# मकराना मार्बल से संवरेगा सीकर का विजय गणेश मंदिर, 1.25 करोड़ रुपये से तैयार होगा 33 फीट ऊंचा तीन मंजिला धाम

> सीकर के ऐतिहासिक विजय गणेश मंदिर का 1.25 करोड़ रुपये की लागत से कायाकल्प किया जा रहा है, जिसमें मकराना के सफेद संगमरमर की नक्काशी और तीन मंजिला नया ढांचा शामिल होगा।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
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**Tags:** सीकर विजय गणेश मंदिर, मकराना मार्बल, सीकर मंदिर जीर्णोद्धार, फतेहपुरी गेट सीकर, रावराजा देवीसिंह, राजस्थान मंदिर

राजस्थान के सीकर शहर में फतेहपुरी गेट के पास स्थित ऐतिहासिक विजय गणेश मंदिर को एक नया और भव्य स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और मंदिर परिसर में बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे धाम का कायाकल्प किया जा रहा है। इस पुनरुद्धार और विस्तार परियोजना पर कुल 1.25 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। पूरा निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद यह धार्मिक स्थल तीन मंजिला रूप ले लेगा, जिसकी कुल ऊंचाई लगभग 33 फीट होगी। इस नए ढांचे की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसमें राजस्थान के प्रसिद्ध मकराना के उच्च गुणवत्ता वाले सफेद मार्बल पत्थरों का व्यापक उपयोग किया जाएगा।

मंदिर प्रबंधन ने इस निर्माण योजना को भक्तों की सहूलियत के हिसाब से तैयार किया है। लगातार बढ़ती भीड़ को सुगमता से दर्शन कराने और उत्सवों के दौरान जगह की कमी को दूर करने के लिए परिसर का विस्तार बेहद जरूरी हो गया था। प्रबंधन की ओर से तय की गई समय-सीमा के अनुसार, आगामी दीपावली के त्योहार से पहले मंदिर के ग्राउंड फ्लोर यानी भूतल से जुड़े सभी जरूरी निर्माण कार्यों को पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि पूजा-अर्चना का क्रम बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलता रहे।

## मकराना के संगमरमर पर दिखेगी पारंपरिक कारीगरी
मंदिर के पुजारी पवन शर्मा के अनुसार, पूरे नए मंदिर भवन में संगमरमर का उत्कृष्ट कार्य देखने को मिलेगा। इसके निर्माण के लिए विशेष तौर पर मकराना की खदानों से निकाले गए सफेद पत्थरों को मंगाया जा रहा है। इन पत्थरों पर देवी-देवताओं की आकृतियां और विभिन्न पारंपरिक मांगलिक डिजाइनों की नक्काशी का जिम्मा भी मकराना के कुशल शिल्पकारों को ही सौंपा गया है। इन कारीगरों की पारंगत कला के माध्यम से मंदिर के स्वरूप में राजस्थानी स्थापत्य कला और प्राचीन भारतीय मंदिर वास्तु की जीवंत झलक दिखाई देगी।

पुजारी पवन शर्मा ने मंदिर की आंतरिक संरचना की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि नए मंदिर में भगवान गणेश की मूल और पवित्र प्रतिमा को उनके वर्तमान स्थान पर ही पूरी मर्यादा के साथ स्थापित रखा जाएगा। भूतल पर गणेशजी के मुख्य दर्शन होंगे, जबकि मंदिर की दूसरी मंजिल पर भगवान शिव की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके ऊपर तीसरी मंजिल पर मंदिर का भव्य और नक्काशीदार शिखर उभरेगा, जो पूरे मंदिर को करीब 33 फीट की आकर्षक ऊंचाई प्रदान करेगा।

## चिकनी मिट्टी और गोबर से निर्मित प्रतिमा की चमत्कारिक मान्यता
सीकर के विजय गणेश मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र यहां विराजमान गणेश प्रतिमा है। मंदिर के महंत के अनुसार, यह अनूठी प्रतिमा पत्थर या धातु की नहीं, बल्कि विशुद्ध चिकनी मिट्टी और गाय के गोबर के मिश्रण से गढ़ी गई है। इस प्राकृतिक रचना के बावजूद प्रतिमा के साथ जुड़ा अनुभव लोगों को विस्मित करता रहा है। बीते दशकों में जब भी भारी बारिश होती थी, तो फतेहपुरी गेट इलाके का जलभराव मंदिर परिसर में घुस जाता था। उस दौरान कई मर्तबा पानी का स्तर इतना बढ़ जाता था कि गणेशजी की यह प्रतिमा आधी से ज्यादा पानी में डूब जाती थी।

