लंबी दूरी की रेलगाड़ियों में सोने और नकदी पर हाथ साफ करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के चार शातिर बीकानेर में गिरफ्तार बीकानेर में जीआरपी ने ट्रेनों के वातानुकूलित कोचों में सफर कर रहे यात्रियों को निशाना बनाने वाले हरियाणा के चार बदमाशों को दबोचकर नकदी, आभूषण और बोलेरो गाड़ी बरामद की है। रेलगाड़ियों के वातानुकूलित डिब्बों में सफर करने वाले मुसाफिरों को झांसा देकर उनके कीमती सामान पर हाथ साफ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह की करतूतों पर बीकानेर में राजकीय रेलवे पुलिस ने शिकंजा कसा है। पुलिस दल ने इस सिलसिले में हरियाणा के रहने वाले चार शातिर चोरों को हिरासत में ले लिया है। इन पकड़े गए आरोपियों के पास से वारदात में चुराए गए सोने व चांदी के जेवर, पांच लाख रुपये की नकदी और घटना को अंजाम देने के दौरान भागने में काम में लाई जाने वाली एक बोलेरो गाड़ी भी बरामद कर ली गई है। नागपुर से सफर कर रही मां और बेटी बनी थीं शिकार इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब नागपुर से वापसी कर रही एक मां और उनकी बेटी मदुरई बीकानेर एक्सप्रेस के एसी कोच में यात्रा कर रही थीं। सफर समाप्त होने पर जब वे अपने घर पहुंचीं और उन्होंने अपना सामान संभाला, तो उनके होश उड़ गए। उनके बैग के भीतर रखे लगभग 65 से 70 तोला सोने के आभूषण, चांदी के जेवरात और आठ लाख रुपये की नकद रकम पूरी तरह नदारद थी। इस चोरी हुए जेवरात का कुल मूल्य करीब एक करोड़ रुपये आंका गया था। परिवार ने तत्काल बीकानेर जीआरपी थाने का रुख किया और वहां 14 सितंबर को अज्ञात बदमाशों के विरुद्ध औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसी गिरोह द्वारा अणुव्रत एक्सप्रेस में भी महिला यात्रियों के सामान से बड़ी तादाद में जेवर और नकदी पार करने की बात सामने आई थी। जांच के लिए विशेष दल का गठन और गिरोह का पर्दाफाश इस सनसनीखेज वारदात के सामने आने के उपरांत जीआरपी थानाधिकारी नेहा राजपुरोहित ने जांच को तेजी से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम ने रेलगाड़ी के आरक्षण चार्ट, तकनीकी साक्ष्यों और पुराने आपराधिक इतिहास को बारीकी से खंगालना शुरू किया। तकनीकी विश्लेषण और लगातार सुराग जुटाने के बाद पुलिस ने चार आरोपियों को दबोच लिया, जिनकी पहचान वीरेंद्र कुमार उर्फ पिल्ला, सुरेंद्र कुमार, सुनील कुमार और रणवीर के रूप में हुई है। प्राथमिक पूछताछ के दौरान इन अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे छह से सात लोगों की टोली बनाकर रेलगाड़ियों में ऐसी वारदातों को अंजाम देते थे। स्टेशन आने से पहले घेरकर ध्यान भटकाने का अनूठा तरीका पूछताछ में यह तथ्य भी उजागर हुआ कि यह गिरोह लंबी दूरी की रेलगाड़ियों में पूर्व नियोजित तरीके से वारदात करता था। जब भी कोई पड़ाव या रेलवे स्टेशन नजदीक आने वाला होता था और यात्री अपने सामान को लेकर कोच के मुख्य द्वार या गलियारे की ओर बढ़ते थे, तभी गिरोह के सदस्य सहायता करने के बहाने उनके इर्द-गिर्द जमा हो जाते थे। दल के कुछ सदस्य मुसाफिरों से बातचीत कर उनका ध्यान पूरी तरह भटका देते थे, जबकि उसी समय उनके अन्य साथी मास्टर चाबी, पेचकस, ब्लेड अथवा अन्य धारदार औजारों की मदद से यात्रियों के बैग खोलकर जेवरात और नकदी चुरा लेते थे। इसके बाद बदमाश तुरंत अगले स्टेशन पर उतर जाते थे, जहां सड़क मार्ग पर साथ-साथ चल रही उनकी बोलेरो गाड़ी उन्हें लेकर सुरक्षित फरार हो जाती थी। फिलहाल पुलिस इन पकड़े गए चारों आरोपियों से गहन पूछताछ कर उनके अन्य साथियों और पुरानी वारदातों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। इसका आप पर असर रेलगाड़ी में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह घटना सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अहम चेतावनी पेश