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  "title": "मानसून में दुधारू पशुओं को दलहनी हरा चारा खिलाते समय बरतें ये सावधानियां, थोड़ी सी चूक से घट सकता है दूध का फैट और उत्पादन",
  "summary": "बरसात के मौसम में हरे चारे की बहुतायत के बीच बिना संतुलन के दलहनी चारा खिलाना दुधारू पशुओं के पाचन तंत्र को बिगाड़ सकता है। उदयपुर कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार सूखा चारा और दाना मिलाकर देना ही पशु सेहत के लिए फायदेमंद है।",
  "content": "मानसून का महीना खेतों में हरियाली और पशुओं के लिए ताजा चारा तो लेकर आता है, लेकिन इस मौसम में दुधारू मवेशियों के खानपान में थोड़ी सी लापरवाही उनकी सेहत और दूध उत्पादन दोनों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। बारिश के दिनों में खल और दाने के बढ़ते दामों से राहत पाने के लिए कई पशुपालक पशुओं को अधिक मात्रा में दलहनी हरा चारा खिलाने लगते हैं। हालांकि, बिना संतुलन के दिया गया हरा चारा गाय और भैंस के पाचन तंत्र को बिगाड़ सकता है, जिससे दूध की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।\n\nदलहनी हरे चारे की अधिकता और पाचन तंत्र पर असर\nउदयपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात के मौसम में उगे हरे चारे में नमी का स्तर सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा होता है। जब पशु बहुत अधिक नमी वाला हरा चारा खा लेते हैं, तो उनका पाचन तंत्र संतुलित नहीं रह पाता। इसके परिणामस्वरूप मवेशियों में पेट फूलने, अफरा, दस्त और अन्य गंभीर गैस्ट्रिक समस्याएं पैदा होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए मौसम के बदलाव के साथ पशुओं के दैनिक आहार में फेरबदल करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।\n\nदूध में फैट और एसएनएफ घटने की समस्या का समाधान\nबरसात के दिनों में अक्सर देखा जाता है कि गाय और भैंस के दूध में वसा यानी फैट और एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) का प्रतिशत गिरने लगता है। इस गुणवत्ता को बरकरार रखने की चाहत में पशुपालक प्रोटीन से भरपूर दलहनी चारे का सहारा लेते हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यद्यपि दलहनी चारे में प्रोटीन भरपूर होता है, लेकिन इसे अनियंत्रित मात्रा में देना उल्टे परिणाम दे सकता है। अत्यधिक दलहनी चारा पशु का पेट खराब कर देता है, जिससे दूध का उत्पादन और उसकी गुणवत्ता दोनों में गिरावट दर्ज की जाती है।\n\nहरा चारा खिलाने की सही तकनीक और सूखा चारा\nपशुधन की सेहत दुरुस्त रखने के लिए आहार प्रबंधन का एक खास तरीका अपनाना जरूरी है। मवेशियों को हरा चारा परोसने से ठीक पहले थोड़ी मात्रा में सूखा चारा और संतुलित दाना देना चाहिए। सूखा चारा हरे चारे की अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है, जिससे पाचन क्रिया सुचारू बनी रहती है। यदि पशुओं को बाहर चरने के लिए भेजा जाता है, तब भी उन्हें बाड़े से निकालने से पूर्व सूखा चारा खिलाना बेहद फायदेमंद साबित होता है। इस अभ्यास से पशु एक बार में अत्यधिक हरा चारा नहीं चरते और उनकी सेहत बनी रहती है।\n\nमवेशियों की क्षमता के अनुसार आहार का निर्धारण\nपशु चिकित्सकों की सलाह है कि हर मवेशी की खुराक उसकी उम्र, शारीरिक वजन और दूध देने की क्षमता के आधार पर ही तय की जानी चाहिए। केवल दूध देने वाले पशु ही नहीं, बल्कि जो पशु इस समय दूध नहीं दे रहे हैं, उन्हें भी उनकी शारीरिक जरूरतों के मुताबिक संतुलित आहार दिया जाना आवश्यक है। विशेषज्ञों की राय लिए बिना आहार चार्ट में अचानक बड़ा बदलाव करना नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए दलहनी चारे का इस्तेमाल हमेशा सूखे चारे और मिनरल्स के साथ संतुलित रूप में ही किया जाना चाहिए।\n\nअफरा और पेट की समस्या का प्राथमिक उपचार\nयदि अत्यधिक हरा चारा खाने के कारण पशु को दस्त लग जाएं, पेट फूलने लगे या अफरा जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो बिना देर किए पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। आपातकालीन स्थिति में बड़े पशुओं के लिए एक पारंपरिक उपाय उपयोग में लाया जाता है। विशेषज्ञों की देखरेख में सरसों के तेल में सीमित मात्रा में तारपीन का तेल मिलाकर दिया जा सकता है। ध्यान रहे कि यह घरेलू उपचार भी केवल पशु चिकित्सक की परामर्श और सलाह पर ही आजमाया जाना चाहिए। समय पर डॉक्टरी सहायता मिलने से पशु जल्द स्वस्थ हो जाता है और दूध उत्पादन पर विपरीत असर कम पड़ता है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत भर में: पशुपालक मानसून के दौरान हरे और सूखे चारे का सही संतुलन बनाकर दूध में फैट और एसएनएफ के गिरते स्तर को रोक सकते हैं।\n• उदयपुर और ग्रामीण क्षेत्रों में: अत्यधिक नमी वाले हरे चारे से पहले पशुओं को सूखा चारा देने की सलाह दी जाती है, जिससे मवेशियों को अफरा और पाचन संबंधी बीमारियों से बचाया जा सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मानसून में अत्यधिक दलहनी हरा चारा खिलाना पशुओं के लिए क्यों नुकसानदायक है?\nबरसात के मौसम में हरे चारे में नमी का स्तर काफी अधिक होता है। अत्यधिक दलहनी चारा खाने से पशुओं का पाचन तंत्र प्रभावित होता है, जिससे दस्त और अफरा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।\n\n2. बरसात में दूध के फैट और एसएनएफ पर क्या प्रभाव पड़ता है?\nमानसून के दिनों में गाय और भैंस के दूध में फैट और एसएनएफ की मात्रा अक्सर कम हो जाती है। इसे सुधारने के लिए दलहनी चारा दिया जाता है, लेकिन इसकी अधिकता पाचन बिगाड़ देती है।\n\n3. हरा चारा परोसने से पहले सूखा चारा देना क्यों जरूरी है?\nसूखा चारा हरे चारे में मौजूद अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है। इससे पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है और पशु एक साथ बहुत अधिक हरा चारा नहीं खाते।\n\n4. पशुओं को अफरा होने पर क्या प्राथमिक उपचार दिया जाता है?\nपशु चिकित्सक की सलाह से बड़े पशुओं में अफरा की स्थिति में सरसों के तेल में सीमित मात्रा में तारपीन का तेल मिलाकर दिया जाता है।\n\n5. पशुओं का आहार किस आधार पर तय किया जाना चाहिए?\nपशु की खुराक उसकी उम्र, शारीरिक वजन और दूध उत्पादन क्षमता के अनुसार ही तय की जानी चाहिए।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-08-01",
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