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  "title": "कोटखावदा के शिव शंकर प्रजापति बने सहारा, 25 साल में 1000 से ज्यादा लोगों के कराए निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन",
  "summary": "जयपुर के कोटखावदा तहसील क्षेत्र स्थित महादेवपुरा निवासी शिव शंकर प्रजापति बीते 25 वर्षों से लगातार निशुल्क नेत्र जांच और मोतियाबिंद शिविर लगाकर निर्धन ग्रामीणों की आंखों में रोशनी भर रहे हैं।",
  "content": "जयपुर जिले के कोटखावदा तहसील क्षेत्र स्थित महादेवपुरा गांव में सेवा और इंसानियत की एक अनोखी मिसाल देखने को मिल रही है। यहां के रहने वाले शिव शंकर प्रजापति पिछले 25 वर्षों से गरीब और असहाय ग्रामीणों की आंखों की रोशनी लौटाने के पुनीत कार्य में जुटे हैं। पैसों की तंगी के चलते जो लोग मोतियाबिंद जैसी बीमारी का ऑपरेशन कराने में असमर्थ रहते हैं, उनकी मदद के लिए वे लगातार निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर रहे हैं। उनके इस निरंतर समर्पण की बदौलत अब तक हजारों ग्रामीणों को आंखों के उपचार का लाभ मिल चुका है, जिनमें 1000 से अधिक जरूरतमंदों के निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक करवाए गए हैं।\n\nसाल 2001 से शुरू हुआ सेवा का सफर\nशिव शंकर प्रजापति की इस सेवा यात्रा की शुरुआत साल 2001 में हुई थी। वर्ष 2001 से 2010 तक उन्होंने पंचायती राज जन चेतना संस्थान के जरिए जरूरतमंदों तक नेत्र उपचार पहुंचाने का अभियान चलाया। इसके बाद साल 2011 से उन्होंने कामधेनु गौशाला महादेवपुरा के बैनर तले इस मुहिम को आगे बढ़ाया। तब से लेकर अब तक वे हर साल औसतन चार निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर आयोजित करवाते आ रहे हैं। उनका यह सिलसिला बिना रुके बीते ढाई दशकों से जारी है और ग्रामीण इलाकों में रोशनी की नई उम्मीद बनकर उभरा है।\n\nकेलगिरी नेत्र चिकित्सालय के सहयोग से हर सुविधा मुफ्त\nशिव शंकर प्रजापति बताते हैं कि दूरदराज के देहाती इलाकों में आर्थिक तंगी तो इलाज में बड़ी रुकावट बनती ही है, साथ ही एक और बड़ी समस्या अस्पताल में मरीज के साथ रुकने वाले तीमारदार की होती है। कई परिवारों के पास इतना वक्त या साधन नहीं होते कि वे दिनों तक शहर के अस्पताल में रहकर मरीज की तीमारदारी कर सकें। इसी मुश्किल को आसान बनाने के लिए वे केलगिरी नेत्र चिकित्सालय, जयपुर के सहयोग से शिविर आयोजित करते हैं।\n\nइन शिविरों में आने वाले मरीजों को एंबुलेंस सेवा, आंखों की विस्तृत जांच, ऑपरेशन, लेंस प्रत्यारोपण, आवश्यक दवाइयां और नजर का चश्मा पूरी तरह निशुल्क मिलता है। इतना ही नहीं, अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनके रहने की व्यवस्था, पौष्टिक भोजन तथा चाय-नाश्ते का पूरा प्रबंध भी बिना किसी शुल्क के किया जाता है। मरीजों या उनके परिजनों से किसी भी प्रक्रिया के लिए एक रुपया भी नहीं लिया जाता।\n\nमरीजों के तीमारदार बनकर चार दिन तक साथ निभाते हैं\nशिव शंकर प्रजापति की जिम्मेदारी केवल मरीजों को चिन्हित कर अस्पताल भिजवाने तक सीमित नहीं रहती। वे अस्पताल में खुद एक समर्पित तीमारदार की भूमिका निभाते हैं। मरीज के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर ऑपरेशन संपन्न होने तक और फिर करीब चार दिनों बाद स्वस्थ होकर वापस गौशाला लौटने तक वे साए की तरह उनके साथ रहते हैं। वे हर बुजुर्ग और जरूरतमंद मरीज की देखरेख अपने सगे परिवार के सदस्य की भांति करते हैं। इसी अटूट विश्वास के कारण ग्रामीण बेझिझक होकर अपने बुजुर्ग परिजनों को इलाज के लिए उनके साथ भेज देते हैं।