खाटूश्याम जी में उमड़ी भारी भीड़, लाल फूलों से सजा दरबार और वीआईपी दर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित वीकेंड के चलते सीकर के खाटूश्याम मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जबकि आगामी 17 सितंबर को तिलक श्रृंगार के कारण मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। वीकेंड के अवसर पर सीकर स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी के मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। शनिवार को मंगला आरती के समय से ही भक्तों के आने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह रविवार को अलसुबह तक लगातार जारी रहा। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन कराने के लिए कुल चौदह कतारों की व्यवस्था की गई है। बढ़ती गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से आने वाले लोगों की सुविधा के लिए विशेष और अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी को परेशानी का सामना न करना पड़े। भव्य सजावट और सुरक्षा के कड़े इंतजाम इस बार वीकेंड के खास मौके पर मंदिर के मंडप प्रांगण को बेहद भव्य तरीके से सजाया गया है। इसके साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों से विशेष तौर पर मंगवाए गए लाल फूलों से बाबा श्याम का बहुत ही मनमोहक और आकर्षक श्रृंगार किया गया है। मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के लिए डीएसपी राजेश कुमार जांगिड़ और स्थानीय थानाधिकारी के निर्देशन में लगभग तीन सौ पचास पुलिसकर्मियों, आरएसी के जवानों और होमगार्ड्स के बल को तैनात किया गया है। इसके अलावा मंदिर परिसर के भीतर श्री श्याम मंदिर कमेटी के अपने सुरक्षा गार्ड भी मुस्तैद हैं। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए यातायात व्यवस्था के भी विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि सड़कों पर जाम की स्थिति न बने। सामान्य दर्शन और वीआईपी प्रतिबंध दर्शन व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी बनाए रखने के वास्ते कतार प्रबंधन, मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए हैं। इस दौरान किसी भी प्रकार के वीआईपी दर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। केवल प्रशासनिक प्रोटोकॉल के दायरे में आने वाले विशिष्ट लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। रविवार का दिन होने और अवकाश का समय होने के कारण दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हरियाणा समेत देश के विभिन्न कोनों और विदेशों से भी लाखों भक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस दिन किए जाने वाले विशेष श्रृंगार के दर्शन के लिए भक्तों में गजब का उत्साह देखने को मिलता है. तिलक श्रृंगार के कारण बंद रहेंगे कपाट आगामी अमावस्या के पावन पर्व पर बाबा श्याम को पवित्र स्नान करवाया जाएगा जिसके पश्चात उनका पारंपरिक तिलक श्रृंगार संपन्न होगा। इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान और तिलक श्रृंगार के चलते सोलह सितंबर की रात दस बजे से मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। ये कपाट सत्रह सितंबर की शाम को पांच बजे दोबारा खोले जाएंगे। श्री श्याम मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान ने सभी भक्तों से अपील की है कि वे सत्रह सितंबर को शाम को पट खुलने के बाद ही खाटूधाम पहुंचें ताकि उन्हें दर्शन करने में किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। बाबा श्याम की पौराणिक महिमा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा श्याम को हारे का सहारा कहकर पुकारा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का ही एक स्वरूप माना जाता है। महाभारत काल के युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल होने जा रहे थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने एक साधारण ब्राह्मण का रूप धरकर उनसे उनका शीश दान में मांग लिया था। वीर बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश भगवान कृष्ण को अर्पित कर दिया। उनकी इस महान परीक्षा से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा और वे संसार के सभी हारे हुए लोगों की सहायता करेंगे। उसी समय से बाबा श्याम भक्तों के बीच हारे के सहारे के रूप में पूजे जा रहे हैं। इसका आप पर असर खाटूश्याम मंदिर में भारी भीड़ और वीआईपी दर्शन बंद होने से आम श्रद्धालुओं को दर्शन प्रक्रिया में कुछ राहत मिली है, लेकिन यात्रा के दौरान भारी ट्रैफिक और लंबी कतारों का सामना करना पड़ सकता है। • राजस्थान में: सीकर और आसपास के मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव और यातायात डायवर्जन रह सकता है, जिससे स्थानीय निवासियों को आवाजाही में अतिरिक्त समय देना होगा। • देशभर के भक्तों के लिए: सोलह सितंबर की रात से सत्रह सितंबर की शाम तक मंदिर के पट बंद रहने के कारण यदि कोई भक्त इस अवधि में यात्रा की योजना बना रहा है, तो उसे अपनी तारीख बदलनी होगी। • सुरक्षा और सुविधा: प्रशासन द्वारा तीन सौ पचास से अधिक जवानों की तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी, जिससे उमड़ती भीड़ के बीच अनुशासन और व्यवस्था बनी रहेगी। • प्रोटोकॉल नियम: वीआईपी दर्शन पूरी तरह बंद होने से सभी श्रद्धालुओं को समान रूप से चौदह कतारों के माध्यम से ही दर्शन का अवसर मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़ और दर्शन व्यवस्था में बदलाव का मुख्य कारण वीकेंड की छुट्टी और आगामी अमावस्या के धार्मिक अनुष्ठान हैं। • वीकेंड का अवकाश: शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में कामकाजी लोग और परिवार दर्शन के लिए पहुंचते हैं। • विशेष श्रृंगार परंपरा: विभिन्न राज्यों से मंगाए गए लाल फूलों से होने वाला विशेष मनमोहक श्रृंगार और सजे हुए मंडप श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। • तिलक श्रृंगार अनुष्ठान: अमावस्या के अवसर पर हर महीने होने वाले पवित्र स्नान और तिलक श्रृंगार के कारण मंदिर के कपाट तय समय के लिए बंद करना अनिवार्य होता है। • ऐतिहासिक मान्यता: हारे के सहारे के रूप में पूजे जाने वाले बाबा श्याम के प्रति गहरी आस्था के कारण दूर-दराज के राज्यों से भक्तों का निरंतर आगमन होता रहता है। सवाल-जवाब 1. खाटूश्याम जी का मंदिर कहां स्थित है? खाटूश्याम जी का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है। 2. मंदिर के कपाट कब से कब तक बंद रहेंगे? तिलक श्रृंगार के चलते सोलह सितंबर की रात दस बजे से सत्रह सितंबर की शाम पांच बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। 3. इस बार मंदिर को किस प्रकार सजाया गया है? मंदिर के मंडप प्रांगण को भव्य रूप से सजाया गया है और बाबा श्याम का विभिन्न राज्यों से मंगवाए गए लाल फूलों से श्रृंगार किया गया है। 4. वीकेंड पर दर्शन के लिए क्या विशेष व्यवस्था की गई है? श्रद्धालुओं को सुचारू रूप से दर्शन कराने के लिए चौदह कतारों की व्यवस्था की गई है और वीआईपी दर्शन पूरी तरह बंद रखे गए हैं। 5. मंदिर की सुरक्षा में कितने पुलिसकर्मी तैनात हैं? डीएसपी और थानाधिकारी के नेतृत्व में लगभग तीन सौ पचास पुलिसकर्मी, आरएसी जवान और होमगार्ड्स तैनात किए गए हैं। 6. श्री श्याम मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष कौन हैं? रवि सिंह चौहान श्री श्याम मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष हैं। 7. बाबा श्याम को किस नाम से जाना जाता है? बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। https://trendkia.com/rajasthan/khatushyam-ji-men-umari-bhari-bhira-lala-phulon-se-saja-darabara-aura-vip-darshana-puri-taraha-pratibndhita-31748 TrendKia — Har trend, sabse pehle.