मसूद अजहर का नया जाल: जैश-ए-मोहम्मद अब भारतीय महिलाओं को बना रहा निशाना जैश-ए-मोहम्मद ऑनलाइन शादी के झूठे वादों के जरिए भारतीय महिलाओं को अपने कट्टरपंथी नेटवर्क में फंसा रहा है। खुफिया एजेंसियों ने राजस्थान सीमा पर सक्रिय इस खतरनाक साजिश को लेकर चेतावनी जारी की है। पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने भारतीय महिलाओं को अपने आतंकी जाल में फंसाने के लिए एक बेहद खतरनाक रणनीति अपनाई है। संगठन अब सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन विवाह का प्रलोभन देकर महिलाओं को निशाना बना रहा है। इस साजिश का मुख्य उद्देश्य केवल इन महिलाओं को अपने संगठन में भर्ती करना नहीं है, बल्कि भारत के भीतर जासूसी का विस्तार करना और भविष्य में आतंकी गतिविधियों के लिए नेटवर्क को मजबूत करना है। मसूद अजहर द्वारा संचालित इस संगठन के निशाने पर विशेष रूप से वे महिलाएं हैं जो सामाजिक रूप से कमजोर या पारिवारिक समस्याओं से घिरी हुई हैं। आतंकी संगठन की महिला इकाई और नेतृत्व खुफिया दस्तावेजों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में जैश-ए-मोहम्मद ने जमात-उल-मोमिनात नामक अपनी पहली महिला शाखा का गठन किया था। इस विंग की कमान मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर संभाल रही हैं। जमात-उल-मोमिनात का प्राथमिक कार्य महिलाओं और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ना, उन्हें संगठन में शामिल करना और भविष्य के लिए फिदायीन दस्तों को तैयार करना है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि संगठन के सदस्य सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर भारतीय महिलाओं से महीनों तक लंबी बातचीत करते हैं, ताकि उनका पूरा भरोसा जीता जा सके। फंसाने का तरीका और राजस्थान पर फोकस इस साजिश के तहत, संगठन से जुड़े युवक महिलाओं को बेहतर जीवन, सुखद वैवाहिक भविष्य और सुरक्षा का सपना दिखाकर पाकिस्तान आने के लिए प्रेरित करते हैं। बातचीत की प्रक्रिया में किसी भी तरह की संवेदनशील जानकारी नहीं मांगी जाती, जिससे पीड़िता को किसी भी साजिश का आभास नहीं होता। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान पहुंचने के बाद इन महिलाओं को कट्टरपंथ की शिक्षा दी जाती है और उनका ब्रेनवॉश किया जाता है। इसके बाद कुछ महिलाओं को वापस भारत भेजकर सैन्य और रणनीतिक ठिकानों की जानकारी जुटाने का काम सौंपा जाता है, जबकि अन्य को संगठन के नेटवर्क का विस्तार करने का निर्देश दिया जाता है। पहले यह खतरा मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर तक सीमित था, लेकिन अब जैश-ए-मोहम्मद ने अपना ध्यान राजस्थान की ओर केंद्रित कर लिया है। पाकिस्तान से सटी राजस्थान की 1,070 किलोमीटर लंबी सीमा इस आतंकी गिरोह के लिए अधिक सुविधाजनक मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती क्षेत्रों में सोशल मीडिया पर हो रही संदिग्ध गतिविधियों की बारीकी से निगरानी कर रही हैं और कई ऑनलाइन संपर्कों की पहचान भी की गई है। सावधानी की अपील संगठन ऐसे लोगों को निशाना बनाता है जो अकेलेपन या सामाजिक अलगाव का सामना कर रहे हैं। शादी का प्रस्ताव देने से पहले कम से कम 6 महीने तक निरंतर संपर्क रखा जाता है। सहमति मिलने पर उन्हें वैध पासपोर्ट बनवाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। पाकिस्तान तक पहुंचने के लिए राजस्थान सीमा के अलावा नेपाल और सऊदी अरब के रास्तों का उपयोग करने की भी जानकारी मिली है। खुफिया एजेंसियों ने इसे भर्ती का सबसे घातक तरीका बताते हुए आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं से सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सतर्क रहने और विवाह प्रस्तावों की जांच करने की कड़ी चेतावनी दी है। इसका आप पर असर भारत में: सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति से शादी या निजी जानकारी साझा करने से पहले अत्यधिक सावधानी बरतें और संदिग्ध प्रस्तावों की रिपोर्ट करें। राजस्थान में: सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले निवासी ऑनलाइन संदिग्ध संपर्कों या सीमा के पास किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों को तुरंत दें। सवाल-जवाब 1. जैश-ए-मोहम्मद की महिला इकाई का नाम क्या है? इस इकाई का नाम जमात-उल-मोमिनात है, जिसका गठन अक्टूबर 2025 में हुआ था। 2. आतंकी संगठन महिलाओं को क्यों निशाना बना रहे हैं? इसका उद्देश्य महिलाओं को कट्टरपंथी बनाना, उन्हें आतंकी नेटवर्क में भर्ती करना और भारत के रणनीतिक ठिकानों की जासूसी करवाना है। 3. इस साजिश के लिए राजस्थान सीमा का उपयोग क्यों किया जा रहा है? राजस्थान और पाकिस्तान के बीच 1,070 किलोमीटर लंबी सीमा होने के कारण इसे संगठन द्वारा अपनी गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना गया है। 4. शादी का झांसा देने से पहले संगठन कितने समय तक संपर्क बनाए रखता है? खुफिया जानकारी के अनुसार, संगठन के सदस्य महिला का भरोसा जीतने के लिए कम से कम 6 महीने या उससे अधिक समय तक ऑनलाइन बातचीत करते हैं। https://trendkia.com/rajasthan/masood-azhar-ka-naya-jala-jaish-e-mohammed-aba-bharatiya-mahilaon-ko-bana-raha-nishana-7369 TrendKia — Har trend, sabse pehle.