# खाटूश्यामजी में आकार लेगा सफेद मार्बल का भव्य धाम, 133 फीट ऊंचे शिखर और 93 खंभों पर टिकेगा नया परिसर

> राजस्थान के सीकर में खाटूश्यामजी मंदिर का नया परिसर नागर शैली और मकराना मार्बल से तैयार होगा। मंदिर कमेटी अगले पांच वर्षों में 133 फीट ऊंचे शिखर और 93 नक्काशीदार खंभों वाले इस भव्य धाम का निर्माण पूरा करने की तैयारी में है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/khatu-shyam-ji-men-akara-lega-sapheda-marbala-ka-bhavya-dhama-133-phita-unche-shikhara-aura-93-khnbhon-para-tikega-naya-parisara-43103 · **Language:** Hindi
**Tags:** खाटूश्यामजी, सीकर, बाबा श्याम, राजस्थान मंदिर, नागर शैली, मकराना मार्बल, मंदिर निर्माण

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटूश्यामजी धाम आने वाले वर्षों में एक बिल्कुल नए और भव्य स्वरूप में नजर आने वाला है। देश और दुनिया भर से बाबा श्याम के दर्शन करने पहुंचने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद को देखते हुए मंदिर के विस्तार और नवनिर्माण की योजना अब जमीन पर उतरने के करीब पहुंच गई है। श्री श्याम मंदिर कमेटी इस परियोजना को अपने मौजूदा कार्यकाल के भीतर धरातल पर शुरू करने और एक तय समय सीमा में पूरा करने के लिए तेजी से काम कर रही है। पिछले चार वर्षों से चल रही कागजी और तकनीकी तैयारियों के बाद अब पत्थरों की तराशी का काम जोर-शोर से चल रहा है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि अगले पांच साल के भीतर यह विशाल मंदिर पूरी तरह बनकर भक्तों के लिए समर्पित कर दिया जाएगा।

## चार साल की पूर्व तैयारी के बाद तराशी जा रहे हैं पत्थर
इस पूरे प्रोजेक्ट की रूपरेखा अचानक नहीं बनी है, बल्कि पिछले लगभग चार सालों से इसके अलग-अलग चरणों पर गहन काम किया जा रहा था। वर्तमान मंदिर परिसर से कुछ ही दूरी पर चिन्हित जगह पर प्रस्तावित ढांचे के लिए पत्थरों पर बारीक नक्काशी का काम निरंतर जारी है। श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, मुख्य मंदिर के निर्माण की शुरुआती औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है। पत्थरों की जटिल और पारंपरिक नक्काशी में अभी थोड़ा वक्त और दरकार है, जिसके पूरा होते ही मुख्य स्थल पर निर्माण कार्य पूरी ताकत के साथ शुरू हो जाएगा। प्रबंध समिति का लक्ष्य है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में मंदिर की मुख्य संरचना अपनी भव्य आकृति लेने लगे और तय समय के भीतर समूचा परिसर आकार ले ले।

## पारंपरिक नागर वास्तुकला और वर्तमान से दोगुना विशाल परिसर
नया श्याम मंदिर किसी भी तरह के आधुनिक कंक्रीट ढांचे की बजाय भारतीय स्थापत्य की ऐतिहासिक और पारंपरिक नागर शैली में निर्मित किया जा रहा है। नागर शैली की भव्यता को दर्शाने के लिए पूरे परिसर का निर्माण मकराना के उच्च श्रेणी के सफेद मार्बल और मजबूत ग्रेनाइट के मेल से किया जाएगा। क्षेत्रफल और भव्यता के मामले में यह प्रस्तावित परिसर मौजूदा मंदिर की तुलना में लगभग दोगुना बड़ा होगा। मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई करीब 133 फीट तय की गई है, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी। इस पूरे ढांचे का भार 93 बेहद कलात्मक और नक्काशीदार खंभों पर टिका होगा, जो मंदिर को प्राचीन राजप्रासादों और ऐतिहासिक देवालयों जैसा गौरवशाली रूप प्रदान करेंगे।

## मूल प्रतिमा का स्थान रहेगा यथावत, गर्भगृह का होगा विस्तार
श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और सदियों पुरानी परंपराओं का पूरा सम्मान करते हुए स्पष्ट किया गया है कि बाबा श्याम की पूज्य प्रतिमा के मूल स्वरूप या स्थान में रत्ती भर भी बदलाव नहीं किया जाएगा। प्रतिमा अपने तय स्थान पर वैसी ही प्रतिष्ठित रहेगी जैसी अब तक रही है। बदलाव केवल उसके आसपास के स्थापत्य में किया जा रहा है। नए नक्शे के मुताबिक गर्भगृह को पहले की तुलना में काफी ज्यादा चौड़ा, खुला और भव्य बनाया जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था में भक्त करीब 18 फीट की दूरी से बाबा श्याम की अलौकिक छवि के दर्शन करते हैं, लेकिन नया गर्भगृह और बड़ा आंगन तैयार होने के बाद वे कुछ और दूरी से भी बिना किसी रुकावट के अत्यंत सुगमता से दर्शन लाभ ले सकेंगे। प्रवेश द्वारों को भी काफी चौड़ा किया जा रहा है ताकि भारी भीड़ के दौरान श्रद्धालुओं को खड़े होने और कतारबद्ध चलने में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

