कोटा के युवा रजनीश ने कमरे से शुरू की एक्सपोर्ट कंसल्टेंसी, 1000 से अधिक लोगों को बनाया अंतरराष्ट्रीय कारोबारी राजस्थान के कोटा में कोरोना महामारी के दौरान एक कमरे से शुरू हुई कंसल्टेंसी फर्म आज देश भर के युवाओं को वैश्विक व्यापार सिखा रही है। आईस्टार्ट योजना की मदद से स्थापित इस स्टार्टअप ने 1000 से अधिक लोगों को सफल एक्सपोर्टर बना दिया है। राजस्थान का कोटा शहर अब केवल कोचिंग संस्थानों के लिए ही नहीं, बल्कि नए दौर के स्टार्टअप और व्यावसायिक नवाचारों के लिए भी अपनी अलग पहचान दर्ज करा रहा है। यहाँ के युवा अपनी सोच और तकनीकी दक्षता के बल पर वैश्विक बाजार में नए आयाम गढ़ रहे हैं। इसी बदलाव के बीच कोटा के युवा उद्यमी रजनीश की सफलता की कहानी देश भर के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी है। उन्होंने हाड़ौती संभाग की पहली एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कंसल्टेंसी फर्म 'कनेक्टिंग इंडिया एग्जिम सॉल्यूशंस' की नींव रखी। वर्ष 2020 की विपरीत परिस्थितियों में अपने घर के एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ यह सफर आज 1000 से अधिक लोगों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर सफल एक्सपोर्टर बना चुका है। उद्योग के जमीनी अनुभवों से बनी मजबूत नींव रजनीश ने अपने करियर की शुरुआत इंटरनेशनल बिजनेस में MBA की डिग्री प्राप्त करके की थी। शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के बाद वे केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने मुंबई और गुजरात के प्रमुख औद्योगिक व व्यापारिक केंद्रों में व्यावहारिक काम सीखा। वर्षों तक धरातल पर काम करते हुए उन्होंने कस्टम्स ब्रोकरेज, शिपिंग लॉजिस्टिक्स और कस्टम्स क्लीयरेंस कंपनियों में सीधी भागीदारी निभाई। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के जटिल नियमों, कागजी प्रक्रियाओं और पोर्ट्स के संचालन को करीब से समझा। जब वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण देश भर में लॉकडाउन लगा, तो रजनीश अपने गृह नगर कोटा लौट आए। उन्होंने इस अभूतपूर्व संकट को एक अवसर के रूप में स्वीकार किया और अपने घर के एक कमरे से ऑनलाइन कंसल्टेंसी सेवा की शुरुआत कर दी। राजस्थान सरकार के iStart प्लेटफॉर्म का मिला सहारा शुरुआती चरण में अकेले काम करते हुए रजनीश को राजस्थान सरकार के फ्लैगशिप स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम iStart के बारे में जानकारी मिली। iStart से जुड़ने के बाद उनके स्टार्टअप को एक नई दिशा और गति प्राप्त हुई। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्हें न केवल उद्योग जगत के अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिला, बल्कि आधिकारिक इनक्यूबेशन स्पेस और एक व्यवस्थित ढांचा भी हासिल हुआ। इस सरकारी प्रोत्साहन ने उनके व्यावसायिक दायरे को तेजी से विस्तार दिया। वर्तमान में उनके पास 8 कुशल पेशेवरों की एक कोर टीम कार्यरत है। इस टीम में कई कॉलेज छात्र और इंटर्न्स भी शामिल हैं, जो लाइव प्रोजेक्ट्स पर काम करके अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बारीकियां सीख रहे हैं। कागजी कार्रवाई से लेकर शिपमेंट तक संपूर्ण व्यावहारिक समाधान 'कनेक्टिंग इंडिया एग्जिम सॉल्यूशंस' की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह नए व्यवसायियों को केवल किताबी पाठ नहीं पढ़ाती, बल्कि निर्यात और आयात से जुड़ी हर धरातली चुनौती का व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराती है। इसके तहत कई प्रमुख क्षेत्रों में सहायता प्रदान की जाती है • दस्तावेजीकरण (Documentation): नया व्यापार शुरू करने के लिए आवश्यक IEC (इंपोर्ट एक्सपोर्ट कोड), GST रिफंड प्रक्रिया, RCMC (रजिस्ट्रेशन कम मेंबरशिप सर्टिफिकेट) तथा अन्य सभी अनिवार्य लाइसेंस तैयार करने में पूर्ण सहायता दी जाती है। • कस्टम्स एवं लॉजिस्टिक्स सपोर्ट: अंतरराष्ट्रीय समुद्री व हवाई पोर्ट्स की प्रक्रियाओं, शिपिंग कंटेनरों की बुकिंग और कस्टम्स क्लीयरेंस के पेचीदा नियमों का सही तरीके से पालन कराया जाता है। • पैन-इंडिया नेटवर्क: आज इस संस्थान के पास देश के लगभग हर राज्य से युवा और उद्यमी प्रशिक्षण प्राप्त करने आ रहे हैं, जिससे इसका नेटवर्क पूरे भारत में फैल चुका है। नर्सिंग छात्र ने 4 महीने में कमाया ₹12 लाख का मुनाफा इस एक्सपोर्ट कंसल्टेंसी के व्यावहारिक मार्गदर्शन का सबसे प्रत्यक्ष उदाहरण जोधपुर के निवासी निवित की सफलता है। मेडिकल पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले निवित ने BSc Nursing की पढ़ाई की थी। व्यापारिक अनुभव न होने के बावजूद उन्होंने रजनीश से एक्सपोर्ट-इंपोर्ट का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के महज 3 से 4 महीनों के भीतर उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट सफलता के साथ भेजा। इस पहले ही सौदे में उन्होंने लगभग ₹12 लाख का शुद्ध मुनाफा कमाया। