# किसान के बेटे डॉ. भागचंद बधाल का RAS से IAS कैडर में हुआ प्रमोशन, सरकारी स्कूल से शुरू हुआ था सफर

> जयपुर ग्रामीण के बधाल गांव निवासी डॉ. भागचंद बधाल को राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोट कर भारतीय प्रशासनिक सेवा कैडर में शामिल किया गया है। सरकारी स्कूल से पढ़कर प्रशासनिक मुकाम हासिल करने वाले डॉ. बधाल युवाओं के मार्गदर्शन और जरूरतमंद छात्रों की मदद के लिए भी जाने जाते हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kisana-ke-bete-dr-bhagchand-badhal-ka-ras-se-ias-kaidara-men-hua-pramoshana-sarakari-skula-se-shuru-hua-tha-saphara-40874 · **Language:** Hindi
**Tags:** डॉ भागचंद बधाल, आरएएस से आईएएस, जयपुर ग्रामीण, प्रशासनिक सेवा, सफलता की कहानी, जयपुर विकास प्राधिकरण

जयपुर ग्रामीण के बधाल गांव में पले-बढ़े डॉ. भागचंद बधाल ने एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक व्यवस्था तक का सफर तय किया है। एक किसान परिवार में जन्मे डॉ. बधाल को राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) से प्रमोट कर अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल कर लिया गया है। इस पदोन्नति की खबर पहुंचते ही बधाल गांव समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में उत्साह का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के मान-सम्मान से जोड़ा।

## साधारण पृष्ठभूमि और प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत
डॉ. भागचंद बधाल की यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरक मानी जा रही है जो सीमित साधनों में बड़े लक्ष्य साधने की कोशिश करते हैं। उनका आरंभिक शैक्षणिक जीवन किसी महंगे निजी संस्थान या बड़े शहर के नामी स्कूल में नहीं बीता, बल्कि गांव की चौखट और सरकारी स्कूल के सामान्य माहौल में शुरू हुआ। रोजमर्रा के अभावों और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई कभी रुकने नहीं दी। कड़े अनुशासन, नियमित अध्ययन और अटूट लगन को अपनी मुख्य ताकत बनाते हुए उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर कदम बढ़ाए और आखिरकार राज्य प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर सेवा की राह पकड़ी।

## प्रशासनिक करियर और अहम पदों की जिम्मेदारियां
राजस्थान प्रशासनिक सेवा में आने के बाद डॉ. भागचंद ने राज्य शासन के भीतर कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। वे प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड के सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं का प्रबंधन देखा और कर्मचारी बीमा विभाग के निदेशक के तौर पर भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया। फील्ड पोस्टिंग के दौरान उन्होंने कई उपखंडों में उपखंड अधिकारी (एसडीओ) के रूप में कार्य करते हुए कानून-व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन को संभाला। वर्तमान समय में डॉ. बधाल जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में अतिरिक्त आयुक्त पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

## अभ्यर्थियों के लिए पुस्तक और सामाजिक सहयोग
प्रशासनिक सेवा की मुश्किल डगर से खुद गुजरने के कारण डॉ. भागचंद बधाल उन चुनौतियों से भली-भांति वाकिफ रहे, जिनका सामना ग्रामीण पृष्ठभूमि के अभ्यर्थी करते हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने 'कैसे बनते हैं आरएएस' शीर्षक से एक पुस्तक लिखी, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले अभ्यर्थियों को सही दिशा, स्पष्ट रणनीति और सटीक अध्ययन पद्धति समझ आ सके। इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने अभ्यर्थियों को व्यावहारिक सलाह और परीक्षा प्रबंधन के तौर-तरीके सुझाए।

प्रशासनिक दायित्वों के अलावा वे सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे हैं। गांव के लोगों के अनुसार, डॉ. बधाल जयपुर में उच्च शिक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जरूरतमंद और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की लगातार सहायता करते हैं। वे ऐसे छात्र-छात्राओं को रहने के लिए आवास की सुविधा, पढ़ाई की फीस और जरूरी आर्थिक संसाधन जुटाने में प्रत्यक्ष सहयोग देते रहे हैं। एक किसान के बेटे का सरकारी स्कूल से निकलकर पहले RAS और फिर IAS तक का मुकाम पाना आज उन सभी युवाओं के लिए एक मजबूत नजीर बन चुका है जो सीमित संसाधनों के बावजूद प्रशासनिक सेवा में आने का सपना देखते हैं।

