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  "title": "करौली के परीता में ऐतिहासिक कुश्ती दंगल: 1.11 लाख रुपये के महामुकाबले में रोमांचक बराबरी पर छूटी अंतिम जंग",
  "summary": "राजस्थान के करौली स्थित परीता गांव में बड़िये बाबा के मेले के अवसर पर विशाल कुश्ती दंगल आयोजित किया गया, जिसमें 1.11 लाख रुपये की अंतिम कुश्ती बराबरी पर छूटी।",
  "content": "करौली उपखंड क्षेत्र के परीता गांव में आयोजित हुए विशाल कुश्ती दंगल ने हजारों खेल प्रेमियों को रोमांचित कर दिया। हर साल की तरह इस बार भी भादो महीने की अमावस्या के शुभ अवसर पर इस भव्य खेल आयोजन की परंपरा को जीवंत रखा गया। अखाड़े की पारंपरिक मिट्टी में जब विभिन्न क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अपनी ताकत और फुर्ती का प्रदर्शन किया, तो दर्शकों के उत्साह से पूरा परिसर गूंज उठा। इस पारंपरिक दंगल का आनंद लेने के लिए करौली और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, जिससे कार्यक्रम स्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई।\n\nबाल और महिला पहलवानों ने जीता दर्शकों का दिल\nइस भव्य खेल महोत्सव का शुभारंभ नन्हें बाल पहलवानों के बीच हुए मुकाबलों से हुआ। मिट्टी के इस मैदान में छोटे बच्चों ने जिस सूझबूझ और फुर्ती के साथ एक-दूसरे को चुनौती दी, उसने वहां मौजूद हर दर्शक का दिल जीत लिया। बच्चों के बाद महिला पहलवानों ने अखाड़े में कदम रखकर अपने हुनर का प्रदर्शन किया। महिला वर्ग में हुए मुकाबले बेहद कड़े और रोमांचक थे। उनकी असाधारण ताकत और बेहतरीन दांव-पेंच देखकर दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं और उनका हौसला बढ़ाया। इस पारंपरिक आयोजन में महिलाओं की इस सक्रिय भागीदारी ने दंगल को और भी गरिमामयी बना दिया।\n\nविभिन्न राज्यों से जुटे 300 से अधिक धाकड़ पहलवान\nआयोजन समिति की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस एक दिवसीय खेल प्रतियोगिता के दौरान छोटी और बड़ी मिलाकर 300 से अधिक कुश्तियां कराई गईं। इस विशाल दंगल में केवल स्थानीय प्रतिभाएं ही शामिल नहीं हुईं, बल्कि राजस्थान के करौली, सवाई माधोपुर, भरतपुर, दौसा और धौलपुर जिलों से आए बेहतरीन पहलवानों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों और क्षेत्रों जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से आए नामी पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपनी खेल कौशल का परिचय दिया। पहलवानों ने विभिन्न प्रकार के पारंपरिक दांव-पेंच आजमाकर अपने विरोधियों को परास्त किया। सभी विजयी पहलवानों को आयोजन समिति द्वारा नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।\n\nएक लाख ग्यारह हजार की अंतिम कुश्ती में जोरदार टक्कर\nइस पूरे आयोजन का सबसे मुख्य और रोमांचक मुकाबला दंगल के अंत में देखने को मिला। यह अंतिम जंग हाथरस के हरिकेश पहलवान और दिल्ली के भारत पहलवान के बीच लड़ी गई। पूरे 1.11 लाख रुपये की भारी-भरकम इनामी राशि के लिए आयोजित इस महामुकाबले में दोनों पहलवानों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। दोनों के बीच कांटे की टक्कर हुई और काफी समय तक चले इस संघर्ष के बाद भी कोई किसी को चित नहीं कर सका। अंततः यह मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। आयोजन समिति ने दोनों उत्कृष्ट पहलवानों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया और इनामी राशि को दोनों में बराबर-बराबर बांटकर सौंप दिया।\n\nयुवाओं को व्यसनों से दूर रखने की एक सराहनीय पहल\nआयोजन मंडल के सदस्यों ने बताया कि इस वार्षिक कुश्ती दंगल का आयोजन हर वर्ष बड़िये बाबा के मेले के पावन अवसर पर किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रखना और उन्हें खेलों की तरफ आकर्षित करना है। इस भव्य और सफल आयोजन के दौरान क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें अंकुर परीता, सरपंच प्रतिनिधि अजय, सरपंच राजन्ती देवी, महादेवा पटेल, प्रधानाचार्य रामाधार और राजेंद्र शामिल हैं। यह मेला और कुश्ती दंगल अब इस पूरे क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और खेल भावना का एक अटूट हिस्सा बन चुके हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस पारंपरिक आयोजन का मुख्य प्रभाव खेल संस्कृति और ग्रामीण युवाओं की सेहत पर पड़ता है।\n\n• भारत में: ऐसे क्षेत्रीय दंगल देश के पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देते हैं। यह मिट्टी की कुश्ती की समृद्ध विरासत को जीवित रखने में मदद करता है।\n• राजस्थान और करौली में: स्थानीय युवाओं को नशे और अन्य बुरी आदतों से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में खेल सुविधाओं और प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइस विशाल दंगल का आयोजन हर साल एक विशेष परंपरा और सामाजिक उद्देश्य के तहत किया जाता है।\n\n• धार्मिक और पारंपरिक कारण: यह दंगल हर वर्ष भादो मास की अमावस्या के अवसर पर बड़िये बाबा के मेले के हिस्से के रूप में आयोजित किया जाता है। यह क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति का एक प्रमुख प्रतीक है।\n• सामाजिक कल्याण: आयोजकों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को नशे की लत और अन्य बुरी आदतों से बचाना है। उन्हें खेल गतिविधियों से जोड़कर एक स्वस्थ जीवन शैली की ओर मोड़ना इसका लक्ष्य है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह कुश्ती दंगल कहां और कब आयोजित किया गया था?\nयह दंगल राजस्थान के करौली उपखंड क्षेत्र के परीता गांव में भादो मास की अमावस्या के पावन अवसर पर आयोजित किया गया था।\n\n2. इस खेल आयोजन में कुल कितने मुकाबले हुए और कहां-कहां के पहलवानों ने भाग लिया?\nइस आयोजन में 300 से अधिक छोटी-बड़ी कुश्तियां हुईं। इसमें राजस्थान के विभिन्न जिलों सहित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के पहलवानों ने भाग लिया।\n\n3. दंगल की अंतिम कुश्ती किसके बीच हुई और इसकी इनामी राशि क्या थी?\nअंतिम कुश्ती हाथरस के हरिकेश पहलवान और दिल्ली के भारत पहलवान के बीच हुई, जिसकी कुल इनामी राशि 1.11 लाख रुपये थी।\n\n4. इस कुश्ती दंगल के आयोजन के पीछे क्या मुख्य सामाजिक उद्देश्य है?\nइसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को नशे और बुरी आदतों से दूर रखना तथा उन्हें खेलों की ओर आकर्षित करना है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-12",
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