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो बिना किसी व्यावसायिक पृष्ठभूमि वाले युवा भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मंच पर अपनी सफलता की पताका फहरा सकते हैं। इसका आप पर असर यह समाचार भारत भर के युवाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रवेश करने के सीधे रास्ते खोलता है। • भारत भर में: बिना किसी पारंपरिक बिजनेस बैकग्राउंड के भी युवा एक्सपोर्ट-इंपोर्ट सेक्टर में कदम रख सकते हैं। सही मेंटरशिप और IEC व GST प्रक्रियाओं के ज्ञान से कोई भी व्यक्ति वैश्विक स्तर पर उत्पाद बेच सकता है। • राजस्थान और हाड़ौती में: कोटा और हाड़ौती क्षेत्र के उद्यमियों को स्थानीय स्तर पर इनक्यूबेशन और लॉजिस्टिक्स गाइडेंस मिल रही है। अब छोटे शहरों के निर्माताओं को मुंबई या गुजरात की एजेंसियों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। • स्टार्टअप्स और छात्रों के लिए: सरकारी योजनाओं जैसे iStart का लाभ उठाकर नई कंपनियां मेंटरशिप और स्पेस प्राप्त कर सकती हैं। कॉलेज छात्र भी पढ़ाई के साथ लाइव प्रोजेक्ट्स पर काम करके वास्तविक व्यापारिक हुनर सीख सकते हैं। • गैर-व्यावसायिक पृष्ठभूमि के लिए: मेडिकल, नर्सिंग या आर्ट्स की पढ़ाई करने वाले युवा भी 3 से 4 महीनों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार शुरू कर सकते हैं। ₹12 लाख जैसे बड़े शुद्ध मुनाफे के साथ वैश्विक बाजार में अपना मुकाम बनाया जा सकता है। सवाल-जवाब 1. कोटा में 'कनेक्टिंग इंडिया एग्जिम सॉल्यूशंस' की शुरुआत किसने की? इंटरनेशनल बिजनेस में MBA कर चुके युवा उद्यमी रजनीश ने 2020 के लॉकडाउन के दौरान अपने घर से इसकी शुरुआत की थी। 2. इस स्टार्टअप को राजस्थान सरकार की किस योजना से सहयोग मिला? इसे राजस्थान सरकार के फ्लैगशिप स्टार्टअप प्रोत्साहन प्लेटफॉर्म iStart से मेंटरशिप और आधिकारिक इनक्यूबेशन स्पेस का सहयोग मिला। 3. रजनीश की कंसल्टेंसी फर्म अब तक कितने लोगों को प्रशिक्षित कर चुकी है? यह फर्म अब तक देश भर के 1000 से अधिक लोगों को एक्सपोर्ट-इंपोर्ट का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर सफल एक्सपोर्टर बना चुकी है। 4. नर्सिंग छात्र निवित ने एक्सपोर्ट ट्रेनिंग के बाद कितना मुनाफा कमाया? जोधपुर निवासी निवित ने 3 से 4 महीने में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट भेजा और लगभग ₹12 लाख का शुद्ध मुनाफा कमाया। 5. यह फर्म नए एक्सपोर्टर्स को किन-किन प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान करती है? यह IEC कोड, GST रिफंड, RCMC लाइसेंस, कस्टम्स क्लीयरेंस नियम और शिपिंग कंटेनर बुकिंग जैसे व्यावहारिक कार्यों में मदद करती है। प्रेरणा और सबक रजनीश की सफलता की यात्रा से हर महत्वाकांक्षी उद्यमी को कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक सीख मिलती हैं। • विपरीत समय में अवसर खोजें: लॉकडाउन और महामारी के संकट के दौरान कोटा लौटकर घर के कमरे से काम शुरू करना दर्शाता है कि संसाधन कम होने पर भी संकल्प से शुरुआत की जा सकती है। • क्षेत्रीय अनुभव को प्राथमिकता दें: व्यापार शुरू करने से पहले मुंबई और गुजरात जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में जमीनी काम सीखकर रजनीश ने अपनी विशेषज्ञता को मजबूत किया। • सरकारी पहलों का पूरा लाभ उठाएं: iStart जैसी सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं से जुड़कर इंफ्रास्ट्रक्चर, मेंटरशिप और आधिकारिक पहचान प्राप्त करना ग्रोथ को तेज करता है। • डिग्री से ऊपर हुनर को रखें: जोधपुर के निवित की सफलता साबित करती है कि आपकी पढ़ाई का क्षेत्र चाहे जो हो, व्यावहारिक ट्रेनिंग और लगन से किसी भी नए उद्योग में महारत हासिल की जा सकती है। https://trendkia.com/rajasthan/kota-ke-yuva-rajneesh-ne-kamare-se-shuru-ki-eksaporta-knsaltensi-1000-se-adhika-logon-ko-banaya-antararashtriya-karobari-26070 TrendKia — Har trend, sabse pehle.