# खैरथल में 25 साल से गायों की सेवा कर रहे राकेश शर्मा, 13 लाख की एंबुलेंस और लम्पी वायरस पर उठे सवाल

> खैरथल में राकेश शर्मा पिछले 25 वर्षों से बेसहारा और घायल गायों की सेवा कर रहे हैं। श्री गोबिंदम गौ शाला ट्रस्ट के जरिए अब तक 3 हजार से ज्यादा गायों का इलाज किया जा चुका है, हालांकि शहर में लम्पी वायरस के मामलों और सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर चिंताएं भी सामने आई हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/khairthal-me-25-saal-se-gaayon-ki-seva-kar-rahe-rakesh-sharma-13-lakh-ki-ambulance-aur-lumpy-virus-par-uthe-sawaal-39286 · **Language:** Hindi
**Tags:** खैरथल, गौ सेवा, राकेश शर्मा, लम्पी वायरस, श्री गोबिंदम गौ शाला ट्रस्ट, पशु चिकित्सालय

राजस्थान के खैरथल शहर में बेसहारा और बीमार गोवंश की देखभाल का एक अनूठा और प्रेरणादायी उदाहरण देखने को मिलता है। यहां के स्थानीय निवासी राकेश शर्मा पिछले 25 वर्षों से पूरी निष्ठा और बिना किसी स्वार्थ के घायल, असहाय और बीमार गायों की सेवा में अपना जीवन समर्पित किए हुए हैं। सड़कों पर भटकने वाले और दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले मवेशियों को नया जीवन देने के उद्देश्य से उन्होंने करीब ढाई साल पहले श्री गोबिंदम गौ शाला ट्रस्ट की नींव रखी थी। समय के साथ इस नेक काम से शहर के लगभग 25 व्यापारी और अन्य समर्पित गौ सेवक जुड़ गए हैं, जिससे यह सेवा अभियान और अधिक मजबूत हुआ है। अब यह पूरी टीम दिन-रात यानी 24 घंटे और सातों दिन किसी भी समय मिलने वाली सूचना पर घायल गोवंश के उपचार के लिए तत्पर रहती है।

## तेरह लाख की आधुनिक एंबुलेंस और बेहतर इलाज की व्यवस्था
इस गौ सेवा के काम को और अधिक व्यापक और असरदार बनाने के लिए राकेश शर्मा और उनकी पूरी टीम ने मिलकर जनता के सहयोग से लगभग 13 लाख रुपये की लागत वाली एक अत्याधुनिक एंबुलेंस तैयार कराई है। जैसे ही टीम को शहर या आसपास के इलाके से किसी बीमार या दुर्घटनाग्रस्त गाय के बारे में कोई सूचना मिलती है, वे तुरंत इस विशेष एंबुलेंस के साथ निर्धारित स्थल पर पहुंच जाते हैं। मौके पर पहुंचने के बाद मवेशी को प्राथमिक उपचार दिया जाता है और फिर उसे सुरक्षित स्थान या उपचार केंद्र तक पहुंचाया जाता है। जिन गायों की हड्डियां टूटी होती हैं या जिनकी स्थिति बेहद गंभीर होती है, उन्हें बेहतर और उच्च स्तरीय चिकित्सा के लिए श्री गोकुल धाम संस्था, झज्जर भेजा जाता है, जहां विशेषज्ञ पशु चिकित्सक उनका ऑपरेशन और इलाज करते हैं। इस संस्था का दावा है कि उनके इस संयुक्त प्रयास से अब तक 3 हजार से अधिक गायों को नया जीवनदान मिल चुका है।

## लम्पी वायरस का प्रकोप और सरकारी अस्पताल पर गंभीर सवाल
गौ सेवा के इस सराहनीय सफर के बीच खैरथल में लम्पी वायरस के संक्रमण को लेकर नई चिंताएं और तीखे आरोप सामने आने लगे हैं। क्षेत्र के गौ सेवकों का कहना है कि शहर में खुले आसमान के नीचे घूमने वाले कई पशुओं के शरीर पर मोटी-मोटी गांठे और गहरे घाव साफ दिखाई दे रहे हैं, जो इस खतरनाक बीमारी के पुख्ता लक्षण हैं। स्थानीय पशु चिकित्सालय के लम्पी यार्ड में भी कई गायें उपचाराधीन हैं। श्री गोबिंदम गौ शाला ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों ने सरकारी पशु चिकित्सालय की व्यवस्थाओं और प्रबंधों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका मुख्य आरोप यह है कि खैरथल में जिला स्तर का ए श्रेणी अस्पताल होने के बावजूद वहां लम्पी बीमारी के इलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयां और पट्टियां तक उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें मजबूरन अपने खुद के पैसों से बाजार से दवा खरीदकर लानी पड़ती है।

