# करौली में साल के कई महीने जलमग्न रहता है अनूठा हनुमान मंदिर, केवल गर्मियों में होते हैं आसान दर्शन

> राजस्थान के करौली स्थित वीरवास गांव में पहाड़ियों के नीचे बना बगीची वाले हनुमान का मंदिर साल में आठ से दस महीने पानी से घिरा रहता है, जहां स्थापित प्रतिमा के कंधों पर श्रीराम और लक्ष्मण विराजमान हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/karauli-men-sala-ke-kai-mahine-jalamagna-rahata-hai-anutha-hanuman-mndira-kevala-garmiyon-men-hote-hain-asana-darshana-34497 · **Language:** Hindi
**Tags:** करौली, हनुमान मंदिर, राजस्थान मंदिर, वीरवास गांव, बगीची वाले हनुमान, धार्मिक स्थल

राजस्थान की पावन धरा पर पवनपुत्र हनुमान के अनेक ऐतिहासिक और चमत्कारी तीर्थ स्थल स्थित हैं, जिनकी बनावट और उनसे जुड़ी मान्यताएं हर किसी को हैरान करती हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत विस्मयकारी धाम करौली क्षेत्र में मौजूद है, जहां स्थापित मारुति नंदन की पाषाण प्रतिमा वर्ष के अधिकांश समय अथाह जलराशि के भीतर समाई रहती है। मानसून के आगमन के साथ ही जलस्तर में होने वाली अप्रत्याशित बढ़ोतरी पूरे मंदिर परिसर को जलमग्न कर देती है, फिर भी यह धार्मिक संरचना कई दशकों से जलधारा के थपेड़ों के बीच अडिग भाव से खड़ी है।

## वीरवास गांव की तलहटी में स्थित है यह विस्मयकारी धाम
यह अनोखा पूजा स्थल करौली मुख्य शहर से थोड़ी दूरी पर बसे वीरवास गांव की सुरम्य पहाड़ियों के ठीक नीचे स्थापित है। हालांकि इस धार्मिक स्थल की बाहरी बनावट बिल्कुल साधारण पत्थरों से तैयार की गई है, परंतु इसका लंबे समय तक जलधारा के आगोश में समाए रहना इसे असाधारण बनाता है। इलाकाई बाशिंदों के कथनानुसार, वे पिछले तकरीबन चार दशकों से इस पवित्र स्थल को निरंतर जलभराव से घिरा देखते आ रहे हैं। मूसलाधार मानसूनी बारिश के मौसम में आसपास के जलस्रोतों का फैलाव बढ़ने से पूरा ढांचा पानी में डूब जाता है, मगर इतने लंबे अरसे तक पानी में रहने के बाद भी इमारत की मजबूती पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है।

## प्रतिमा में नजर आती है अहिरावण उद्धार प्रसंग की अनूठी झलक
मंदिर के गर्भगृह में सुशोभित प्रतिमा की संरचना धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत दुर्लभ और दर्शनीय मानी जाती है। इस दिव्य विग्रह में हनुमान जी के दोनों मजबूत कंधों पर भगवान श्रीराम और उनके भ्राता लक्ष्मण को आदरपूर्वक विराजमान दिखाया गया है। बुजुर्गों और धार्मिक जानकारों के मुताबिक, इस विशिष्ट रूप का सीधा ताल्लुक रामायण के प्रसिद्ध अहिरावण प्रसंग से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब पाताल लोक का स्वामी अहिरावण छलपूर्वक प्रभु राम और लक्ष्मण को अपने लोक में बंधक बनाकर ले गया था, तब महावीर हनुमान ने पाताल में प्रवेश कर दोनों को बंधनमुक्त कराया था और उन्हें सकुशल बाहर लाए थे। यह प्रतिमा इसी पावन उद्धार लीला का सजीव दृश्य प्रस्तुत करती है।

## साल में केवल दो से तीन महीने ही हो पाते हैं सुलभ दर्शन
वीरवास के स्थानीय निवासी भरत सिंह जादौन बताते हैं कि वे अपनी बाल्यावस्था से ही इस समूचे परिसर को पानी के पहरे में देखते आ रहे हैं। बरसात के दौर में मंदिर पूरी गहराई तक डूब जाता है, जबकि शेष समय में भी भक्तों को जलभराव से जूझना पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, साल के लगभग 8 से 10 महीने मंदिर के चारों ओर अथाह पानी जमा रहता है। ग्रीष्मकाल के दौरान जब भीषण गर्मी से जलस्तर काफी नीचे खिसक जाता है, तभी श्रद्धालुओं को प्रतिमा के सुलभ दर्शन का अवसर मिल पाता है। साल भर में केवल दो से तीन महीने का समय ही ऐसा होता है जब भक्त बिना किसी बड़ी परेशानी के मंदिर तक पहुंच सकते हैं, वरना बाकी दिनों में घुटनों तक भरे पानी के बीच से ही रास्ता तय करना पड़ता है।

