{
  "type": "article",
  "title": "कोटा में स्कूली बच्चों के निवाले पर डाका: गोदाम से निकला 3213 क्विंटल राशन गायब, ठेकेदार पर केस दर्ज",
  "summary": "राजस्थान के कोटा में सरकारी प्राथमिक स्कूलों के मिड-डे मील के लिए भेजा गया 3,213 क्विंटल से अधिक गेहूं और चावल गायब हो गया। रसद विभाग की शिकायत पर गुजरात की ट्रांसपोर्ट फर्म और उसके कर्ताधर्ताओं के खिलाफ नयापुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।",
  "content": "राजस्थान के कोटा जिले में सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों के पोषण के लिए भेजा जाने वाला भारी मात्रा में खाद्यान्न रास्ते से ही गायब किए जाने का बड़ा मामला प्रकाश में आया है। केंद्रीय भंडारण केंद्र से शत-प्रतिशत उठाव किए जाने के बावजूद 3,213 क्विंटल से अधिक गेहूं और चावल कभी विद्यालयों के रसोईघरों तक नहीं पहुंच सके। इस भारी हेराफेरी के सामने आने के बाद रसद विभाग ने मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए गुजरात आधारित परिवहन एजेंसी के खिलाफ नयापुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई है।\n\nविद्यालयों में पोषाहार का संकट और शिकायतों का दौर\nराष्ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2026 की जुलाई से सितंबर वाली दूसरी तिमाही के लिए खाद्यान्न का आवंटन स्वीकृत किया गया था। इस योजना के क्रियान्वयन हेतु कोटा स्थित सेंट्रल वेयर हाउस नंबर-1 से 14 जुलाई से 21 जुलाई के बीच अनाज की शत-प्रतिशत निकासी की गई थी। इसके बावजूद जिले भर के शैक्षणिक संस्थानों से लगातार भोजन तैयार करने हेतु कच्ची सामग्री कम पड़ने अथवा न मिलने की जानकारियां सामने आने लगीं। जब शिक्षकों और स्थानीय प्रबंधकों ने राशन की अनुपलब्धता का मुद्दा उठाया, तब पूरे प्रशासनिक तंत्र में खलबली मच गई।\n\nसत्यापन प्रक्रिया में खुली कागजी दावों की पोल\nजिले के प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने लगातार मिल रहे असंतोष के बाद पूरे मामले का ब्लॉक स्तर पर सत्यापन कराने का निर्णय लिया। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (सीबीईओ) के जरिए विद्यालयों में प्राप्त रसीदों तथा वास्तविक तौर पर पहुंचे अनाज की खेप का मिलान कराया गया। भौतिक मिलान में यह तथ्य प्रमाणित हुआ कि गोदाम से कागजों में उठाया गया पूरा स्टॉक स्कूलों तक वितरित ही नहीं हुआ था। प्रत्येक विद्यालय के पास केवल उसी सामग्री की पावती मौजूद थी जो वास्तव में उन्हें सौंपी गई थी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि गोदाम से निकासी और वास्तविक आपूर्ति के बीच भारी अंतर बना हुआ था।\n\nआंकड़ों में सामने आई भारी कमी\nविभागीय जांच रिपोर्ट के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 1844 क्विंटल गेहूं और 1369 क्विंटल चावल विद्यालयों तक पहुंचा ही नहीं था। अधिक सूक्ष्म गणना में यह कमी 1844.06 क्विंटल गेहूं तथा 1369.52 क्विंटल चावल दर्ज की गई, जो कुल मिलाकर 3213 क्विंटल से अधिक खाद्यान्न बैठती है। इस गायब सामग्री का सरकारी मूल्य लगभग 81 लाख रुपये आंका गया है, जबकि खुले खुदरा अथवा थोक बाजार के भाव से इसकी कीमत 1 करोड़ से 1 करोड़ 10 लाख रुपये तक आंकी जा रही है। फर्म ने अपनी मासिक प्रगति रिपोर्ट (एमपीआर) में महज 207.50 क्विंटल गेहूं तथा 100.60 क्विंटल चावल शेष बचा हुआ दिखाया था और बाद में मौखिक तौर पर यह दावा करने का प्रयास किया कि संपूर्ण सामग्री वितरित कर दी गई है।\n\nपरिवहन फर्म और वर्क ऑर्डर की शर्तें\nइस पूरे खाद्यान्न को गोदाम से उठाकर संबंधित शैक्षणिक संस्थानों तक सुरक्षित पहुंचाने का दायित्व गुजरात के हिम्मतनगर स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठान मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज को सौंपा गया था। इस कार्य के लिए संवेदक को 32 रुपये 6 पैसे प्रति क्विंटल की दर से कार्यादेश स्वीकृत किया गया था। अनुबंध के अनुसार संवेदक को गोदाम से माल उठाकर समयबद्ध तरीके से प्रत्येक विद्यालय को उसकी तय पर्ची के आधार पर अनाज सौंपना था, परंतु जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर अनाज की खेप को गायब कर दिया गया।