# खरीफ फसलों के नए एमएसपी से सीकर के किसानों में निराशा, मूंग पर मात्र 11 रुपये तो मूंगफली पर 254 रुपये की बढ़ोतरी

> केंद्र सरकार ने खरीफ सत्र के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर दिए हैं, जिसमें सीकर के प्रमुख उत्पाद मूंग के भाव में महज 11 रुपये और मूंगफली में 254 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। जिले में उपज की सुचारू खरीद सुनिश्चित करने के लिए 19 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kharipha-phasalon-ke-nae-msp-se-sikar-ke-kisanon-men-nirasha-munga-para-matra-11-rupaye-to-mungaphali-para-254-rupaye-ki-barhotari-38290 · **Language:** Hindi
**Tags:** न्यूनतम समर्थन मूल्य, सीकर मंडी, मूंग का भाव, मूंगफली एमएसपी, खरीफ फसल, सहकारिता विभाग, कृषि उपज मंडी

खरीफ सत्र की फसलों की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य ने सीकर जिले के किसानों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। दलहन और तिलहन की मुख्य फसलों के लिए तय की गई नई दरों के तहत मूंग का समर्थन मूल्य 8,780 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली का भाव 7,517 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। पिछले विपणन वर्ष के आंकड़ों से तुलना करें तो मूंग के सरकारी दाम में मात्र 11 रुपये प्रति क्विंटल का प्रतीकात्मक इजाफा हुआ है, जबकि मूंगफली में 254 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़त दर्ज की गई है। जिले में पैदावार बेचने के इच्छुक काश्तकारों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस दफा खरीद केंद्रों के दायरे का विस्तार भी किया गया है।

## मूंग और मूंगफली की दरों में हुआ मामूली बदलाव
विगत खरीफ सत्र के दौरान सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों को मूंग के लिए 8,769 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य दिया गया था। इस बार इसमें केवल 11 रुपये की बढ़ोतरी करके इसे 8,780 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पूरे खरीफ बास्केट में सबसे कम वृद्धि मानी जा रही है। दूसरी तरफ मूंगफली की दर पिछले साल 7,263 रुपये प्रति क्विंटल तय थी, जिसमें 254 रुपये प्रति क्विंटल जोड़कर नया भाव 7,517 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। स्थानीय काश्तकारों का स्पष्ट कहना है कि बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, जुताई, मजदूरी और लगातार महंगे होते डीजल के खर्च को देखते हुए यह नाममात्र की बढ़ोतरी खेती की बढ़ती लागत की भरपाई करने में पूरी तरह नाकाफी है।

## अन्य खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य में बड़ा अंतर
केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी ताजा दरों में सिर्फ मूंग और मूंगफली ही शामिल नहीं हैं, बल्कि बाजरा, तुअर और उड़द के समर्थन मूल्य में भी बदलाव किया गया है। बाजरे का एमएसपी 2,775 रुपये से बढ़ाकर 2,900 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, यानी इसमें 125 रुपये का इजाफा हुआ है। इसी तरह दलहनी फसलों में तुअर के दाम में 450 रुपये की वृद्धि कर इसे 8,450 रुपये प्रति क्विंटल और उड़द में 400 रुपये की बढ़ोतरी के साथ नया मूल्य 8,200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। फसलों के तुलनात्मक अध्ययन से साफ जाहिर होता है कि जहां तुअर और उड़द में 400 से 450 रुपये तक की राहत दी गई है, वहीं मूंग की फसल को सबसे कम प्राथमिकता मिली है।

