# करौली में सांकेतिक भाषा दिवस पर मूकबधिर युवाओं ने उठाई आवाज, प्रशासन को ज्ञापन देकर की आठ प्रमुख मांगें

> अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के अवसर पर करौली में करीब 40 मूकबधिर युवाओं ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और जीवन के हर क्षेत्र में समान अधिकारों की मांग की।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/karauli-men-sanketika-bhasha-divasa-para-mukabadhira-yuvaon-ne-uthai-avaja-prashasana-ko-jnapana-dekara-ki-atha-pramukha-mangen-37875 · **Language:** Hindi
**Tags:** करौली, मूकबधिर युवा, सांकेतिक भाषा दिवस, आईएसएल, दिव्यांग अधिकार, राजस्थान समाचार

हाथों के इशारों और चेहरे के भावों को माध्यम बनाकर करौली जिले के करीब 40 मूकबधिर युवाओं ने सड़कों पर उतरकर समाज और व्यवस्था को एक स्पष्ट संदेश दिया। अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के अवसर पर एकत्रित हुए इन युवाओं की जुबान खामोश थी, लेकिन अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उनके संकल्प बेहद मुखर नजर आए। जिले के अलग अलग इलाकों से आए इन युवाओं का कहना था कि जब इशारों को समझने की संवेदनशीलता समाज में विकसित होगी, तभी वे भी मुख्यधारा में अपनी बात खुलकर रख पाएंगे।

## सड़कों पर निकला मूकबधिर युवाओं का शांतिपूर्ण मार्च
इस आयोजन के दौरान युवाओं ने एक अनुशासित और शांतिपूर्ण रैली निकाली। सड़क मार्ग से गुजरते हुए वे केवल अपनी मांगें ही नहीं उठा रहे थे, बल्कि आम नागरिकों को भी भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) सीखने और दिव्यांगजनों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए जागरूक कर रहे थे। राह चलते लोग जब इन युवाओं को हाथों के इशारों से संवाद करते देखते, तो उनकी खामोशी और आंखों की गंभीरता देखकर रुक जाते। हालांकि अधिकांश लोग उनकी सांकेतिक भाषा को तुरंत समझने में असमर्थ थे, फिर भी युवाओं के चेहरे के भाव हर राहगीर को सोचने पर विवश कर रहे थे।

## प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बयां की दैनिक चुनौतियां
रैली के बाद यह समूह कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा, जहां अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। इस समूह में रवि गुप्ता, राहुल गुर्जर और कालू मीणा सहित कई युवा शामिल थे। प्रशासनिक संवाद को सुगम बनाने के लिए आईएसएल विशेषज्ञ सरिता मीणा और इंटरप्रेटर भावना सोनवाल ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इन दोनों विशेषज्ञों की मदद से युवाओं ने अपनी दैनिक समस्याओं, सरकारी दफ्तरों में होने वाली दिक्कतों और संवाद के अभाव में छूटते अधिकारों की जानकारी दी। करौली एसडीएम राकेश कुमार रावत ने इंटरप्रेटर के जरिए सभी बिंदुओं को सुना और नियम सम्मत समाधान का आश्वासन दिया।

## दैनिक जीवन और सरकारी तंत्र से जुड़ी 8 मुख्य मांगें
युवाओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षा, चिकित्सा, कानून और आजीविका से जुड़ी 8 स्पष्ट मांगें दर्ज की गई थीं। इन मांगों का ब्योरा इस प्रकार है

- बधिर छात्र छात्राओं को पढ़ाने के लिए आईएसएल में निपुण शिक्षक और सुलभ शिक्षण सामग्री की व्यवस्था की जाए।
- सामान्य शिक्षकों को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण दिया जाए अथवा विद्यालयों में योग्य आईएसएल इंटरप्रेटर नियुक्त हों।
- सरकारी अस्पतालों में सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर रखे जाएं ताकि मरीज डॉक्टरों को बीमारी समझा सकें और उपचार समझ सकें।
- पुलिस थानों और न्यायिक अदालतों में भी बधिर नागरिकों की सुनवाई के लिए इंटरप्रेटर का अनिवार्य प्रबंध हो।
- शासकीय कार्यालयों की सार्वजनिक जानकारी और नागरिक सेवाओं की अधिसूचनाएं सांकेतिक भाषा में भी दी जाएं।
- रोजगार, कौशल प्रशिक्षण, नौकरियों और कार्यस्थल पर पदोन्नति में मूकबधिरों को पूर्ण बराबरी दी जाए।
- आपातकालीन घोषणाओं और आपदा से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं को भी सांकेतिक माध्यम में सुलभ बनाया जाए।
- परिवार और समाज बधिरता को अज्ञानता न समझें, बल्कि खुद सांकेतिक भाषा सीखकर आपसी संवाद का दायरा बढ़ाएं।

