मकराना में पुष्पक विमान से होगा 80 फीट के रावण का दहन, 105 साल पुराने विजयादशमी उत्सव में जुड़ा नया रंग डीडवाना-कुचामन के मकराना में इस विजयादशमी पर 80 फीट ऊंचा रावण पुष्पक विमान पर खड़ा दिखेगा, जिसे 50 स्थानीय कलाकारों ने मिलकर तैयार किया है. राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में स्थित संगमरमर के प्रसिद्ध केंद्र मकराना में इस साल विजयादशमी का त्योहार एकदम अलग और अनूठे स्वरूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यहां स्थापित होने वाला लंकापति रावण का पुतला किसी साधारण चबूतरे या धरती पर टिके मंच पर खड़ा नहीं दिखेगा, बल्कि उसे पौराणिक पुष्पक विमान की प्रतिकृति पर विराजमान किया जा रहा है। बीते दशकों में यहां कभी गजराज तो कभी युद्ध रथ पर रावण को सजाने का रिवाज रहा था, मगर इस बार आकाश मार्ग से आने वाले दिव्य विमान का रूप देकर आयोजन समिति ने पूरे राज्य के श्रद्धालुओं और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक सदी से भी पुरानी परंपरा में पहली बार बढ़ी ऊंचाई मकराना की धरती पर विजयादशमी के इस विशाल जलसे को संचालित करने का दायित्व चारभुजा सेवा समिति निष्ठापूर्वक संभाल रही है। पुतले के निर्माण स्थल से लेकर मुख्य दशहरा मैदान तक सभी प्रबंध बहुत तीव्र गति से पूरे किए जा रहे हैं। चारभुजा सेवा समिति के संरक्षक ठाकुर चंद्रवीर सिंह चौहान और स्थानीय पार्षद एवं समिति के सचिव महेश पुजारी ने इस ऐतिहासिक पर्व की रूपरेखा सामने रखी है। उनके अनुसार, मकराना में सार्वजनिक रूप से रावण के दहन का सिलसिला सन 1919 में प्रारंभ हुआ था, जो बिना किसी रुकावट के आज तक अनवरत चला आ रहा है। भव्यता, जनभागीदारी और विशाल स्वरूप के आधार पर यह उत्सव पूरे राजस्थान में कोटा के बाद दूसरे पायदान पर गिना जाता है। अब तक के इतिहास में यहां अधिकतम 75 फीट ऊंचे पुतले का निर्माण किया जाता रहा था। इस बार उत्सव को यादगार बनाने और 105 वर्ष से अधिक पुरानी इस विरासत को नई भव्यता देने के उद्देश्य से आयोजकों ने पुतले की ऊंचाई सीधे 80 फीट तय कर दी है। सवा सौ साल के इतिहास में यह पहला अवसर है जब इस पुतले के आकार में इतना बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। स्थानीय शिल्पकारों के हाथों साकार हुआ पुष्पक विमान इस विराट पुतले और उसके नीचे लगे पुष्पक विमान की संरचना के लिए किसी बाहरी महानगर या विशेषज्ञ मंडली को ठेका देने के बजाय आयोजकों ने मकराना के अपने हुनरमंद कारीगरों पर भरोसा जताया। शहर के लगभग 50 स्थानीय शिल्पकार पिछले 25 दिनों से लगातार पसीना बहाकर इस जटिल ढांचे को मूर्त रूप देने में जुटे हैं। बाहर से कारीगर न बुलाकर अपने ही शहर के लोगों को जिम्मेदारी सौंपने का यह कदम प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के आह्वान को जमीनी धरातल पर जीवंत करता है। इन फनकारों ने बांस, कागज, सुतली और रंग-बिरंगे कपड़ों के सहारे पुष्पक विमान की ऐसी संरचना बनाई है जो देखने में अत्यंत सजीव जान पड़ती है। लागत और उत्सव में उमड़ने वाली भीड़ चारभुजा सेवा समिति के पदाधिकारियों के आकलन के मुताबिक, पुष्पक विमान, मुख्य पुतले और संपूर्ण तकनीकी ढांचे को तैयार करने में लगभग 2.50 लाख से 3.50 लाख रुपए तक की धनराशि व्यय होने का अनुमान है। विजयादशमी की बेला में जब आकाश रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठेगा, तब इस 80 फीट ऊंचे पुतले में अग्नि प्रवाहित की जाएगी। विमान पर सवार दशानन का यह रूप मैदान में उपस्थित हर व्यक्ति के लिए विस्मयकारी दृश्य प्रस्तुत करेगा। यह वार्षिक जलसा सिर्फ शहर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहता। आसपास के दर्जनों ग्रामीण अंचलों और कस्बों से हजारों नर-नारी इस अलौकिक पल के साक्षी बनने मकराना पहुंचते हैं। रावण दहन के समय दशहरा मैदान एक विशालकाय मेले का रूप ले लेता है, जहां दुकानें, झूले और जनसमूह मिलकर एक अद्भुत सांस्कृतिक छटा बिखेरते हैं। विमान पर सवार रावण की इस बिल्कुल नई परिकल्पना ने अभी से पूरे क्षेत्र में भारी उत्सुकता जगा दी है। इसका आप पर असर मकराना और आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों और दशहरा देखने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन कई अहम पहलुओं से जुड़ा है। • डीडवाना-कुचामन और नागौर क्षेत्र