# कोटा की लैंडमार्क सिटी में बदहाल सड़कों और धूल से छात्र परेशान, बुनियादी सुविधाएं सुधारने की उठी मांग

> कोटा के कोचिंग हब लैंडमार्क सिटी में गड्ढों, धूल और जाम के कारण छात्रों का स्वास्थ्य और पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रों ने प्रशासन से सड़क मरम्मत, नियमित सफाई और ट्रैफिक प्रबंधन में तुरंत सुधार की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kota-ki-landmark-city-men-badahala-sarakon-aura-dhula-se-chhatra-pareshana-buniyadi-suvidhaen-sudharane-ki-uthi-manga-46186 · **Language:** Hindi
**Tags:** कोटा, लैंडमार्क सिटी, कोचिंग छात्र, सड़क मरम्मत, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण

देशभर से हजारों की संख्या में युवा डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लेकर कोचिंग हब कोटा का रुख करते हैं। यहां आकर छात्र अपनी पूरी ऊर्जा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, टेस्ट सीरीज और कठिन अध्ययन कार्यक्रम में लगाते हैं। लेकिन लैंडमार्क सिटी जैसे प्रमुख कोचिंग क्षेत्र में रोजमर्रा के सफर की मुश्किलें उनके इरादों की परीक्षा ले रही हैं। कोचिंग संस्थानों तक जाने वाले रास्तों पर फैली गंदगी, उधड़ी हुई सड़कें, गहरे गड्ढे और चारों ओर उड़ती धूल छात्रों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। छुट्टी के समय जब हजारों छात्र एक साथ बाहर निकलते हैं, तो सड़कों पर पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। हॉस्टल और पीजी से कक्षाओं के बीच यह रोज की भागदौड़ न केवल उनका कीमती समय बर्बाद कर रही है, बल्कि उनकी सेहत और मानसिक शांति पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।

## टूटी सड़कों और गंदगी के बीच संघर्ष करते छात्र
लैंडमार्क सिटी में रहकर पढ़ाई कर रहे छात्र राहुल राज ने इस समस्या को सामने रखते हुए बताया कि यहां की मुख्य सड़कें कई हिस्सों में पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। जब भी कोचिंग संस्थानों में छुट्टी होती है, तो वाहनों और विद्यार्थियों की भारी आवाजाही के कारण लंबा जाम लग जाता है। बरसात के मौसम में तो इन सड़कों की स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जाती है क्योंकि गड्ढों में पानी भरने से आवागमन पूरी तरह ठप होने लगता है। उन्होंने मांग उठाई कि प्रशासन को इस सड़क की तुरंत मरम्मत करानी चाहिए, ताकि अपनी कक्षाओं के लिए आने-जाने वाले छात्रों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

इसी इलाके में रह रहे एक अन्य छात्र हुजैफ ने बताया कि देश के अलग-अलग कोनों से कोटा आने वाले विद्यार्थियों का मकसद केवल पढ़ाई होता है और उन्हें एक स्वच्छ व शांत शैक्षिक माहौल मिलना चाहिए। सड़कों पर लगातार दौड़ते वाहनों की वजह से दिनभर इतनी धूल उड़ती है कि सांस लेना तक कठिन हो जाता है। इस धूल से छात्रों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि जर्जर सड़क को तुरंत नए सिरे से बनाने के साथ ही नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को यहां रोजाना सफाई की पुख्ता व्यवस्था करनी चाहिए।

## हादसों का खतरा और ट्रैफिक डायवर्जन की आवश्यकता
खराब रास्तों और अव्यवस्थित यातायात की वजह से विद्यार्थियों के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी हमेशा बनी रहती है। छात्र हर्षित ने बताया कि कक्षाओं के आने और जाने के समय सड़कों पर भारी वाहनों तथा छात्रों की जबरदस्त भीड़ उमड़ती है। ऐसे में उड़ती धूल के बीच गंभीर सड़क हादसों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कोचिंग की छुट्टी के दौरान ट्रैफिक रूट में फौरन बदलाव किया जाना चाहिए। चार पहिया वाहनों और कारों को दूसरे वैकल्पिक रास्तों पर मोड़ा जाना चाहिए ताकि मुख्य कोचिंग मार्ग पर अत्यधिक भीड़ जमा न हो और पैदल चलने वाले छात्रों को सुरक्षित राह मिल सके।

सड़कों के बड़े गड्ढों की वजह से दोपहिया वाहन चलाना भी बेहद जोखिम भरा हो चुका है। गड्ढों और पत्थरों के कारण कई बार छात्र अपनी स्कूटी से फिसल कर गिर जाते हैं। धूल और प्रदूषण की इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए छात्रों ने सुझाव दिया है कि संज्ञान बिल्डिंग के बाहर लैंडमार्क रोड पर वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया जाना चाहिए, जिससे समय-समय पर पानी का छिड़काव कर धूल को बैठने में मदद मिले। इसके अतिरिक्त, सड़क किनारे दोनों तरफ घने पेड़-पौधे लगाने की भी सलाह दी गई है ताकि पर्यावरण स्वच्छ बना रहे।

