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  "type": "article",
  "title": "खाटूश्याम जी में वीकेंड पर उमड़ा आस्था का सैलाब, जलझूलनी एकादशी पर दिन-रात खुले रहेंगे कपाट",
  "summary": "राजस्थान के सीकर स्थित खाटूश्याम जी मंदिर में वीकेंड पर लाखों भक्तों के पहुंचने के बाद मंदिर कमेटी ने 22 सितंबर को पड़ने वाली जलझूलनी एकादशी के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसके तहत मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा।",
  "content": "राजस्थान के सीकर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध खाटू धाम में सप्ताहांत के दौरान आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। शनिवार की अलसुबह मंगला आरती के समय से ही देश भर से आए श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था, जो रविवार को भी लगातार जारी रहा। भक्तों के अपार जनसैलाब को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सामान्य दिनों में दोपहर के वक्त होने वाले कपाट बंदी के नियम को स्थगित कर दिया, जिससे दिनभर दोनों दिन दर्शन का सिलसिला बिना किसी रुकावट के चलता रहा। श्रद्धालुओं की भारी तादाद को सुगमता से दर्शन कराने के लिए 14 समानांतर कतारों की व्यवस्था अमल में लाई गई, साथ ही भीषण गर्मी से बचाव के लिए श्री श्याम मंदिर कमेटी ने भक्तों की सुख-सुविधा से जुड़े विशेष बंदोबस्त किए।\n\nश्रृंगार दर्शन और रूट डायवर्जन के पुख्ता इंतजाम\nसप्ताहांत की इस विशेष भीड़ के बीच बाबा श्याम का अलौकिक और मनमोहक श्रृंगार आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस दिव्य श्रृंगार के लिए देश की राजधानी दिल्ली से खास तौर पर सफेद, हरे और गुलाबी रंग के सुगंधित ताजे फूल मंगवाए गए थे। बाबा को श्रृंगार आरती के साथ-साथ संध्या आरती के दौरान भी भव्य रूप से सुसज्जित किया गया। सोमवार को आने वाले दर्शनार्थियों के लिए सुगम मार्ग प्रबंधन सुनिश्चित किया गया है। भक्तों को तोरणद्वार, अस्पताल चौराहा, शनि मंदिर और लामियां तिराहा के तयशुदा रास्ते से होते हुए मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचाया जा रहा है।\n\nमंदिर परिसर के भीतर 75 फीट चौड़े विशाल मार्ग पर 14 पंक्तियों में कतारबद्ध होकर श्रद्धालु गर्भगृह के सामने पहुंच रहे हैं। व्यवस्था को नियंत्रित रखने के मकसद से कतार प्रबंधन, मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षा कर्मियों की चाक-चौबंद तैनाती की गई है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामान्य वीआईपी दर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, और केवल प्रोटोकॉल श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों को ही इस मार्ग से प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।\n\nजलझूलनी एकादशी पर 24 घंटे दर्शन और विशेष पूजन\nआगामी 22 सितम्बर को जलझूलनी एकादशी का पावन पर्व मनाया जाएगा, जिसको लेकर खाटूश्याम जी में अगले दो से तीन दिनों तक श्रद्धालुओं की संख्या में और भी भारी इजाफा होने का अनुमान लगाया गया है। इस पावन तिथि पर बाबा श्याम के विशेष श्रृंगार के बीच भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप को भी प्रतिष्ठित किया जाएगा। उत्सव के दिन आयोजित होने वाली पांचों आरतियों में बाल गोपाल की विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न होगी। भोग आरती के शुभ अवसर पर बाबा श्याम और बाल गोपाल को पारंपरिक माखन, मिश्री और मावे का महाभोग अर्पित किया जाएगा।\n\nउत्सव के आकर्षण को बढ़ाने के लिए देश-विदेश से जुटाए गए दुर्लभ खुशबूदार फूलों से मंदिर और विग्रह का मनमोहक श्रृंगार किया जाएगा, जबकि बाबा श्याम को नवरत्न जड़ित स्वर्ण निर्मित नया मुकुट भी धारण कराया जाएगा। श्रद्धालुओं की संभावित प्रचंड भीड़ को संभालने के लिए मंदिर प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि जलझूलनी एकादशी पर मंदिर के कपाट पूरे 24 घंटे खुले रखे जाएंगे। सामान्य दिनों में दोपहर 2:00 बजे से लेकर 4:00 बजे तक मंदिर के पट बंद रहते हैं, सिवाय शनिवार, रविवार तथा शुक्ल पक्ष की एकादशी एवं द्वादशी के। इसके अलावा आम रातों में रात्रि 10.30 बजे शयन आरती के उपरांत मंदिर बंद हो जाता है, लेकिन इस उत्सव पर दिन अथवा रात में कपाट बिल्कुल बंद नहीं होंगे।