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  "type": "article",
  "title": "कोटा के सरकारी अस्पताल में सिजेरियन के बाद महिला की मौत, दूसरी प्रसूता की हालत नाजुक",
  "summary": "कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद किडनी संबंधी गंभीर जटिलताओं से एक महिला ने दम तोड़ दिया, जबकि दूसरी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रही है।",
  "content": "राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं के चलते एक प्रसूता की जान चली गई, जबकि एक अन्य महिला की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। गायनी विभाग में 14 अक्टूबर को सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली 40 वर्षीय रेशमा ने शुक्रवार रात उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसी दिन ऑपरेशन कराने वाली 30 वर्षीय अनिता की हालत भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है और उन्हें विशेष निगरानी के लिए नेफ्रोलॉजी विभाग के गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया है। दोनों ही मरीजों में शल्य चिकित्सा के कुछ ही घंटों बाद किडनी की कार्यप्रणाली अचानक प्रभावित होने लगी थी, जिसके चलते स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं।\n\nऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद बिगड़ी दोनों की तबीयत\nन्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में 14 अक्टूबर को रेशमा और अनिता दोनों का सिजेरियन ऑपरेशन संपन्न किया गया था। ऑपरेशन पूरा होने के कुछ घंटों के भीतर ही दोनों महिलाओं के शरीर में गंभीर लक्षण उभरने लगे। उनके यूरिन आउटपुट में भारी गिरावट दर्ज की गई और दोनों की किडनियों ने सामान्य रूप से काम करना बंद कर दिया। रेशमा की तेजी से बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिजन उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले गए, परंतु वहां भी उनकी शारीरिक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया। इसके पश्चात शुक्रवार शाम परिजन उन्हें दोबारा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एसएसबी विंग में लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद रेशमा की मृत्यु हो गई। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उपचार के दौरान लगाए गए इंजेक्शन के बाद उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ी थी।\n\nचिकित्सीय रिपोर्ट और संभावित जटिलताओं का आकलन\nअस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा द्वारा जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया कि आपातकालीन सिजेरियन के फौरन बाद रेशमा को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ा था। इसके साथ ही उनका ब्लड प्रेशर अचानक काफी नीचे गिर गया था। प्रारंभिक चिकित्सकीय रिपोर्ट में इन गंभीर लक्षणों को थ्रोम्बोएम्बोलिक अटैक की संभावना से जोड़कर देखा गया है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों का अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। उधर, दूसरी प्रसूता अनिता का स्वास्थ्य भी अत्यधिक चिंता का विषय बना हुआ है। अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार, अनिता के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या घटकर महज 21 हजार रह गई है। चिकित्सकों का मानना है कि अनिता की स्थिति थ्रोम्बोटिक माइक्रोएंजियोपैथी तथा HELLP सिंड्रोम से संबंधित जटिलताओं से जुड़ी हो सकती है। फिलहाल अनिता को नेफ्रोलॉजी आईसीयू में रखकर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निरंतर गहन चिकित्सा दी जा रही है।\n\nमई महीने में भी सामने आई थी ऐसी ही त्रासदी\nन्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इस प्रकार की चिकित्सीय त्रासदी पहली बार नहीं घटी है। लगभग पांच महीने पूर्व, 5 मई 2026 को इसी स्वास्थ्य केंद्र में सिजेरियन प्रसव के उपरांत 12 प्रसूताओं की किडनियां खराब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। उस दुखद घटना में पायल, ज्योति, पिंकी, प्रिया और शिरीन नामक पांच प्रसूताओं की उपचार के दौरान जान चली गई थी। उस दौरान भी अस्पताल की संचालन व्यवस्था, दवाओं की गुणवत्ता और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को लेकर व्यापक स्तर पर सवाल खड़े हुए थे। उस मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए विभिन्न आवश्यक नमूने कोलकाता स्थित प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेजे गए थे, लेकिन पांच महीने का लंबा समय बीत जाने के बावजूद उन नमूनों की आधिकारिक रिपोर्ट अब तक अप्राप्त बताई जा रही है।\n\nकार्रवाई, बहाली और दोबारा उभरे गंभीर सवाल\nमई महीने में हुई पांच प्रसूताओं की मौत के गंभीर प्रकरण के बाद प्रशासन ने तीन चिकित्सकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। हालांकि, बाद में गठित जांच समितियों की ओर से क्लीनचिट दिए जाने के पश्चात उन सभी चिकित्सकों को हाल ही में दोबारा सेवा में बहाल कर दिया गया था। अब रेशमा की असमय मौत और अनिता की अत्यंत संकटग्रस्त स्थिति ने पूर्व में हुई जांच की निष्पक्षता तथा अस्पताल की संपूर्ण चिकित्सा प्रणाली को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा अनुत्तरित प्रश्न यह है कि पांच महीने पहले इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा क्या सुरक्षात्मक कदम उठाए गए थे और वैसी ही स्थिति दोबारा क्यों दोहराई गई। पूरे मामले में जवाबदेही तय करने और भविष्य में प्रसूताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है।