# मकराना के 99 प्रतिशत कैल्शियम वाले संगमरमर से खरनाल में संवर रहा वीर तेजाजी का भव्य धाम

> राजस्थान के नागौर स्थित खरनाल में करीब 200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज का भव्य मंदिर तैयार हो रहा है, जिसमें सीमेंट के बिना तांबे और पीतल की इंटरलॉकिंग से मकराना मार्बल जोड़ा जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/makrana-ke-99-pratishata-calcium-vale-sangarmarmar-se-kharnal-men-snvara-raha-veer-tejaji-ka-bhavya-dham-43070 · **Language:** Hindi
**Tags:** वीर तेजाजी मंदिर, खरनाल नागौर, मकराना मार्बल, राजस्थान मंदिर निर्माण, शिल्पी रमजान, मंदिर वास्तुकला

राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गांव में लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की पावन जन्मस्थली पर एक अद्वितीय और भव्य तीर्थ स्थल आकार ले रहा है। देश भर के श्रद्धालुओं के बीच यह नया निर्माण अपनी बेमिसाल वास्तुकला, पारंपरिक भारतीय शिल्प और आधुनिक इंजीनियरिंग के संतुलन के कारण व्यापक चर्चा बटोर रहा है। पूरे परिसर के निर्माण कार्य पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान तय किया गया है। इस निर्माण की मुख्य पहचान यह है कि पूरी संरचना में किसी भी अन्य पत्थर या मिश्रित सामग्री की जगह सिर्फ मकराना के शुद्ध सफेद संगमरमर का ही प्रयोग किया जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध मकराना मार्बल की स्वाभाविक चमक और मजबूती इस पूरे मंदिर परिसर को एक अलौकिक रूप प्रदान कर रही है।

## अयोध्या के शिल्पकार रमजान के हाथों में तराशने की कमान
इस ऐतिहासिक मंदिर के निर्माण और नक्काशी की निगरानी देश के बेहद अनुभवी शिल्पियों के हाथों में सौंपी गई है। अयोध्या में भगवान रामलला के भव्य गर्भगृह के निर्माण कार्य में अपने बेजोड़ हुनर का प्रदर्शन कर चुके मकराना के जाने-माने शिल्पी रमजान इस पूरे प्रोजेक्ट के मुख्य शिल्पी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पत्थरों को तराशने से लेकर दीवारों और खंभों पर बारीक कलाकृतियां उकेरने का काम उनकी सीधी देखरेख में चल रहा है। निर्माण प्रगति की बात करें तो अब तक पूरे मंदिर का करीब 35 से 40 प्रतिशत काम मुकम्मल हो चुका है। बेस और मुख्य ढांचे के बाद अब अगले चरण में मंदिर के भव्य शिखर, विशाल गुंबद और ऊपरी संरचना को स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

## सीमेंट और बजरी के बिना तांबे-पीतल की इंटरलॉकिंग तकनीक
मंदिर की संरचना को सदियों तक अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इसकी नींव बेहद सुदृढ़ रखी गई है। धरातल पर लगभग 32 फीट गहरी मजबूत नींव तैयार की गई है, जिसका करीब 25 फीट हिस्सा जमीन के अंदर सुरक्षित है जबकि 7 फीट हिस्सा सतह से ऊपर उठाया गया है। इसी आधारशिला के ऊपर अब तक मंदिर का लगभग 20 फीट ऊंचा मुख्य ढांचा खड़ा किया जा चुका है। निर्माण प्रक्रिया की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि इसमें सीमेंट, रेत या बजरी का रत्ती भर भी उपयोग नहीं किया गया है। प्राचीन भारतीय मंदिर निर्माण शैली को अपनाते हुए मकराना संगमरमर की भारी शिलाओं को तांबे और पीतल की मजबूत पत्तियों के जरिए इंटरलॉकिंग तकनीक से एक-दूसरे के साथ मजबूती से जोड़ा जा रहा है, जिससे भूकंप या मौसमी बदलावों का असर ढांचे पर न पड़े।