## पशुपालन विभाग का तर्क और बीमारी की स्थिति
गौ सेवकों द्वारा लगाए गए इन तमाम आरोपों के जवाब में पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पीसी यादव ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में लम्पी बीमारी का यह संक्रमण लगभग एक महीने पहले सामने आया था, लेकिन अब यह समाप्ति की ओर अग्रसर है। उनके पास उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे जिले में कुल 496 पशुओं में इस बीमारी के लक्षण पाए गए थे, जिनमें से 487 मवेशी पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। पीसी यादव ने यह बात भी स्वीकार की कि खैरथल-तिजारा जिले में अपना खुद का ड्रग डिपो न होने की वजह से दवाइयां पुराने अलवर जिले से मंगवानी पड़ती हैं, जिसकी वजह से कभी-कभी सीमित आपूर्ति की समस्या पैदा हो जाती है। उन्होंने सभी पशुपालकों से यह अपील भी की है कि वे अपने मवेशियों को आवारा या खुले में न छोड़ें और जैसे-जैसे सर्दी का मौसम आगे बढ़ेगा, इस बीमारी के मामले और अधिक कम हो जाएंगे।

## चुनौतियों के बावजूद डटे हैं गौ सेवक
इस पूरे सेवा कार्य का संचालन किसी सरकारी अनुदान के बजाय पूरी तरह से जन सहयोग और टीम के सदस्यों के आपसी योगदान से किया जाता है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में ये सदस्य अपनी व्यक्तिगत दिनचर्या को छोड़कर तुरंत सक्रिय हो जाते हैं और गौ सेवा के लिए निकल पड़ते हैं। लम्पी वायरस के पहले दौर के संकट के दौरान भी इस संस्था ने काफी सराहनीय और उल्लेखनीय कार्य किया था। हालांकि दवाइयों की भारी किल्लत और प्रशासनिक उदासीनता जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद इन समर्पित गौ सेवकों का हौसला और उत्साह बिल्कुल कम नहीं हुआ है। वे निरंतर प्रशासन के समक्ष यह मांग रख रहे हैं कि अस्पताल में कम से कम प्राथमिक उपचार से जुड़ी दवाइयां हर समय अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहनी चाहिए ताकि किसी भी बेजुबान जानवर को इलाज के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े।

## इसका आप पर असर
खैरथल में चल रहे इस गौ सेवा अभियान और लम्पी वायरस के मामलों का स्थानीय निवासियों और पशुपालकों पर सीधा असर पड़ रहा है।

- **भारत में:** देश भर में आवारा पशुओं की सुरक्षा और उनके इलाज के लिए नागरिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे अभियानों से स्थानीय स्तर पर घायल गोवंश को समय पर चिकित्सीय सहायता मिल पाती है।
- **खैरथल में:** शहर के पशुपालकों और निवासियों को खुले में घूमने वाले मवेशियों की सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा। स्थानीय लोगों को लम्पी वायरस के लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए और अपने पशुओं को सुरक्षित रखना चाहिए।
- **अस्पताल की स्थिति:** सरकारी पशु चिकित्सालय में दवाओं की सीमित आपूर्ति के कारण स्थानीय लोगों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आपात स्थिति में निजी संगठनों और जन सहयोग पर निर्भरता बढ़ जाती है।
- **शीतकालीन प्रभाव:** सर्दी का मौसम बढ़ने के साथ पशुपालन विभाग के अनुसार लम्पी वायरस के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। इससे पशुपालकों को मौसमी संक्रमण से राहत मिलने की संभावना है।

## ऐसा क्यों हुआ
खैरथल में गौ सेवा के विस्तार और लम्पी वायरस के फैलने के पीछे कई ज़मीनी परिस्थितियां और प्रशासनिक कारण जिम्मेदार रहे हैं।