## समान अवसर और सामाजिक स्वीकार्यता का आग्रह
ज्ञापन देने पहुंचे युवाओं का मानना है कि बोलने की क्षमता का न होना किसी भी तरह से प्रतिभा, सपनों या नागरिक अधिकारों की कमी नहीं है। उनकी मुख्य अपेक्षा यह है कि शासन और समाज उनकी सांकेतिक भाषा को मान्यता दे, सार्वजनिक स्थानों पर अनुवादक मौजूद रहें और शिक्षा से लेकर रोजगार तक उन्हें अन्य नागरिकों की तरह समान अवसर प्राप्त हो सकें।

## इसका आप पर असर
यह पहल सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों और अदालतों में दिव्यांगजनों के लिए संवाद की बाधाओं को दूर करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है।

- **भारत में:** सार्वजनिक सेवाओं में सांकेतिक भाषा दुभाषियों की अनिवार्यता लागू होने से देश भर के लाखों मूकबधिर नागरिकों को न्याय और इलाज पाना सुगम होगा। इससे शिक्षण संस्थानों और कार्यस्थलों पर समावेशी नीतियां मजबूत होंगी।
- **करौली में:** स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा ज्ञापन पर कदम उठाने से जिले के सरकारी अस्पतालों और थानों में सांकेतिक भाषा सहायकों की तैनाती की राह खुलेगी। इससे करौली के दिव्यांग युवाओं को सरकारी योजनाओं और रोजगार प्रक्रियाओं में अपनी बात सीधे रखने की सुविधा मिलेगी।
- **छात्रों और युवाओं के लिए:** विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षक मिलने से बधिर विद्यार्थियों की पढ़ाई में सुधार आएगा। वे प्रतियोगी परीक्षाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों में अन्य छात्रों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
- **आम नागरिकों के लिए:** आम लोगों में बुनियादी सांकेतिक भाषा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी। समाज में संवादहीनता घटने से मूकबधिर व्यक्तियों के प्रति पूर्वाग्रह दूर करने में मदद मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर सार्वजनिक तंत्र में मौजूद संवादहीनता और भेदभावपूर्ण कमियों को उजागर करने के लिए आयोजित किया गया।

- **संवाद का गहरा अभाव:** सरकारी अस्पतालों, थानों और अदालतों में सांकेतिक भाषा के दुभाषिए न होने से मूकबधिर नागरिक अपनी बीमारी या शिकायत दर्ज कराने में असमर्थ रहते हैं। इसी रोजमर्रा की लाचारी ने इन युवाओं को सड़क पर उतरने को विवश किया।
- **शिक्षा और रोजगार में बाधा:** स्कूलों में विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और भर्ती प्रक्रियाओं में सुलभ माध्यम न होने से इन युवाओं के करियर और तरक्की के अवसर सीमित हो जाते हैं। युवाओं ने समान अवसरों की मांग के तहत यह मांग पत्र सौंपा।
- **प्रशासनिक संवेदनशीलता की दरकार:** सरकारी कार्यालयों और आपातकालीन सूचनाओं में सांकेतिक भाषा का अभाव बधिर नागरिकों को बुनियादी जानकारियों से वंचित रखता है। इसलिए युवाओं ने अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के अवसर को अपनी बात औपचारिक रूप से रखने के लिए चुना।

## सवाल-जवाब

### 1. करौली में मूकबधिर युवाओं ने किस अवसर पर रैली निकाली?
युवाओं ने अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के अवसर पर यह शांतिपूर्ण रैली निकाली।

### 2. इस प्रदर्शन में लगभग कितने युवाओं ने भाग लिया?
करौली जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 40 मूकबधिर युवाओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

### 3. प्रशासन के समक्ष युवाओं का पक्ष किसने रखा?
आईएसएल विशेषज्ञ सरिता मीणा और इंटरप्रेटर भावना सोनवाल ने युवाओं की बात प्रशासन तक पहुंचाई।

### 4. प्रशासन की ओर से ज्ञापन किसने स्वीकार किया?
करौली एसडीएम राकेश कुमार रावत ने इंटरप्रेटर के जरिए समस्याएं सुनीं और ज्ञापन स्वीकार किया।

### 5. ज्ञापन में शिक्षा क्षेत्र को लेकर क्या मांग रखी गई है?
ज्ञापन में स्कूलों में आईएसएल जानने वाले शिक्षक, सांकेतिक भाषा सामग्री और योग्य इंटरप्रेटर की नियुक्ति की मांग की गई है।

### 6. अस्पतालों और पुलिस थानों के संबंध में युवाओं की क्या मांग है?
युवाओं ने अस्पतालों, थानों और अदालतों में संवाद के लिए अनिवार्य रूप से आईएसएल इंटरप्रेटर उपलब्ध कराने की मांग की है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._