# कपासन के श्री शनिमहाराज आली धाम में खुला दानपात्र, नोटों की गिनती से मिले 19.41 लाख रुपये

> चित्तौड़गढ़ के कपासन स्थित प्रसिद्ध श्री शनिमहाराज आली धाम में चतुर्दशी पर दानपात्र खोले गए, जहां नोटों की गिनती में 19,41,755 रुपये की राशि निकली है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kapasan-ke-shri-shanimaharaj-aali-dham-men-khula-danapatra-noton-ki-ginati-se-mile-19-41-lakha-rupaye-45761 · **Language:** Hindi
**Tags:** शनिमहाराज आली धाम, कपासन, चित्तौड़गढ़, मेवाड़, मंदिर दानपात्र, शनिदेव मंदिर

चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन उपखंड में स्थित मेवाड़ के प्रमुख धार्मिक केंद्र श्री शनिमहाराज आली धाम में मंदिर के भंडारे यानी दानपात्रों को खोला गया। श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा भाव से अर्पित की गई दान राशि की गणना के दौरान केवल नोटों की गिनती में ही 19 लाख 41 हजार 755 रुपये प्राप्त हुए हैं। मंदिर ट्रस्ट और प्रबंध समिति के अनुसार, नोटों की गिनती पूरी हो चुकी है जबकि सिक्कों को गिनने का काम लगातार चल रहा है। सभी सिक्कों की गिनती संपन्न होने के बाद ही इस महीने प्राप्त कुल चढ़ावे का अंतिम आंकड़ा सामने आ सकेगा।

## चतुर्दशी पर दानपात्र खोलने की वर्षों पुरानी परंपरा
कपासन क्षेत्र के इस सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर हर माह अमावस्या से एक दिन पहले पड़ने वाली चतुर्दशी तिथि पर दानपात्र खोलने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। शनिवार के दिन भगवान श्री शनिदेव महाराज की पूरे विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती और वैदिक मंत्रोच्चार किया गया। इसके बाद मंदिर की मुख्य प्रबंध समिति के सदस्यों की मौजूदगी में दानपात्रों के ताले खोले गए। मुख्य मंदिर परिसर के साथ-साथ नवग्रह मंदिर और तेल कुंड के निकट रखे गए सभी दानपात्रों से चढ़ावे की राशि निकाली गई।

## कड़ी निगरानी में हुई नोटों की गिनती, सिक्कों की छंटनी जारी
दानपात्रों से निकाली गई संपूर्ण धनराशि की गिनती सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों और मंदिर के वरिष्ठ पदाधिकारियों की सीधी निगरानी में आरंभ की गई। रात तक नोटों की गिनती का कार्य संपन्न कर लिया गया, जिसमें 19,41,755 रुपये की राशि दर्ज हुई। इसके तुरंत बाद अब सिक्कों की अलग-अलग छंटनी और उनकी गिनती का चरण शुरू किया गया है। पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए समिति के सदस्य निरंतर निगरानी रख रहे हैं।

## मेवाड़ अंचल में आली धाम की गहरी आस्था
चित्तौड़गढ़ सहित पूरे मेवाड़ अंचल में श्री शनिमहाराज आली धाम को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी धार्मिक मान्यता है। प्रत्येक माह आने वाली अमावस्या के अवसर पर देश और राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से हजारों-लाखों भक्त भगवान शनिदेव के दर्शन करने और तेल अर्पित करने यहां पहुंचते हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इस पावन धाम पर तेल चढ़ाने और प्रार्थना करने से जीवन के सभी संकटों और कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसी अटूट आस्था के चलते हर महीने मंदिर के भंडारे में लाखों रुपये की नकदी और भारी मात्रा में तेल अर्पित किया जाता है।

## इसका आप पर असर
श्री शनिमहाराज आली धाम के दानपात्रों की मासिक गिनती से श्रद्धालुओं को मंदिर की पारदर्शी व्यवस्था और आगामी दर्शन व्यवस्था की जानकारी मिलती है।

