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  "type": "article",
  "title": "कोटा के ऐतिहासिक राष्ट्रीय दशहरा मेले में लगेंगे 70 से ज्यादा झूले, 145 फीट की नाव बनेगी मुख्य आकर्षण",
  "summary": "कोटा के दशहरा मैदान में राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, जहां 145 फीट की विशाल नाव और 70 से अधिक झूले दर्शकों के रोमांच को बढ़ाएंगे। साथ ही दशकों पुराने पारंपरिक व्यंजनों और बड़े बाजारों से पूरा मेला परिसर गुलजार रहेगा।",
  "content": "हाड़ौती क्षेत्र के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में शुमार कोटा के दशहरा मैदान में राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 को लेकर रौनक बढ़ने लगी है। नगर निगम और स्थानीय मेला प्रशासन इस पूरे आयोजन को भव्य रूप देने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं जुटाने में लगे हैं। मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं, परिवारों और बच्चों के मनोरंजन के लिए एक विशाल झूला परिसर विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है, जिसमें 70 से अधिक अलग-अलग श्रेणियों के रोमांचक और सामान्य झूले स्थापित किए जा रहे हैं।\n\nविशालकाय नाव और तकनीकी कारीगरों का काम अंतिम चरण में\nझूला प्रांगण में भारी क्रेनों की मदद से बड़े ढांचों को खड़ा किया जा रहा है। कुशल तकनीकी कारीगरों का दल इन झूलों की असेंबलिंग, सुरक्षा जांच और रंग-रोगन के काम को अंतिम रूप देने में जुटा है। इस बार दर्शकों के बीच सबसे बड़ा कौतूहल 145 फीट की एक विशालकाय नाव को लेकर है। इस विशाल झूले की क्षमता इतनी है कि एक ही चक्कर में 100 से लेकर 125 लोग एक साथ बैठकर झूलने का लुत्फ उठा सकेंगे। वर्षों और पीढ़ियों से इस मेले में झूले लगाने वाले संचालकों का कहना है कि वे पारंपरिक रूप से यहां अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं।\n\nमौत का कुआं, ड्रैगन ट्रेन और रोमांचक राइड्स\nसाहसिक और रोमांचक खेलों के शौकीनों के लिए मैदान में कई तरह की विशेष राइड्स तैयार की जा रही हैं। इनमें सुनामी, जाइंट व्हील और मिक्सर जैसे भारी झूले शामिल हैं। इसके अलावा 26 और 28 सीटों वाले मध्यम आकार के झूले भी कतार में खड़े किए जा रहे हैं। बच्चों के लिए विशेष ड्रैगन ट्रेन और टॉय ट्रेन का ट्रैक बिछाया जा रहा है, जबकि पारंपरिक स्टंट देखने वालों के लिए मौत का कुआं भी मेले का अहम हिस्सा बनेगा।\n\nदशकों पुराने स्वाद: फालूदा, नसीराबाद का कचौरा और दूध-जलेबी\nमनोरंजन के साथ-साथ इस बार का फूड बाजार भी पारंपरिक जायकों से महकने लगा है। राजस्थान समेत पड़ोसी राज्यों के प्रसिद्ध खान-पान प्रतिष्ठान यहां अपनी दुकानें सजा रहे हैं। शेरे पंजाब आइसक्रीम के संचालक सरदार तरनपाल सिंह ने बताया, \n \"हम पिछले 40-45 वर्षों से मेले में आ रहे हैं और कोटावासी हमारे स्पेशल फालूदा का सालभर इंतजार करते हैं।\"\n\nसाल 1995 से लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे नसीराबाद के जाने-माने अग्रवाल कचौरा भंडार का स्वाद भी इस बार आगंतुकों को मिलेगा। इसके साथ ही रामपुरा की 70 साल पुरानी शम्भू जी की दुकान से ताजा दूध-जलेबी और खास लस्सी का प्रबंध भी किया गया है।\n\nखिलौनों से लेकर बर्तनों तक के सजे विशाल बाजार\nइस पूरे आयोजन को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रखकर एक मुकम्मल शॉपिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। परिसर में हलवाई बाजार के अलावा परिधानों का कपड़ा बाजार, बच्चों के खिलौनों की दुकानें और घरेलू बर्तनों का बहुत बड़ा बाजार लगाया जा रहा है। पूरे हाड़ौती अंचल, समूचे राजस्थान और निकटवर्ती राज्यों से हर दिन हजारों की तादाद में खरीदार और दर्शक इस ऐतिहासिक मेले में पहुंचेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nकोटा दशहरा मेले में आने वाले दर्शकों और परिवारों को इस बार मनोरंजन, खान-पान और खरीदारी का व्यापक अनुभव एक ही परिसर में मिलेगा।