# कोटा के निमोला में घर के बाड़े में घुसा चार फीट का मगरमच्छ, सुरक्षित पकड़कर चंबल में छोड़ा

> कोटा जिले के इटावा क्षेत्र स्थित निमोला गांव में रविवार रात एक घर के बाड़े में 40 से 45 किलो वजनी मगरमच्छ मिलने से अफरा-तफरी मच गई, जिसे सुरक्षित रेस्क्यू कर चंबल नदी में छोड़ दिया गया।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kota-ke-nimola-men-ghara-ke-bare-men-ghusa-chara-phita-ka-magaramachchha-surakshita-pakarakara-chambal-men-chhora-46739 · **Language:** Hindi
**Tags:** कोटा, इटावा, निमोला, मगरमच्छ रेस्क्यू, चंबल नदी, हयात खान टाइगर, वन विभाग राजस्थान

राजस्थान के कोटा जिले में स्थित इटावा क्षेत्र के निमोला गांव में रविवार देर रात उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब रिहायशी बस्ती के बीच बने एक मकान के बाड़े में अचानक एक विशाल मगरमच्छ बैठा हुआ दिखाई दिया। रात करीब 9 बजे बाड़े में चार फीट लंबे इस जलीय जीव को देखकर स्थानीय निवासियों में डर का माहौल बन गया। बस्ती के बीचों-बीच मगरमच्छ की मौजूदगी की खबर फैलते ही आसपास के लोग जमा हो गए और उन्होंने तुरंत इस घटना की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों तथा सामाजिक कार्यकर्ता हयात खान टाइगर को दी।

## सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान और सुरक्षित नियंत्रण
सूचना प्राप्त होने के तुरंत बाद हयात खान टाइगर अपनी बचाव टीम को साथ लेकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया और ग्रामीणों की भीड़ को दूर रखते हुए बचाव अभियान प्रारंभ किया। मगरमच्छ के संभावित हमले और उसकी आक्रामकता से बचाव के लिए टीम ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया। हयात खान के अनुसार, इस पूरे अभियान के दौरान अत्यधिक सतर्कता बरती गई ताकि न तो किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचे और न ही मगरमच्छ चोटिल हो।

रेस्क्यू टीम ने सबसे पहले विशेष तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए मगरमच्छ के जबड़े को नियंत्रित किया और सुरक्षा के लिहाज से उसके मुंह पर टेप लगा दी। मुंह बंध जाने के बाद टीम के सदस्यों ने उसके आगे और पीछे के पैरों को मजबूत रस्सियों से बांधकर उसे पूरी तरह से स्थिर कर दिया। इसके साथ ही उसकी पूंछ की तेज हरकतों पर भी लगातार नजर रखी गई और उसे सावधानी से संभाला गया, जिससे किसी भी सदस्य को अचानक चोट न लगे। इन सभी सुरक्षात्मक कदमों के बाद मगरमच्छ को बिना किसी नुकसान के काबू में कर लिया गया।

## मगरमच्छ का आकार और प्राकृतिक पर्यावास में वापसी
रेस्क्यू किए गए इस मगरमच्छ की कुल लंबाई लगभग 4 फीट मापी गई, जबकि इसका वजन तकरीबन 40 से 45 किलोग्राम आंका गया है। आबादी वाले क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने के बाद टीम उसे वाहन की मदद से गेता क्षेत्र लेकर गई। वहां प्रवाहित होने वाली चंबल नदी के गहरे जल में इस मगरमच्छ को प्राकृतिक पर्यावास के भीतर सकुशल छोड़ दिया गया। बस्ती से इस शिकारी जीव के सफलतापूर्वक निकाले जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत महसूस की।

## स्थानीय तलाई से आबादी में आने की आशंका और चेतावनी
गांव के निवासियों का मानना है कि निमोला गांव के समीप ही एक तलाई स्थित है, और यह आशंका जताई जा रही है कि यह जीव उसी जलस्रोत से निकलकर रिहायशी इलाके के बाड़े तक आ पहुंचा। ग्रामीणों ने यह भी साझा किया कि महज दो दिन पहले भी इसी इलाके में एक मगरमच्छ देखा गया था। हालांकि, बाड़े में मिला यह जीव वही था या कोई दूसरा, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

भौगोलिक दृष्टि से यह पूरा इलाका चंबल और पार्वती नदियों के कछार तथा जल नेटवर्क के नजदीक स्थित है, जिसके चलते यहां समय-समय पर मगरमच्छों की सक्रियता दर्ज की जाती रहती है। जलस्रोतों के निकटवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि भविष्य में यदि कोई मगरमच्छ या अन्य जलीय वन्यजीव बस्ती में नजर आए, तो उसके समीप जाने अथवा स्वयं उसे पकड़ने का जोखिम न उठाएं, बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचित करें ताकि प्रशिक्षित दल द्वारा सुरक्षित बचाव कार्य किया जा सके।