## मंडी के खुले कारोबार और सरकारी खरीद पर संभावित असर
न्यूनतम समर्थन मूल्य केवल सरकारी खरीद का आंकड़ा भर नहीं होता, बल्कि यह खुले कृषि बाजार में व्यापारियों की खरीद रणनीति और कीमतों की दिशा भी तय करता है। अनाज कारोबारी सुभाष बूबना के मुताबिक यदि सरकारी क्रय केंद्रों पर तय एमएसपी खुले बाजार के भावों से अधिक रहता है और प्रशासन सक्रियता से खरीद करता है, तो किसान अपनी उपज सीधे खरीद केंद्रों पर ले जाना पसंद करेंगे। इस स्थिति में स्थानीय कृषि उपज मंडियों में अनाज की आवक घट सकती है, जिससे निजी व्यापारियों और मिलर्स के बीच सीमित स्टॉक हासिल करने की होड़ बढ़ जाएगी और खुले बाजार के भावों में तेजी आ सकती है।

इसके विपरीत यदि निजी व्यापारी और मंडियां किसानों को घोषित एमएसपी से बेहतर या उसके आसपास नकदी भुगतान देने लगें, तो किसान लंबी औपचारिकताओं वाले सरकारी खरीद केंद्रों से दूरी बनाकर मंडियों का रुख करेंगे। मंडियों में अचानक भारी आवक होने से व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा घटेगी और जिंसों के दामों पर गिरावट का दबाव बन सकता है। लिहाजा किसानों के वास्तविक मुनाफे के लिए केवल कागजों पर घोषित एमएसपी ही निर्णायक नहीं होगा, बल्कि आवक के समय मंडी के वास्तविक हालात और सरकारी खरीद केंद्रों की सक्रियता सबसे बड़ा पैमाना साबित होगी।

## सीकर जिले में 19 केंद्रों पर होगी मूंग और मूंगफली की खरीद
जिले भर के किसानों से मूंग और मूंगफली की उपज खरीदने के लिए सहकारिता विभाग ने प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस वर्ष खरीद केंद्रों की संख्या 17 से बढ़ाकर 19 कर दी गई है ताकि किसानों को दूरदराज के इलाकों में भटकना न पड़े। सीकर कृषि उपज मंडी समिति के मुख्य परिसर, धोद और गोठड़ा भूकरान में खरीद की सीधी व्यवस्था की गई है। दांतारामगढ़ तहसील क्षेत्र में दांतारामगढ़ क्रय-विक्रय सहकारी समिति, पलसाना मंडी तथा केवीएसएस दांतारामगढ़ में खरीद बिंदु बनाए गए हैं, जबकि लक्ष्मणगढ़ और फतेहपुर के किसानों के लिए संबंधित क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के केंद्र काम करेंगे।

खंडेला इलाके में खंडेला और तपिपल्या जीएसएस को खरीद केंद्र घोषित किया गया है। श्रीमाधोपुर उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत मुख्य मंडी परिसर के अलावा भारणी, नाथूसर, कंचनपुर, सिहोड़ी, गढ़टकनेत और सिमारला जागीर में केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही नीमकाथाना इलाके में स्थानीय क्रय-विक्रय सहकारी समिति के अलावा पाटन और चला जीएसएस पर तुलाई की व्यवस्था रहेगी। सहकारिता विभाग ने सभी 19 खरीद केंद्रों की सूची फाइनल कर ली है और जल्द ही पंजीयन तथा तुलाई का औपचारिक समय चक्र जारी कर दिया जाएगा।

## इसका आप पर असर
खरीफ फसलों के नए समर्थन मूल्य से सीकर और आसपास के किसानों की आय तथा स्थानीय कृषि व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा।

