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  "type": "article",
  "title": "लक्जरी कार सौदे में 17 लाख हड़पने वाला आरोपी रामचंद्र नोएडा के सूरजपुर से पकड़ा गया",
  "summary": "झुंझुनूं कोतवाली पुलिस ने डिफेंडर-130 गाड़ी का झांसा देकर 17 लाख रुपये की ठगी करने के आरोपी रामचंद्र को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया है। करीब डेढ़ साल से फरार चल रहे आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।",
  "content": "झुंझुनूं कोतवाली पुलिस ने लक्जरी एसयूवी दिलाने के नाम पर 17 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। लंबे समय से कानून की गिरफ्त से दूर भाग रहे आरोपी रामचंद्र को पुलिस टीम ने आखिरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सूरजपुर, नोएडा से गिरफ्तार कर लिया है। करीब डेढ़ साल तक पुलिस को चकमा देने वाला यह आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। मामले की जांच कर रही झुंझुनूं पुलिस ने उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से न्यायिक आदेश के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।\n\nरेंज रोवर डिफेंडर के सौदे से शुरू हुआ था धोखाधड़ी का खेल\nइस पूरे प्रकरण की औपचारिक शुरुआत 7 फरवरी 2025 को हुई थी, जब राजस्थान हर्बल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर साजिद दीवान ने झुंझुनूं के कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में स्पष्ट किया गया था कि उनकी कंपनी को आधिकारिक कार्यों के लिए एक नई रेंज रोवर डिफेंडर-130 गाड़ी खरीदनी थी। इस वाहन की खरीद के सिलसिले में कंपनी ने नोएडा स्थित अव्यान ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड के संचालक रामचंद्र से संपर्क साधा था। बातचीत के दौरान आरोपी रामचंद्र ने उक्त लक्जरी वाहन का कुल मूल्य 1 करोड़ 67 लाख 37 हजार 89 रुपये तय किया था।\n\nसौदा तय होने के बाद आरोपी रामचंद्र ने कंपनी प्रबंधन को भरोसा दिलाया था कि भुगतान की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होते ही अधिकतम छह महीने के भीतर वह गाड़ी की डिलीवरी सुनिश्चित कर देगा। इस भरोसे पर राजस्थान हर्बल इंटरनेशनल के आधिकारिक बैंक खाते से आरोपी के बताए गए बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से दो किस्तों में धनराशि भेजी गई। 6 मार्च 2024 को पहली किस्त के रूप में 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि 8 मार्च 2024 को दूसरी किस्त के तौर पर 10 लाख रुपये भेजे गए। इस प्रकार कुल 17 लाख रुपये आरोपी के खाते में जमा करा दिए गए।\n\nतय समय पर डिलीवरी नहीं मिली, पैसे मांगने पर किया इनकार\nरकम हासिल करने के बाद जब छह महीने की तय समयावधि बीत गई, तब भी वाहन की कोई डिलीवरी नहीं दी गई। जब शिकायतकर्ता साजिद दीवान ने वाहन न मिलने पर अपनी जमा कराई गई 17 लाख रुपये की अग्रिम राशि वापस मांगी, तो रामचंद्र ने सीधे तौर पर पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। अपनी रकम डूबती देख पीड़ित पक्ष ने कोतवाली थाने का रुख किया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच पड़ताल शुरू की। पुलिस टीमों ने बैंक खातों के लेनदेन, आरटीजीएस विवरण और संबंधित तकनीकी साक्ष्यों को कब्जे में लेकर आगे की जांच को गति दी।\n\nजंतर-मंतर पर मंच साझा करते दिखा था आरोपी\nशहर कोतवाल श्रवण मील के अनुसार आरोपी रामचंद्र गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार दिल्ली और नोएडा के बीच अपने ठिकाने बदलता रहा। पुलिस की विशेष टीमें उसकी लोकेशन को ट्रैक करते हुए कई बार दबिश दे चुकी थीं। इस लंबी फरारी के दौरान जुलाई 2026 में पुलिस टीम को एक अहम सुराग मिला था और टीम लगभग आरोपी के करीब पहुंच गई थी। हालांकि, उसी दौरान आरोपी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित सीजेपी के एक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के दौरान मंच पर दिखाई दिया।\n\nउस समय जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल पर भारी संख्या में छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी जमा थे। मौके की नजाकत और वहां किसी भी तरह की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस टीम ने उस वक्त मंच पर जाकर त्वरित गिरफ्तारी की कार्रवाई करने से परहेज किया। बाद में सामने आई तस्वीरों और वीडियो में आरोपी सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके तथा संगठन से जुड़े अन्य लोगों के साथ मंच पर उपस्थित देखा गया। पुलिस ने इन सभी वीडियो फुटेज और तस्वीरों को भी अपनी विवेचना व केस डायरी का हिस्सा बनाया।\n\nस्कूलों के दौरों और मुखबिर तंत्र की मदद से सूरजपुर में दबोचा गया\nसार्वजनिक प्रदर्शन के समाप्त हो जाने के बाद भी पुलिस की विशेष टीम ने आरोपी की तलाश बंद नहीं की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी कई स्कूलों में जाकर निरीक्षण जैसी गतिविधियों में शामिल हुआ था, जिससे जुड़े फुटेज भी पुलिस के हाथ लगे थे। पुलिस की निगरानी टीमों ने आरोपी के संभावित रास्तों, संपर्कों और छिपने की जगहों पर लगातार नजर रखी। अंततः मुखबिर तंत्र से मिली सटीक सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस को खबर मिली कि आरोपी सूरजपुर, नोएडा में मौजूद है।