कोटा में गणेशोत्सव की धूम, प्रेमानंद महाराज के स्वरूप से लेकर 600 साल पुराने खड़े गणपति के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु कोटा में गणेशोत्सव के दौरान रामपुरा, अनंतपुरा और पुरानी सब्जी मंडी सहित कई इलाकों में बप्पा के अद्भुत स्वरूप सजे हैं, जिन्हें देखने भारी भीड़ उमड़ रही है। राजस्थान का कोटा शहर इन दिनों पूरी तरह से आस्था, उमंग और दिव्य रोशनी से सराबोर है। गणेशोत्सव के पावन अवसर पर शहर के हर कोने, गली-मोहल्ले और प्रमुख चौराहों पर विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश के विभिन्न और अद्भुत रूपों की झांकियां सजी हुई हैं। गणपति बप्पा के दर्शन के लिए कहीं भव्य और चमचमाते झूमरों से सजे पंडाल तैयार किए गए हैं, तो कहीं पारंपरिक और क्लासिक कलाकृतियों के जरिए श्रद्धालुओं का मन मोहा जा रहा है। पूरा कोटा शहर इस समय बप्पा की भक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है और हर तरफ केवल जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बने भव्य दरबारों को देखने के लिए दिन-रात भक्तों का तांता लगा हुआ है। रामपुरा के नगर सेठ और राजा के दरबार की अद्भुत रौनक कोटा के रामपुरा इलाके में स्थित नगर सेठ के विशाल पंडाल में की गई अलौकिक सजावट इस समय पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस भव्य पंडाल की छतों पर लटकाए गए विशालकाय और जगमगाते झूमर हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इसके साथ ही मोतियों की लंबी-लंबी लड़ियों की बारीक कारीगरी और ताजे फूलों से की गई सजावट इस पूरे दरबार की सुंदरता में चार चांद लगा रही है। इस दिव्य रोशनी से नहाए पंडाल में विराजे बप्पा की एक झलक पाने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसके ठीक पास रामपुरा के राजा के स्वागत के लिए भी एक भव्य पंडाल तैयार किया गया है। बप्पा के आगमन पर पूरा इलाका रंग-बिरंगी लाइटों और शानदार आतिशबाजी से गूंज उठा। इस अद्भुत नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने के लिए भक्तों की होड़ मची रही। विशेष रूप से शाम के समय जब महाआरती का आयोजन होता है, तो पूरा पंडाल मोबाइल की रोशनी और श्रद्धा के अनूठे मेल से जगमगा उठता है। जय गणेश देवा के जयकारों के बीच होने वाली यह आरती भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराती है। अनंतपुरा में शिव-पार्वती रूपी राजा-रानी का आकर्षण कोटा से झालावाड़ जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित अनंतपुरा में इस बार गणेशोत्सव का एक बेहद खास रूप देखने को मिल रहा है। यहां स्थापित किए गए 'अनंतपुरा के राजा और रानी शिव-पार्वती' की मूर्तियां अपने क्लासिक और पारंपरिक अंदाज से लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। भगवान गणेश और माता पार्वती के इस अनूठे स्वरूप को देखने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले मुसाफिर भी अपनी गाड़ियां रोककर बप्पा के चरणों में शीश नवा रहे हैं। ढलती शाम के साथ ही इस पंडाल में रंग-बिरंगी रोशनी का ऐसा शानदार खेल शुरू होता है कि यहां भक्तों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। यह स्थान इस समय भक्ति और उत्सव का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। 600 साल पुराना खड़े गणेश जी का ऐतिहासिक और अनूठा मंदिर कोटा की धार्मिक विरासत में खड़े गणेश जी का मंदिर एक बेहद विशिष्ट स्थान रखता है। चंबल नदी के पावन तट के समीप और प्राकृतिक वादियों के बीच बसा यह ऐतिहासिक मंदिर लगभग 600 वर्ष पुराना है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा बैठी हुई या शयन मुद्रा में नहीं, बल्कि खड़ी मुद्रा में स्थापित है। पूरे भारतवर्ष में भगवान गणेश का यह स्वरूप अत्यंत दुर्लभ और अनूठा माना जाता है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां आकर सच्चे मन से बप्पा से मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। अपनी इसी धार्मिक मान्यता और अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के कारण इस मंदिर में न केवल गणेशोत्सव के दौरान, बल्कि साल के बारह महीने देश-दुनिया से श्रद्धालुओं का आगमन होता रहता है। कैथूनीपोल के दादा गणेश और पुरानी सब्जी मंडी में संत स्वरूप कोटा के कैथूनीपोल इलाके में स्थित दादा गणेश जी का पंडाल भी अपनी खास पहचान रखता है। यहां हर वर्ष गणेशोत्सव