# किसान की बेटी सुनीता टोडावता ने रचा इतिहास, आईसीएआर जेआरएफ परीक्षा में हासिल किया देश भर में पहला स्थान

> जयपुर के सांचौती गांव की 24 वर्षीय सुनीता टोडावता ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की जेआरएफ/एसआरएफ परीक्षा 2026 में ऑल इंडिया पहली रैंक हासिल की है। रोज 19 घंटे अध्ययन और 3 साल के कड़े अनुशासन के दम पर उन्होंने कृषि प्रसार शिक्षा विषय में यह मुकाम पाया।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kisana-ki-beti-sunita-todawata-ne-racha-itihasa-icar-jrf-pariksha-men-hasila-kiya-desha-bhara-men-pahala-sthana-41033 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुनीता टोडावता, आईसीएआर, जेआरएफ परीक्षा, कृषि प्रसार शिक्षा, जयपुर, सफलता की कहानी, आईएआरआई

कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प के सहारे ग्रामीण पृष्ठभूमि की बेटियों ने एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। राजस्थान में जयपुर जिले की कालवाड़ तहसील स्थित सांचौती गांव की रहने वाली 24 वर्षीय छात्रा सुनीता टोडावता ने देश की प्रतिष्ठित कृषि प्रतियोगी परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा आयोजित जेआरएफ/एसआरएफ परीक्षा 2026 में उन्होंने कृषि प्रसार शिक्षा विषय चुनकर पूरे भारत में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस बेटी की उपलब्धि से पूरे गांव और परिवार में उत्सव जैसा माहौल बन गया है।

## साधारण किसान पृष्ठभूमि और तीन वर्षों की तपस्या
सुनीता के पिता मालीराम टोडावता और मां मांगी देवी लंबे अरसे से पारंपरिक खेती-बाड़ी का कार्य संभालते हैं। घर के सामान्य आर्थिक हालात कभी सुनीता के सपनों के आड़े नहीं आए, क्योंकि उन्होंने शिक्षा को हमेशा अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाए रखा। पिछले तीन वर्षों के दौरान उन्होंने इस परीक्षा के लिए अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी थी। प्रतियोगी परीक्षा की इस मैराथन तैयारी में वह प्रतिदिन लगभग 19 घंटे अध्ययन करती थीं। एकाग्रता को टूटने से बचाने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया के सभी डिजिटल मंचों से पूरी तरह किनारा कर लिया था, जिससे उनका ध्यान कभी भटकाव की ओर नहीं गया।

## शैक्षणिक उत्कृष्टता का निरंतर रिकॉर्ड
सुनीता के शैक्षणिक सफर में यह पहला राष्ट्रीय मुकाम नहीं है, बल्कि वह लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाती रही हैं। श्री करण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर से जब वह अपनी स्नातक की डिग्री पूरी कर रही थीं, उस समय भी उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर 13वीं रैंक अपने नाम की थी, जबकि अपनी विशेष श्रेणी में वह चौथे स्थान पर रही थीं। इसके बाद उन्हें दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) में दाखिला मिला। वर्ष 2024 के दौरान आईएआरआई से जुड़ी एक अन्य परीक्षा में भी उन्होंने समूचे भारत में चौथा स्थान पाकर अपनी गहरी शैक्षणिक समझ का परिचय दिया था।

## 75 वर्षीय दादी का अटूट विश्वास बना संबल
इस शानदार उपलब्धि का बड़ा श्रेय सुनीता अपने परिवार के भावनात्मक समर्थन और विशेष तौर पर अपनी 75 वर्षीय दादी बिला देवी के आशीर्वाद को देती हैं। परिवार के बुजुर्गों का हौसला उनके लिए कठिन दौर में मार्गदर्शक साबित हुआ। सुनीता के अनुसार, उनकी दादी उन्हें लगातार प्रेरित करती थीं और अक्सर कहती थीं कि वह एक रोज अपने परिवार का मान पूरे देश में बढ़ाएंगी। दादी की इसी उम्मीद ने उनके भीतर नया विश्वास भरा और घंटों की थका देने वाली पढ़ाई के दौरान उन्हें कभी निराश नहीं होने दिया।

## अनुसंधान की रूपरेखा और वैज्ञानिक बनने की आकांक्षा
कृषि प्रसार शिक्षा विभाग में रहते हुए सुनीता ने रेडी प्रोग्राम के समन्वय के साथ अपनी तैयारी को अंतिम रूप दिया था। राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिलने की सूचना सार्वजनिक होते ही वरिष्ठ छात्रों, शिक्षकों और रिश्तेदारों की तरफ से उन्हें निरंतर बधाइयां मिल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका अगला कदम कृषि प्रसार शिक्षा के व्यावहारिक पहलुओं पर शोध करना है, जिसकी समय सीमा लगभग तीन वर्ष की रहेगी। उनका अंतिम लक्ष्य एक कुशल कृषि वैज्ञानिक बनना है। जमीनी तौर पर खेती की दुश्वारियों को बचपन से देखने के कारण वह प्रयोगशाला के अनुसंधानों को सीधे खेत और किसानों के कल्याण से जोड़ना चाहती हैं।

## इसका आप पर असर
यह सफलता देश के कृषि छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक स्पष्ट दिशा प्रदान करती है।

