# कोटा के बांके बिहारी मंदिर में शरद पूर्णिमा पर सजी अलौकिक झांकी, साल में सिर्फ एक बार होती है बंशी की दर्शन

> कोटा के रंगबाड़ी स्थित ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में शरद पूर्णिमा के मौके पर विशेष आयोजन हुआ। यहां ठाकुर जी को साढ़े तीन किलो चांदी के आभूषण पहनाए गए और उन्होंने साल में सिर्फ एक दिन बंशी धारण की।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kota-ke-banke-bihari-temple-men-sharad-purnima-para-saji-alaukik-jhanki-saal-me-sirf-ek-baar-hoti-hai-vanshi-ki-darshan-51946 · **Language:** Hindi
**Tags:** कोटा, बांके बिहारी मंदिर, शरद पूर्णिमा, रंगबाड़ी कोटा, कृष्ण भक्ति, राजस्थान मंदिर, गोविंद माहेश्वरी

कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर आस्था और उल्लास का अनूठा माहौल दिखाई दिया। इस खास मौके पर मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सजाया गया था और ठाकुर जी ने श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को अपने दिव्य स्वरूप के दर्शन दिए। सफेद बंगले में विराजमान बांके बिहारी का यह मनमोहक रूप देखने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।

मंदिर से जुड़े राजेंद्र खंडेलवाल ने इस आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शरद पूर्णिमा का दिन इस मंदिर के लिए बेहद खास होता है क्योंकि इसी दिन ठाकुर श्री बांके बिहारी जी अपने हाथों में बंशी धारण करते हैं। पूरे साल में केवल यह एक ही ऐसा दिन होता है जब भक्तों को ठाकुर जी के इस विशिष्ट रूप के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस विशेष अवसर पर भगवान का श्रृंगार पूरी तरह से सफेद कपड़ों और चांदी के चमचमाते गहनों से किया जाता है, जिससे सफेद बंगले में उनकी छटा देखते ही बनती है।

## साढ़े तीन किलो चांदी के गहनों से हुआ मनमोहक श्रृंगार
शरद पूर्णिमा के उत्सव के दौरान ठाकुर जी को कुल लगभग साढ़े तीन किलो चांदी से बने अनूठे आभूषण पहनाए गए थे। इन आभूषणों में मुख्य रूप से सवा किलो चांदी का भव्य मुकुट, करीब 325 ग्राम वजन की चांदी की बंशी, 250 ग्राम का कमरबंद और सवा सौ ग्राम की पायजेब शामिल थी। इसके अलावा पारंपरिक रूप से ठाकुर जी स्वर्ण आभूषणों के तहत कड़े और नथनी भी धारण करते हैं। इन सभी कीमती और सुंदर गहनों से सजे भगवान के दर्शन करने के लिए पूरे दिन भक्तों का तांता लगा रहा।

## हरिनाम संकीर्तन परिक्रमा और विशेष अनुष्ठान
राजेंद्र खंडेलवाल ने आगे बताया कि इस मंदिर में वर्ष 2010 में ठाकुर जी की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी और तब से लेकर अब तक हर महीने नियमित रूप से हरिनाम संकीर्तन परिक्रमा निकाली जाती है। शरद पूर्णिमा के दिन भी सुबह ठीक 6:30 बजे रंगबाड़ी के विभिन्न स्थानीय मार्गों से हरिनाम संकीर्तन यात्रा निकाली गई, जो विभिन्न रास्तों से होती हुई वापस मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। इसके ठीक बाद सुबह 7:30 बजे से भक्तों के लिए ठाकुर जी के विशेष दर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया, जो शाम तक जारी रहा और बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

## भजन संध्या, महारास और अमृत खीर का प्रसाद
पर्व की रात को विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें रात 9 बजे से 12 बजे तक भव्य भजन संध्या और महारास का भव्य आयोजन हुआ। एलन के डायरेक्टर गोविंद माहेश्वरी के सानिध्य में संपन्न हुए इस धार्मिक कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत और रस का जमकर आनंद लिया। रात्रि के बारह बजने के बाद भक्तों के बीच विशेष अमृत खीर का प्रसाद वितरित किया गया, जिसका शरद पूर्णिमा के धार्मिक अनुष्ठानों में बहुत अधिक महत्व माना जाता है।

## भक्तों के लिए आस्था का दूसरा वृंदावन
मंदिर समिति के राजेंद्र खंडेलवाल का कहना है कि रंगबाड़ी का यह बांके बिहारी मंदिर देश भर के कृष्ण भक्तों के लिए गहरी आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां वैसे तो आम दिनों में भी रोजाना श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन शरद पूर्णिमा के दिन बंशी धारण किए हुए ठाकुर जी के दुर्लभ स्वरूप का दर्शन करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मनमोहक श्रृंगार, नियमित आरती और गूंजते भजनों के बीच मंदिर का पूरा माहौल कृष्णमय नजर आया और श्रद्धालुओं ने इसे किसी दूसरे वृंदावन जैसा दिव्य अनुभव बताया।

## इसका आप पर असर
शरद पूर्णिमा के इस विशेष आयोजन का स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक आयोजनों पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

- **स्थानिय स्तर पर:** कोटा के रंगबाड़ी और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को साल में केवल एक बार मिलने वाले इस दुर्लभ दर्शन का लाभ मिला। इस आयोजन में शामिल होने वाले लोगों को रात्रि में विशेष अमृत खीर का प्रसाद और संगीत का आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ।
- **व्यापक प्रभाव:** राजस्थान और देश भर के कृष्ण भक्तों के लिए यह उत्सव बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव का माध्यम बनता है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय मंदिरों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और सामाजिक सौहार्द मजबूत होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऊर्जावान रात्रि माना जाता है, जिससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठान सदियों पुरानी परंपराओं का हिस्सा हैं।

- **धार्मिक मान्यता:** पौराणिक कथाओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और इस रात्रि को भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसी प्रसंग के तहत मंदिरों में विशेष श्रृंगार और उत्सव मनाए जाते हैं।
- **परंपरागत अनुष्ठान:** कोटा के रंगबाड़ी मंदिर में वर्ष 2010 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही हर महीने हरिनाम संकीर्तन और विशेष पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है। इसी वार्षिक परंपरा के तहत ठाकुर जी को चांदी के आभूषण पहनाकर बंशी धारण कराई जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. कोटा के किस मंदिर में शरद पूर्णिमा पर विशेष आयोजन हुआ?
कोटा के रंगबाड़ी स्थित ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में शरद पूर्णिमा का विशेष आयोजन किया गया।

### 2. ठाकुर बांके बिहारी ने साल में किस दिन बंशी धारण की?
ठाकुर बांके बिहारी ने साल में केवल शरद पूर्णिमा के दिन ही बंशी धारण की।

### 3. ठाकुर जी का श्रृंगार कितने वजन के चांदी के गहनों से हुआ?
ठाकुर जी का श्रृंगार लगभग साढ़े तीन किलो चांदी के आभूषणों से किया गया।

### 4. रंगबाड़ी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कब हुई थी?
रंगबाड़ी के इस बांके बिहारी मंदिर में वर्ष 2010 में ठाकुर जी की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी।

### 5. रात के समय कौन सा विशेष प्रसाद वितरित किया गया?
आधी रात के बाद भक्तों को विशेष अमृत खीर का प्रसाद वितरित किया गया।

### 6. भजन संध्या और महारास का आयोजन किसके सानिध्य में हुआ?
भजन संध्या और महारास का आयोजन एलन के डायरेक्टर गोविंद माहेश्वरी के सानिध्य में हुआ।

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