# मसूरिया बालीनाथ समाधि स्थल पर 1500 टन छीतर पत्थर से तैयार होगा 45 फीट चौड़ा भव्य प्रवेश द्वार

> जोधपुर के मसूरिया में बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथजी के समाधि स्थल पर 45 फीट चौड़े और 35 फीट ऊंचे भव्य द्वार की नींव रखी गई है, जिसे 1500 टन से अधिक जोधपुरी छीतर पत्थर पर नक्काशी कर सजाया जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/masuria-balinath-samadhi-sthala-para-1500-tana-chhitar-patthara-se-taiyara-hoga-45-phita-chaura-bhavya-pravesha-dvara-40023 · **Language:** Hindi
**Tags:** जोधपुर, मसूरिया, बालीनाथजी समाधि, बाबा रामदेव, छीतर पत्थर, धार्मिक पर्यटन, राजस्थान

जोधपुर के मसूरिया क्षेत्र में स्थित लोक देवता बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथजी के पवित्र समाधि स्थल का स्वरूप आने वाले दिनों में और अधिक भव्य नजर आएगा। धार्मिक परिसर के विस्तार और यहाँ पहुँचने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए एक विशाल मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इस भव्य संरचना के निर्माण के लिए पीपा क्षत्रिय समस्त न्याति सभा ट्रस्ट मसूरिया की अगुवाई में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजन संपन्न हुआ। पूजा अनुष्ठान के दौरान नींव में पाँच पवित्र शिलाएँ स्थापित कर आधिकारिक तौर पर निर्माण कार्य की आधारशिला रखी गई। इस धार्मिक आयोजन में ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्र चौहान, सचिव नरेंद्र गोयल, कोषाध्यक्ष पुरुषोत्तम राखेचा, उपाध्यक्ष शिवप्रकाश दईया और दिनेश गोयल समेत ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

## 1500 टन छीतर पत्थर और सिरोही व फतेहपुर के कारीगरों की नक्काशी
इस पूरे प्रवेश द्वार को स्थानीय पहचान और पारंपरिक स्थापत्य शैली के अनुरूप जोधपुरी छीतर पत्थर से गढ़ा जा रहा है। इस विशाल परियोजना में लगभग 1500 टन से भी अधिक छीतर पत्थर का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इन पत्थरों को बेहद आकर्षक रूप देने के लिए सिरोही और फतेहपुर के कुशल कारीगर पिछले दो वर्षों से लगातार जुटे हुए हैं। ये शिल्पकार पत्थरों की बारीक घड़ाई कर रहे हैं और उन पर पारंपरिक जोधपुरी स्थापत्य कला से प्रेरित सुंदर कलाकृतियाँ और नक्काशी उकेर रहे हैं, जिससे पूरा ढांचा राजस्थान की समृद्ध विरासत की झलक पेश करेगा।

## द्वार का ढांचा, आयाम और आंतरिक व्यवस्था
यह नया मुख्य द्वार कुल 45 फीट चौड़ाई और 35 फीट ऊंचाई में फैला होगा। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए इस पूरे प्रवेश मार्ग को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। मुख्य ढांचे के बीचों-बीच 24 फीट का बड़ा केंद्रीय प्रवेश द्वार रहेगा, जिसके दोनों तरफ 11-11 फीट के दो छोटे सहायक द्वार बनाए जाएंगे। प्रवेश द्वार के सबसे ऊपरी शिखर पर बाबा की पावन ध्वजा स्थापित की जाएगी जो दूर से ही लहराती हुई भक्तों को आकर्षित करेगी। मुख्य प्रवेश मार्ग के भीतरी हिस्से में ट्रस्ट कार्यालय के अधीन दो विशेष कमरों का भी निर्माण कराया जाएगा, जिनका उपयोग पूरे परिसर की सुरक्षा, निगरानी और मॉनिटरिंग संबंधी व्यवस्थाओं के संचालन के लिए होगा।

## समाधि स्थल के नाम पर नामकरण और पर्यटन स्थल के रूप में विकास
इस नव-निर्मित भव्य प्रवेश द्वार का नामकरण बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथजी के समाधि स्थल के नाम पर ही किया जाएगा। समाधि परिसर में आगामी दिनों में 5 फीट ऊंची प्रतिमा का प्राण-प्रतिष्ठा उत्सव आयोजित होना प्रस्तावित है। इसी भव्य धार्मिक समारोह के दौरान इस नवनिर्मित मुख्य द्वार का औपचारिक उद्घाटन भी संपन्न किया जाएगा। लाखों की लागत से आकार ले रहे इस निर्माण का व्यापक उद्देश्य समाधि स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं को उच्च स्तरीय सुविधाएँ मुहैया कराने के साथ-साथ पूरे मसूरिया क्षेत्र को जोधपुर के एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।