\n\nनोटिस की अनदेखी के बाद पुलिस में प्राथमिकी\nगंभीर अनियमितता की पुष्टि होने के उपरांत रसद विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए फर्म के संचालक नारायणलाल शंकर लाल खटीक (निवासी हिम्मतनगर, गुजरात) तथा उनके स्थानीय अधिकृत प्रतिनिधि शैलेंद्र शर्मा (निवासी बरूंधन, तालेड़ा) को 14 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस थमाया। दोनों जिम्मेदारों को 15 अक्टूबर की सुबह 10:30 बजे तक स्थिति स्पष्ट करने का समय दिया गया था, किंतु निर्धारित समयसीमा बीत जाने के पश्चात भी कोई लिखित स्पष्टीकरण पेश नहीं किया गया। इसके बाद विभाग ने नयापुरा पुलिस थाने में औपचारिक तहरीर देकर आपराधिक मुकदमा दर्ज करवा दिया।\n\nजांच के दायरे में पूरी वितरण व्यवस्था\nकोटा के जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), प्रारंभिक, रूप सिंह मीणा के अनुसार, खाद्यान्न के पूर्ण उठाव के बाद भी बच्चों के राशन का स्कूलों तक न पहुंचना पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। रूप सिंह मीणा ने कहा, \"अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि बच्चों के पोषाहार के लिए आया खाद्यान्न कहां गायब हुआ और इस गड़बड़ी में कौन-कौन शामिल है।\" वर्तमान में पुलिस और प्रशासनिक टीमें इस पहलू की गहन पड़ताल कर रही हैं कि गायब किया गया राशन किन व्यापारियों या मंडियों में खपाया गया और इस मिलीभगत में अन्य कौन से चेहरे शामिल हैं।\n\nइसका आप पर असर\nसरकारी स्कूलों के पोषण कार्यक्रम में राशन गायब होने से विद्यार्थियों के भोजन और वितरण निगरानी पर सीधा असर पड़ता है।\n\n• राजस्थान में: सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के दोपहर के भोजन में खाद्यान्न की कमी का संकट पैदा हुआ है। जिला प्रशासन अब भविष्य में राशन की सीधी आपूर्ति और निगरानी व्यवस्था को पहले से अधिक कड़ा कर रहा है।\n• कोटा में: स्थानीय प्राथमिक विद्यालयों में कई हफ्तों तक विद्यार्थियों के लिए तैयार होने वाले भोजन का कोटा बुरी तरह प्रभावित रहा। अभिभावकों और स्कूल प्रबंधकों को अब वितरण रसीदों और आपूर्ति की सीधी जांच का अतिरिक्त अधिकार दिया जा रहा है।\n• जनता के पैसे पर असर: लगभग 1 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सार्वजनिक खाद्यान्न की हेराफेरी से करदाताओं के धन का नुकसान हुआ है। दोषी ट्रांसपोर्टर से इस राशि की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।\n• ठेका प्रक्रिया में बदलाव: बाहरी राज्यों के परिवहन ठेकेदारों के चयन और उनकी जवाबदेही तय करने के नियमों में सख्ती देखने को मिलेगी। भविष्य में जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल पावती प्रणाली को अनिवार्य बनाया जा सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nगोदाम से शत-प्रतिशत खाद्यान्न उठने के बाद भी स्कूलों तक सामग्री न पहुंचने की मुख्य वजह ट्रांसपोर्टर द्वारा रास्ते में ही माल खपा देना और निगरानी तंत्र में ढिलाई रही।\n\n• सीधा कारण: परिवहन की जिम्मेदारी संभालने वाली निजी फर्म ने गोदाम से माल उठाया किंतु उसे स्कूलों तक पहुंचाने के बजाय रास्ते में ही गायब कर दिया।\n• निगरानी में चूक: गोदाम से माल निकलने और स्कूलों में वास्तविक आपूर्ति के बीच रीयल-टाइम निगरानी की कमी रही, जिसका खुलासा केवल स्कूलों की लगातार शिकायतों के बाद हुआ।\n• जवाबदेही से बचाव: संवेदक ने अपनी मासिक रिपोर्ट में कम स्टॉक लंबित दिखाकर कागजी खानापूर्ति करने की कोशिश की और कारण बताओ नोटिस जारी होने पर भी कोई औपचारिक स्पष्टीकरण पेश नहीं किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कोटा में कितने क्विंटल खाद्यान्न के गबन का मामला सामने आया है?\nसरकारी गोदाम से उठाया गया 3213 क्विंटल से अधिक खाद्यान्न गायब हुआ है, जिसमें 1844 क्विंटल गेहूं और 1369 क्विंटल चावल शामिल है।\n\n2. इस गायब हुए राशन की अनुमानित कीमत कितनी आंकी गई है?\nइस खाद्यान्न की कीमत सरकारी दर पर करीब 81 लाख रुपये और खुले बाजार के हिसाब से 1 करोड़ से 1 करोड़ 10 लाख रुपये तक आंकी गई है।\n\n3. खाद्यान्न परिवहन की जिम्मेदारी किस एजेंसी के पास थी?