# कोटा में मानवता हुई तार-तार, सांगोद के सफाई कर्मी का शव कचरा गाड़ी में ले जाने को मजबूर हुए परिजन

> कोटा के सांगोद में एंबुलेंस या निजी वाहन न मिलने पर मृतक सफाई कर्मचारी के शव को कचरा उठाने वाली गाड़ी में ले जाया गया। नाले से मिले शव की दुर्गंध के कारण वाहन चालकों ने ले जाने से मना कर दिया था।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/kota-men-manavata-hui-tara-tara-sangod-ke-saphai-karmi-ka-shava-kachara-gari-men-le-jane-ko-majabura-hue-parijana-46243 · **Language:** Hindi
**Tags:** कोटा, सांगोद, खानपुर, सफाई कर्मचारी, राजस्थान समाचार, कचरा गाड़ी, शव वाहन

राजस्थान के कोटा जिले के सांगोद कस्बे में संवेदनहीनता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र और सामाजिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। सांगोद नगरपालिका में सफाई कर्मचारी के तौर पर सेवाएं देने वाले एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव को अंतिम सफर के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। बदहवास परिजनों को मजबूरी में नगरपालिका के कचरा उठाने वाले वाहन में शव रखकर खानपुर से सांगोद तक लाना पड़ा। व्यवस्था की इस लाचारी ने सरकारी मशीनरी के दावों की पोल खोल दी है।

## 7 अक्टूबर से घर से निकला था कर्मचारी
मृतक की पहचान सांगोद निवासी राकेश वाल्मीकि के रूप में हुई है, जो स्थानीय नगरपालिका में सफाई कर्मी के पद पर कार्यरत था। पारिवारिक सदस्यों के अनुसार राकेश बीते 7 अक्टूबर को अचानक बिना किसी को कोई जानकारी दिए घर से चला गया था। परिवार के लोगों ने बताया कि पहले भी वह कई मौकों पर बिना बताए चला जाता था और कुछ दिनों के अंतराल के बाद खुद ही घर लौट आता था। इसी आदत के चलते परिजनों ने इस दफा भी पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। उन्हें पूरा भरोसा था कि वह हमेशा की तरह सुरक्षित घर लौट आएगा, मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ।

## खानपुर के नाले से बरामद हुआ शव
शुक्रवार के दिन खानपुर पुलिस को अनाज मंडी के समीप बहने वाले एक गंदे नाले में लावारिस शव पड़े होने की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही पुलिस दल मौके पर पहुंचा और शव को नाले से बाहर निकलवाकर उसकी पहचान कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। शनिवार को जब इस दुखद घटना की खबर सांगोद में परिजनों तक पहुंची, तो वे तुरंत खानपुर पहुंचे। वहां परिजनों ने मृतक की शिनाख्त राकेश वाल्मीकि के रूप में की। इसके पश्चात खानपुर पुलिस ने विधिक औपचारिकताएं पूरी करते हुए मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया और अंतिम क्रियाकर्म के लिए देह परिजनों को सौंप दी।

## सड़न और दुर्गंध के कारण चालकों ने किया इनकार
पोस्टमार्टम की कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद पीड़ित परिवार के सामने सबसे विकट समस्या शव को पैतृक कस्बे सांगोद तक पहुंचाने की खड़ी हो गई। कई दिनों तक गंदे पानी में पड़े रहने की वजह से शव काफी फूल चुका था और उससे भयंकर बदबू उठ रही थी। परिजनों ने खानपुर से सांगोद तक ले जाने के लिए कई निजी एंबुलेंस चालकों और टैक्सी चालकों से हाथ जोड़कर विनती की। शव की अत्यधिक खराब स्थिति और दुर्गंध का हवाला देकर किसी भी एंबुलेंस चालक या निजी वाहन मालिक ने उसे ले जाने की हामी नहीं भरी।

## कचरा उठाने वाले वाहन में निकली अंतिम यात्रा
लंबे समय तक कोशिश करने और तमाम मिन्नतों के बावजूद जब कोई साधन उपलब्ध नहीं हुआ, तो बेबस परिजनों के सामने कोई अन्य रास्ता नहीं बचा। अंत में निराश होकर परिजनों को सांगोद नगरपालिका के कचरा ढोने वाले वाहन का प्रबंध करना पड़ा। जिस इंसान ने अपनी पूरी जिंदगी सड़कों और बस्तियों का कूड़ा साफ करने में खपा दी, उसी की मृत देह को नगरपालिका के कचरा वाहन में लादकर लाया गया। खानपुर से सांगोद तक कचरा वाहन में शव ले जाने की इस घटना ने सरकारी शव वाहन व्यवस्था, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और नागरिक संवेदनाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