\n\nसूचना की पुष्टि होते ही झुंझुनूं पुलिस की टीम ने तुरंत दबिश देकर रामचंद्र पुत्र प्रेमलाल को सूरजपुर से हिरासत में ले लिया। विधिवत गिरफ्तारी के उपरांत आरोपी को नोएडा से सीधे झुंझुनूं लाया गया। कोतवाली थाने में गहन पूछताछ की प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से अदालत के आदेशानुसार उसे सीधे जेल भेज दिया गया।\n\nइसका आप पर असर\nवाहन खरीद के नाम पर अग्रिम राशि देकर ठगी का शिकार होने से बचने के लिए सतर्कता और कानूनी सुरक्षा जरूरी है।\n\n• भारत में: लक्जरी अथवा किसी भी वाहन की खरीद के लिए अनाधिकृत बिचौलियों या अनधिकृत डीलरों को मोटी अग्रिम रकम ट्रांसफर करने से बचना चाहिए। किसी भी वित्तीय सौदे से पहले संबंधित डीलरशिप के आधिकारिक पंजीकरण और वाहन आवंटन दस्तावेजों की गहन जांच अनिवार्य रूप से करें।\n• झुंझुनूं में: स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों और व्यक्तिगत खरीदारों को भारी लेन-देन करते समय अधिकृत बैंकिंग व विधिक अनुबंधों का सहारा लेना चाहिए। अगर किसी भी सौदे में तय अवधि के बाद डिलीवरी न मिले या धोखाधड़ी का अंदेशा हो, तो तुरंत कोतवाली पुलिस अथवा स्थानीय साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।\n• न्यायिक कार्यवाही: पुलिस द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत सुनिश्चित होने से पीड़ित कंपनी की राशि वसूली प्रक्रिया को कानूनी गति मिलेगी। अदालती प्रक्रिया के माध्यम से धोखाधड़ी के मामलों में संपत्ति कुर्की और रिकवरी के रास्ते खुलते हैं।\n• व्यावसायिक सावधानी: कॉर्पोरेट खरीद के मामलों में छह महीने जैसे लंबे डिलीवरी वादों के बदले पूरा अग्रिम भुगतान करने के बजाय बैंक गारंटी या एस्क्रो खातों का उपयोग करें। यह प्रक्रिया किसी भी पक्ष द्वारा वादे से मुकरने की स्थिति में पूंजी के नुकसान को रोकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह धोखाधड़ी और गिरफ्तारी लक्जरी गाड़ी की खरीद पर फर्जी वादों और उसके बाद डेढ़ साल तक पुलिस को चकमा देने की कोशिशों का नतीजा है।\n\n• सीधा कारण: आरोपी ने 1.67 करोड़ से अधिक मूल्य की रेंज रोवर डिफेंडर-130 गाड़ी छह महीने में उपलब्ध कराने का वादा करके 17 लाख रुपये अग्रिम लिए थे। तय समय बीत जाने पर न तो वाहन दिया गया और न ही पीड़ित पक्ष के पैसे लौटाए गए, जिससे यह आपराधिक मामला बना।\n• गिरफ्तारी में देरी: आरोपी करीब डेढ़ साल तक दिल्ली और नोएडा में ठिकाने बदलकर पुलिस से बचता रहा। जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान भीड़ और संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण पुलिस ने उस समय गिरफ्तारी टाल दी थी।\n• पकड़े जाने की परिस्थितियां: पुलिस ने आरोपी की गतिविधियों, स्कूलों के दौरों के फुटेज और तकनीकी निगरानी को निरंतर जारी रखा। आखिरकार मुखबिर तंत्र से सूरजपुर, नोएडा में उसकी मौजूदगी की सटीक पुष्टि हुई, जिसके बाद विशेष टीम ने उसे दबोच लिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आरोपी रामचंद्र को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?\nरामचंद्र को एक कंपनी से रेंज रोवर डिफेंडर-130 गाड़ी दिलाने के नाम पर 17 लाख रुपये की अग्रिम रकम लेकर धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।\n\n2. यह मामला कब और कहां दर्ज कराया गया था?\nयह मामला 7 फरवरी 2025 को राजस्थान हर्बल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर साजिद दीवान की शिकायत पर झुंझुनूं कोतवाली थाने में दर्ज किया गया था।\n\n3. पीड़ित कंपनी ने आरोपी को कुल कितने रुपये और कब दिए थे?\nकंपनी ने आरटीजीएस के जरिए 6 मार्च 2024 को 7 लाख रुपये और 8 मार्च 2024 को 10 लाख रुपये देकर कुल 17 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे।\n\n4. वाहन की कुल कीमत कितनी तय की गई थी?\nआरोपी रामचंद्र ने डिफेंडर-130 वाहन की कुल कीमत 1 करोड़ 67 लाख 37 हजार 89 रुपये बताई थी।\n\n5. जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया था?\nजंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में छात्रों और प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ मौजूद थी, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते पुलिस ने उस समय कार्रवाई टाल दी थी।\n\n6. आरोपी रामचंद्र को आखिरकार कहां से पकड़ा गया?\nझुंझुनूं कोतवाली पुलिस की टीम ने 28 सितंबर को आरोपी को सूरजपुर, नोएडा से गिरफ्तार किया और बाद में अदालत के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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    "झुंझुनूं पुलिस",
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