सामान्य तौर पर मिट्टी और गोबर से बनी कोई भी आकृति पानी में पूरी तरह घुल जाती है, लेकिन हफ्तों तक पानी में डूबे रहने के बाद भी इस प्रतिमा को तनिक भी नुकसान नहीं पहुंचा और न ही मिट्टी का क्षरण हुआ। स्थानीय भक्त इस घटना को विघ्नहर्ता का साक्षात चमत्कार मानते हैं। इसी अगाध श्रद्धा के कारण यहां स्थापित विनायक को विजय गणेश के नाम से पुकारा जाने लगा। आज भी सीकर शहर के अलावा शेखावाटी और आसपास के कई दूर-दराज के इलाकों से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां माथा टेकने पहुंचते हैं।

## 1840 के ऐतिहासिक संघर्ष और विजय की गाथा
मंदिर की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 19वीं सदी के सैन्य संघर्ष से जुड़ी हुई है। मंदिर के महंत के अनुसार, लगभग 1840 के दौर में सीकर के तत्कालीन रावराजा देवीसिंह और कासली ठिकाने के शासक राजा पूरणसिंह के मध्य तीखा विवाद और सैन्य संघर्ष छिड़ गया था। उस समय कासली के राजा पूरणसिंह हर रोज सीकर की परकोटा दीवार पर बने नानी गेट की दिशा में भाला फेंकते थे और देवीसिंह को खुले युद्ध की सीधी चुनौती दिया करते थे।

प्रतिद्वंद्वी की इस ललकार और बढ़ते तनाव के बाद रावराजा देवीसिंह ने कासली पर तोपों से भारी गोलाबारी करने के कई प्रयास किए, ताकि विपक्षी ठिकाने को शांत किया जा सके। हालांकि, आश्चर्यजनक रूप से सीकर की तोपों से दागा गया कोई भी गोला कासली की सीमा में नहीं गिर सका और सभी प्रयास लगातार विफल होते रहे। इस अप्रत्याशित विफलता से चिंतित होकर जब राजा देवीसिंह ने अपने राजपुरोहितों और विद्वानों से इसका गूढ़ कारण पूछा, तो उन्होंने रहस्य उजागर किया। विद्वानों ने बताया कि कासली गांव में भगवान गणेश की एक अत्यंत सिद्ध और चमत्कारी प्रतिमा मौजूद है, जो पूरे गांव के रक्षा कवच की तरह काम करती है और किसी भी विपत्ति को वहां फटकने नहीं देती।

## रथ रुकने वाली जगह पर स्थापित हुआ मंदिर
यह बात जानकर रावराजा देवीसिंह ने युद्ध के मैदान में विजय प्राप्ति के लिए स्वयं उन्हीं गणेशजी की शरण ली और श्रद्धापूर्वक जीत की मनौती मांगी। जनश्रुति के अनुसार, जब देवीसिंह ने संघर्ष में विजय हासिल कर ली, तो वे उस मंगलकारी गणेश प्रतिमा को ससम्मान कासली से लेकर सीकर के लिए रवाना हुए। विजय जुलूस जब सीकर के फतेहपुरी गेट पर पहुंचा, तो अचानक जिस रथ पर प्रतिमा रखी गई थी, वह वहीं ठिठक गया और रथ को खींच रहे घोड़ों ने आगे कदम बढ़ाने से पूरी तरह इनकार कर दिया।

राजा और उनके सहयोगियों ने इसे गजानन की स्वयं उसी स्थान पर विराजने की दैवीय इच्छा समझा और बिना विलंब किए उसी स्थल पर प्रतिमा की स्थापना कर मंदिर का निर्माण करवा दिया। चूंकि इस प्रतिमा के आशीर्वाद से युद्ध में निर्णायक विजय प्राप्त हुई थी, इसलिए इस विग्रह का नामकरण विजय गणेश किया गया। अब लगभग 1.25 करोड़ रुपये के व्यापक जीर्णोद्धार के बाद यही ऐतिहासिक धाम मकराना के पत्थरों की बारीक कारीगरी, दूसरी मंजिल पर भगवान शिव के विग्रह और 33 फीट ऊंचे शिखर के साथ एक नए वैभवशाली रूप में भक्तों के स्वागत के लिए तैयार हो रहा है।