## इसका आप पर असर
यह प्रेरणादायी प्रशासनिक पदोन्नति प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और ग्रामीण युवाओं को सीधे प्रभावित करती है।

- **भारत में:** यह यात्रा दर्शाती है कि अभावों और सरकारी स्कूल की पृष्ठभूमि के बावजूद देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवाओं में मुकाम हासिल किया जा सकता है। इससे साधारण और ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर आत्मविश्वास और हौसला बढ़ता है।
- **राजस्थान में:** राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पदोन्नति से प्रशासनिक व्यवस्था में जमीनी स्तर के अनुभवी अधिकारी शीर्ष नीतिगत पदों पर पहुंचते हैं। इसके साथ ही डॉ. बधाल की लिखी मार्गदर्शिका और छात्रों के लिए उनका सहयोग स्थानीय अभ्यर्थियों को स्पष्ट दिशा देने में मददगार है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पदोन्नति राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में दी गई निरंतर सेवाओं और प्रशासनिक कार्यशैली के आधार पर संभव हुई है।

- **सीनियरिटी और उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड:** राज्य प्रशासनिक सेवा में लंबे समय तक पारदर्शी और निष्ठावान सेवा देने वाले अधिकारियों को वरिष्ठता और सेवा मूल्यांकन के आधार पर आईएएस कैडर में पदोन्नत किया जाता है।
- **महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन:** मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी, चयन बोर्ड के सचिव और उपखंड अधिकारी जैसे पदों पर काम करने से उनका प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत हुआ।
- **जेडीए में मौजूदा जिम्मेदारी:** जयपुर विकास प्राधिकरण में अतिरिक्त आयुक्त के तौर पर उनके प्रभावी कार्य निष्पादन और अनुभव ने इस आधिकारिक पदोन्नति की प्रक्रिया को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ाया।

## सवाल-जवाब

### 1. डॉ. भागचंद बधाल किस सेवा से आईएएस में प्रमोट हुए हैं?
डॉ. भागचंद बधाल राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) से प्रमोट होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए हैं।

### 2. डॉ. भागचंद बधाल मूल रूप से कहां के निवासी हैं?
वे जयपुर ग्रामीण के बधाल गांव के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

### 3. वर्तमान में डॉ. बधाल किस पद पर कार्यरत हैं?
वर्तमान में वे जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में अतिरिक्त आयुक्त पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

### 4. डॉ. बधाल ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए कौन सी पुस्तक लिखी है?
उन्होंने अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन के लिए 'कैसे बनते हैं आरएएस' नाम से एक पुस्तक लिखी है।

### 5. डॉ. भागचंद ने पूर्व में कौन-कौन से मुख्य पदों पर काम किया है?
वे मुख्यमंत्री के ओएसडी, राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड के सचिव, कर्मचारी बीमा विभाग के निदेशक और कई क्षेत्रों में उपखंड अधिकारी रह चुके हैं।

## प्रेरणा और सबक
डॉ. भागचंद बधाल का संघर्ष और सफलता उन सभी लोगों के लिए एक ठोस उदाहरण है जो संसाधनों की कमी को अपनी मजबूरी मानते हैं।

- **संसाधनों से बड़ा संकल्प:** सरकारी स्कूल और साधारण किसान परिवार से आने के बावजूद उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि अनुशासन और मेहनत को अपना सबसे मजबूत साधन बनाया।
- **प्रशासनिक अनुभव को साझा करना:** सफलता मिलने के बाद उन्होंने 'कैसे बनते हैं आरएएस' पुस्तक लिखकर ग्रामीण और नए अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा की कठिन राह को आसान बनाने का काम किया।
- **समाज को वापस लौटाने की भावना:** प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी उन्होंने अपनी जड़ों को नहीं भुलाया और जयपुर में पढ़ने वाले जरूरतमंद छात्रों को फीस व रहने की जगह देकर सहयोग जारी रखा।

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