क्षारीय जमीन के सुधार पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दे रही सरकार, कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ ने बताई प्रक्रिया खेत की क्षारीयता दूर कर फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि विभाग जिप्सम पर 50 प्रतिशत का अनुदान दे रहा है। किसान मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट की जीआर वैल्यू के आधार पर अधिकतम 2 हेक्टेयर जमीन के लिए आवेदन कर सकते हैं। खेती की जमीन में क्षारीयता बढ़ने की वजह से फसलों की पैदावार प्रभावित होना एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस समस्या से निपटने और मिट्टी की उर्वरता बहाल करने के लिए कृषि विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार द्वारा मृदा सुधारक के रूप में जिप्सम का उपयोग करने वाले किसानों को 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए खेत की मिट्टी के सुधार में आने वाली लागत को कम करना है ताकि वे अपनी जमीन की उत्पादन क्षमता में सुधार कर सकें। इस योजना के अंतर्गत एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र तक ही सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाएगा। वैज्ञानिक तरीके से होगा जिप्सम की मात्रा का चयन इस योजना की सबसे खास बात यह है कि जिप्सम का अनुदान किसी सामान्य या मनमाने अनुमान के आधार पर नहीं दिया जाएगा। इसके लिए खेत की मिट्टी की वैज्ञानिक जांच कराना अनिवार्य होगा। मृदा परीक्षण के बाद जो रिपोर्ट प्राप्त होगी, उसमें जिप्सम की आवश्यक मात्रा को जीआर वैल्यू (GR Value) के रूप में दर्शाया जाएगा। इसी जीआर वैल्यू के आधार पर ही किसान अपने खेत में जिप्सम की सही खुराक तय कर सकेंगे। इस वैज्ञानिक पद्धति से खेतों में जरूरत से ज्यादा जिप्सम डालने की गलती से बचा जा सकेगा और मिट्टी सुधार का काम पूरी तरह व्यवस्थित ढंग से हो सकेगा। फसलों के विकास पर क्षारीय जमीन का प्रभाव कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ के अनुसार क्षारीय भूमि में मिट्टी की बनावट बिगड़ जाती है और उसमें मौजूद आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता बाधित होने लगती है। जब पौधों को सही मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिलते, तो उनकी वृद्धि और विकास की गति धीमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में जिप्सम एक बेहतरीन मृदा सुधारक के रूप में कार्य करता है और जमीन के स्वास्थ्य को सुधारता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर खेत की स्थिति अलग होती है, इसलिए बिना मिट्टी की जांच के अनुमान से जिप्सम का छिड़काव करना नुकसानदेह या बेअसर साबित हो सकता है। मृदा परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार उपयोग करने से खेती की लागत पर नियंत्रण रहता है और पैदावार में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। अनुदान दर और आवेदन की मुख्य शर्तें सरकार द्वारा तैयार की गई इस योजना के अंतर्गत जिलेवार तय की गई जिप्सम की कुल लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा अनुदान के रूप में किसान को मिलेगा। 2 हेक्टेयर की अधिकतम सीमा के कारण किसानों को अपने खेत के कुल क्षेत्रफल और मिट्टी जांच रिपोर्ट के अनुसार ही अपना आवेदन तैयार करना होगा। आवेदन के समय किसान को निर्धारित प्रपत्र में अपनी मांग दर्ज करनी होगी, जिसमें क्षारीयता सुधार के लिए जरूरी जिप्सम की मात्रा और जीआर वैल्यू का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। आवेदन पत्र में सही और प्रामाणिक जानकारी देना अनिवार्य है क्योंकि विभाग द्वारा जिप्सम की स्वीकृत मात्रा का निर्धारण खेत की वास्तविक स्थिति के आधार पर ही किया जाएगा। आवेदन के लिए इन अधिकारियों से करें संपर्क यह योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए बेहद मददगार साबित होगी जिनकी जमीन की उत्पादन क्षमता क्षारीयता की वजह से घट गई है। कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान रिपोर्ट की सिफारिशों का सही पालन करके ही इस सुविधा का लाभ उठाएं। योजना का लाभ उठाने, आवेदन प्रपत्र प्राप्त करने और नियम एवं पात्रता की विस्तृत जानकारी के लिए किसान अपने जिले के संयुक्त निदेशक कृषि, सहायक निदेशक कृषि अथवा अपने क्षेत्र के स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक से सीधे संपर्क स्थापित कर सकते हैं। इसका आप पर असर भारत में: क्षारीय जमीन की समस्या से जूझ रहे किसानों की खेती की लागत घटेगी और मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी। किसानों के लिए: मिट्टी की जांच कराकर 50 प्रतिशत सब्सिडी पर जिप्सम प्राप्त कर किसान 2 हेक्टेयर तक की जमीन को फिर से उपजाऊ बना सकते हैं। सवाल-जवाब 1. जिप्सम पर सरकार कितना अनुदान दे रही है? कृषि विभाग की योजना के तहत किसानों को निर्धारित दर का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। 2. एक किसान अधिकतम कितनी जमीन के लिए जिप्सम सब्सिडी का लाभ ले सकता है? प्रत्येक किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए इस अनुदान योजना का लाभ उठा सकता है। 3. जिप्सम की आवश्यकता और मात्रा का निर्धारण कैसे होता है? खेत की मिट्टी की जांच कराने के बाद रिपोर्ट में दर्ज जीआर वैल्यू (GR Value) के आधार पर जिप्सम की सटीक मात्रा तय की जाती है। 4. जिप्सम सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किन अधिकारियों से संपर्क करना होगा? किसान अपने जिले के संयुक्त निदेशक कृषि, सहायक निदेशक कृषि या स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। https://trendkia.com/rajasthan/kshariya-jamina-ke-sudhara-para-50-pratishata-sabsidi-de-rahi-sarakara-krishi-visheshajna-dinesh-jakhar-ne-batai-prakriya-18651 TrendKia — Har trend, sabse pehle.