\n\nबुजुर्गों को मिला नया जीवन और स्वाभिमान\nदृष्टिहीनता या कम रोशनी के कारण बुजुर्गों को रोजमर्रा के साधारण कार्यों में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। शिविर में उपचार कराने वाले एक बुजुर्ग ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि कम दिखाई देने के कारण एक बार तो उन्हें कुत्ते के साथ एक ही थाली में खाना खाने जैसी लाचारी से गुजरना पड़ा था। ऑपरेशन के बाद जब उनकी आंखों की ज्योति लौटी, तो वे अपने ज्यादातर काम खुद करने लगे और उन्हें दोबारा आत्मनिर्भरता मिली। ग्रामीण अंचलों में महंगे लेंस प्रत्यारोपण और अस्पताल आने-जाने के भारी खर्च के डर से लोग बीमारी टालते रहते हैं। ऐसे असहाय लोगों के दर्द को समझकर शिव शंकर प्रजापति 25 सालों से उनके जीवन में उजाला बिखेर रहे हैं और पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह पहल ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निशुल्क मोतियाबिंद उपचार और पूर्ण देखभाल सुनिश्चित करती है।\n\n• भारत में: ग्रामीण इलाकों में मोतियाबिंद के निशुल्क शिविर वंचित बुजुर्गों को बिना किसी आर्थिक बोझ के रोशनी लौटाने का बड़ा माध्यम बनते हैं। इससे परिवार के कामकाजी सदस्यों पर अस्पताल में रुकने या भारी खर्च उठाने का दबाव खत्म होता है।\n• जयपुर और कोटखावदा में: स्थानीय ग्रामीणों को केलगिरी नेत्र चिकित्सालय के माध्यम से निशुल्क जांच, सर्जरी, भोजन और रहने की सुविधा मिल रही है। शिव शंकर प्रजापति के सालाना चार शिविरों की मदद से क्षेत्र के बुजुर्ग मरीज बिना किसी डर या खर्च के अपना इलाज करवा सकते हैं।\n• मरीजों की देखभाल: भर्ती से लेकर घर वापसी तक मरीज के साथ तीमारदार मौजूद रहता है। इससे असहाय बुजुर्गों को शहर के अस्पताल में अकेलापन या असुविधा महसूस नहीं होती।\n• आत्मनिर्भरता और सुरक्षा: आंखों की रोशनी लौटने के बाद बुजुर्ग रोजमर्रा के काम स्वयं करने में सक्षम हो जाते हैं। इससे ग्रामीण बुजुर्गों को दूसरों पर आश्रित रहने से मुक्ति मिलती है और वे सम्मानपूर्वक जीवन जी पाते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nग्रामीण क्षेत्रों में अत्यधिक गरीबी, महंगे लेंस प्रत्यारोपण और तीमारदार की अनुपलब्धता के कारण बुजुर्ग समय पर मोतियाबिंद का इलाज नहीं करा पाते हैं। इस सामाजिक और आर्थिक विवशता को दूर करने के लिए शिव शंकर प्रजापति ने 25 वर्ष पहले यह निशुल्क सेवा शुरू की।\n\n• इलाज का भारी खर्च: निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद की सर्जरी, लेंस प्रत्यारोपण और दवाइयों की लागत गरीब परिवारों की पहुंच से बाहर होती है। इसी आर्थिक तंगी के चलते कई ग्रामीण दृष्टिहीनता झेलने को मजबूर हो जाते हैं।\n• तीमारदार का अभाव: शहरों में जाकर इलाज कराने के लिए अस्पताल में मरीज के साथ रहने वाला कोई तीमारदार चाहिए होता है, जो दैनिक मजदूरी करने वाले परिवारों के लिए संभव नहीं हो पाता। शिव शंकर प्रजापति खुद चार दिन अस्पताल में रुककर इस कमी को पूरा करते हैं।