\nयह काम गुजरात के हिम्मतनगर स्थित मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज को 32 रुपये 6 पैसे प्रति क्विंटल की दर से सौंपा गया था।\n\n4. प्रशासन ने इस मामले में किन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है?\nरसद विभाग ने फर्म के प्रोपराइटर नारायणलाल शंकर लाल खटीक और अधिकृत प्रतिनिधि शैलेंद्र शर्मा के खिलाफ नयापुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/kota-men-skuli-bachchon-ke-nivale-para-daka-godama-se-nikala-3213-kvintala-rashana-gayaba-thekedara-para-kesa-darja-53137",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-29",
  "tags": [
    "कोटा",
    "मिड डे मील",
    "राशन घोटाला",
    "राजस्थान पुलिस",
    "शिक्षा विभाग",
    "गेहूं चावल गबन"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia",
  "whatItMeansForYou": "सरकारी स्कूलों के पोषण कार्यक्रम में राशन गायब होने से विद्यार्थियों के भोजन और वितरण निगरानी पर सीधा असर पड़ता है।\n\n• राजस्थान में: सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के दोपहर के भोजन में खाद्यान्न की कमी का संकट पैदा हुआ है। जिला प्रशासन अब भविष्य में राशन की सीधी आपूर्ति और निगरानी व्यवस्था को पहले से अधिक कड़ा कर रहा है।\n• कोटा में: स्थानीय प्राथमिक विद्यालयों में कई हफ्तों तक विद्यार्थियों के लिए तैयार होने वाले भोजन का कोटा बुरी तरह प्रभावित रहा। अभिभावकों और स्कूल प्रबंधकों को अब वितरण रसीदों और आपूर्ति की सीधी जांच का अतिरिक्त अधिकार दिया जा रहा है।\n• जनता के पैसे पर असर: लगभग 1 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सार्वजनिक खाद्यान्न की हेराफेरी से करदाताओं के धन का नुकसान हुआ है। दोषी ट्रांसपोर्टर से इस राशि की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।\n• ठेका प्रक्रिया में बदलाव: बाहरी राज्यों के परिवहन ठेकेदारों के चयन और उनकी जवाबदेही तय करने के नियमों में सख्ती देखने को मिलेगी। भविष्य में जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल पावती प्रणाली को अनिवार्य बनाया जा सकता है।",
  "whyItHappened": "गोदाम से शत-प्रतिशत खाद्यान्न उठने के बाद भी स्कूलों तक सामग्री न पहुंचने की मुख्य वजह ट्रांसपोर्टर द्वारा रास्ते में ही माल खपा देना और निगरानी तंत्र में ढिलाई रही।\n\n• सीधा कारण: परिवहन की जिम्मेदारी संभालने वाली निजी फर्म ने गोदाम से माल उठाया किंतु उसे स्कूलों तक पहुंचाने के बजाय रास्ते में ही गायब कर दिया।\n• निगरानी में चूक: गोदाम से माल निकलने और स्कूलों में वास्तविक आपूर्ति के बीच रीयल-टाइम निगरानी की कमी रही, जिसका खुलासा केवल स्कूलों की लगातार शिकायतों के बाद हुआ।\n• जवाबदेही से बचाव: संवेदक ने अपनी मासिक रिपोर्ट में कम स्टॉक लंबित दिखाकर कागजी खानापूर्ति करने की कोशिश की और कारण बताओ नोटिस जारी होने पर भी कोई औपचारिक स्पष्टीकरण पेश नहीं किया।",
  "questionsAndAnswers": [
    {
      "question": "कोटा में कितने क्विंटल खाद्यान्न के गबन का मामला सामने आया है?",
      "answer": "सरकारी गोदाम से उठाया गया 3213 क्विंटल से अधिक खाद्यान्न गायब हुआ है, जिसमें 1844 क्विंटल गेहूं और 1369 क्विंटल चावल शामिल है।"
    },
    {
      "question": "इस गायब हुए राशन की अनुमानित कीमत कितनी आंकी गई है?",
      "answer": "इस खाद्यान्न की कीमत सरकारी दर पर करीब 81 लाख रुपये और खुले बाजार के हिसाब से 1 करोड़ से 1 करोड़ 10 लाख रुपये तक आंकी गई है।"
    },
    {
      "question": "खाद्यान्न परिवहन की जिम्मेदारी किस एजेंसी के पास थी?",
      "answer": "यह काम गुजरात के हिम्मतनगर स्थित मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज को 32 रुपये 6 पैसे प्रति क्विंटल की दर से सौंपा गया था।"
    },
    {
      "question": "प्रशासन ने इस मामले में किन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है?",
      "answer": "रसद विभाग ने फर्म के प्रोपराइटर नारायणलाल शंकर लाल खटीक और अधिकृत प्रतिनिधि शैलेंद्र शर्मा के खिलाफ नयापुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।"
    }
  ]
}