- **भारत में:** कृषि और उच्च शिक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को यह संदेश मिलता है कि डिजिटल भटकाव से दूरी बनाकर साधारण पृष्ठभूमि से भी राष्ट्रीय स्तर की पहली रैंक पाई जा सकती है। इससे अनुसंधान और विस्तार शिक्षा जैसे विषयों के प्रति ग्रामीण छात्रों की रुचि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
- **जयपुर में:** राजस्थान के ग्रामीण अंचलों की बेटियों और किसान परिवारों के लिए यह उपलब्धि उच्च अध्ययन के नए रास्ते खोलने का काम करेगी। स्थानीय संस्थानों जैसे जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय से पढ़कर शीर्ष पर पहुंचने का यह उदाहरण क्षेत्रीय विद्यार्थियों में उच्च आकांक्षाएं पैदा करेगा।
- **प्रतियोगी उम्मीदवारों के लिए:** जेआरएफ और एसआरएफ की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए नियमित 19 घंटे की मेहनत और तीन साल की निरंतरता एक अनुकरणीय मानक स्थापित करती है। यह साबित करता है कि विषय पर बुनियादी पकड़ और स्नातक स्तर से बनाई गई रणनीति अंतिम सफलता की कुंजी है।
- **कृषि वैज्ञानिकों के लिए:** जमीनी स्तर पर किसानों की चुनौतियों को नजदीक से देखने वाले युवाओं का शोध के क्षेत्र में आना कृषि नीतियों और समाधानों को अधिक व्यावहारिक बनाएगा। आने वाले वर्षों में विस्तार शिक्षा के माध्यम से किसानों तक नई तकनीकों की पहुंच और सुगम हो सकेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह ऐतिहासिक परिणाम वर्षों के सुनियोजित शैक्षणिक प्रयास, पारिवारिक समर्थन और कठोर अनुशासन के समन्वय से संभव हुआ।

- **दीर्घकालिक तैयारी:** सुनीता ने किसी अंतिम क्षण की हड़बड़ी के बजाय लगातार तीन वर्षों तक अपने पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित किया। इस निरंतरता ने उनके विषय ज्ञान को अत्यंत मजबूत बनाया।
- **गहन एकाग्रता:** रोजाना 18 से 19 घंटे पढ़ाई करने के साथ-साथ उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाई। इससे उनका समय और मानसिक ऊर्जा व्यर्थ की गतिविधियों में नष्ट नहीं हुई।
- **मजबूत शैक्षणिक आधार:** जोबनेर से स्नातक के दौरान 13वीं रैंक और आईएआरआई परीक्षा में चौथी रैंक प्राप्त करने से उनका आत्मविश्वास पहले से ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के अनुरूप ढल चुका था।
- **पारिवारिक ढांचा:** माता-पिता की मेहनत और 75 वर्षीय दादी के निरंतर प्रोत्साहन ने कठिन समय में आवश्यक भावनात्मक संबल प्रदान किया।

## सवाल-जवाब

### 1. सुनीता टोडावता ने किस परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त की?
सुनीता ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की जेआरएफ/एसआरएफ परीक्षा 2026 में कृषि प्रसार शिक्षा विषय में पहली रैंक हासिल की है।

### 2. सुनीता राजस्थान के किस जिले और गांव की निवासी हैं?
वह जयपुर जिले की कालवाड़ तहसील के अंतर्गत आने वाले सांचौती गांव की रहने वाली हैं।

### 3. सुनीता रोजाना कितने घंटे पढ़ाई करती थीं?
परीक्षा की तैयारी के दौरान सुनीता प्रतिदिन करीब 19 घंटे अध्ययन करती थीं और उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बना रखी थी।

### 4. सुनीता के स्नातक और पूर्व परीक्षाओं के परिणाम कैसे रहे हैं?
उन्होंने जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय से स्नातक के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर 13वीं रैंक और वर्ष 2024 में आईएआरआई से जुड़ी परीक्षा में चौथी रैंक पाई थी।

### 5. सुनीता का भविष्य का क्या लक्ष्य है?
वह कृषि प्रसार शिक्षा में तीन साल का रिसर्च कार्य पूरा करने के बाद कृषि वैज्ञानिक बनकर किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहती हैं।

## प्रेरणा और सबक
साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली सुनीता की यात्रा से कई उपयोगी सबक मिलते हैं।

- **अनुशासन और त्याग:** सोशल मीडिया और अनावश्यक भटकाव से दूरी बनाकर ही लंबे समय तक कठिन अध्ययन को साधा जा सकता है। अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखना सबसे अहम है।
- **निरंतरता की ताकत:** सफलता किसी एक दिन के प्रयास का परिणाम नहीं होती, बल्कि तीन साल तक हर रोज की गई अथक मेहनत ही शीर्ष रैंक दिलाती है।
- **जड़ों से जुड़ाव:** किसान परिवार की समस्याओं को अपनी आंखों से देखकर उन्हें हल करने का लक्ष्य तय करना अध्ययन को एक स्पष्ट उद्देश्य देता है।
- **पारिवारिक मूल्यों का सम्मान:** बड़ों के विश्वास और प्रोत्साहन को संबल बनाकर हर तरह की प्रतिकूल परिस्थितियों का मुकाबला किया जा सकता है।

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