## बगीची वाले हनुमान दरबार में पूरी होती हैं भक्तों की मन्नतें
इलाके में इस पवित्र स्थल को बगीची वाले हनुमान के नाम से अत्यधिक ख्याति प्राप्त है। स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि इस दरबार में स्वच्छ मन से मांगी गई हर मुराद अवश्य पूरी होती है। सप्ताह के विशेष दिनों, खासकर मंगलवार और शनिवार को, यहां श्रद्धालुओं का भारी तांता लगता है। भक्तजन पानी की परवाह किए बिना प्रतिमा तक पहुंचते हैं और पवनपुत्र को श्रद्धापूर्वक चोला अर्पित करते हैं।

क्षेत्र के निवासी अभिषेक सिंह जादौन का कहना है कि हनुमान जी के कंधों पर राम और लक्ष्मण के आसीन होने वाली ऐसी अनोखी प्रतिमा विरले ही किसी अन्य मंदिर में दृष्टिगोचर होती है। इसी अनुपम स्वरूप और जलमग्न रहने के चमत्कार का साक्षात्कार करने के लिए दूरदराज के अंचलों से भी लोग खिंचे चले आते हैं, जिससे मंदिर में धार्मिक आस्था निरंतर प्रगाढ़ हो रही है।

## इसका आप पर असर
यह अनोखा मंदिर राजस्थान के करौली क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और तीर्थ यात्रा की योजना बनाने वाले श्रद्धालुओं को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

- **यात्रा के समय पर प्रभाव:** दर्शन के लिए जाने से पहले वर्ष के उचित महीनों का चयन अनिवार्य है। मंदिर वर्ष में 8 से 10 महीने पानी में डूबा रहता है, इसलिए सुगम दर्शन केवल गर्मियों के दो से तीन महीनों में ही संभव हो पाते हैं।
- **सुरक्षा और आवागमन:** सामान्य दिनों में घुटनों तक भरे पानी से गुजरकर गर्भगृह तक पहुंचना पड़ता है। बुजुर्गों और बच्चों के साथ जाने वाले परिवारों को जलस्तर कम होने पर ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
- **विशेष पूजा के दिन:** मंगलवार और शनिवार को मंदिर में चोला चढ़ाने की विशेष परंपरा है। इन दिनों में भीड़ अधिक रहती है, जिससे श्रद्धालुओं को तदनुसार समय निकालकर पहुंचना होगा।
- **धार्मिक शोध और कला प्रेमियों के लिए:** रामायण के अहिरावण प्रसंग पर आधारित राम-लक्ष्मण को कंधों पर बिठाए हनुमान जी की प्रतिमा बेहद दुर्लभ है। भारतीय मूर्तिकला और धार्मिक इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह एक महत्वपूर्ण स्थल है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मंदिर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण वर्ष के ज्यादातर समय जलमग्न रहता है, क्योंकि यह पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है जहां प्राकृतिक जल संचित होता है।

- **भौगोलिक तलहटी का प्रभाव:** मंदिर वीरवास गांव की पहाड़ियों के निचले हिस्से में बना हुआ है। आसपास की पहाड़ियों से बहकर आने वाला बरसाती पानी स्वाभाविक रूप से इस निचले इलाके में जमा हो जाता है।
- **मानसून में भारी जलभराव:** वर्षा ऋतु में क्षेत्र के प्राकृतिक जलस्रोतों का जलस्तर अचानक बहुत ऊंचा उठ जाता है। जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण यह जलभराव अगले 8 से 10 महीनों तक कायम रहता है।
- **दशकों पुराना अस्तित्व:** स्थानीय निवासियों के अनुसार यह स्थिति पिछले करीब चार दशकों से लगातार देखी जा रही है। लंबे समय तक पानी में रहने के बाद भी मंदिर का ढांचा सुरक्षित बना हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह जलमग्न हनुमान मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के करौली शहर से कुछ दूरी पर स्थित वीरवास गांव की पहाड़ियों के नीचे बना हुआ है।

### 2. मंदिर की प्रतिमा में क्या विशेषता है?
इस प्रतिमा में हनुमान जी के दोनों कंधों पर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण विराजमान हैं, जो रामायण के अहिरावण उद्धार प्रसंग को दर्शाता है।

### 3. साल में कितने महीने मंदिर पानी में डूबा रहता है?
स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर साल में लगभग 8 से 10 महीने पानी से घिरा या डूबा रहता है।

### 4. श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सबसे सुगम समय कौन सा होता है?
गर्मियों के मौसम में जब जलस्तर कम हो जाता है, तब साल के लगभग दो से तीन महीने भक्त आसानी से दर्शन कर पाते हैं।

### 5. स्थानीय स्तर पर इस मंदिर को किस नाम से पुकारा जाता है?
स्थानीय लोग इस पावन धाम को बगीची वाले हनुमान के नाम से जानते हैं और मंगलवार व शनिवार को यहां विशेष चोला चढ़ाते हैं।

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