कोटपूतली के पापड़ा गांव में पैंथर का आतंक, घर के बाड़े में घुसकर भैंस की पाड़ी को बनाया शिकार जयपुर जिले के कोटपूतली के विराटनगर वन रेंज स्थित पापड़ा गांव में पैंथर ने एक मकान के बाड़े में घुसकर भैंस की पाड़ी पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में पिछले दो साल से पैंथर की आवाजाही बनी हुई है और वन विभाग से इसे पकड़ने की मांग की जा रही है। जयपुर जिले के कोटपूतली के विराटनगर वन रेंज के अंतर्गत आने वाले पापड़ा गांव में पैंथर की लगातार सक्रियता से स्थानीय लोगों में भारी खौफ का माहौल बना हुआ है। बीती रात एक पैंथर अचानक गांव के एक रिहायशी इलाके में घुस आया और सीधे एक घर के बाड़े को अपना निशाना बनाया। इस दौरान पैंथर ने वहां बंधी हुई भैंस की पाड़ी पर जोरदार हमला बोल दिया, जिससे उस बेजुबान पाड़ी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना के सामने आने के बाद से ही पीड़ित किसान परिवार के अलावा पूरे गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का साया गहरा गया है। घर के बाड़े में कैसे हुआ हमला मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना रात के वक्त रामजीलाल गुर्जर के मकान परिसर में बने बाड़े के भीतर घटी। पैंथर चुपचाप बाड़े में दाखिल हुआ और वहां बंधी पाड़ी पर हमला कर दिया, जिससे उसे संभलने का कोई मौका नहीं मिला। हमले की गंभीरता इतनी अधिक थी कि पाड़ी की मौके पर ही मौत हो गई। अगली सुबह जब इस दुखद घटना की खबर फैली, तो भारी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए और इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त करने लगे कि अब वन्यजीव रिहायशी बस्तियों के इतने करीब पहुंच चुके हैं। दो साल से बनी हुई है पैंथर की आवाजाही क्षेत्रीय लोगों का ऐसा कहना है कि पापड़ा गांव तथा इसके आसपास के तमाम इलाकों में बीते करीब दो वर्षों से लगातार पैंथर की आवाजाही देखी जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, इस अंतराल के दौरान पैंथर पहले भी कई बार पालतू पशुओं को अपना निशाना बना चुका है और उन्हें मौत के घाट उतार चुका है। इन सिलसिलेवार घटनाओं की वजह से अब ग्रामीणों के मन में सिर्फ अपने अमूल्य पशुधन के नुकसान का ही डर नहीं है, बल्कि अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों का यह भी आरोप है कि पैंथर की इन संदिग्ध गतिविधियों और लगातार हो रहे हमलों के बारे में कई बार वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, मगर इस गंभीर समस्या के किसी भी स्थायी समाधान के वास्ते कोई भी ठोस या प्रभावी कार्रवाई धरातल पर नहीं उतरी है। पैंथर की बढ़ती गतिविधियों के कारण अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि लोगों को रात के अंधेरे में अपने खेतों की तरफ या घरों के आसपास निकलने से भी डर लगने लगा है। वन विभाग की प्रतिक्रिया और ग्रामीणों की चेतावनी इस ताजा घटना के सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारी भी हरकत में आए और मौके पर पहुंचकर मौजूदा हालात का जायजा लिया। दूसरी तरफ, आक्रोशित और डरे हुए ग्रामीणों ने वन विभाग के समक्ष यह साफ मांग रखी है कि इलाके में फौरन पिंजरा लगाया जाए, पैंथर की हरकतों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और उसे जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से पकड़ा जाए। ग्रामीणों का साफ तौर पर यह भी कहना है कि यदि वक्त रहते इस खतरनाक वन्यजीव को पकड़कर किसी सुरक्षित प्राकृतिक आवास में नहीं भेजा गया, तो भविष्य में किसी इंसान की जान पर भी बड़ा खतरा आ सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने इस मामले में जल्द से जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे मजबूर होकर कड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। इस पूरी घटना के बाद से पूरे गांव में हर तरफ सिर्फ इसी बात की चर्चा है और डर का माहौल कायम है। इसका आप पर असर ग्रामीण इलाकों और खेतों के पास रहने वाले लोगों की सुरक्षा और पशुधन को लेकर बड़ा व्यावहारिक संकट पैदा हो गया है। • भारत में: वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों के करीब आने से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों के लिए मवेशियों की सुरक्षा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस तरह की घटनाओं के बाद लोगों को रात के समय खेतों में जाने से बचना चाहिए। • कोटपूतली में: पापड़ा गांव और आसपास के इलाकों में रहने वाले परिवारों को रात के वक्त बाहर निकलते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। स्थानीय लोग वन विभाग पर दबाव बनाकर अपने इलाके में पिंजरे लगवाने और नियमित गश्त शुरू करवाने की मांग कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. यह घटना किस गांव में हुई है? यह घटना जयपुर जिले के कोटपूतली के विराटनगर वन रेंज के अंतर्गत आने वाले पापड़ा गांव में हुई है। 2. पैंथर ने किस जानवर पर हमला किया? पैंथर ने रामजीलाल गुर्जर के मकान के बाड़े में बंधी भैंस की पाड़ी पर हमला किया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। 3. इलाके में पैंथर की आवाजाही कितने समय से है? ग्रामीणों के अनुसार पापड़ा गांव और आसपास के क्षेत्र में पिछले करीब दो वर्षों से पैंथर की लगातार आवाजाही बनी हुई है। 4. ग्रामीणों ने वन विभाग से क्या मांग की है? ग्रामीणों ने क्षेत्र में तत्काल पिंजरा लगाने, पैंथर की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और उसे सुरक्षित पकड़ने की मांग की है। 5. वन विभाग ने घटना के बाद क्या कदम उठाया? घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। https://trendkia.com/rajasthan/kotaputali-ke-papra-ganva-men-panther-ka-atnka-ghara-ke-bare-men-ghusakara-buffalo-calf-ko-banaya-shikara-24657 TrendKia — Har trend, sabse pehle.