- **सामान की कमी:** खैरथल-तिजारा जिले में अपना खुद का ड्रग डिपो न होने के कारण दवाइयां पुराने अलवर जिले से मंगवानी पड़ती हैं। इस वजह से सरकारी अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सामग्रियों की सीमित आपूर्ति बनी रहती है।
- **संक्रमण का चक्र:** जिले में लम्पी वायरस का संक्रमण करीब एक महीने पहले फैला था, जिससे कई मवेशी प्रभावित हुए थे। खुले में घूमने वाले पशुओं के संपर्क में आने से यह बीमारी तेजी से फैली।
- **निजी पहल की जरूरत:** सरकारी स्तर पर संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण स्थानीय नागरिकों को खुद आगे आना पड़ा। राकेश शर्मा और उनके साथियों ने इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए ट्रस्ट और एंबुलेंस की व्यवस्था की।
- **आगे की स्थिति:** पशुपालन विभाग के अनुसार, तापमान में गिरावट और सर्दियों के बढ़ने से इस वायरस का प्रकोप अपने आप कम होने की संभावना है। विभाग ने आवारा घूमने वाले पशुओं पर नियंत्रण रखने की सलाह दी है।

## सवाल-जवाब

### 1. राकेश शर्मा पिछले कितने वर्षों से गायों की सेवा कर रहे हैं?
राकेश शर्मा पिछले 25 वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के बेसहारा, घायल और बीमार गायों की सेवा कर रहे हैं।

### 2. श्री गोबिंदम गौ शाला ट्रस्ट की स्थापना कब और किसने की थी?
इस ट्रस्ट की स्थापना करीब ढाई साल पहले राकेश शर्मा ने की थी, जिससे बाद में कई व्यापारी और गौ सेवक जुड़ गए।

### 3. एंबुलेंस की लागत कितनी है और इसका उपयोग कैसे किया जाता है?
जन सहयोग से तैयार इस अत्याधुनिक एंबुलेंस की लागत लगभग 13 लाख रुपये है और इसका उपयोग घायल गायों को अस्पताल पहुंचाने के लिए किया जाता है।

### 4. गंभीर रूप से घायल गायों को इलाज के लिए कहाँ भेजा जाता है?
हड्डियों टूटने या गंभीर रूप से घायल गायों को बेहतर इलाज के लिए श्री गोकुल धाम संस्था, झज्जर भेजा जाता है।

### 5. अब तक इस टीम ने कितनी गायों को जीवनदान दिया है?
संस्था का दावा है कि उनकी टीम अब तक 3 हजार से अधिक गायों को जीवनदान दे चुकी है।

### 6. लम्पी वायरस को लेकर गौ सेवकों ने क्या आरोप लगाए हैं?
गौ सेवकों ने आरोप लगाया है कि खैरथल के सरकारी अस्पताल में लम्पी के इलाज के लिए पर्याप्त दवाइयां और पट्टियां उपलब्ध नहीं हैं।

### 7. पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में कितने पशु लम्पी से प्रभावित हुए थे?
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल 496 पशुओं में लक्षण मिले थे, जिनमें से 487 स्वस्थ हो चुके हैं।

### 8. दवाइयों की किल्लत का क्या कारण बताया गया है?
खैरथल-तिजारा जिले में अपना ड्रग डिपो न होने के कारण दवाइयां पुराने अलवर जिले से मंगवानी पड़ती हैं, जिससे आपूर्ति सीमित हो जाती है।

## प्रेरणा और सबक
राकेश शर्मा और उनके साथियों के 25 वर्षों के इस समर्पण से समाज को कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं।

- **निस्वार्थ सेवा:** बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लगातार 25 वर्षों तक बेसहारा जीवों की सेवा करना गहरी प्रतिबद्धता का उदाहरण है। यह दिखाता है कि दृढ़ संकल्प से बड़े सामाजिक बदलाव लाए जा सकते हैं।
- **सामूहिक सहयोग:** केवल एक व्यक्ति के प्रयास से शुरू हुआ काम जन सहयोग और व्यापारियों के जुड़ने से एक बड़े ट्रस्ट में बदल गया। इससे साबित होता है कि नेक काम में समाज का साथ मिलने पर बड़े संसाधन जुटाए जा सकते हैं।
- **संकट में तत्परता:** प्रशासनिक चुनौतियों और दवाइयों की किल्लत के बावजूद गौ सेवकों का उत्साह कम नहीं हुआ। यह सीख देता है कि कठिनाइयों के सामने हार मानने के बजाय समाधान की ओर ध्यान देना चाहिए।
- **व्यापक प्रभाव:** एक छोटी सी पहल से शुरू होकर यह अभियान आज 3 हजार से अधिक मवेशियों को जीवनदान दे चुका है। निरंतरता और मेहनत से किसी भी क्षेत्र में बड़ा सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है।

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