- **सीकर में:** जिले के किसानों को मूंग के लिए 8,780 रुपये और मूंगफली के लिए 7,517 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपज बेचने का सरकारी विकल्प मिलेगा। किसान अपने नजदीकी 19 सहकारी खरीद केंद्रों पर पंजीयन कराकर न्यूनतम गारंटीशुदा दर हासिल कर सकते हैं।
- **भारत में:** देशभर के दलहन और तिलहन उत्पादकों को बढ़ती कृषि लागत के मुकाबले बेहद सीमित मूल्य वृद्धि के साथ संतोष करना पड़ेगा। तुअर और उड़द के मुकाबले मूंग उगाने वाले किसानों को इस सत्र में अपेक्षाकृत कम मुनाफा मिलने की संभावना है।
- **खुले बाजार के व्यापारियों पर:** सरकारी खरीद केंद्रों के सक्रिय रहने की स्थिति में खुले बाजार की मंडियों में मूंग और मूंगफली की आवक घट सकती है। निजी कारोबारियों को पर्याप्त स्टॉक जुटाने के लिए किसानों को समर्थन मूल्य से बेहतर दाम की पेशकश करनी पड़ सकती है।
- **उपभोक्ताओं पर असर:** थोक समर्थन मूल्य में वृद्धि का सीमित असर खुदरा दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। आपूर्ति में किसी भी कमी की स्थिति में खुले बाजार में खुदरा कीमतें स्थिर अथवा हल्की तेज रह सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य में की गई असमान बढ़ोतरी के पीछे उत्पादन लागत, बाजार संतुलन और दलहन उत्पादन की नीतिगत प्राथमिकताएं मुख्य वजह हैं।

- **लागत गणना और फसल प्राथमिकता:** केंद्र सरकार विभिन्न फसलों के उत्पादन व्यय और राष्ट्रीय भंडार की प्राथमिकताओं के आधार पर मूल्य समायोजन तय करती है। तुअर और उड़द की घरेलू कमी को पूरा करने के लिए उनमें अधिक बढ़ोतरी की गई, जबकि मूंग में मात्र 11 रुपये की सांकेतिक वृद्धि हुई।
- **किसानों की बढ़ती इनपुट लागत:** डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और खेत मजदूरी के दाम लगातार बढ़ने से किसान उत्पादन की वास्तविक लागत अधिक होने की बात कह रहे हैं। सरकारी दरों में मामूली वृद्धि के कारण किसान लागत की तुलना में इस संशोधन को अपर्याप्त मान रहे हैं।
- **सरकारी खरीद व्यवस्था का विस्तार:** सीकर जिले में किसानों की पहुंच आसान बनाने और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रशासन ने केंद्रों की संख्या 17 से बढ़ाकर 19 की है। सहकारिता विभाग ने आगामी आवक सीजन के लिए केंद्रों का चयन कर औपचारिक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है।

## सवाल-जवाब

### 1. इस सत्र में मूंग और मूंगफली का नया एमएसपी कितना तय किया गया है?
इस बार मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,780 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली का 7,517 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

### 2. पिछले साल के मुकाबले मूंग और मूंगफली के समर्थन मूल्य में कितनी बढ़ोतरी हुई?
मूंग के समर्थन मूल्य में महज 11 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली के समर्थन मूल्य में 254 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

### 3. अन्य खरीफ फसलों जैसे बाजरा, तुअर और उड़द के नए भाव क्या हैं?
बाजरे का एमएसपी 2,900 रुपये, तुअर का 8,450 रुपये और उड़द का समर्थन मूल्य 8,200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।

### 4. सीकर जिले में सरकारी खरीद के लिए कितने केंद्र बनाए गए हैं?
सीकर जिले में इस बार सरकारी खरीद के लिए 19 केंद्र बनाए गए हैं, जबकि पिछले साल 17 केंद्र थे।

### 5. सीकर जिले के प्रमुख खरीद केंद्र किन क्षेत्रों में स्थित हैं?
खरीद केंद्र सीकर मंडी, धोद, गोठड़ा भूकरान, दांतारामगढ़, पलसाना, लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर, खंडेला, श्रीमाधोपुर और नीमकाथाना में स्थित हैं।

### 6. एमएसपी बढ़ने से खुले बाजार के भावों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि किसान उपज सरकारी केंद्रों पर बेचते हैं तो मंडियों में आवक कम होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और खुले बाजार के भाव चढ़ सकते हैं।

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