करती है। • देशभर के रेल यात्रियों के लिए: लंबी दूरी के सफर में अपने बैग और जेवरात की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखें। किसी भी अनजान व्यक्ति को स्टेशन आने पर अपना सामान छूने या उठाने की अनुमति न दें। • बीकानेर व राजस्थान क्षेत्र में: स्थानीय रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा गश्त और टिकट चेकिंग व्यवस्था और सख्त होने की संभावना है। सफर के दौरान यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध दिखे तो तुरंत जीआरपी या रेलवे हेल्पलाइन पर सूचना दें। • सफर में आभूषण ले जाने वालों के लिए: ट्रेन यात्रा के दौरान बड़ी मात्रा में सोना और नकदी साथ लेकर चलने से बचें। यदि आभूषण ले जाना अपरिहार्य हो तो उसे हमेशा अपने साथ लगे छोटे पर्स या शरीर के पास रखें। • वारदात की स्थिति में: चोरी या छेड़छाड़ का अंदेशा होते ही तुरंत संबंधित जीआरपी थाने में बिना देरी किए शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत दर्ज होने से तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर माल बरामदगी की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा क्यों हुआ यह घटना संगठित अंतरराज्यीय गिरोहों द्वारा लंबी दूरी की ट्रेनों के वातानुकूलित कोचों में यात्रियों की असावधानी का अनुचित लाभ उठाने के कारण संभव हुई। • सीधा कारण: स्टेशन आने से ठीक पहले जब यात्री कोच के गेट या गलियारे में सामान लेकर खड़े होते थे, तब गिरोह के सदस्य मदद के बहाने उनका ध्यान भटकाकर मास्टर चाबी और ब्लेड से बैग खोल लेते थे। • वारदात को आसान बनाने वाली परिस्थितियां: वातानुकूलित कोचों में यात्रा कर रहे लोगों द्वारा भारी मात्रा में आभूषण और नकद रकम रखना और स्टेशन आते समय भीड़भाड़ में अपरिचितों पर भरोसा करना गिरोह के काम आया। इसके अलावा सड़क मार्ग पर समानांतर चल रही बोलेरो गाड़ी ने उन्हें तुरंत भागने की सुविधा दी। • पृष्ठभूमि और पिछला रिकॉर्ड: यह गिरोह पूर्व में भी अणुव्रत एक्सप्रेस और अन्य रेलगाड़ियों में इसी कार्यप्रणाली का इस्तेमाल कर कई महिलाओं के जेवर और नकदी उड़ा चुका था। • जांच में सामने आया पहलू: पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह के छह से सात सदस्य आपस में काम बांटकर योजनाबद्ध तरीके से वारदातों को अंजाम देते रहे हैं। सवाल-जवाब 1. बीकानेर जीआरपी ने किस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है? जीआरपी ने रेलगाड़ियों में यात्रियों के बैग से सोने-चांदी के जेवरात और नकदी चुराने वाले हरियाणा के अंतरराज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। 2. पीड़ित मां-बेटी से कितनी नकदी और जेवरात की चोरी हुई थी? नागपुर से लौट रही मां-बेटी के बैग से लगभग 65 से 70 तोला सोने के आभूषण, चांदी के जेवर और 8 लाख रुपये की नकदी चोरी हुई थी, जिसकी कुल कीमत करीब 1 करोड़ रुपये थी। 3. पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद किया है? पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषण, 5 लाख रुपये की नकदी और वारदात में इस्तेमाल की गई बोलेरो गाड़ी बरामद की है। 4. यह गिरोह रेलगाड़ी में यात्रियों को कैसे अपना शिकार बनाता था? स्टेशन आने से पहले जब यात्री गेट के पास आते थे, तो गिरोह के सदस्य सहायता के बहाने ध्यान भटकाते थे और साथी मास्टर चाबी व औजारों से बैग खोलकर जेवर निकाल लेते थे। 5. गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम क्या हैं? पकड़े गए चारों आरोपियों के नाम वीरेंद्र कुमार उर्फ पिल्ला, सुरेंद्र कुमार, सुनील कुमार और रणवीर हैं। https://trendkia.com/rajasthan/lnbi-duri-ki-relagariyon-men-sone-aura-nakadi-para-hatha-sapha-karane-vale-antararajyiya-giroha-ke-chara-shatira-bikaner-men-girap-37382 TrendKia — Har trend, sabse pehle.