करौली में वाहन चालक से 20 रुपये अतिरिक्त वसूलने पर टोल प्लाजा पर 32 हजार का जुर्माना करौली के जिला उपभोक्ता आयोग ने फैलिपुरा टोल प्लाजा पर 20 रुपये अतिरिक्त वसूलने को सेवा में कमी मानते हुए 32 हजार रुपये चुकाने का सख्त फैसला सुनाया है. करौली जिले में एक टोल नाके पर वाहन चालक से निर्धारित दर से मात्र 20 रुपये अधिक वसूलना टोल ऑपरेटर के लिए बेहद महंगा साबित हुआ है. अनुचित वसूली के इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए टोल प्रबंधन पर कुल 32 हजार रुपये का भारी हर्जाना लगाया है. आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी कर अतिरिक्त राशि लेना सीधे तौर पर सेवा में गंभीर कमी का मामला बनता है. फैलिपुरा टोल प्लाजा पर डबल फेरे के नियम का उल्लंघन यह पूरा विवाद फैलिपुरा टोल प्लाजा से जुड़ा हुआ है. नियमों के अनुसार वाहन के डबल फेरे का प्रावधान तय होने के बावजूद वहां मौजूद कर्मियों ने वाहन चालक से 45 रुपये वसूल कर लिए थे. चालक ने उसी समय इसे नियमों का खुला उल्लंघन करार दिया और अतिरिक्त लिए गए 20 रुपये के खिलाफ औपचारिक कानूनी कदम उठाने का निर्णय लिया. इसके बाद पीड़ित ने जिला उपभोक्ता आयोग में टोल प्रबंधन के खिलाफ लिखित परिवाद दायर कर न्याय की गुहार लगाई. उपभोक्ता आयोग का कड़ा फैसला और हर्जाने का आदेश जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की दोनों पक्षों के तथ्यों के आधार पर सुनवाई की. पीठ ने पाया कि टोल प्लाजा संचालक द्वारा तय नियमों के विपरीत जाकर अतिरिक्त राशि वसूलना पूरी तरह गलत और नियम विरुद्ध था. आयोग के अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह और सदस्य सुरेंद्र चतुर्वेदी की पीठ ने टोल संचालक को निर्देश दिया कि वह अनुचित रूप से वसूली गई 20 रुपये की राशि 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ शिकायतकर्ता को वापस लौटाए. मानसिक संत्रास और कानूनी खर्च की भरपाई का निर्देश अदालत ने इसके अलावा उपभोक्ता को झेलनी पड़ी मानसिक परेशानी के एवज में 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने का हुक्म दिया. साथ ही कानूनी लड़ाई में हुए परिवाद खर्च के तौर पर 7 हजार रुपये अलग से अदा करने का निर्देश दिया गया. आयोग ने टोल प्रबंधन को इस पूरे 32 हजार रुपये के भुगतान को निपटाने के लिए एक महीने का समय निर्धारित किया है. इसका आप पर असर यह फैसला दिखाता है कि टोल प्लाजा पर नियमों के उल्लंघन और अवैध वसूली के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जा सकती है. • भारत में: टोल प्लाजा पर अक्सर मामूली अतिरिक्त वसूली को लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह आदेश स्पष्ट करता है कि अनुचित वसूली सेवा में कमी है. वाहन चालक रसीद और नियमों की जांच कर उपभोक्ता फोरम में सीधे क्षतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं. • करौली में: फैलिपुरा टोल प्लाजा से गुजरने वाले स्थानीय वाहन चालकों को अब सही छूट और तय दरें सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. टोल कर्मियों द्वारा रिटर्न फेरे की गलत पर्ची काटने पर स्थानीय लोग इस फैसले की मिसाल देकर कार्रवाई की मांग कर सकते हैं. • उपभोक्ताओं के लिए: महज 20 रुपये के विवाद में उपभोक्ता को 32 हजार रुपये का मुआवजा और 18 प्रतिशत ब्याज मिलना उपभोक्ताओं के अधिकारों को कानूनी मजबूती देता है. टोल रसीद संभाल कर रखने से किसी भी अवैध कटौती को चुनौती दी जा सकती है. • टोल संचालकों के लिए: टोल कंपनियों को अपने कर्मचारियों को नियमों का सही पालन करने की सख्त हिदायत देनी होगी. एक महीने के भीतर 32 हजार रुपये चुकाने का यह आदेश अन्य टोल प्रबंधनों के लिए भी चेतावनी है. ऐसा क्यों हुआ यह कानूनी कार्रवाई टोल प्लाजा कर्मचारियों द्वारा तय नियमों का उल्लंघन करने और वाहन चालक के जायज विरोध की अनदेखी करने की वजह से सामने आई. • डबल फेरे के नियम की अनदेखी: फैलिपुरा टोल पर चालक से दोतरफा यात्रा छूट के बावजूद पूरे 45 रुपये वसूले गए. इस नियम उल्लंघन के चलते चालक से सीधे तौर पर 20 रुपये की अनुचित वसूली की गई. • उपभोक्ता की शिकायत पर सुनवाई: चालक ने अतिरिक्त शुल्क को चुपचाप सहने के बजाय उपभोक्ता संरक्षण कानून का सहारा लिया. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में विधिवत परिवाद दर्ज कराया गया. • सेवा में कमी साबित होना: आयोग की न्यायिक पीठ ने पाया कि अनुबंध और नियमों के विपरीत पैसे लेना गंभीर लापरवाही है. इसी आधार पर पीठ ने संचालक को दोषी ठहराते हुए हर्जाना तय किया. सवाल-जवाब 1. यह मामला किस जिले और किस टोल प्लाजा से संबंधित है? यह मामला राजस्थान के करौली जिले में स्थित फैलिपुरा टोल प्लाजा का है. 2. टोल प्लाजा संचालक ने वाहन चालक से कितने रुपये की अतिरिक्त वसूली की थी? टोल प्लाजा पर डबल फेरे के नियम के बावजूद 45 रुपये वसूल कर 20 रुपये अतिरिक्त लिए गए थे. 3. उपभोक्ता आयोग ने टोल संचालक पर कुल कितना भुगतान करने का आदेश दिया है? आयोग ने 20 रुपये 18 प्रतिशत ब्याज के साथ, मानसिक संत्रास के 25 हजार और परिवाद खर्च के 7 हजार मिलाकर कुल 32 हजार रुपये चुकाने का आदेश दिया है. 4. टोल संचालक को राशि का भुगतान करने के लिए कितना समय दिया गया है? जिला उपभोक्ता आयोग ने आदेश के पालन और भुगतान के लिए संचालक को एक महीने की समय सीमा दी है. 5. यह फैसला उपभोक्ता आयोग की किस पीठ ने सुनाया? यह फैसला आयोग के अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह और सदस्य सुरेंद्र चतुर्वेदी की पीठ ने सुनाया. https://trendkia.com/rajasthan/karauli-men-vahana-chalaka-se-20-rupaye-atirikta-vasulane-para-tola-plaja-para-32-hajara-ka-jurmana-56681 TrendKia — Har trend, sabse pehle.