केवलादेव में पक्षियों के अलावा बसती है सरीसृपों की अनोखी दुनिया, 13 किस्म के सांप और भारी तादाद में मौजूद हैं अजगर भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में परिंदों के साथ-साथ सरीसृपों का समृद्ध संसार मौजूद है, जहां जहरीले और विषहीन सांपों की 13 प्रजातियों के अलावा भारी तादाद में अजगर भी पाए जाते हैं। भरतपुर स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की अंतरराष्ट्रीय पहचान भले ही देसी और प्रवासी परिंदों के प्रमुख बसेरे के रूप में हो, लेकिन इस जंगल का पारिस्थितिक ताना-बाना सिर्फ पंखों की उड़ानों तक सीमित नहीं है। कड़ाके की ठंड के दिनों में जब देश और विदेश के कोने-कोने से सैलानी यहां मेहमान पक्षियों की चहचहाहट देखने पहुंचते हैं, तब इस संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर रेंगने वाले जीवों की एक पूरी समानांतर दुनिया सक्रिय रहती है। जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध इस वेटलैंड में सांपों की लगभग 13 अलग-अलग प्रजातियां अपना बसेरा बनाए हुए हैं, जिनमें प्राणघातक जहर वाले और पूरी तरह विषहीन दोनों ही तरह के सरीसृप शामिल हैं। सरीसृपों के अनुकूल प्राकृतिक आवास और सुरक्षा नियम इस राष्ट्रीय उद्यान का अनोखा भूगोल सांपों और अन्य उभयचरों व सरीसृपों के फलने-फूलने के लिए एक आदर्श माहौल तैयार करता है। यहां का विस्तृत जलभराव वाला इलाका, नम मिट्टी, ऊंची-घनी घास, कटीली झाड़ियां और बड़े वृक्षों की छत्रछाया इन जीवों को छिपने, शिकार करने और प्रजनन के लिए सुरक्षित प्राकृतिक ठिकाना देती है। इन्हीं अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों की वजह से उद्यान के विभिन्न कोनों में अनेक प्रजातियों के सांप सामान्य रूप से विचरण करते हैं। इसके बावजूद, पर्यटकों और शोधार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन क्षेत्र में भ्रमण के दौरान वन्यजीवों से एक सुरक्षित और तय दूरी बनाए रखने की सख्त हिदायत दी जाती है, ताकि इंसानों और इन जीवों के बीच कोई अवांछित टकराव न हो। घास और जलाशयों के बीच अजगरों की भारी मौजूदगी केवलादेव घना के भीतर सरीसृपों के आकर्षण में सबसे अहम स्थान विशालकाय अजगरों का है, जिनकी तादाद इस पूरे क्षेत्र में काफी अधिक मानी जाती है। ये विशालकाय सांप अक्सर दलदली किनारों, जलभराव वाले खंडों, घनी झाड़ियों और सूखी घास के मैदानों में धूप सेकते या सुस्ताते हुए देखे जा सकते हैं। वन्यजीवों को निहारने आने वाले पर्यटकों और उनके साथ चलने वाले नेचर गाइडों को अक्सर इन शांत लेकिन विशालकाय जीवों के दर्शन हो जाते हैं। अजगर स्वभाव से विषहीन होते हैं, लेकिन उनका भारी-भरकम शरीर, अद्भुत ताकत और शिकार को जकड़कर निगलने की शारीरिक क्षमता उन्हें देखने वालों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक रोमांचक दृश्य बना देती है। खाद्य श्रृंखला का संतुलन और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र इस नम भूमि पर मौजूद सांप और अजगर केवल आकर्षण का केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे पूरे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को जिंदा और संतुलित रखने की अनिवार्य कड़ी हैं। ये शिकारी सरीसृप चूहों, मेंढकों और अन्य कीट-पतंगों व छोटे जीवों की आबादी को अनियंत्रित होने से रोकते हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। इसके साथ ही, वे स्वयं भी जंगल की विशाल खाद्य श्रृंखला में शिकारी पक्षियों और बड़े मांसाहारी जीवों के आहार का जरिया बनते हैं। सैलानी जब घना का रुख करते हैं तो उनकी पहली पसंद रंग-बिरंगे पक्षी होते हैं, लेकिन गहराई से देखने पर साफ होता है कि यह राष्ट्रीय उद्यान एक समग्र और आत्मनिर्भर वन्य जीवन तंत्र है, जहां पक्षियों के संग सांप और अजगर मिलकर इस दलदली जंगल को प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद अनूठा बनाते हैं। इसका आप पर असर केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान जाने वाले सैलानियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए अब पार्क में पक्षियों के अलावा सरीसृपों के समृद्ध संसार को देखने का बेहतर अवसर मौजूद है। • भारत में: वन्यजीव प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए यह वेटलैंड पक्षी दर्शन के अलावा सरीसृपों के व्यवहार और संरक्षण के अध्ययन का एक अहम केंद्र बनता जा रहा है। देश भर से आने वाले सैलानी यहां एक ही जंगल में विविध प्रजातियों की मौजूदगी को नजदीक से समझ सकते हैं। • भरतपुर में: स्थानीय स्तर पर गाइडों और सैलानियों को जंगल में घूमते समय सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। वन क्षेत्र के जलभराव और घास वाले रास्तों पर चलते समय पर्यटकों को सतर्क रहकर सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए। • इकोसिस्टम पर असर: सांपों और अजगरों की यह मौजूदगी चूहों और मेंढकों की आबादी को संतुलित रखकर फसलों और नम भूमि के स्वास्थ्य की रक्षा करती है। इससे आसपास के ग्रामीण और कृषि इलाकों में कीटों तथा कृतंकों का प्रसार स्वतः नियंत्रित रहता है। • पर्यटन का दायरा: पक्षी प्रेमियों के साथ-साथ अब सरीसृप विशेषज्ञों और फोटोग्राफरों की रुचि भी इस उद्यान के प्रति तेजी से बढ़ रही है। सर्दियों के मौसम में यात्रा की योजना बनाने वाले लोग अब अपनी सूची में पाइथन और स्नेक ट्रैकिंग के अनुभव को भी जोड़ सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में सांपों और अजगरों की इतनी बड़ी तादाद और विभिन्न प्रजातियों का पनपना यहां के अनूठे जल और वन परिवेश के कारण संभव हुआ है। • अनुकूल प्राकृतिक आवास: पार्क का दलदली इलाका, जलभराव वाले क्षेत्र, घनी झाड़ियां और पेड़ सरीसृपों को छिपने, शिकार करने और प्रजनन के लिए सुरक्षित माहौल देते हैं। यह विविध परिदृश्य भोजन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जिससे सरीसृप आसानी से फलते-फूलते हैं। • प्रचुर मात्रा में शिकार: नम भूमि के कारण यहां चूहे, मेंढक और छोटे जलीय जीवों की भरमार रहती है, जो सांपों और अजगरों के लिए मुख्य आहार बनते हैं। भोजन की इस सहज उपलब्धता से इन शिकारी जीवों को भटकना नहीं पड़ता। • संरक्षित वातावरण: एक राष्ट्रीय उद्यान के तौर पर मानवीय दखल, शिकार और वनों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध होने से इन सरीसृपों को बिना किसी बाधा के प्राकृतिक रूप से विकसित होने का मौका मिलता है। सवाल-जवाब 1. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में सांपों की कितनी प्रजातियां पाई जाती हैं? केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में सांपों की लगभग 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें विषैले और बिना विष वाले दोनों प्रकार के सांप शामिल हैं। 2. क्या केवलादेव में पाए जाने वाले अजगर विषैले होते हैं? नहीं, अजगर पूरी तरह से विषहीन होते हैं, लेकिन उनका विशाल शरीर और जकड़ने की शक्ति उन्हें बेहद शक्तिशाली शिकारी बनाती है। 3. पार्क में अजगर आमतौर पर किन जगहों पर दिखाई देते हैं? अजगर अक्सर पार्क के घास के मैदानों, झाड़ियों और जलभराव वाले इलाकों के आसपास धूप सेकते या आराम करते हुए नजर आते हैं। 4. केवलादेव के पारिस्थितिकी तंत्र में सांपों की क्या भूमिका है? सांप चूहों, मेंढकों और अन्य छोटे जीवों की आबादी को नियंत्रित कर प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। 5. केवलादेव जाने वाले पर्यटकों को सरीसृपों के संबंध में क्या सलाह दी जाती है? पर्यटकों और शोधार्थियों को जंगल में भ्रमण के दौरान वन्यजीवों और सांपों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। https://trendkia.com/rajasthan/keoladeo-men-pakshiyon-ke-alava-basati-hai-sarisripon-ki-anokhi-duniya-13-kisma-ke-sanpa-aura-bhari-tadada-men-maujuda-hain-ajagar-36233 TrendKia — Har trend, sabse pehle.