\n\nहारे का सहारा बनने की पौराणिक गाथा\nधार्मिक मान्यताओं में बाबा श्याम को कलयुग में हारे का सहारा माना जाता है और उन्हें साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का अवतार मानकर पूजा जाता है। महाभारत काल के प्रसंग के अनुसार, महाबली भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों के पक्ष से युद्ध भूमि में उतरने की तैयारी कर रहे थे। उसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे शीश का दान मांग लिया। वीर बर्बरीक ने बिना किसी संकोच अथवा हिचकिचाहट के अपना शीश काटकर भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। उनके इस सर्वोच्च बलिदान और समर्पण से अत्यंत प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान प्रदान किया कि कलयुग के समय में वे उनके ही स्वरूप यानी श्याम नाम से पूजे जाएंगे और संसार में हर हारे हुए एवं निराश व्यक्ति का संबल बनेंगे। इसी दैवीय वरदान के कारण सदियों से बाबा श्याम को श्रद्धालु हारे के सहारे के रूप में भजते आ रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nखाटूश्याम जी मंदिर में जलझूलनी एकादशी के अवसर पर 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था से सीकर आने वाले तीर्थयात्रियों को बिना कपाट बंदी के कभी भी दर्शन का अवसर मिलेगा।\n\n• सीकर में: आगामी दो से तीन दिनों तक श्रद्धालुओं को तोरणद्वार, अस्पताल चौराहा, शनि मंदिर और लामियां तिराहा मार्ग से ही 14 कतारों में मंदिर तक प्रवेश मिलेगा। आम वीआईपी दर्शन बंद रहने के कारण सभी सामान्य यात्रियों को समान कतार व्यवस्था से गुजरना होगा।\n• तीर्थयात्रियों के लिए: 22 सितंबर को सामान्य दिनों की तरह दोपहर 2:00 बजे से 4:00 बजे तक और रात 10.30 बजे के बाद कपाट बंद नहीं होंगे। भक्त दिन अथवा रात में अपनी सुविधानुसार किसी भी समय बिना लंबे ठहराव के दर्शन कर सकेंगे।\n• श्रद्धालुओं की पूजा के लिए: एकादशी के दिन पांचों आरतियों में बाल गोपाल के दर्शन और माखन मिश्री के विशेष भोग का दर्शन लाभ मिलेगा। 9 रत्न जड़ित सोने के नए मुकुट और विदेशी सुगंधित फूलों से सुसज्जित विग्रह के दर्शन किए जा सकेंगे।\n• गर्मी से बचाव के लिए: मंदिर परिसर में तेज धूप और उमस को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। कतार में लगने वाले यात्रियों को परिसर के 75 फीट चौड़े रास्ते पर छाया और पेयजल की सुलभता मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nवीकेंड पर उमड़ी भारी भीड़ और 22 सितंबर को पड़ने वाले जलझूलनी एकादशी पर्व के कारण मंदिर प्रबंधन ने दर्शन नियमों में बड़े बदलाव किए हैं।\n\n• त्योहारी भीड़ का दबाव: जलझूलनी एकादशी के अवसर पर खाटू धाम में आगामी दो-तीन दिनों के भीतर लाखों अतिरिक्त श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। भारी जनसैलाब को नियंत्रित रखने और भगदड़ जैसी स्थिति टालने के लिए 24 घंटे कपाट खुले रखने का निर्णय लिया गया।\n• सप्ताहांत में दर्शनार्थियों का रेकॉर्ड आगमन: शनिवार को मंगला आरती के समय से ही भारी संख्या में लोग पहुंचे, जिसके चलते शनिवार और रविवार को दोपहर के समय कपाट बंद नहीं किए जा सके। इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए आगामी एकादशी पर भी दिन-रात दर्शन सुचारु रखने की रूपरेखा तैयार हुई।\n• भीड़ नियंत्रण और वीआईपी व्यवस्था: परिसर के 75 फीट चौड़े मार्ग पर 14 कतारें बनाकर सुगम आवाजाही सुनिश्चित की गई है। आम श्रद्धालुओं की कतारों में व्यवधान रोकने के लिए वीआईपी दर्शन रोककर केवल प्रोटोकॉल एंट्री तक सीमित कर दी गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. खाटूश्याम जी में जलझूलनी एकादशी कब मनाई जाएगी?\nखाटूश्याम जी मंदिर में जलझूलनी एकादशी का पावन पर्व 22 सितम्बर को मनाया जाएगा।\n\n2. जलझूलनी एकादशी पर मंदिर में दर्शन के समय क्या रहेंगे?\nभक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए जलझूलनी एकादशी पर मंदिर के कपाट पूरे 24 घंटे खुले रहेंगे और दिन में भी पट बंद नहीं होंगे।\n\n3. एकादशी पर बाबा श्याम का श्रृंगार किस प्रकार किया जाएगा?\nबाबा श्याम का श्रृंगार देश-विदेश से लाए गए खुशबूदार फूलों से होगा और उन्हें 9 रत्न जड़ित सोने का नया मुकुट पहनाया जाएगा।\n\n4. श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए कौन सा मार्ग तय किया गया है?\nश्रद्धालुओं को तोरणद्वार, अस्पताल चौराहा, शनि मंदिर और लामियां तिराहा होते हुए 75 फीट चौड़े मार्ग की 14 कतारों से प्रवेश दिया जा रहा है।\n\n5. क्या वर्तमान में मंदिर में वीआईपी दर्शन की अनुमति है?\nमंदिर में सामान्य वीआईपी दर्शन पूरी तरह बंद हैं और केवल आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत ही वीआईपी प्रवेश दिया जा रहा है।\n\n6. बाबा श्याम को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?\nमहाभारत काल में बर्बरीक द्वारा श्रीकृष्ण को शीश दान करने पर उन्हें वरदान मिला था कि कलयुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और हारे हुए लोगों का सहारा बनेंगे।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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    "खाटूश्याम जी",
    "सीकर",
    "जलझूलनी एकादशी",
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