## मकराना मार्बल, भूकंपरोधी तकनीक और महाभारत कालीन नक्काशी
नए धाम को सदियों तक सुरक्षित और अडिग रखने के उद्देश्य से निर्माण तकनीक में मजबूती पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। पूरे ढांचे को विशेष रूप से भूकंपरोधी तकनीक के आधार पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें जमीन के नीचे की नींव और मुख्य आधार में उच्च गुणवत्ता वाले मजबूत ग्रेनाइट का इस्तेमाल होगा। मंदिर कमेटी के प्रतिनिधियों ने राजस्थान के कई प्रसिद्ध पत्थर क्षेत्रों का दौरा करने के बाद विश्वविख्यात मकराना के सफेद संगमरमर को इस पुनीत कार्य के लिए चुना। इंजीनियरों की एक विशेषज्ञ टीम हर पत्थर के नमूने और उसकी गुणवत्ता की बारीकी से जांच करती है, जिसके बाद ही उसे कुशल कारीगरों के पास नक्काशी के लिए भेजा जाता है। मंदिर की दीवारों पर राधा-कृष्ण की मनोहारी लीलाओं और महाभारत के ऐतिहासिक प्रसंगों को सजीव रूप में उकेरा जाएगा। इसके अलावा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए आधुनिक मेटल डिटेक्टर और हाईटेक सीसीटीवी कैमरों का जाल भी बिछाया जाएगा।

## इसका आप पर असर
खाटूश्यामजी में बनने वाले इस विशाल परिसर से आम श्रद्धालुओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।

- **भारत भर में:** देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भारी भीड़ के दिनों में भी सुगम और तनावमुक्त दर्शन की सुविधा मिलेगी। गर्भगृह और मुख्य परिसर के दोगुना बड़े होने से कतारों में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
- **सीकर और खाटू क्षेत्र में:** नया भव्य मंदिर बनने से इलाके में धार्मिक पर्यटन और होटल कारोबार में भारी उछाल आने की उम्मीद है। स्थानीय व्यापारियों, परिवहन ऑपरेटरों और कारीगरों के लिए रोजगार और आमदनी के नए रास्ते खुलेंगे।
- **श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर:** भूकंपरोधी तकनीक और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस होने के कारण बड़े उत्सवों में भक्तों की हिफाजत सुनिश्चित होगी। हाईटेक सीसीटीवी कैमरों और मेटल डिटेक्टरों से भीड़ प्रबंधन पहले से कहीं अधिक पुख्ता हो सकेगा।
- **दर्शन व्यवस्था पर:** गर्भगृह के चौड़ा होने से श्रद्धालु कुछ और दूरी से भी बिना धक्का-मुक्की के स्पष्ट दर्शन कर सकेंगे। बाबा श्याम की मूल प्रतिमा अपने स्थान पर ही रहेगी, जिससे पारंपरिक आस्था पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
खाटूश्यामजी में नए मंदिर के निर्माण का निर्णय लगातार बढ़ती श्रद्धालु संख्या और मौजूदा परिसर की सीमित क्षमता के कारण लिया गया है।

- **श्रद्धालुओं की भारी वृद्धि:** हाल के वर्षों में देश-विदेश से खाटूश्यामजी आने वाले भक्तों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। मौजूदा परिसर का आकार लाखों की संख्या में पहुंचने वाली भीड़ को संभालने के लिहाज से छोटा पड़ने लगा था।
- **दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा योजना:** श्री श्याम मंदिर कमेटी ने पिछले चार वर्षों से इस विशाल विस्तार की रूपरेखा तैयार की थी ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके। पुराने ढांचे को छेड़े बिना एक ऐसा मजबूत और टिकाऊ धाम बनाने का फैसला हुआ जो सदियों तक सुरक्षित रहे।
- **पारंपरिक स्थापत्य और सुरक्षा आवश्यकताएं:** आधुनिक कंक्रीट की जगह प्राचीन नागर शैली और मकराना मार्बल को इसलिए चुना गया ताकि मंदिर की ऐतिहासिक गरिमा बनी रहे। साथ ही भूकंपरोधी तकनीक और मजबूत ग्रेनाइट नींव का चयन संरचना को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए किया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. खाटूश्यामजी का नया मंदिर कब तक बनकर तैयार होगा?
मंदिर कमेटी के अनुसार नए मंदिर का निर्माण आगामी 5 वर्षों में पूरी तरह संपन्न होने की उम्मीद है, जबकि अगले दो से तीन वर्षों में ढांचा आकार लेने लगेगा।

### 2. नए मंदिर की वास्तुकला शैली और ऊंचाई कितनी होगी?
यह मंदिर पारंपरिक नागर शैली में मकराना के सफेद मार्बल से बनेगा, जिसका मुख्य शिखर करीब 133 फीट ऊंचा होगा और यह 93 खंभों पर खड़ा होगा।

### 3. क्या नए निर्माण में बाबा श्याम की प्रतिमा का स्थान बदला जाएगा?
नहीं, बाबा श्याम की प्रतिमा अपने मूल स्थान पर ही रहेगी और उसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी, सिर्फ गर्भगृह को पहले से चौड़ा और भव्य बनाया जाएगा।

### 4. वर्तमान मंदिर की तुलना में नया परिसर कितना बड़ा होगा?
प्रस्तावित नया मंदिर वर्तमान मंदिर के आकार की तुलना में लगभग दोगुना बड़ा होगा, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी।

### 5. मंदिर की दीवारों पर किस तरह की कलाकृतियां उकेरी जाएंगी?
नए मंदिर की दीवारों पर राधा-कृष्ण की लीलाओं और महाभारत से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों की मनमोहक नक्काशीदार झांकियां तैयार की जाएंगी।

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