\n\nइसका आप पर असर\nकोटा के प्रमुख सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद बार-बार सामने आ रही गंभीर जटिलताओं ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।\n\n• राजस्थान में: सरकारी चिकित्सालयों में प्रसव और शल्य चिकित्सा कराने वाले परिवारों के मन में सुरक्षा को लेकर भारी संशय पैदा हो गया है। मरीजों के परिजनों को दवा, इंजेक्शन और ऑपरेशन के बाद होने वाली किसी भी असामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया पर डॉक्टरों से तुरंत स्पष्टीकरण मांगना चाहिए।\n• कोटा में: न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गायनी और प्रसूति विभाग में इलाज करा रहे मरीजों में भय का माहौल है। अस्पताल प्रशासन पर ऑपरेशन थिएटर के संक्रमण नियंत्रण और दवाओं की गहन जांच कराने का दबाव तेजी से बढ़ गया है।\n• स्वास्थ्य प्रणाली पर: पांच महीने पूर्व हुई पांच मौतों की जांच रिपोर्ट लंबित होने से प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। इस घटना के बाद राज्य भर के चिकित्सालयों में दवाओं के बैच और संक्रमण नियंत्रण प्रक्रियाओं की समीक्षा अनिवार्य हो सकती है।\n• मरीजों के अधिकारों पर: मरीज के परिजनों द्वारा इंजेक्शन के बाद तबीयत बिगड़ने के आरोप दर्ज कराए गए हैं। ऐसे मामलों में परिजनों को उपचार के समस्त रिकॉर्ड और चिकित्सकीय दस्तावेज सुरक्षित रखने की आवश्यकता होती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 14 अक्टूबर को सिजेरियन प्रसव के कुछ ही घंटों बाद दोनों महिलाओं में यूरिन आउटपुट गिरने और किडनी कार्यप्रणाली बाधित होने के लक्षण देखे गए। अस्पताल प्रबंधन और परिजनों ने इसके अलग-अलग चिकित्सकीय व परिस्थितिजन्य कारण सामने रखे हैं।\n\n• चिकित्सकीय जटिलताएं: अस्पताल अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, रेशमा को आपात सिजेरियन के बाद सांस लेने में रुकावट और निम्न रक्तचाप की समस्या हुई, जिसे थ्रोम्बोएम्बोलिक अटैक की आशंका माना गया है। वहीं दूसरी मरीज अनिता में प्लेटलेट्स घटकर 21 हजार होने के साथ HELLP सिंड्रोम और थ्रोम्बोटिक माइक्रोएंजियोपैथी के संकेत पाए गए हैं।\n• परिजनों का आरोप: मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि सिजेरियन के उपरांत उपचार के दौरान दिए गए इंजेक्शन के बाद ही प्रसूता की शारीरिक स्थिति एकाएक बिगड़ी थी। हालांकि किसी विशेष दवा या संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।\n• पुराना घटनाक्रम: पांच महीने पहले 5 मई 2026 को भी इसी अस्पताल में 12 प्रसूताओं की किडनी प्रभावित हुई थी और पांच महिलाओं की मृत्यु हो गई थी। उस घटना के नमूने जांच के लिए कोलकाता की प्रयोगशाला भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट पांच महीने बाद भी अप्राप्त है।\n• जवाबदेही में ढिलाई: पूर्व मामले में निलंबित किए गए तीन डॉक्टरों को हाल ही में जांच कमेटियों की क्लीनचिट के बाद बहाल कर दिया गया था। पुरानी जांच का कोई ठोस निष्कर्ष सामने न आने के कारण अस्पताल की प्रणालियों में संभावित खामियों का समय रहते समाधान नहीं हो सका।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किस महिला की मृत्यु हुई है?\n14 अक्टूबर को सिजेरियन प्रसव कराने वाली 40 वर्षीय रेशमा की शुक्रवार रात उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।\n\n2. दूसरी प्रसूता अनिता की वर्तमान स्थिति क्या है?\n30 वर्षीय अनिता की हालत गंभीर बनी हुई है, उनके प्लेटलेट्स घटकर 21 हजार रह गए हैं और वे नेफ्रोलॉजी आईसीयू में उपचाराधीन हैं।\n\n3. अस्पताल अधीक्षक की रिपोर्ट में मौत का क्या संभावित कारण बताया गया है?\nअस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा के अनुसार, सिजेरियन के बाद रेशमा को सांस लेने में दिक्कत और निम्न रक्तचाप हुआ, जो थ्रोम्बोएम्बोलिक अटैक की ओर संकेत करता है।\n\n4. मृतका के परिवार वालों ने क्या आरोप लगाया है?\nपरिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद इलाज के दौरान लगाए गए इंजेक्शन के कारण रेशमा की तबीयत अचानक बिगड़ी थी।\n\n5. पांच महीने पहले इसी अस्पताल में क्या घटना हुई थी?\n5 मई 2026 को सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 12 प्रसूताओं की किडनियां खराब हो गई थीं, जिनमें से पांच महिलाओं की मौत हो गई थी।\n\n6. मई महीने की घटना में डॉक्टरों पर क्या कार्रवाई हुई थी?\nउस घटना के बाद तीन डॉक्टरों को निलंबित किया गया था, जिन्हें हाल ही में जांच समितियों से क्लीनचिट मिलने के बाद बहाल कर दिया गया।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-17",
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    "कोटा",
    "न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल",
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