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  "type": "article",
  "title": "मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने का दावा, सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए गंभीर आरोप",
  "summary": "जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और राजस्थान में सूखे के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए।",
  "content": "जयपुर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने निर्वाचन आयोग के कामकाज और कार्यप्रणाली को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर दबाव बढ़ता जा रहा है। आयोग की कार्यशैली के साथ-साथ उन्होंने राजस्थान के कई इलाकों में सूखे और अकाल की स्थिति और पंजाब में नशीले पदार्थों तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर भी अपनी बात रखी।\n\nनिर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया और कार्यप्रणाली पर सवाल\nसंवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक नियमों का हवाला देते हुए सचिन पायलट ने कहा कि निर्वाचन आयोग में कोई भी नीतिगत या महत्वपूर्ण फैसला सभी सदस्यों की आम सहमति अथवा बहुमत के आधार पर तय होना चाहिए। इसके विपरीत, वर्तमान व्यवस्था में दोनों चुनाव आयुक्तों की राय को नजरअंदाज कर मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अपने स्तर पर फैसले लिए जाने का आरोप उन्होंने लगाया। उनका कहना था कि आयोग के भीतर सामूहिक निर्णय लेने की स्थापित परंपरा को दरकिनार किया जा रहा है।\n\nमतदाता सूची संशोधन और 13 करोड़ नाम हटने का दावा\nमतदाता सूची के पुनरीक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नियमों के तहत मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने का प्राथमिक अधिकार निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी ईआरओ के पास होता है। पायलट ने आरोप लगाया कि इस संवैधानिक अधिकार को स्थानीय स्तर से हटाकर दिल्ली स्थित आयोग के मुख्य कार्यालय में केंद्रित कर दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि एसआईआर और विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं के तहत देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूचियों से विलोपित किए गए हैं।\n\nदेश में बढ़ती जनसंख्या का संदर्भ देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि सामान्य परिस्थितियों में मतदाताओं की कुल संख्या में वृद्धि होनी चाहिए, लेकिन पहली बार मतदाताओं के आंकड़ों में गिरावट दर्ज होना चिंता का विषय है। उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना करते हुए कहा कि पहले की आर्थिक नीतियों के बाद अब मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में लक्षित रूप से मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग की कार्यप्रणाली पर सत्ता के पक्ष में झुकाव के गंभीर सवाल उठ रहे हैं।\n\nराजस्थान में सूखा, अकाल और स्थानीय निकाय चुनाव की स्थिति\nराजस्थान की आंतरिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए पायलट ने कहा कि इस वर्ष मानसून की भारी कमी के कारण राज्य के कई ग्रामीण और कृषि क्षेत्र सूखे तथा अकाल की चपेट में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि मौसम के प्रतिकूल संकेतों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर समय रहते राहत या जल प्रबंधन की पूर्व योजनाएं तैयार नहीं की गईं। उनके अनुसार प्रशासन का ध्यान जनसमस्याओं के समाधान से हटकर अन्य राजनीतिक और चुनावी प्राथमिकताओं पर केंद्रित रहा।\n\nस्थानीय शहरी निकाय चुनावों के संदर्भ में उन्होंने मतदान और मतों की गिनती के बीच लंबा अंतराल रखे जाने तथा चुनावी प्रक्रियाओं में देरी पर सवाल उठाए। पायलट ने आरोप लगाया कि स्थानीय संस्थाओं के चुनावों में सरकारी तंत्र और पुलिस प्रशासन का अनुचित उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिशें हुईं और हरियाणा सीमा पर कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों को रोकने जैसी प्रशासनिक कार्रवाइयां की गईं।