- **राजस्थान भर में:** अमावस्या के अवसर पर दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को मंदिर की समय-सारणी और व्यवस्थाओं का स्पष्ट अनुमान मिलता है। दूर-दराज से आने वाले भक्त दर्शन और तेल अर्पण के लिए तय समय पर मंदिर पहुंच सकते हैं।
- **चित्तौड़गढ़ और कपासन में:** मंदिर में होने वाली विशाल भीड़ और भारी दान प्रवाह से स्थानीय प्रशासन और परिवहन व्यवस्था सक्रिय रहती है। स्थानीय दुकानदारों और धर्मशालाओं में आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर तैयारियां तेज हो जाती हैं।
- **दान की पारदर्शिता:** समिति द्वारा नोटों और सिक्कों की गिनती सार्वजनिक किए जाने से भक्तों का संस्थान पर भरोसा मजबूत होता है। दान राशि का यह ब्योरा मंदिर के विकास और सुविधाओं में उपयोग की स्पष्टता तय करता है।
- **आगामी अमावस्या दर्शन:** चतुर्दशी पर भंडारा खुलने के बाद अगले दिन अमावस्या पर दर्शनार्थियों की भारी भीड़ जुटने की संभावना रहती है। दर्शनार्थियों को तेल कुंड और मुख्य मंदिर में समय रहते कतारबद्ध होने की सलाह दी जाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
श्री शनिमहाराज आली धाम में हर महीने दानपात्र खोलने और दान राशि की गिनती करने के पीछे एक सुव्यवस्थित धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक नियम है।

- **चतुर्दशी की परंपरा:** मंदिर में हर माह अमावस्या से ठीक एक दिन पहले चतुर्दशी तिथि पर दानपात्रों को खोलने की कई दशकों पुरानी परंपरा स्थापित है। शनिवार को विशेष पूजा और मंत्रोच्चार संपन्न होने के बाद ही ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दानपात्र खोले गए।
- **अमावस्या पर भारी भीड़:** अगले दिन आने वाली अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने से पहले दानपात्र खाली करना आवश्यक होता है ताकि नए चढ़ावे के लिए पर्याप्त जगह रहे। इसी व्यवस्था के तहत मुख्य मंदिर, नवग्रह मंदिर और तेल कुंड के पात्रों को खाली किया गया।
- **सिक्कों की लंबित गिनती:** नोटों की गिनती पूरी हो चुकी है, परंतु सिक्कों की भारी संख्या और वजन के कारण उनकी छंटनी में अधिक समय लगता है। अंतिम संकलित आंकड़ा सिक्कों की पूरी गिनती संपन्न होने के बाद ही जारी किया जाएगा।

## सवाल-जवाब

### 1. श्री शनिमहाराज आली धाम में नोटों की गिनती से कुल कितनी राशि प्राप्त हुई है?
दानपात्रों से केवल नोटों की गिनती में कुल 19 लाख 41 हजार 755 रुपये की राशि प्राप्त हुई है।

### 2. श्री शनिमहाराज आली धाम किस जिले और उपखंड में स्थित है?
यह प्रसिद्ध तीर्थ स्थल राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन उपखंड में स्थित है।

### 3. मंदिर के दानपात्र किस दिन खोले जाते हैं?
मंदिर में हर महीने अमावस्या से ठीक एक दिन पहले चतुर्दशी के अवसर पर दानपात्र खोले जाने की परंपरा है।

### 4. कुल दान राशि का अंतिम आंकड़ा कब जारी किया जाएगा?
सिक्कों की छंटनी और गिनती पूरी होने के बाद मंदिर समिति द्वारा अंतिम आंकड़ा जारी किया जाएगा।

### 5. मंदिर परिसर में किन स्थानों के दानपात्र खोले गए?
मुख्य मंदिर परिसर, नवग्रह मंदिर और तेल कुंड के पास रखे दानपात्रों को खोला गया है।

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