के समय अत्यंत सुंदर और बारीक नक्काशी वाली कलात्मक प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। उत्सव के सभी दिनों में बप्पा का बिल्कुल अलग, अनूठा और मनमोहक श्रृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस पंडाल की सजावट और बप्पा की भव्यता श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लाती है। इसी तरह, कोटा की पुरानी सब्जी मंडी के प्राचीन गणेश मंदिर के ठीक बाहर सजे पंडाल में इस बार एक अनोखा प्रयोग देखने को मिला है। यहां पूज्य संत प्रेमानंद महाराज जी के स्वरूप से मिलती-जुलती भगवान गणेश की एक बेहद आकर्षक और दिव्य प्रतिमा विराजमान की गई है। फूलों के खूबसूरत और सुगंधित बंगले के बीच सजे इस अलौकिक दरबार में बप्पा के इस नए और मनभावन रूप के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं और मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। इसका आप पर असर कोटा में चल रहे इस भव्य गणेशोत्सव से स्थानीय व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों को नया बल मिल रहा है। • भारत में: देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले ऐसे उत्सव राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देते हैं। इससे अन्य राज्यों के लोग भी राजस्थान की इस समृद्ध उत्सव संस्कृति की ओर आकर्षित होते हैं। • कोटा में: स्थानीय बाजारों और त्योहार से जुड़े व्यवसायों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। मूर्तिकारों, फूल विक्रेताओं और प्रकाश सज्जा करने वाले स्थानीय लोगों की आय में भारी वृद्धि हुई है। • यातायात सलाह: रामपुरा और अनंतपुरा जैसे व्यस्त मार्गों पर शाम के समय अत्यधिक भीड़ होने की संभावना है। श्रद्धालुओं और यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। • पर्यटन को बढ़ावा: 600 साल पुराने खड़े गणेश जी के अनूठे मंदिर में बढ़ती भीड़ से कोटा का पर्यटन उद्योग मजबूत हो रहा है। इससे होटल व्यवसाय और परिवहन क्षेत्र को भी सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है। ऐसा क्यों हुआ कोटा में इस वर्ष की भव्य उत्सव सजावट के पीछे गहरी सांस्कृतिक जड़ें और स्थानीय समुदायों का आपसी सहयोग मुख्य कारक रहे हैं। • ऐतिहासिक जुड़ाव: कोटा में सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं रही हैं, जैसे कि 600 साल पुराना खड़े गणेश मंदिर। इसी ऐतिहासिक जुड़ाव के कारण स्थानीय लोगों में इस त्योहार के प्रति असाधारण उत्साह रहता है। • कलात्मक नवाचार: विभिन्न पूजा समितियों द्वारा हर साल कुछ नया पेश करने की होड़ ने इस बार थीम-आधारित पंडालों को जन्म दिया है। संत प्रेमानंद महाराज के स्वरूप जैसी मूर्तियां इसी नवाचार का परिणाम हैं जो भीड़ को आकर्षित कर रही हैं। • सद्भाव और सहयोग: त्योहारों के दौरान आपसी भाईचारा और मिलकर काम करने की भावना के कारण ही इतने बड़े पैमाने पर पंडालों का सफल आयोजन संभव हो पाता है। सवाल-जवाब 1. कोटा का खड़े गणेश जी मंदिर कितना पुराना है और इसकी क्या विशेषता है? यह मंदिर लगभग 600 साल पुराना है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा के बजाय खड़ी मुद्रा में स्थापित है, जो देश में अनूठी है। 2. पुरानी सब्जी मंडी के पंडाल में बप्पा का कौन सा स्वरूप दिखाया गया है? पुरानी सब्जी मंडी के प्राचीन गणेश मंदिर के बाहर सजे पंडाल में भगवान गणेश की प्रतिमा पूज्य संत प्रेमानंद महाराज जी के स्वरूप में स्थापित की गई है। 3. अनंतपुरा में किस प्रकार की मूर्तियां लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं? अनंतपुरा में कोटा-झालावाड़ रोड पर 'अनंतपुरा के राजा और रानी शिव-पार्वती' की क्लासिक शैली में तैयार प्रतिमाएं मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं। 4. रामपुरा के नगर सेठ पंडाल की सजावट कैसी की गई है? नगर सेठ के पंडाल की छत को विशाल झूमरों, मोतियों की खूबसूरत लड़ियों और ताजे फूलों से अलौकिक रूप से सजाया गया है। 5. खड़े गणेश जी का प्रसिद्ध मंदिर किस नदी के किनारे स्थित है? खड़े गणेश जी का यह प्राचीन मंदिर कोटा में बहने वाली चंबल नदी के पावन तट के समीप स्थित है। https://trendkia.com/rajasthan/kota-men-ganeshotsava-ki-dhuma-sant-premanand-maharaj-ke-svarupa-se-lekara-600-sala-purane-khare-ganpati-ke-darshana-ke-lie-umare--32682 TrendKia — Har trend, sabse pehle.