## कठिन रूटीन के बीच धूल की मार, प्रशासन से जल्द समाधान की गुहार
छात्र राम का कहना है कि वे रोजाना अपनी कक्षाओं में भाग लेने के लिए इसी खस्ताहाल मार्ग से गुजरते हैं। गड्ढों, धूल और भीषण जाम के कारण छात्रों का मनोबल टूटता है। उनका स्पष्ट कहना है कि वे अपने घरों से दूर केवल पढ़ाई करने आए हैं, धूल और प्रदूषण की मार झेलने नहीं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का दैनिक कार्यक्रम पहले से ही काफी व्यस्त और तनावपूर्ण होता है। सुबह जल्दी कोचिंग पहुंचना, दिनभर लंबी कक्षाएं लेना और शाम को टेस्ट की तैयारी में जुटने के बाद जब वे हॉस्टल या पीजी लौटते हैं, तो रास्ते की इस बदहाली से उनका काफी समय और ऊर्जा नष्ट हो जाती है।

छात्रों की स्पष्ट मांग है कि संबंधित प्रशासनिक विभाग इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लें। क्षेत्र की सड़कों की मजबूती से मरम्मत की जाए, नियमित सफाई अभियान चलाया जाए और कोचिंग के व्यस्त घंटों के दौरान सुगम ट्रैफिक मैनेजमेंट लागू किया जाए। यदि कोचिंग क्षेत्रों में बेहतर रोड कनेक्टिविटी और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा, तभी छात्र अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

## इसका आप पर असर
लैंडमार्क सिटी की खराब सड़कों और उड़ती धूल का सीधा असर हजारों छात्रों के दैनिक जीवन और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

- **कोटा में:** कोचिंग छात्रों को रोजाना धूल, जाम और दुर्घटनाओं के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। इससे उनका पढ़ाई का समय बर्बाद हो रहा है और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका है।
- **भारत भर में:** देशभर से अपने बच्चों को कोटा भेजने वाले अभिभावकों के लिए यह सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी चिंता का विषय है। बेहतर बुनियादी ढांचे से ही दूर-दराज से आने वाले छात्रों को सुरक्षित शैक्षिक माहौल मिल सकेगा।
- **आवागमन पर असर:** जर्जर सड़कों और गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने का खतरा बना हुआ है। ट्रैफिक रूट में बदलाव और सड़क मरम्मत होने पर ही छात्रों को दैनिक आवागमन में राहत मिलेगी।
- **प्रशासनिक कदम:** नगर निगम और संबंधित विभागों द्वारा सड़क मरम्मत और सफाई अभियान चलाने पर ही समस्या हल होगी। संज्ञान बिल्डिंग के बाहर स्प्रिंकलर लगाने से प्रदूषण में कमी आ सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
कोटा के लैंडमार्क सिटी में बुनियादी ढांचे की उपेक्षा और भारी आवागमन के कारण यह समस्या पैदा हुई है। संबंधित विभागों द्वारा नियमित रखरखाव न करने से हालात बिगड़ते चले गए।

- **जर्जर सड़क और गड्ढे:** सड़कों की लंबे समय से मरम्मत न होने और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से गड्ढे बन गए हैं। बारिश के दौरान जलभराव होने से सड़क की परत और तेजी से उखड़ गई है।
- **सफाई का अभाव:** सड़क किनारे जमा मिट्टी और कचरे की नियमित सफाई न होने से वाहनों के गुजरते ही धूल का गुबार उठता है। वाटर स्प्रिंकलर जैसी धूल नियंत्रण व्यवस्था न होने से प्रदूषण बढ़ता है।
- **अव्यवस्थित यातायात:** कोचिंग की छुट्टी के समय कारों, दोपहिया वाहनों और हजारों पैदल छात्रों के एक ही मार्ग पर आने से जाम लगता है। अलग रूट या ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था न होने से स्थिति अनियंत्रित हो जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. कोटा की लैंडमार्क सिटी में छात्र किन मुख्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं?
छात्र टूटी सड़कों, गहरे गड्ढों, भारी ट्रैफिक जाम और लगातार उड़ती धूल से परेशान हैं।

### 2. छात्रों ने धूल नियंत्रण के लिए क्या उपाय सुझाए हैं?
छात्रों ने सड़क किनारे पेड़ लगाने और संज्ञान बिल्डिंग के बाहर वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने का सुझाव दिया है।

### 3. ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए छात्रों की क्या मांग है?
छात्रों ने मांग की है कि कोचिंग की छुट्टी के समय कारों के लिए वैकल्पिक रूट बनाया जाए ताकि भीड़ कम हो सके।

### 4. बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति कैसी हो जाती है?
बरसात के दौरान सड़कों के गड्ढों में पानी भर जाने से रास्ते की हालत और ज्यादा खराब हो जाती है।

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