# कोटा और उदयपुर निगम चुनाव नतीजे 14 सितंबर को, बागी बिगाड़ सकते हैं खेल

> राजस्थान में कोटा और उदयपुर नगर निगम चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो चुका है। अब सभी की निगाहें 14 सितंबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जहां निर्दलीय और बागी प्रत्याशी चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kota-aura-udaipur-nigama-chunava-natije-14-sitnbara-ko-bagi-bigara-sakate-hain-khela-32076 · **Language:** Hindi
**Tags:** कोटा नगर निगम चुनाव, उदयपुर निकाय चुनाव, राजस्थान चुनाव परिणाम, शांति धारीवाल, निकाय चुनाव मतगणना

राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के दूसरे चरण के तहत कोटा और उदयपुर नगर निगमों सहित कई अन्य निकायों में मतदान की प्रक्रिया 11 सितंबर को पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न करा ली गई। पूरे राज्य के भीतर कुल 309 नगरीय निकायों के अंतर्गत आने वाले 10,245 वार्डों में पार्षदों के चुनाव के लिए सियासी सरगर्मी बनी हुई है।

## सुबह धीमी शुरुआत के बाद उमड़ी भीड़
कोटा और उदयपुर दोनों ही प्रमुख शहरों में सुबह ठीक 8:00 बजे जब मतदान शुरू हुआ तो शुरुआती घंटे में वोटिंग की रफ्तार काफी धीमी दर्ज की गई। हालांकि जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, वैसे-वैसे मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलने लगीं। कोटा के नयापुरा और जेडीबी कॉलेज रोड पर स्थित मतदान बूथों पर टिकट वितरण को लेकर स्थानीय स्तर पर कुछ असंतोष जरूर देखा गया, लेकिन इसके बावजूद जनता के बीच वोट डालने को लेकर जबरदस्त उत्साह बना रहा। इसके साथ ही उदयपुर के शहरी इलाकों के साथ ग्रामीण सीमाओं से सटे हुए वार्डों में भी लोगों ने इस लोकतांत्रिक उत्सव में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

## युवाओं और महिलाओं ने दिखाया खासा उत्साह
दिन में ठीक 12:00 बजे तक मतदान के आंकड़ों में अच्छी खासी तेजी दर्ज की जाने लगी। कोटा की शहरी सीटों पर पहली बार वोट डाल रहे युवा मतदाताओं और महिलाओं की भारी सक्रियता ने पूरे चुनावी समीकरण को बेहद दिलचस्प मोड़ पर ला दिया है। इन इलाकों में स्थानीय स्तर की परेशानियां, साफ़-सफाई की व्यवस्था और शहर का बुनियादी विकास जैसे मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में रहे। दूसरी तरफ, उदयपुर के आदिवासी इलाकों से जुड़े क्षेत्रों और अंदरूनी वार्डों में भी मतदान की रफ्तार काफी तेज बनी रही, जिससे कुल वोटिंग प्रतिशत ऊपर की तरफ बढ़ता हुआ साफ तौर पर दिखाई दिया।

## बागी उम्मीदवारों ने बढ़ाई राजनीतिक दलों की मुश्किलें
शाम के 4:00 बजे तक मिले रुझानों के अनुसार, कोटा के 10 से ज्यादा वार्डों में बागी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराते हुए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी का पूरा सियासी गणित बिगाड़ दिया है। इसकी वजह से कई सीटों पर अब सीधी लड़ाई के बजाय त्रिकोणीय मुकाबले जैसे हालात पैदा हो गए हैं। कोटा के इस पूरे सियासी घटनाक्रम में पूर्व यूडीएच मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल का प्रभाव भी काफी अहम माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, उदयपुर में भीतरघात और क्रॉस-वोटिंग जैसी आशंकाओं से निपटने के लिए दोनों ही मुख्य दलों के दिग्गज नेता लगातार बूथ वार वोटिंग रिपोर्ट का जायजा लेते हुए नजर आए।

## ईवीएम सीलिंग और स्ट्रॉन्ग रूम की कड़ी सुरक्षा
शाम को ठीक 6:00 बजे तय समय सीमा समाप्त होने के साथ ही कोटा और उदयपुर के सभी वार्डों में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई। वोटिंग खत्म होते ही तमाम मतदान दलों ने उम्मीदवारों के चुनावी एजेंटों की उपस्थिति में ईवीएम मशीनों को सील किया और उन्हें पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुँचा दिया। मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता अपनी जीत और हार के समीकरणों को जोड़ने-तोड़ने के गणित में पूरी तरह व्यस्त हो चुके हैं।