## इसका आप पर असर
यह घटना सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में शव परिवहन सुविधाओं की भारी कमी और निर्धन परिवारों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को उजागर करती है।

- **भारत में:** यह घटना देश भर के सरकारी अस्पतालों में लावारिस या दुर्गंधयुक्त शवों के लिए अलग शव वाहन नीति की जरूरत को रेखांकित करती है। इससे आम नागरिकों को संकट के समय सम्मानजनक अंतिम संस्कार के बुनियादी अधिकारों की जानकारी रखने में मदद मिलती है।
- **कोटा में:** सांगोद और खानपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों के लिए मुफ्त शव वाहन सेवा की अनुपलब्धता सीधे तौर पर सामने आई है। स्थानीय लोगों को अब आपातकालीन स्थिति में मोर्चरी से शव ले जाने हेतु वाहन व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन से स्पष्ट नियमों की मांग करनी होगी।
- **परिजनों के लिए:** किसी व्यक्ति के लापता होने पर तुरंत पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराना कानूनी और व्यावहारिक रूप से बेहद जरूरी हो जाता है। समय पर सूचना देने से अज्ञात शवों की तुरंत पहचान हो सकती है और शव को खराब होने से बचाया जा सकता है।
- **सफाई कर्मियों के लिए:** नगरपालिकाओं में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और गरिमापूर्ण सहायता तंत्र की आवश्यकता बढ़ गई है। स्थानीय कर्मचारी संगठनों द्वारा मृतक आश्रितों के लिए आपातकालीन सहायता योजनाओं की मांग उठ सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना तब घटी जब नाले में मिले अत्यधिक खराब शव को ले जाने से सभी निजी चालकों ने मना कर दिया और कोई सरकारी शव वाहन उपलब्ध नहीं हुआ।

- **शव की खराब स्थिति:** पानी में कई दिनों तक पड़े रहने के कारण मृतक का शरीर बुरी तरह फूल चुका था और उससे असहनीय दुर्गंध आ रही थी। इसी तीव्र दुर्गंध और सड़न के चलते निजी वाहन चालकों और एंबुलेंस वालों ने शव ले जाने से साफ इनकार कर दिया।
- **गुमशुदगी की रिपोर्ट न होना:** मृतक पहले भी बिना बताए जाने और कुछ दिनों बाद वापस लौटने का आदी था, जिसके चलते परिजनों ने 7 अक्टूबर को उसके जाने पर कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई। देरी से हुई खोज के कारण शव कई दिनों तक नाले में पड़ा रहा।
- **प्रशासनिक शव वाहन का अभाव:** पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल या पुलिस की ओर से शव को घर तक पहुंचाने के लिए कोई समर्पित सरकारी शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके चलते असहाय परिजनों को अंतिम विकल्प के रूप में कचरा गाड़ी का उपयोग करना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. मृतक सफाई कर्मचारी का क्या नाम था और वह कहां का निवासी था?
मृतक का नाम राकेश वाल्मीकि था और वह राजस्थान के कोटा जिले के सांगोद कस्बे का निवासी था।

### 2. राकेश वाल्मीकि कब से घर से गायब थे?
राकेश वाल्मीकि 7 अक्टूबर से बिना किसी को कुछ बताए अचानक घर से चले गए थे।

### 3. परिजनों ने राकेश के लापता होने की रिपोर्ट पुलिस में क्यों नहीं दर्ज करवाई थी?
राकेश पहले भी कई बार बिना बताए घर से जाकर कुछ दिनों में लौट आते थे, इसलिए परिजनों ने इस बार भी उनके खुद लौटने की उम्मीद में रिपोर्ट नहीं लिखवाई थी।

### 4. राकेश का शव कहां से बरामद किया गया था?
उनका शव शुक्रवार को खानपुर में अनाज मंडी के पास स्थित एक गंदे नाले से बरामद हुआ था।

### 5. एंबुलेंस या निजी चालकों ने शव ले जाने से इनकार क्यों किया?
शव कई दिनों तक पानी में रहने के कारण फूल गया था और उससे तेज दुर्गंध आ रही थी, जिसके चलते चालकों ने मना कर दिया।

### 6. शव को खानपुर से सांगोद कैसे लाया गया?
किसी भी अन्य वाहन के न मिलने पर परिजनों को सांगोद नगरपालिका की कचरा गाड़ी में शव रखकर लाना पड़ा।

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