\n• संस्थागत सहयोग: वर्ष 2001 से 2010 तक पंचायती राज जन चेतना संस्थान और 2011 से कामधेनु गौशाला व केलगिरी नेत्र चिकित्सालय के समन्वय ने इस अभियान को निरंतर बनाए रखा है। इसी मजबूत साझेदारी से हर साल चार शिविरों का आयोजन संभव हो पाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शिव शंकर प्रजापति कौन हैं और वे क्या कार्य कर रहे हैं?\nशिव शंकर प्रजापति जयपुर की कोटखावदा तहसील के महादेवपुरा निवासी हैं, जो पिछले 25 वर्षों से गरीब ग्रामीणों के लिए निशुल्क नेत्र जांच और मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर आयोजित कर रहे हैं।\n\n2. अब तक कितने मरीजों का निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन हो चुका है?\nशिव शंकर प्रजापति के प्रयासों से अब तक 1000 से अधिक जरूरतमंद लोगों के मोतियाबिंद के सफल और निशुल्क ऑपरेशन करवाए जा चुके हैं।\n\n3. यह सेवा यात्रा कब और किस संस्था के साथ शुरू हुई थी?\nयह सेवा यात्रा वर्ष 2001 में पंचायती राज जन चेतना संस्थान के माध्यम से शुरू हुई थी, जो 2010 तक चली।\n\n4. वर्ष 2011 से शिविरों का आयोजन किस बैनर तले हो रहा है?\nसाल 2011 से ये शिविर कामधेनु गौशाला महादेवपुरा के बैनर तले आयोजित किए जा रहे हैं, जहां हर साल औसतन चार शिविर लगते हैं।\n\n5. शिविर में मरीजों को कौन-कौन सी सुविधाएं निशुल्क दी जाती हैं?\nमरीजों को एंबुलेंस, आंखों की जांच, ऑपरेशन, लेंस प्रत्यारोपण, दवाइयां, चश्मा, भोजन, नाश्ता और अस्पताल में ठहरने की सुविधा पूरी तरह निशुल्क मिलती है।\n\n6. मरीजों के इलाज में किस नेत्र अस्पताल का सहयोग लिया जाता है?\nमरीजों के उपचार और ऑपरेशन के लिए जयपुर स्थित केलगिरी नेत्र चिकित्सालय का सहयोग लिया जाता है।\n\n7. अस्पताल में मरीजों की देखभाल कौन करता है?\nशिव शंकर प्रजापति खुद मरीजों के साथ तीमारदार बनकर अस्पताल में रहते हैं और भर्ती होने से लेकर करीब चार दिन बाद डिस्चार्ज होने तक उनकी देखभाल करते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nशिव शंकर प्रजापति की 25 वर्षों की यह यात्रा साबित करती है कि संसाधनों के अभाव के बावजूद सच्ची निष्ठा से समाज में व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।\n\n• समर्पण की निरंतरता: समाजसेवा किसी एक दिन का काम नहीं, बल्कि लंबा संकल्प है। प्रजापति ने बिना रुके ढाई दशकों तक इस सेवा को जारी रखकर 1000 से अधिक लोगों की जिंदगी बदली है।\n• जिम्मेदारी का विस्तार: केवल मरीज को अस्पताल भेजने तक नहीं, बल्कि चार दिन तक तीमारदार बनकर साथ रहना सच्ची सहानुभूति का उदाहरण है। काम को अधूरा छोड़ने के बजाय अंत तक साथ निभाना ही वास्तविक नेतृत्व है।\n• संस्थागत साझेदारी: गौशाला और विशेषज्ञ नेत्र अस्पताल के साथ मिलकर काम करने से बड़े पैमाने पर निशुल्क सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकी हैं। साझा प्रयासों से बड़े सामाजिक लक्ष्य आसानी से हासिल होते हैं।\n• आत्मसम्मान की बहाली: किसी की आंखों की रोशनी लौटाना केवल इलाज नहीं, बल्कि उसे सम्मान और स्वावलंबन वापस देना है। जरूरतमंदों की बुनियादी लाचारी को समझकर किया गया कार्य सबसे पुण्यकारी होता है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-12",
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