## इसका आप पर असर
सीकर के ऐतिहासिक विजय गणेश मंदिर के पुनरुद्धार से स्थानीय श्रद्धालुओं और शेखावाटी आने वाले पर्यटकों के लिए दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव होंगे।

- **सीकर में:** मंदिर परिसर में भीड़ प्रबंधन और दर्शन व्यवस्था पहले से काफी सुगम हो जाएगी। दीपावली से पहले भूतल का काम पूरा होने से स्थानीय भक्तों को त्योहार के दौरान खुले और व्यवस्थित परिसर में पूजा करने की सुविधा मिलेगी।
- **राजस्थान में:** शेखावाटी के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर इस प्राचीन स्थल की पहचान और अधिक सुदृढ़ होगी। मकराना के पत्थरों से तैयार 33 फीट ऊंचा भव्य ढांचा राज्यभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- **कारीगरों और शिल्पकारों पर:** मकराना के पारंपरिक मूर्तिकारों और पत्थर तराशने वाले श्रमिकों को सीधा रोजगार मिला है। इस परियोजना के माध्यम से राजस्थान की सदियों पुरानी हाथ की नक्काशी कला को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन मिल रहा है।
- **श्रद्धालुओं की पूजा पद्धति पर:** अब भक्तों को एक ही परिसर में भगवान गणेश के साथ-साथ भगवान शिव के दर्शन का भी अवसर मिलेगा। दूसरी मंजिल पर शिव प्रतिमा की स्थापना से दोनों संप्रदायों के पर्वों पर श्रद्धालुओं के लिए यह एक बड़ा संयुक्त केंद्र बन जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती भीड़ और 19वीं सदी के ऐतिहासिक मंदिर ढांचे को सुरक्षित एवं भव्य रूप देने की जरूरत के चलते इस 1.25 करोड़ रुपये की परियोजना को शुरू किया गया है।

- **बढ़ती भीड़ का दबाव:** सीकर और आसपास के इलाकों से हर मंगलवार और पर्वों पर हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मौजूदा पुराने परिसर में जगह कम होने के कारण दर्शनार्थियों को घंटों संकरी जगह में खड़ा रहना पड़ता था, जिसके समाधान के लिए विस्तार अनिवार्य हो गया।
- **स्थापत्य को भव्य रूप देना:** प्राचीन मंदिर की संरचना को राजस्थानी वास्तुकला के अनुरूप संवारने का निर्णय लिया गया। मंदिर प्रबंधन ने मकराना के सफेद संगमरमर और 33 फीट ऊंचे तीन मंजिला शिखर के साथ इसे एक स्थायी और भव्य धार्मिक पहचान देने की रूपरेखा तैयार की।
- **शिव उपासना का समावेश:** श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और परिसर के सर्वांगीण विकास के तहत दूसरी मंजिल पर भगवान शिव की प्रतिमा जोड़ने की योजना बनाई गई। इस बहुमंजिला संरचना से एक ही स्थान पर दो प्रमुख देवों की पूजा संभव हो सकेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. सीकर के विजय गणेश मंदिर के जीर्णोद्धार पर कुल कितनी लागत आएगी?
इस मंदिर के जीर्णोद्धार और विस्तार कार्य पर कुल लगभग 1.25 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

### 2. नए मंदिर की ऊंचाई और मंजिलों की संख्या क्या होगी?
नया मंदिर तीन मंजिला होगा और इसकी कुल ऊंचाई लगभग 33 फीट रखी जाएगी।

### 3. मंदिर निर्माण में किस पत्थर का उपयोग किया जा रहा है?
मंदिर निर्माण और उस पर नक्काशी के लिए मकराना के प्रसिद्ध सफेद मार्बल पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है।

### 4. मंदिर की विभिन्न मंजिलों पर किन देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित होंगी?
भूतल पर भगवान गणेश की वर्तमान प्रतिमा रहेगी, दूसरी मंजिल पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित होगी और तीसरी मंजिल पर शिखर बनेगा।

### 5. विजय गणेश की मूल प्रतिमा किस सामग्री से बनी हुई है?
मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की यह पवित्र प्रतिमा चिकनी मिट्टी और गाय के गोबर के मिश्रण से बनी हुई है।

### 6. फतेहपुरी गेट पर ही यह मंदिर क्यों स्थापित किया गया था?
कासली से विजय के बाद लौटते समय रावराजा देवीसिंह का रथ फतेहपुरी गेट पर अचानक रुक गया था, जिसे ईश्वरीय संकेत मानकर वहीं मंदिर बनाया गया।

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