## 108 फीट की ऊंचाई और 306 कलात्मक स्तंभों का वैभव
परियोजना के मानचित्र के अनुसार, मुख्य मंदिर तीन मंजिला होगा और इसकी कुल ऊंचाई लगभग 108 फीट प्रस्तावित की गई है। दूर से ही दिखाई देने वाला इसका गगनचुंबी शिखर श्रद्धालुओं को सहज ही आकर्षित करेगा। पूरे मंदिर में कुल 306 कलात्मक स्तंभ स्थापित किए जा रहे हैं। पत्थरों की तैयारी के लिए मकराना में एक विशेष कार्यशाला बनाई गई है, जहां मुख्य शिल्पी रमजान के मार्गदर्शन में करीब 100 कुशल कारीगर लगातार संगमरमर को तराशने में जुटे हैं। इसके साथ ही खरनाल स्थित मुख्य कार्यस्थल पर भी 15 से 20 विशेषज्ञ कारीगर पत्थरों को सही क्रम में बिठाने और धातु की इंटरलॉकिंग जोड़ने का काम कर रहे हैं। अब तक मकराना की खदानों से तराशकर लगभग 17 से 18 हजार घनफीट मार्बल खरनाल पहुंचाया जा चुका है, जबकि पूरे निर्माण में कुल मिलाकर लगभग एक लाख घनफीट सफेद संगमरमर की खपत होने का अनुमान है।

## सोमनाथ, अयोध्या और दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली का अनूठा संगम
खरनाल में बन रहे इस पावन धाम की बनावट में देश के कई प्रतिष्ठित तीर्थों की स्थापत्य कला का सुंदर समन्वय दिखाई देगा। मंदिर का मुख्य गर्भगृह ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर की भव्य वास्तुकला से प्रेरित होकर गढ़ा जा रहा है, तो वहीं इसके गगनचुंबी शिखर में सांवरिया सेठ मंदिर की भव्यता और दिव्यता समाहित की जा रही है। मंदिर के भव्य सिंहद्वार यानी मुख्य प्रवेश द्वार की रूपरेखा अयोध्या के राम मंदिर के मुख्य द्वार की बनावट से मेल खाती तैयार की गई है। इसके अलावा 306 खंभों पर दक्षिण भारत की प्रसिद्ध द्रविड़ शैली की नक्काशी देखने को मिलेगी, जिन पर लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज के त्याग, शौर्य और चमत्कारों से जुड़े प्रसंगों को सजीव रूप में उकेरा जा रहा है।

## 99 प्रतिशत कैल्शियम की शुद्धता, पीला नहीं पड़ेगा संगमरमर
मुख्य शिल्पी रमजान ने इस पत्थर की विशेषताओं पर रोशनी डालते हुए स्पष्ट किया है कि मंदिर में लगाया जा रहा मकराना का संगमरमर अत्यंत दुर्लभ और उच्च कोटि का है। इस सफेद पत्थर में लगभग 99 प्रतिशत प्राकृतिक कैल्शियम मौजूद है, जबकि लोहे यानी आयरन का अंश इसमें बिल्कुल नगण्य है। लोहे का अंश न होने के कारण हवा और पानी के संपर्क में आने पर भी इस पत्थर पर पीलापन नहीं चढ़ता। इसकी सबसे बड़ी वैज्ञानिक खूबी यह है कि समय बीतने के साथ, लगातार घिसाई और जल अभिषेक अथवा धुलाई से इसकी स्वाभाविक सफेदी और चमक कम होने के बजाय और ज्यादा निखरती जाती है। आगामी वर्षों में यह धाम देश के प्रमुख सांस्कृतिक और वास्तुशिल्प केंद्रों में विशिष्ट पहचान दर्ज करेगा।

## इसका आप पर असर
खरनाल में बन रहे इस भव्य मंदिर से श्रद्धालुओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर लाभ मिलने जा रहा है।

- **राजस्थान में:** नागौर जिले के खरनाल में विश्वस्तरीय तीर्थ स्थल विकसित होने से क्षेत्रीय धार्मिक पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य कारोबार में उल्लेखनीय तेजी आएगी। रोजगार और छोटे व्यापारिक अवसरों में वृद्धि होने से स्थानीय युवाओं और दुकानदारों को प्रत्यक्ष आय का जरिया मिलेगा।
- **भारत में:** देश भर से वीर तेजाजी महाराज के अनुयायियों को बिना किसी सीमेंट के पारंपरिक धातु इंटरलॉकिंग से बने मकराना संगमरमर के इस अनूठे वास्तुशिल्प का दर्शन करने का अवसर मिलेगा। प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला और शुद्ध मकराना मार्बल के प्रति शोधकर्ताओं और स्थापत्य प्रेमियों का आकर्षण बढ़ेगा।
- **शिल्पकला क्षेत्र:** मकराना के पारंपरिक संगमरमर कारीगरों और नक्काशी विशेषज्ञों के कौशल को राष्ट्रीय स्तर पर नया सम्मान और सतत काम प्राप्त होगा। धातु इंटरलॉकिंग जैसी पारंपरिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रयोग भविष्य के विरासत स्मारकों के निर्माण में उपयोगी मानक स्थापित करेगा।
- **आस्थावान यात्रियों के लिए:** तीन मंजिला 108 फीट ऊंचे परिसर में एक लाख घनफीट संगमरमर की भव्यता और 306 नक्काशीदार स्तंभ श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेंगे। मंदिर के पूरा होने के बाद दर्शनार्थियों के लिए दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान अधिक सुव्यवस्थित हो सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
खरनाल में लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज के जन्मस्थान को एक भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप देने के उद्देश्य से इस वृहद मंदिर का निर्माण शुरू किया गया है। सदियों तक सुरक्षित रहने वाले एक अद्वितीय स्मारक की आवश्यकता के कारण निर्माण समिति ने पारंपरिक निर्माण पद्धतियों को चुना।

