# कोटा दशहरा मेला 2026: 105 फीट ऊंचा हाईटेक रावण तैयार, तलवारबाजी के साथ 360 डिग्री घूमेगी गर्दन

> कोटा के राष्ट्रीय दशहरा मेले में इस बार 105 फीट ऊंचा हाईटेक रावण आकर्षण का केंद्र बना है। मैदान में रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के 72-72 फीट के पुतले भी खड़े कर दिए गए हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kota-dussehra-mela-2026-105-feet-high-tech-ravana-ready-with-360-degree-rotating-neck-and-sword-action-49819 · **Language:** Hindi
**Tags:** कोटा दशहरा मेला, रावण दहन 2026, विजयश्री रंगमंच, कोटा समाचार, दशहरा उत्सव, राजस्थान मेले

देशभर में अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भव्यता के लिए विख्यात कोटा का राष्ट्रीय दशहरा मेला इस वर्ष अपनी अनूठी तैयारियों को लेकर विशेष चर्चा में है। इस बार आयोजन स्थल पर मुख्य आकर्षण के रूप में 105 फीट ऊंचा विशालकाय रावण और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के पुतले पूरी तरह से स्थापित कर दिए गए हैं। कोटा के दशहरा मैदान में स्थित विजयश्री रंगमंच के ठीक सामने खड़े इन पुतलों की भव्यता देखते ही बनती है। मंगलवार की सुबह से ही इन कलाकृतियों का दीदार करने और उनके साथ सेल्फी लेने के लिए शहर के नागरिकों की भारी भीड़ मैदान में जुटनी शुरू हो गई है।

## हाईटेक तकनीक और खासियतों से लैस रावण का पुतला
इस वर्ष तैयार किया गया रावण का यह पुतला केवल अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई के कारण ही नहीं, बल्कि इसमें शामिल आधुनिक तकनीकों के चलते भी खास बना हुआ है। इस हाईटेक पुतले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अपनी गर्दन को 360 डिग्री तक घुमाने में सक्षम है। इसके अलावा पुतले की आंखें और पलकें झपकेंगी, मूंछें हिलेंगी और हाथ में पकड़ी तलवार भी चलती हुई नजर आएगी। आयोजकों ने पुतलों के अंदर विशेष और आकर्षक आतिशबाजी का संयोजन किया है, जो दहन के समय अद्भुत नजारा पेश करेगी। इसके साथ ही रावण के भव्य स्वरूप को निखारने के लिए उसकी पोशाक वेलवेट के कपड़ों से तैयार की गई है।

## मेले में उमड़ी भारी भीड़ और लजीज व्यंजनों की रौनक
दशहरे के इस पावन अवसर पर उत्सव स्थल पर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ स्काउट गाइड के स्वयंसेवक भी पूरी मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मेले के भीतर डॉलर और डिस्को डांसर जैसे गगनचुंबी झूले आगंतुकों के मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त बच्चों के खेलौने और महिलाओं के शृंगार से जुड़ी दुकानें भी ग्राहकों से गुलजार हैं। खान-पान के शौकीनों के लिए शेरे-पंजाब आइसक्रीम, पन्नालाल जी और जैन पकौड़े के साथ-साथ तमाम पारंपरिक मिठाइयों की दुकानें सजी हैं, जहां लोग जायके का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।

## शाही सवारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन
विजयादशमी के इस पावन पर्व पर शहर के ऐतिहासिक गढ़ पैलेस से भगवान लक्ष्मीनारायण जी और प्रभु श्रीराम की भव्य शाही सवारी निकाली जाएगी। यह पारंपरिक लवाजमे और तामझाम के साथ विभिन्न मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान में पहुंचेगी। इस धार्मिक और पारंपरिक आयोजन के साथ ही विजयश्री रंगमंच पर बहु-दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी धमाकेदार आगाज होगा। इन कार्यक्रमों के तहत भव्य भजन संध्या, पंजाबी नाइट और देश के जाने-माने प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो इस मेले के उल्लास को और अधिक बढ़ा देंगी।

## इसका आप पर असर
कोटा दशहरा मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ और आयोजनों से स्थानीय व्यापार में तेजी आएगी और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

- **भारत में:** विजयादशमी के अवसर पर देशभर में पारंपरिक मेलों और रावण दहन कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा और आवागमन के विशेष प्रबंध किए गए हैं। इन आयोजनों से स्थानीय पर्यटन और लघु उद्योगों को आर्थिक बढ़ावा मिलता है।
- **कोटा में:** कोटा के दशहरा मैदान और आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ के चलते यातायात में बदलाव किया जा सकता है और सुरक्षा कड़ी रहेगी। स्थानीय दुकानदारों, झूला संचालकों और खान-पान के कारोबारियों को इस दौरान बड़े पैमाने पर व्यापारिक लाभ की उम्मीद है।

## ऐसा क्यों हुआ
राष्ट्रीय दशहरा मेले में इस तरह के विशाल और हाईटेक पुतलों का निर्माण कोटा की पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने के उद्देश्य से किया जाता है। गढ़ पैलेस से शाही सवारी निकालने और सांस्कृतिक संध्याओं के आयोजन की यह परंपरा वर्षों से इस ऐतिहासिक मेले का मुख्य हिस्सा रही है।

- **परंपरा और आधुनिकता का मेल:** आयोजकों द्वारा हर साल मेले के आकर्षण को बढ़ाने के लिए पुतलों में नए तकनीकी बदलाव किए जाते हैं, जिसके तहत इस बार 360 डिग्री घूमने वाली गर्दन और तलवारबाजी जैसी विशेषताएं जोड़ी गई हैं।
- **सांस्कृतिक महत्व:** कोटा का यह राष्ट्रीय मेला क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है, जहां विजयादशमी के पावन पर्व पर प्रभु श्रीराम की शाही सवारी और पारंपरिक आयोजनों की निरंतरता को बनाए रखा जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. कोटा दशहरा मेले में मुख्य रावण का पुतला कितने फीट ऊंचा है?
मुख्य रावण का पुतला 105 फीट ऊंचा तैयार किया गया है।

### 2. रावण के अलावा मैदान में किन अन्य पुतलों को खड़ा किया गया है?
मैदान में 72-72 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतले खड़े किए गए हैं।

### 3. इस बार रावण के पुतले में क्या हाईटेक विशेषताएं हैं?
यह पुतला 360 डिग्री गर्दन घुमाएगा, आंखें और पलकें झपकाएगा, मूंछें हिलाएगा तथा हाथ में तलवार चलाएगा।

### 4. विजयादशमी के दिन शाही सवारी कहां से निकाली जाती है?
शाही सवारी शहर के ऐतिहासिक गढ़ पैलेस से भगवान लक्ष्मीनारायण जी और प्रभु श्रीराम की निकाली जाती है।

### 5. मेले में आगंतुकों के लिए खान-पान के कौन से प्रसिद्ध ठिकाने मौजूद हैं?
मेले में शेरे-पंजाब आइसक्रीम, पन्नालाल जी और जैन पकौड़े की दुकानें प्रमुख रूप से उपलब्ध हैं।

### 6. सांस्कृतिक कार्यक्रम किस स्थान पर आयोजित किए जा रहे हैं?
सांस्कृतिक कार्यक्रम दशहरा मैदान में स्थित विजयश्री रंगमंच पर आयोजित किए जा रहे हैं।

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