## इसका आप पर असर
इस भव्य द्वार और परिसर विस्तार से समाधि स्थल आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन और बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।

- **भारत में:** देश भर से बाबा रामदेव के गुरु के दर्शन के लिए राजस्थान आने वाले भक्तों को बेहतर व्यवस्था और सुगम प्रवेश मिलेगा। बड़े प्रवेश मार्गों के बनने से त्योहारों और मेलों के दौरान भीड़ का प्रबंधन बेहद आसान हो जाएगा।
- **जोधपुर में:** मसूरिया क्षेत्र का बुनियादी ढांचा सुधरेगा और यह इलाका प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा। स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक स्थापत्य कला को बढ़ावा मिलने के साथ क्षेत्रीय कारोबार को भी गति मिलेगी।
- **श्रद्धालुओं के लिए:** 24 फीट चौड़े मुख्य द्वार और 11-11 फीट के दो सहायक द्वारों से दर्शनार्थियों को कतारों में लगने और निकलने में सुविधा होगी। परिसर के भीतर निगरानी और मॉनिटरिंग रूम बनने से सुरक्षा व्यवस्था भी पहले से ज्यादा मजबूत रहेगी।
- **स्थानीय कारीगरों के लिए:** सिरोही और फतेहपुर के शिल्पकारों की पारंपरिक पत्थर तराशने की कला को बड़े मंच पर पहचान मिलेगी। हेरिटेज निर्माण कार्यों में लगे कारीगरों के रोजगार और कौशल को इससे सीधा संबल मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह परियोजना समाधि स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या को संभालने और परिसर को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

- **श्रद्धालुओं का बढ़ता दबाव:** लोक देवता बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथजी के समाधि स्थल पर वर्ष भर बड़ी संख्या में भक्त पहुँचते हैं। पुराने प्रवेश मार्गों पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए बड़े और चौड़े प्रवेश द्वार की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
- **परिसर का समग्र आधुनिकीकरण:** ट्रस्ट ने समाधि स्थल के कायाकल्प और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की योजना तैयार की। इसी योजना के तहत सुरक्षा मॉनिटरिंग के लिए कमरों का निर्माण और परिसर का विस्तार प्रस्तावित किया गया।
- **पर्यटन को बढ़ावा देने का संकल्प:** मसूरिया क्षेत्र को जोधपुर के प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया। जोधपुरी स्थापत्य कला और छीतर पत्थर के उपयोग से स्थल को भव्य ऐतिहासिक पहचान देना तय किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. बालीनाथजी समाधि स्थल का नया मुख्य द्वार कहाँ बनाया जा रहा है?
यह नया मुख्य द्वार राजस्थान के जोधपुर स्थित मसूरिया क्षेत्र में बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथजी के समाधि स्थल पर बनाया जा रहा है।

### 2. इस प्रवेश द्वार के निर्माण में किस पत्थर का उपयोग हो रहा है और कितना पत्थर लगेगा?
द्वार के निर्माण में जोधपुरी छीतर पत्थर का उपयोग किया जा रहा है, जिसकी कुल मात्रा 1500 टन से अधिक है।

### 3. द्वार का आकार और चौड़ाई-ऊंचाई कितनी तय की गई है?
इस भव्य द्वार की कुल चौड़ाई 45 फीट और ऊंचाई 35 फीट होगी, जिसमें 24 फीट का मुख्य प्रवेश और 11-11 फीट के दो सहायक द्वार शामिल हैं।

### 4. पत्थरों की घड़ाई और नक्काशी का काम कौन से कारीगर कर रहे हैं?
सिरोही और फतेहपुर के कुशल शिल्पकार पिछले दो वर्षों से पत्थरों की नक्काशी और घड़ाई का काम कर रहे हैं।

### 5. निर्माण की शुरुआत किस प्रकार की गई?
पीपा क्षत्रिय समस्त न्याति सभा ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा वैदिक पूजन के बाद नींव में पाँच शिलाएँ रखकर निर्माण शुरू किया गया।

### 6. द्वार के अंदर ट्रस्ट की ओर से क्या अतिरिक्त निर्माण कराया जाएगा?
द्वार के भीतरी हिस्से में ट्रस्ट कार्यालय की ओर से निगरानी और मॉनिटरिंग के लिए दो विशेष कमरे बनाए जाएंगे।

### 7. इस नए द्वार का लोकार्पण कब प्रस्तावित है?
समाधि स्थल पर 5 फीट ऊंची प्रतिमा के प्रस्तावित प्रतिष्ठा उत्सव के दौरान ही इस नए द्वार का उद्घाटन किया जाएगा।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._