कोटा नगर निगम चुनाव में क्रॉस वोटिंग से जीतीं अनुसुइया गोस्वामी, कांग्रेस प्रत्याशी की हार कोटा नगर निगम मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की अनुसुइया गोस्वामी ने 65 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। कांग्रेस खेमे में हुई सेंधमारी के कारण पार्टी प्रत्याशी सुनीता सुमन को महज 35 वोट मिले। राजस्थान के कोटा नगर निगम में मेयर पद के लिए हुए कड़े मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल कर ली है। भाजपा उम्मीदवार अनुसुइया गोस्वामी ने विपक्षी खेमे में लगी सेंध और क्रॉस वोटिंग के सहारे यह चुनावी मुकाबला अपने नाम किया। चुनाव के दौरान हुई वोटिंग में कांग्रेस के पार्षदों की तरफ से पाला बदलने के संकेत मिले, जिसके चलते अनुसुइया गोस्वामी नए महापौर के रूप में निर्वाचित घोषित की गईं। मतों की गिनती पूरी होने के बाद सामने आए आंकड़ों के अनुसार भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में कुल 65 वोट पड़े, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को सिर्फ 35 मतों से ही संतोष करना पड़ा। सदन का गणित और भाजपा की बढ़त इस चुनाव में संख्याबल का गणित बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया था। भाजपा के अपने 57 पार्षद थे और चार में से दो निर्दलीय पार्षदों ने पहले ही अनुसुइया गोस्वामी को अपना समर्थन देने का एलान कर दिया था। इस तरह भाजपा खेमे के पास कुल 59 पार्षदों का समर्थन तय माना जा रहा था। हालांकि, जब मतपेटियों से नतीजे बाहर आए तो भाजपा प्रत्याशी को 65 वोट मिले, जो उनके तय संख्याबल 59 से 6 वोट ज्यादा थे। भाजपा की तरफ से पहले 70 वोट मिलने का दावा किया जा रहा था, लेकिन 65 वोटों के साथ पार्टी ने निर्णायक अंतर से जीत दर्ज कर ली। कांग्रेस खेमे में बिखराव और चुनावी आंकड़े दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदन में 39 पार्षद मौजूद थे। पार्टी ने इस प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में सुनीता सुमन को मैदान में उतारा था। सदन में पार्टी के घोषित 39 पार्षदों के बावजूद सुनीता सुमन के खाते में केवल 35 वोट ही दर्ज हुए। इसका सीधा मतलब यह निकला कि कांग्रेस के आधिकारिक संख्याबल से 4 वोट कम मिले। गुप्त मतदान प्रणाली के कारण यह स्पष्ट तौर पर दर्ज नहीं हो सका कि किस पार्षद ने किसके पक्ष में मतदान किया, लेकिन दोनों पक्षों के अंतिम आंकड़ों ने साफ कर दिया कि विपक्षी पार्षदों की क्रॉस वोटिंग ने इस मुकाबले की दिशा तय की। मतदान का घटनाक्रम और प्रशासन पर आरोप मतदान शुरू होने से पहले दोनों दलों के पार्षदों का जमावड़ा देखने लायक था। भाजपा के सभी पार्षद एकजुट होकर सिर पर पारंपरिक पगड़ी पहने एक बस में सवार होकर नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। मतदान केंद्र पहुंचने से पहले ही अनुसुइया गोस्वामी ने बड़े अंतर से विजयी होने का भरोसा जताया था। वहीं कांग्रेस के पार्षद भी अपनी उम्मीदवार सुनीता सुमन के साथ मतदान प्रक्रिया में शामिल होने आए। मतदान के दौरान शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने प्रशासनिक मशीनरी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा है और संख्याबल होने के बावजूद कांग्रेस पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिशें की गईं। इसका आप पर असर कोटा नगर निगम में मेयर चुनाव के इस नतीजे का सीधा असर शहर के