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  "title": "कोटा के इन 5 मंदिरों की कहानियां हैरान कर देंगी, कहीं धंसती है प्रतिमा तो कहीं भक्त लिखते हैं इच्छाएं",
  "summary": "कोटा शहर में कुछ ऐसे मंदिर हैं जिनकी परंपराएं और मान्यताएं बेहद अलग हैं, जहां एक जगह मूर्ति जमीन में धंसती जा रही है तो दूसरी जगह भक्त रजिस्टर में अपनी मुरादें लिखते हैं.",
  "content": "राजस्थान के कोटा शहर में सिर्फ ऐतिहासिक हवेलियां और चंबल किनारे के नजारे ही नहीं, बल्कि कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जिनकी परंपराएं और मान्यताएं देशभर में कहीं और देखने को नहीं मिलतीं. यहां किसी मंदिर में मूर्ति धीरे-धीरे जमीन में समाती जा रही है तो किसी में भक्त अपनी इच्छाएं सीधे रजिस्टर में दर्ज कराते हैं. आइए जानते हैं कोटा के पांच ऐसे मंदिरों के बारे में जो अपनी अलग पहचान के लिए जाने जाते हैं.\n\nचंद्रेशल मठ: पत्थरों में बसी इतिहास की कहानी\nचंद्रेशल नदी के किनारे बना प्राचीन चंद्रेशल मठ कोटा की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत का अहम हिस्सा है. पूरी तरह पत्थरों से तैयार यह परिसर पुरानी स्थापत्य शैली की झलक दिखाता है, जहां पुराने मंदिर, समाधियां और बारीक पत्थर की नक्काशी आज भी सुरक्षित हैं. नदी किनारे का शांत और हरा-भरा माहौल इस जगह को सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि इतिहास और पुरानी विरासत में दिलचस्पी रखने वालों के लिए भी खास बनाता है.\n\nकैथून का विभीषण मंदिर: यहां होती है रावण के भाई की पूजा\nकोटा के कैथून कस्बे में मौजूद विभीषण मंदिर अपने आप में बेहद दुर्लभ है, क्योंकि यहां रावण के भाई विभीषण को पूजा जाता है. इससे जुड़ी कथाएं रामायण काल तक जाती हैं और स्थानीय लोग इसे करीब 5000 साल पुराना मानते हैं. इसे दुनिया का इकलौता विभीषण मंदिर भी बताया जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यह प्रतिमा हर साल थोड़ी-थोड़ी जमीन के भीतर समाती जा रही है. यहां विभीषण का पांच दिवसीय मेला हर साल होली के मौके पर आयोजित होता है, जिसमें आसपास से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.\n\nरामेश्वर महादेव मंदिर: गुफा में विराजे स्वयंभू शिवलिंग\nअरावली की पहाड़ियों के बीच बसा यह रामेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धा और प्रकृति के अनोखे मेल के लिए जाना जाता है. यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 108 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिसके बाद झरने के पास बनी प्राकृतिक गुफा में स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन होते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार गुफा के एक छेद से कभी-कभी सांप निकलकर भगवान शिव की पूजा करने आता है, और जिस भक्त को यह नजारा दिख जाए उसे बेहद भाग्यशाली माना जाता है.\n\nगोदावरी धाम हनुमान मंदिर: चंबल किनारे जागृत प्रतिमा\nचंबल नदी के तट पर बना गोदावरी धाम हनुमान मंदिर अपनी जागृत प्रतिमा और चमत्कारी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. यहां प्रेत बाधा और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोग राहत की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं. दक्षिण भारतीय शैली में बना यह मंदिर अपनी अलग तरह की वास्तुकला की वजह से भी लोगों को आकर्षित करता है. हर मंगलवार और शनिवार यहां विशेष आरती होती है, जिसमें बड़ी तादाद में श्रद्धालु शामिल होते हैं.\n\nगणेश पोल मंदिर: यहां रजिस्टर में दर्ज होती हैं मुरादें\nकोटा के बूंदी रोड पर मौजूद मनोकामना सिद्ध गणेश मंदिर को गणेश पोल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, और इसकी उम्र करीब 800 से 900 साल के बीच आंकी जाती है. इस मंदिर की सबसे अलग बात यहां रखे रजिस्टर हैं, जिनमें भक्त अपनी शादी, नौकरी, नए घर या कारोबार से जुड़ी इच्छाएं दर्ज कराते हैं. इच्छा पूरी होने के बाद भक्त फिर मंदिर आकर उसी रजिस्टर में सही का निशान लगाते हैं और गणपति बप्पा को धन्यवाद कहते हैं.\n\nइसका आप पर असर\nअगर आप धार्मिक यात्रा या हेरिटेज टूरिज्म के शौकीन हैं, तो कोटा के ये मंदिर आपकी अगली ट्रिप में शामिल किए जा सकते हैं.\n\n• भारत में: देशभर से आने वाले श्रद्धालु और इतिहास प्रेमी अब कोटा को सिर्फ चंबल किनारे के किले तक सीमित नहीं मानेंगे. इन मंदिरों की अनोखी परंपराएं धार्मिक पर्यटन के नए विकल्प के तौर पर सामने आ सकती हैं.\n• कोटा और राजस्थान में: स्थानीय टूर ऑपरेटर और होटल कारोबार को इन पांच मंदिरों के जरिए एक नया सर्किट बनाने का मौका मिल सकता है, जिससे शहर में आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है.\n• यात्रा योजना: रामेश्वर महादेव मंदिर जाने वालों को करीब 108 सीढ़ियां चढ़नी होंगी, इसलिए बुजुर्ग और बीमार श्रद्धालु साथ में मदद लेकर जाएं.\n• समय का ध्यान रखें: गोदावरी धाम हनुमान मंदिर में मंगलवार और शनिवार को विशेष आरती होती है, जबकि कैथून के विभीषण मंदिर में होली के आसपास पांच दिवसीय मेला लगता है, इसलिए यात्रा इन तारीखों को ध्यान में रखकर तय करें.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कोटा के कैथून में विभीषण मंदिर की क्या खासियत है?\nयहां रावण के भाई विभीषण की पूजा होती है और मान्यता है कि प्रतिमा हर साल थोड़ा-थोड़ा जमीन में समाती जा रही है.\n\n2. रामेश्वर महादेव मंदिर तक कैसे पहुंचा जाता है?\nश्रद्धालुओं को करीब 108 सीढ़ियां चढ़कर झरने के पास बनी गुफा में स्वयंभू शिवलिंग तक पहुंचना होता है.\n\n3. गोदावरी धाम हनुमान मंदिर में विशेष आरती कब होती है?\nयहां हर मंगलवार और शनिवार को विशेष आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.\n\n4. गणेश पोल मंदिर में मनोकामना कैसे लिखी जाती है?\nभक्त मंदिर में रखे रजिस्टर में अपनी शादी, नौकरी, नए घर या कारोबार से जुड़ी इच्छा लिखते हैं और पूरी होने पर टिक लगाते हैं.\n\n5. विभीषण मेला साल में कब लगता है?\nकैथून के विभीषण मंदिर में हर साल होली के मौके पर पांच दिवसीय मेला आयोजित होता है.\n\n6. गणेश पोल मंदिर कितना पुराना है?\nइसे करीब 800 से 900 साल पुराना बताया जाता है.",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-08",
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