- **शुद्ध मकराना मार्बल का चयन:** सफेद संगमरमर में 99 प्रतिशत कैल्शियम होने और लौह अंश नदारद रहने के कारण यह पत्थर धूप, वर्षा और समय के प्रभाव से कभी पीला नहीं पड़ता। इसी दीर्घकालिक चमक और मजबूती को देखते हुए किसी अन्य पत्थर के स्थान पर केवल मकराना मार्बल तय किया गया।
- **सीमेंट रहित प्राचीन इंटरलॉकिंग:** आधुनिक सीमेंट और कंक्रीट की उम्र 80 से 100 वर्ष मानी जाती है, जबकि प्राचीन धातु इंटरलॉकिंग तकनीक इमारतों को कई शताब्दियों तक सुरक्षित रखती है। तांबे और पीतल की पत्तियों से पत्थरों को बांधकर संरचना को प्राकृतिक झटकों से सुरक्षित बनाया जा रहा है।
- **प्रसिद्ध मंदिरों की शैलियों का समावेशन:** सोमनाथ, अयोध्या और सांवरिया सेठ जैसे प्रसिद्ध देवालयों के तत्वों को शामिल करके इस धाम को पूरे भारत की वास्तुशिल्प शैलियों का केंद्र बिंदु बनाने की योजना बनाई गई। खंभों पर दक्षिण भारतीय द्रविड़ नक्काशी जोड़कर इसे अखिल भारतीय सांस्कृतिक स्वरूप दिया गया।
- **अनुभवी शिल्पियों का नेतृत्व:** अयोध्या के राम मंदिर के गर्भगृह का काम कर चुके मकराना के शिल्पी रमजान की विशेषज्ञता मिलने से नक्काशी और पत्थरों की संरचना को तकनीकी रूप से सर्वोत्तम मानक मिल सके।

## सवाल-जवाब

### 1. खरनाल में बन रहे वीर तेजाजी मंदिर की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
इस भव्य मंदिर के निर्माण पर अनुमानित तौर पर करीब 200 करोड़ रुपये की लागत आने का आकलन किया गया है।

### 2. इस मंदिर के निर्माण में किस विशेष पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है?
मंदिर में किसी अन्य पत्थर के बजाय केवल विश्व प्रसिद्ध मकराना के 99 प्रतिशत कैल्शियम वाले सफेद संगमरमर का इस्तेमाल हो रहा है।

### 3. मंदिर की नक्काशी और पत्थरों को तराशने का कार्य किसकी देखरेख में हो रहा है?
अयोध्या के रामलला गर्भगृह निर्माण में योगदान दे चुके मकराना के प्रसिद्ध शिल्पी रमजान की देखरेख में यह कार्य चल रहा है।

### 4. क्या मंदिर के निर्माण में सीमेंट और कंक्रीट का उपयोग हो रहा है?
नहीं, इसमें सीमेंट और बजरी का इस्तेमाल नहीं हो रहा है; पत्थरों को तांबे और पीतल की पत्तियों से इंटरलॉकिंग तकनीक द्वारा जोड़ा जा रहा है।

### 5. मंदिर की प्रस्तावित ऊंचाई और इसमें लगने वाले खंभों की संख्या कितनी है?
तीन मंजिला मंदिर की कुल ऊंचाई करीब 108 फीट प्रस्तावित है और इसमें कुल 306 कलात्मक स्तंभ बनाए जा रहे हैं।

### 6. पूरे मंदिर के निर्माण में कुल कितना मार्बल लगेगा और अब तक कितना पहुंचा है?
पूरे निर्माण में करीब एक लाख घनफीट मार्बल इस्तेमाल होने का अनुमान है, जिसमें से लगभग 17 से 18 हजार घनफीट मार्बल खरनाल पहुंच चुका है।

### 7. मंदिर में लग रहे मकराना मार्बल की मुख्य विशेषता क्या है?
इसमें 99 प्रतिशत कैल्शियम और नगण्य लौह तत्व होने के कारण यह कभी पीला नहीं पड़ता और घिसाई व धुलाई से इसकी चमक बढ़ती जाती है।

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