कोटा में रह रही देश की सबसे बुजुर्ग बाघिन महक पर बड़ा वैज्ञानिक अध्ययन शुरू कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रह रही 23 साल की बाघिन महक की लंबी उम्र के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान डीएनए जांच और स्वास्थ्य विश्लेषण करने जा रहा है। इंसानों की दुनिया में लंबी उम्र की चर्चा तो आम होती है, लेकिन वन्यजीवों के क्षेत्र में किसी बाघिन का इतनी आयु पार करना एक ऐतिहासिक घटना बन चुका है। राजस्थान के कोटा शहर में स्थित अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रहने वाली महक नाम की बाघिन ने उम्र के सारे अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। सामान्य तौर पर जंगलों या संरक्षित पार्कों में रहने वाले बाघ सोलह से अठारह साल की अवधि में ही दम तोड़ देते हैं, जबकि महक तेईस साल की दहलीज पार कर चुकी है। इतनी अधिक उम्र होने के बावजूद उसका सक्रिय रहना और सामान्य जीवन बिताना हर किसी को हैरान कर रहा है। इसी अनोखे मामले को समझने के लिए अब देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान ने इस दिशा में बड़े कदम उठाने का फैसला किया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की विशेष जांच महक की इस असाधारण लंबी उम्र और बेहतरीन स्वास्थ्य के पीछे छिपे रहस्यों से पर्दा उठाने की जिम्मेदारी अब भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों को मिली है। संस्थान के शोधकर्ता इस बात का गहराई से अध्ययन करने की तैयारी कर रहे हैं कि आखिर किस वजह से इस बाघिन का शरीर उम्र के असर से इस तरह बचा हुआ है। इस व्यापक अध्ययन के दायरे में केवल डीएनए और जेनेटिक्स ही नहीं आएंगे, बल्कि उसकी दिनचर्या, खानपान, समय पर मिले टीके और पिछले तमाम वर्षों के चिकित्सीय दस्तावेज भी शामिल किए जाएंगे। वैज्ञानिक यह टटोलने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उसके पास कोई खास आनुवंशिक खूबी है जो उसे बुढ़ापे की आम बीमारियों से दूर रखती है। जन्म से लेकर अब तक का सफर इस अद्भुत बाघिन के शुरुआती जीवन पर नजर डालें तो उसका जन्म अठ्ठाइस अगस्त दो हजार चार को जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हुआ था। वह अपने पूरे जीवनकाल के दौरान इंसानी देखरेख और संरक्षित माहौल में ही पली-बढ़ी है। उसे पहली बार वर्ष दो हजार बारह में कोटा स्थानांतरित किया गया था, हालांकि कुछ समय बाद उसे वापस जयपुर भेज दिया गया था। इसके बाद मार्च दो हजार तेईस में जब कोटा का अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क बनकर तैयार हुआ, तब महक को नाहर नाम के एक अन्य बाघ के साथ दोबारा इसी पार्क में लाया गया। उसकी जुड़वां बहन रंभा का निधन लगभग छह महीने पहले ही हो चुका है। महक ने असम के गुवाहाटी चिड़ियाघर की प्रसिद्ध बाघिन स्वाति की बीस साल की उम्र के रिकॉर्ड को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। शारीरिक स्वास्थ्य और अंगों की कार्यप्रणाली वैज्ञानिक परीक्षणों के दौरान शोधकर्ता केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे महक के दांतों, पंजों और शरीर के अंदरूनी अंगों के काम करने के तरीकों का भी बारीकी से विश्लेषण करेंगे। इस रिसर्च का मुख्य मकसद यह जानना है कि लगातार बढ़ती उम्र के बीच भी उसका शरीर अंदरूनी तौर पर खुद को कैसे संभाल रहा है। अगर इस अध्ययन के जरिए महक की लंबी उम्र का कोई ठोस कारण हाथ लग जाता है, तो देश और दुनिया के अन्य चिड़ियाघरों में रह रहे बुजुर्ग बाघों, तेंदुओं और शेरों की देखभाल की रणनीतियों में अभूतपूर्व बदलाव किए जा सकते हैं। तनावमुक्त माहौल और डॉक्यूमेंट्री की तैयारी विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लंबी आयु के पीछे केवल जेनेटिक्स ही नहीं, बल्कि एक शांत, तनावमुक्त वातावरण और संतुलित आहार की बहुत बड़ी भूमिका रही है। यह मामला इस बात का बड़ा उदाहरण बन सकता है कि किस तरह बेहतरीन मेडिकल देखरेख और सही खानपान से वन्यजीवों का जीवनकाल बढ़ाया जा सकता है। कोटा के वन्यजीव विभाग के डीएफओ प्रमोद धाकड़ ने बताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर डीएनए सैंपल लेने और रिसर्च को आगे बढ़ाने को लेकर लगातार चर्चा की जा रही है। विभाग की योजना इस पूरी यात्रा को एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म के रूप में ढालने की है, जिसे पार्क में आने वाले पर्यटकों के देखने के लिए बड़ी एलईडी स्क्रीनों पर चलाया जाएगा ताकि लोग इस दुर्लभ बाघिन की कहानी से रूबरू हो सकें। इसका आप पर असर यह शोध वन्यजीव संरक्षण और प्राणी उद्यानों में रहने वाले जानवरों के स्वास्थ्य प्रबंधन के भविष्य को नया आकार दे सकता है। • भारत में: देश भर के चिड़ियाघरों और जैविक पार्कों में रह रहे बुजुर्ग वन्यजीवों की देखभाल और खानपान के पुराने नियमों में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। • कोटा में: अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क आने वाले पर्यटकों को इस अनूठी बाघिन के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री देखने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह अध्ययन बाघिन महक के असाधारण रूप से लंबे जीवन और उसकी जैविक स्थिति के पीछे छिपे कारणों को वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए शुरू किया गया है। • असामान्य आयु: अधिकांश बाघ सोलह से अठारह वर्ष की उम्र में दम तोड़ देते हैं, जबकि महक ने तेईस वर्ष की आयु पार कर ली है। • जेनेटिक जिज्ञासा: वैज्ञानिक यह पता लगाना चाहते हैं कि क्या उसके पास ऐसे विशिष्ट आनुवंशिक गुण हैं जो बुढ़ापे को रोकते हैं। • बेहतर प्रबंधन: कैप्टिव माहौल में लंबे समय तक रहने के कारण उसकी जीवनशैली और मेडिकल इतिहास का विश्लेषण करना भविष्य के संरक्षण कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सवाल-जवाब 1. बाघिन महक की उम्र कितनी है? बाघिन महक की उम्र तेईस साल से अधिक है। 2. महक इस समय कहाँ रह रही है? महक इस समय राजस्थान के कोटा स्थित अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में रह रही है। 3. महक का जन्म कहाँ हुआ था? महक का जन्म अठ्ठाइस अगस्त दो हजार चार को जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हुआ था। 4. कौन सा संस्थान महक पर अध्ययन कर रहा है? भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोधकर्ता महक के डीएनए और स्वास्थ्य का अध्ययन कर रहे हैं। 5. कोटा वन्यजीव विभाग की क्या योजना है? कोटा वन्यजीव विभाग महक की जीवन यात्रा पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार कर पार्क में दिखाने की योजना बना रहा है। https://trendkia.com/rajasthan/kota-men-raha-rahi-desha-ki-sabase-bujurga-baghina-mahak-para-bara-vaijnanika-adhyayana-shuru-30963 TrendKia — Har trend, sabse pehle.