\n\nपंजाब में नशे की समस्या और सीमा पार से तस्करी पर केंद्र से सवाल\nपड़ोसी राज्य पंजाब के हालात पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वहां चिट्टा और विभिन्न रासायनिक नशीले पदार्थ युवाओं के जीवन और भविष्य के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। संगठित गिरोहों और जेलों से संचालित गतिविधियों के कारण नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार असर पड़ रहा है।\n\nराजनीतिक अभियानों पर टिप्पणी करते हुए पायलट ने सवाल किया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से होने वाली मादक पदार्थों और हथियारों की अवैध तस्करी को रोकने के लिए बीते 12 वर्षों के दौरान केंद्र सरकार द्वारा क्या ठोस उपाय किए गए। उन्होंने राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की संगठनात्मक मजबूती का उल्लेख करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में राज्य के नागरिक पार्टी को पुनः जनसेवा का अवसर देंगे।\n\nइसका आप पर असर\nइस बयान और राजनीतिक चर्चा का सीधा असर मतदाताओं और नागरिकों की जागरूक भागीदारी पर पड़ता है।\n\n• मतदाताओं के लिए: नागरिक अपना नाम स्थानीय मतदाता सूची और ऑनलाइन निर्वाचन पोर्टल पर तुरंत जांच सकते हैं। किसी भी विलोपन या त्रुटि की स्थिति में समय रहते ईआरओ कार्यालय या ऑनलाइन फॉर्म के जरिए सुधार कराया जा सकता है।\n• राजस्थान में: सूखे और मानसूनी कमी से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए राहत योजनाओं और प्रशासनिक प्रबंधों पर नजर रखना जरूरी है। स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का सीधा असर वार्ड विकास पर पड़ता है।\n• पंजाब में: नशीले पदार्थों के प्रसार और सीमा पार तस्करी को लेकर कानून-व्यवस्था का मुद्दा स्थानीय परिवारों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा निगरानी और नागरिक सुरक्षा उपायों को लेकर जनता सतर्कता बरत सकती है।\n• चुनावी प्रक्रियाओं में: राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद स्थानीय स्तर पर मतदान केंद्रों और वार्ड परिसीमन की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग बढ़ सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक बयान मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों में संशोधन और विभिन्न राज्यों की तात्कालिक समस्याओं को लेकर दिया गया है।\n\n• निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया: चुनाव आयोग के भीतर दोनों चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर एकल स्तर पर निर्णय लेने और ईआरओ के अधिकारों के केंद्रीयकरण के आरोपों के चलते यह मुद्दा उठा।\n• मतदाता सूची में बदलाव: एसआईआर और अन्य प्रशासनिक प्रणालियों के तहत देश भर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम कटने के दावों के कारण चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए गए।\n• प्राकृतिक और प्रशासनिक संकट: राजस्थान में मानसून की कमी से उत्पन्न सूखे की स्थिति और शहरी निकाय चुनावों में प्रशासनिक तंत्र के इस्तेमाल के आरोपों ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।\n• सीमा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था: पंजाब में रासायनिक नशे के प्रसार और पिछले 12 वर्षों में पाकिस्तान से ड्रोन तस्करी रोकने की केंद्रीय नीतियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए गए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर क्या आरोप लगाए?\nउन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर दोनों चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर मनमर्जी से फैसले लेने और ईआरओ से नाम जोड़ने-काटने के अधिकार छीनने का आरोप लगाया।\n\n2. मतदाता सूची को लेकर क्या दावा किया गया है?\nपायलट ने दावा किया कि एसआईआर और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।\n\n3. राजस्थान के किन मुद्दों पर सरकार को घेरा गया?\nउन्होंने मानसून की भारी कमी के कारण राज्य में गंभीर अकाल व सूखे के संकट और शहरी निकाय चुनावों में प्रशासन के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया।\n\n4. पंजाब के हालात को लेकर पायलट ने क्या सवाल उठाए?\nउन्होंने पंजाब में चिट्टा और केमिकल ड्रग्स के बढ़ते खतरे, जेलों से फिरौती और 12 वर्षों में पाकिस्तान से ड्रोन द्वारा ड्रग्स तस्करी रोकने के केंद्र के कदमों पर सवाल किए।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-04",
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