## रिजल्ट से पहले बाड़बंदी और निर्दलीयों पर नजर
आगामी 14 सितंबर को घोषित होने वाले चुनाव परिणामों से ठीक पहले राजनीतिक दलों के भीतर जोड़-तोड़ और क्रॉस-वोटिंग के खतरे को रोकने की कवायद शुरू कर दी गई है। कोटा और उदयपुर से संभावित विजेता उम्मीदवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजने यानी बाड़बंदी का दौर अब तेजी से शुरू हो चुका है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो कई वार्डों के परिणामों में निर्दलीय प्रत्याशी किंगमेकर की भूमिका अदा कर सकते हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के रणनीतिकार निर्दलीय उम्मीदवारों से संपर्क साधने में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

## इसका आप पर असर
कोटा और उदयपुर नगर निगम चुनाव के ये नतीजे स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक माहौल पर सीधा असर डालेंगे।

- **भारत में:** राजस्थान के शहरी निकायों में चल रही यह चुनावी प्रक्रिया राज्यभर के स्थानीय स्वशासन और प्रशासनिक गतिशीलता को प्रभावित करती है। आने वाले दिनों में जनता को अपने वार्डों में विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के लिए नवनिर्वाचित पार्षदों से सीधे संपर्क करना होगा।
- **कोटा और उदयपुर में:** कोटा और उदयपुर के स्थानीय निवासियों के लिए इन परिणामों से तय होगा कि उनके शहर में अगले कुछ वर्षों तक सफाई, जलापूर्ति और निर्माण कार्य किस दिशा में आगे बढ़ेंगे। विजयी प्रत्याशियों के पाला बदलने की आशंका के बीच बाड़बंदी और निर्दलीयों की भूमिका से स्थानीय राजनीतिक स्थिरता भी कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
इन चुनावों के दौरान त्रिकोणीय मुकाबले और राजनीतिक दलों की बेचैनी के पीछे जमीनी स्तर पर टिकट वितरण और बागी उम्मीदवारों की मजबूत स्थिति मुख्य कारण रही है।

- **टिकट वितरण में असंतोष:** कोटा के नयापुरा और जेडीबी कॉलेज रोड जैसे इलाकों में टिकट बंटवारे के दौरान उभरे आंतरिक असंतोष के कारण कई नेताओं ने पार्टी से बगावत कर दी।
- **निर्दलियों का प्रभाव:** कोटा के 10 से अधिक वार्डों में बागी और स्वतंत्र प्रत्याशियों ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के समीकरणों को पूरी तरह उलझा दिया है।
- **भीतरघात की आशंका:** उदयपुर में क्रास-वोटिंग और अंदरूनी कलह के खतरों को भांपते हुए दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं को मतदान के दौरान सतर्क रहना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. कोटा और उदयपुर नगर निगम चुनाव के लिए मतदान कब समाप्त हुआ?
कोटा और उदयपुर नगर निगम चुनाव के लिए मतदान 11 सितंबर को शाम 6:00 बजे समाप्त हुआ।

### 2. कोटा और उदयपुर निकाय चुनाव के नतीजे कब घोषित किए जाएंगे?
कोटा और उदयपुर नगर निगम चुनाव के परिणाम 14 सितंबर को आएंगे।

### 3. कोटा के किन वार्डों में बागी उम्मीदवारों ने मुकाबला कड़ा किया है?
कोटा के 10 से अधिक वार्डों में बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भाजपा और कांग्रेस का गणित बिगाड़ दिया है।

### 4. चुनाव संपन्न होने के बाद ईवीएम का क्या किया गया?
मतदान समाप्त होते ही सभी ईवीएम को प्रत्याशियों के एजेंटों की मौजूदगी में सील कर कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रॉन्ग रूम में भिजवा दिया गया।

### 5. उदयपुर और कोटा में राजनीतिक दल क्या रणनीति अपना रहे हैं?
परिणाम आने से पहले संभावित विजेताओं को सुरक्षित ठिकानों पर भेजने यानी बाड़बंदी का दौर शुरू कर दिया गया है।

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