\n\n• राजस्थान में: राज्यभर से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को 70 से अधिक झूलों और प्रसिद्ध पारंपरिक पकवानों का आनंद लेने का मौका मिलेगा। परिवार सुरक्षित माहौल में दिनभर के मनोरंजन और त्योहारी खरीदारी की योजना बना सकते हैं।\n• कोटा में: शहर के निवासियों के लिए दशहरा मैदान में विशालकाय 145 फीट की नाव और दशकों पुरानी प्रसिद्ध दुकानों के साथ एक बड़ा सांस्कृतिक केंद्र तैयार हो रहा है। स्थानीय खरीदार घरेलू बर्तनों, कपड़ों और खिलौनों के बाजारों से त्योहारी कीमतों पर सीधी खरीदारी कर सकेंगे।\n• आगंतुकों के लिए: मेले में बच्चों और बड़ों दोनों के लिए अलग-अलग श्रेणियों की रोमांचक राइड्स उपलब्ध रहेंगी। एक साथ 125 लोगों की क्षमता वाली विशाल नाव लंबी कतारों के इंतजार को कम करने में मदद करेगी।\n• व्यापारियों के लिए: स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों और दूर-दराज से आने वाले दुकानदारों को त्योहारी सीजन में बड़े कारोबार का मंच मिलेगा। हजारों दैनिक आगंतुकों की मौजूदगी से शहर के छोटे और मध्यम व्यापारियों की आय में बढ़ोतरी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकोटा के दशहरा मैदान में राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 की व्यापक तैयारियां इसलिए की जा रही हैं ताकि दशकों पुरानी इस सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक भव्य तथा आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया जा सके।\n\n• पारंपरिक विरासत का विस्तार: हाड़ौती अंचल का यह ऐतिहासिक मेला हर साल पूरे क्षेत्र के लोगों को आकर्षित करता है, जिसे नगर निगम और मेला प्रशासन लगातार बड़े पैमाने पर आयोजित कर रहे हैं। इस वर्ष आगंतुकों की भारी संख्या को ध्यान में रखकर मनोरंजन और बाजार के ढांचे को व्यापक स्तर पर फैलाया गया है।\n• मनोरंजन के नए आकर्षण: आधुनिक समय में दर्शकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रशासन और झूला संचालकों ने 70 से अधिक प्रकार के साहसिक और तकनीकी झूलों को शामिल करने का निर्णय लिया। इसमें 145 फीट लंबी नाव को विशेष केंद्रबिंदु बनाया गया है ताकि भीड़ को नया रोमांच मिले।\n• दशकों पुरानी खान-पान संस्कृति: मेले में आने वाले लोगों की पुरानी पसंद को बनाए रखने के लिए पंजाब, नसीराबाद और स्थानीय रामपुरा के दशकों पुराने प्रतिष्ठित खान-पान प्रतिष्ठानों को मंच दिया गया है। ये विक्रेता कई पीढ़ियों से मेले में आकर अपनी पहचान बनाए हुए हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कोटा दशहरा मेला 2026 में मुख्य आकर्षण क्या रहने वाला है?\nमेले का सबसे बड़ा आकर्षण 145 फीट लंबी विशालकाय नाव होगी, जिसमें एक चक्कर में 100 से 125 लोग एक साथ झूल सकेंगे।\n\n2. मेले के झूला परिसर में कुल कितने झूले लगाए जा रहे हैं?\nझूला मार्केट में दर्शकों और बच्चों के मनोरंजन के लिए 70 से अधिक प्रकार के छोटे, बड़े और एडवेंचरस झूले लगाए जा रहे हैं।\n\n3. मेले में रोमांचक खेलों और राइड्स में क्या-क्या शामिल है?\nयहां जाइंट व्हील, सुनामी, मिक्सर, 26 और 28 सीटर झूले, ड्रैगन ट्रेन, टॉय ट्रेन और मौत का कुआं जैसे रोमांचक खेल तैयार किए जा रहे हैं।\n\n4. फूड लवर्स के लिए मेले में कौन-कौन से प्रसिद्ध व्यंजन उपलब्ध होंगे?\nआगंतुकों को शेरे पंजाब का 45 साल पुराना फालूदा, नसीराबाद का मशहूर अग्रवाल कचौरा और रामपुरा की 70 साल पुरानी दुकान से दूध-जलेबी व लस्सी का स्वाद मिलेगा।\n\n5. मेला प्रांगण में खरीदारी के लिए कौन-कौन से बाजार सज रहे हैं?\nमैदान में आगंतुकों के लिए हलवाई बाजार, खिलौना बाजार, कपड़ा बाजार और घरेलू बर्तनों का विशाल बाजार तैयार किया जा रहा है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-18",
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    "कोटा दशहरा मेला",
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