## इसका आप पर असर
रिहायशी इलाकों में मगरमच्छों के प्रवेश से नदी और तालाब किनारे बसे ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।

- **भारत में:** नदी कछारों और नमभूमि क्षेत्रों के निकट बसे ग्रामीण इलाकों में इंसानों और जलीय वन्यजीवों के आमने-सामने आने का जोखिम बढ़ता है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को खुले बाड़ों और जलस्रोतों के पास अंधेरे में आवाजाही के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
- **कोटा में:** चंबल और पार्वती नदी से जुड़े क्षेत्रों के ग्रामीणों को जलस्रोतों के आसपास और रात के समय विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है। किसी भी वन्यजीव के दिखने पर खुद पहल करने के बजाय तुरंत वन विभाग या बचाव दल से संपर्क करना जरूरी है।
- **किसानों और पशुपालकों के लिए:** खुले बाड़ों में मवेशी बांधने वाले परिवारों को रात में सुरक्षा बाड़े और रोशनी का पुख्ता प्रबंध करना चाहिए। इससे पालतू पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और जंगली जीवों के छिपने का अंदेशा कम रहेगा।
- **स्थानीय प्रशासन के लिए:** तलाई और रिहायशी बस्तियों के मध्य नियमित गश्त और ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान तेज करने की जरूरत है। त्वरित सूचना प्रणाली से किसी भी अप्रिय घटना से पहले समय पर रेस्क्यू संभव हो सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
निमोला गांव में मगरमच्छ का पहुंचना इलाके की जलीय संरचना और मौसमी जलभराव से जुड़ा हुआ है।

- **सीधा कारण:** गांव के पास स्थित तलाई से निकलकर मगरमच्छ भोजन या नए ठिकाने की तलाश में आबादी के नजदीक बने बाड़े में आ गया। रात के शांत वातावरण में जीव आसानी से बस्ती के अंदर तक पहुंच गया।
- **भौगोलिक पृष्ठभूमि:** कोटा का यह क्षेत्र चंबल और पार्वती नदियों के निकट पड़ता है, जो मगरमच्छों के प्राकृतिक आवास हैं। इन नदियों और सहायक जलस्रोतों में जलस्तर बदलने पर मगरमच्छ प्रायः आसपास की तलाइयों और नालों में विचरण करते हैं।
- **पिछली घटनाएं:** इस इलाके में दो दिन पूर्व भी मगरमच्छ देखा गया था, जिससे स्पष्ट है कि क्षेत्र के जलस्रोतों में इनकी मौजूदगी बनी हुई है। हालांकि दोनों घटनाओं में एक ही मगरमच्छ था या अलग-अलग, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

## सवाल-जवाब

### 1. निमोला गांव में मगरमच्छ कब और कहां नजर आया?
रविवार की रात करीब 9 बजे कोटा जिले के इटावा क्षेत्र स्थित निमोला गांव में एक घर के बाड़े में मगरमच्छ दिखाई दिया।

### 2. रेस्क्यू किए गए मगरमच्छ की लंबाई और वजन कितना था?
इस मगरमच्छ की लंबाई लगभग 4 फीट थी और उसका वजन करीब 40 से 45 किलोग्राम आंका गया।

### 3. रेस्क्यू टीम ने मगरमच्छ को कैसे काबू में किया?
टीम ने सावधानीपूर्वक उसके मुंह पर टेप लगाई, उसके आगे-पीछे के पैरों को रस्सियों से बांधा और पूंछ को नियंत्रित कर उसे पकड़ा।

### 4. मगरमच्छ को पकड़ने के बाद कहां छोड़ा गया?
सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद मगरमच्छ को गेता क्षेत्र में चंबल नदी के जल में छोड़ दिया गया।

### 5. मगरमच्छ के बस्ती में आने का क्या कारण माना जा रहा है?
ग्रामीणों के अनुसार गांव के पास स्थित तलाई से निकलकर मगरमच्छ के रिहायशी बाड़े तक पहुंचने की आशंका है।

### 6. क्या इस इलाके में पहले भी मगरमच्छ देखा गया था?
ग्रामीणों के अनुसार दो दिन पहले भी इसी इलाके में मगरमच्छ दिखाई दिया था, हालांकि दोनों बार एक ही जीव था या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

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