स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों की प्राथमिकताओं पर पड़ेगा। • कोटा में: नगर निगम में भाजपा की नई मेयर आने से शहर के नागरिक विकास कार्यों और स्वच्छता योजनाओं की नई रूपरेखा तय होगी। स्थानीय निवासियों को वार्ड स्तर पर रुके विकास कार्यों के तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद रहेगी। • भारत में: स्थानीय निकाय चुनावों में क्रॉस वोटिंग की इस घटना से राजनीतिक दलों को अपने जमीनी पार्षदों और संगठन के प्रबंधन पर दोबारा ध्यान देना होगा। पार्टी नेतृत्व को व्हिप और आंतरिक असंतोष से निपटने के लिए संगठनात्मक रणनीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है। • वार्ड विकास और बजट: नए नगर निगम बोर्ड के गठन से शहर की सड़कों, नालियों और स्ट्रीट लाइटों के बजट आवंटन में गति आएगी। वार्ड पार्षदों को अपने क्षेत्रों के प्रस्तावों को पास कराने के लिए नए सिरे से प्रयास करने होंगे। • स्थानीय राजनीति: कांग्रेस खेमे के 4 पार्षदों के वोट कटने से स्थानीय संगठन में आंतरिक जवाबदेही और समीक्षा की प्रक्रिया शुरू होगी। इसका असर आगामी स्थानीय चुनावों में टिकट वितरण और गुटीय संतुलन पर पड़ेगा। ऐसा क्यों हुआ कोटा नगर निगम में भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार के पीछे सदन में संख्याबल का गणित और अंतिम समय में हुई रणनीतिक क्रॉस वोटिंग मुख्य वजह रही। • सदन में संख्याबल की सेंधमारी: भाजपा के पास अपने 57 पार्षद और 2 निर्दलीय मिलाकर 59 मतों का समर्थन था, लेकिन पार्टी ने 65 वोट हासिल किए। इससे साफ हुआ कि विपक्षी खेमे के पार्षदों ने गुप्त मतदान के दौरान पाला बदलकर भाजपा उम्मीदवार का समर्थन किया। • कांग्रेस खेमे में असंतोष: कांग्रेस के पास 39 पार्षद होने के बावजूद प्रत्याशी सुनीता सुमन को केवल 35 वोट मिले। पार्टी के 4 पार्षदों का छिटकना यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर प्रत्याशी चयन या आंतरिक सामंजस्य को लेकर मतभेद मौजूद थे। • गुप्त मतदान का प्रभाव: नगर निगम मेयर चुनाव में गुप्त मतदान प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें किसी भी पार्षद पर पार्टी व्हिप उल्लंघन की सीधी पहचान तुरंत नहीं हो पाती। इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर असंतुष्ट पार्षदों ने अपनी पार्टी के रुख के विपरीत वोट डाला। सवाल-जवाब 1. कोटा नगर निगम का नया मेयर किसे चुना गया है? भारतीय जनता पार्टी की नेता अनुसुइया गोस्वामी को कोटा नगर निगम का नया मेयर चुना गया है। 2. मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को कितने वोट मिले? भाजपा प्रत्याशी अनुसुइया गोस्वामी को चुनाव में कुल 65 वोट प्राप्त हुए। 3. कांग्रेस उम्मीदवार सुनीता सुमन को कितने मत मिले? कांग्रेस की उम्मीदवार सुनीता सुमन को मतदान में केवल 35 वोट मिले। 4. सदन में भाजपा और कांग्रेस के पास अपने कितने पार्षद थे? सदन में भाजपा के 57 पार्षद और दो समर्थक निर्दलीय थे, जबकि कांग्रेस के पास 39 पार्षद मौजूद थे। 5. कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने क्या आरोप लगाए? शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पक्षपात किया और पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। https://trendkia.com/rajasthan/kota-nagara-nigama-chunava-men-krosa-votinga-se-jitin-anusuiya-goswami-congress-pratyashi-ki-hara-38381 TrendKia — Har trend, sabse pehle.