में: उत्सव के दिन दशहरा मैदान के आस-पास भारी जनसैलाब उमड़ने से यातायात और आवाजाही पर सीधा असर पड़ेगा। मेला स्थल पर जाने वाले लोगों को समय से पहले निकलना होगा और स्थानीय प्रशासन द्वारा तय किए गए पार्किंग नियमों का पालन करना होगा। • स्थानीय कारीगरों और अर्थव्यवस्था पर: बाहर से मंडली न बुलाकर शहर के 50 कारीगरों को काम सौंपे जाने से स्थानीय शिल्प को सीधा प्रोत्साहन मिला है। मेले के दौरान उमड़ने वाली हजारों की भीड़ से मकराना के स्थानीय दुकानदारों, खान-पान के विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों को तगड़ा कारोबारी लाभ मिलेगा। • राजस्थान के सांस्कृतिक पर्यटन में: राज्य में दूसरे सबसे बड़े मेले के रूप में पहचान रखने वाला यह उत्सव नई थीम की वजह से अतिरिक्त पर्यटकों को आकर्षित करेगा। पहली बार 80 फीट की रिकॉर्ड ऊंचाई और पुष्पक विमान का दृश्य देखने के लिए ग्रामीण अंचलों से भारी संख्या में परिवार पहुंचेंगे। • सुरक्षा और आतिशबाजी प्रबंधन: 80 फीट ऊंचे विशालकाय पुतले और भारी बारूद के दहन के चलते दर्शक दीर्घा और पुतले के बीच सुरक्षा दूरी बनाए रखना आवश्यक होगा। दर्शकों को स्वयं और बच्चों को आतिशबाजी के मलबे से सुरक्षित रखने के लिए तय बैरिकेडिंग के पीछे ही रुकना होगा। ऐसा क्यों हुआ मकराना में इस बार रावण के पुतले का स्वरूप बदलने और उसकी ऊंचाई में ऐतिहासिक वृद्धि करने के पीछे शताब्दी पुरानी परंपरा को आधुनिक आकर्षण से जोड़ने की आयोजकों की सोच रही है। • नवाचार की इच्छा: चारभुजा सेवा समिति बीते वर्षों में हाथी और रथ जैसे पारंपरिक प्रतीकों का उपयोग करती रही थी, लेकिन इस बार दर्शकों को कुछ नया और अलौकिक अनुभव कराने के उद्देश्य से पौराणिक पुष्पक विमान की संकल्पना चुनी गई। • रिकॉर्ड ऊंचाई का फैसला: पिछले आयोजनों में 75 फीट तक के पुतले जलाए जाते रहे थे, मगर 105 वर्ष से चली आ रही परंपरा में नई भव्यता दर्ज कराने के लिए आयोजकों ने इसे बढ़ाकर 80 फीट करने का निर्णय लिया। • स्थानीय प्रतिभाओं को तरजीह: बाहरी पेशेवर दलों पर निर्भर रहने के स्थान पर मकराना के ही 50 कारीगरों को 25 दिनों का समय देकर आत्मनिर्भरता और वोकल फॉर लोकल के विचार को व्यावहारिक रूप दिया गया। सवाल-जवाब 1. मकराना में इस बार रावण के पुतले की ऊंचाई कितनी रखी गई है? इस बार मकराना में रावण के पुतले की ऊंचाई 80 फीट रखी गई है, जो अब तक के सामान्य 75 फीट से 5 फीट अधिक है. 2. रावण का पुतला इस साल किस विशेष स्वरूप में नजर आएगा? इस वर्ष रावण का पुतला किसी साधारण मंच के बजाय एक विशालकाय पुष्पक विमान पर सवार नजर आएगा. 3. मकराना में रावण दहन का आयोजन कौन सी संस्था करवाती है? इस ऐतिहासिक आयोजन की पूरी देखरेख और व्यवस्था चारभुजा सेवा समिति द्वारा की जाती है. 4. मकराना में सार्वजनिक दशहरा उत्सव की शुरुआत किस वर्ष हुई थी? मकराना में रावण दहन की यह ऐतिहासिक परंपरा सन 1919 से लगातार चली आ रही है. 5. पुष्पक विमान और 80 फीट ऊंचे पुतले को किसने तैयार किया है? मकराना के ही करीब 50 स्थानीय कारीगरों ने 25 दिनों की कड़ी मेहनत से इस पुतले और विमान का निर्माण किया है. 6. इस पूरे सेटअप के निर्माण पर कितना खर्च आने का अनुमान है? आयोजन समिति के अनुसार पूरे पुतले और पुष्पक विमान के ढांचे पर लगभग 2.50 लाख से 3.50 लाख रुपए का खर्च आने का अनुमान है. प्रेरणा और सबक मकराना के इस उत्सव से स्थानीय हुनर, सांस्कृतिक निरंतरता और सामुदायिक स्वावलंबन की प्रेरणा मिलती है। • स्थानीय कौशल का सम्मान: बाहरी एजेंसियों के बजाए अपने ही क्षेत्र के कारीगरों पर भरोसा जताकर यह साबित किया गया कि क्षेत्रीय प्रतिभा किसी बड़े मंच को सजाने में पूरी तरह सक्षम है। • शताब्दी पुरानी परंपरा का संरक्षण: सन 1919 से बिना रुके एक पर्व का आयोजन करते रहना यह सिखाता है कि समाज अपनी जड़ों और संस्कृति को पीढ़ियों तक कैसे सहेज सकता है। • परंपरा में नए विचारों का समावेश: 105 साल पुरानी व्यवस्था में पुष्पक विमान जैसी नई कल्पना जोड़ना दिखाता है कि रूढ़िवादिता छोड़े बिना भी परंपराओं को प्रासंगिक और आकर्षक बनाया जा सकता है। https://trendkia.com/rajasthan/makrana-men-pushpak-viman-se-hoga-80-phita-ke-ravana-ka-dahana-105-sala-purane-vijayadashami-utsava-men-jura-naya-rnga-45095 TrendKia — Har trend, sabse pehle.