# मेड़ पर मटर उगाकर रबी सीजन में बढ़ाएं कमाई, गेहूं और सरसों के साथ खाली जगह का ऐसे करें इस्तेमाल

> रबी सीजन में गेहूं और सरसों जैसी मुख्य फसलों के साथ खेत की मेड़ों पर मटर की खेती करके किसान कम लागत में अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं। सही बीज, जल निकासी और समय पर देखभाल से बाजार में मटर के अच्छे दाम हासिल किए जा सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/mera-para-matara-ugakara-rabi-sijana-men-barhaen-kamai-gehun-aura-sarason-ke-satha-khali-jagaha-ka-aise-karen-istemala-31111 · **Language:** Hindi
**Tags:** रबी सीजन, मटर की खेती, कृषि सलाह, गेहूं और सरसों, किसान आय, मंडी भाव

रबी फसलों की बुवाई की तैयारियां देश भर के खेतों में जोरों पर हैं। किसान अपने खेतों को गेहूं, सरसों और चना जैसी मुख्य फसलों के लिए तैयार कर रहे हैं। इस कृषि सीजन में अपनी सीमित ज़मीन से अधिक लाभ प्राप्त करने का एक बेहद कारगर तरीका खेत के किनारों का सही इस्तेमाल करना है। किसान मुख्य फसलों के साथ-साथ खेत की मेड़ों और खाली जगहों पर हरी मटर की खेती कर सकते हैं। इस रणनीति से मुख्य फसल के रकबे में किसी तरह की कटौती किए बिना एक ही ज़मीन से अतिरिक्त उपज और कमाई हासिल की जा सकती है।

## मेड़ों पर मटर की खेती से अतिरिक्त मुनाफा
रबी के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों में हरी मटर बेहद लोकप्रिय और प्रमुख फसल है। आमतौर पर खेत के किनारों या मेड़ों की ज़मीन खाली पड़ी रह जाती है। यदि किसान इस खाली पड़ी जगह पर मटर की बुवाई करते हैं, तो उन्हें अलग से बड़े भूखंड की आवश्यकता नहीं पड़ती। गेहूं या सरसों जैसी प्राथमिक रबी फसलों के साथ-साथ मेड़ पर उगाई गई मटर बिना किसी अतिरिक्त जगह की खपत के किसान की आय में वृद्धि करती है। सही मौसम और उचित प्रबंधन मिलने पर मटर के पौधे बहुत तेजी से पनपते हैं और किसानों को सीमित संसाधनों में ही बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है।

## मिट्टी का स्वास्थ्य और उन्नत किस्मों का चुनाव
मेड़ या किनारों पर मटर की सफल खेती के लिए मिट्टी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। बुवाई से पहले खेत के किनारों की मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरी बना लेना चाहिए। इसके अलावा, खेत की मिट्टी में जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए, क्योंकि पानी का भराव मटर के पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। बीज का चयन करते समय किसानों को हमेशा प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। बुवाई की शुरुआत करने से पहले अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करना बहुत लाभदायक रहता है। स्थानीय कृषि वैज्ञानिक क्षेत्रीय मौसम और मिट्टी की बनावट के अनुसार सबसे उपयुक्त और रोग प्रतिरोधी किस्मों की सलाह देते हैं।

## सिंचाई, निराई-गुड़ाई और कीट प्रबंधन
यद्यपि मेड़ों पर मटर लगाने में अलग से खेत तैयार करने की मेहनत बच जाती है, लेकिन फसल को नियमित देखभाल की पूरी ज़रूरत होती है। पौधों की बेहतर बढ़वार के लिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर निराई-गुड़ाई करना आवश्यक होता है, जिससे मिट्टी में हवा का प्रवाह बना रहे और पौधों को पूरे पोषक तत्व मिल सकें। मटर की फसल पर विभिन्न प्रकार के कीटों और रोगों का हमला हो सकता है, इसलिए पत्तियों और फलियों की निरंतर निगरानी करते रहना चाहिए। लक्षण दिखते ही जैविक या अनुशंसित वैज्ञानिक उपायों को अपनाकर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।

## बाजार की मांग और बिक्री की रणनीति
हरी मटर की मांग भारतीय बाजारों और रसोइयों में साल भर बनी रहती है। रबी सीजन के दौरान जब ताजी मटर बाजार में आती है, तो स्थानीय मंडियों, सब्जी बाजारों और आसपास के व्यापारियों के पास इसकी खूब बिक्री होती है। हालांकि, मटर के बाजार भाव हर दिन और अलग-अलग मंडियों में परिवर्तित होते रहते हैं। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि फसल की तुड़ाई शुरू करने से पहले अपनी निकटतम मंडियों में मौजूदा दरों और मांग की पूरी जानकारी लें। बाजार की स्थिति का पहले से आकलन करके किसान अपनी फसल की बिक्री की सही योजना बना सकते हैं और व्यापारियों से अपनी उपज का अधिकतम मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

## इसका आप पर असर
यह कृषि तरीका सीमित ज़मीन वाले किसानों के लिए बिना अतिरिक्त लागत के आमदनी बढ़ाने का सीधा अवसर प्रदान करता है।

- **छोटे किसानों के लिए:** खेत की खाली मेड़ों का उपयोग करके अतिरिक्त फसल हासिल की जा सकती है। इससे बिना अतिरिक्त खेत खरीदे या किराए पर लिए हर सीजन में अतिरिक्त उत्पाद बेचने का मौका मिलता है।
- **लागत बचत पर प्रभाव:** मुख्य फसल के साथ ही सिंचाई और देखभाल का तालमेल बैठ जाता है। इससे अलग से बड़े खेत की जुताई और खाद पर होने वाला खर्च काफी हद तक बच जाता है।
- **बाजार में बिक्री:** हरी मटर की मांग साल भर ऊंची बनी रहती है। स्थानीय मंडी में फसल समय पर पहुँचाने से किसानों को तुरंत नकदी हासिल करने में मदद मिलती है।
- **जोखिम प्रबंधन:** यदि मौसम की वजह से मुख्य फसल प्रभावित होती है, तो मटर से होने वाली आय नुकसान की भरपाई करती है। यह विविध फसल पैटर्न किसानों को आर्थिक सुरक्षा देता है।

## ऐसा क्यों हुआ
रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान अपनी ज़मीन का बेहतर उपयोग करने के रास्ते खोज रहे हैं। सीमित कृषि योग्य भूमि और बढ़ती लागत के कारण खेतों की खाली पड़ी मेड़ों का उत्पादक उपयोग एक उपयोगी कृषि विकल्प बनकर उभरा है।

- **सीमित ज़मीन का दोहन:** भारत में अधिकांश किसानों के पास छोटे भूखंड हैं जहाँ अलग से सब्जी उगाना मुश्किल होता है। खेत की सीमाओं और मेड़ों का उपयोग करने से बिना मुख्य फसल का रकबा घटाए अतिरिक्त उपज संभव होती है।
- **रबी का अनुकूल मौसम:** ठंड का मौसम हरी मटर की फसल के लिए प्राकृतिक रूप से अनुकूल होता है। गेहूं और सरसों के साथ बुवाई करने से मटर के पौधों को समान जलवायु परिस्थितियां मिलती हैं।
- **बाजार में ताजी उपज की मांग:** सर्दियों के मौसम में भारतीय बाजारों में ताजी हरी मटर की भारी मांग रहती है। इससे किसानों को अपनी स्थानीय मंडियों में तुरंत खरीदार और उचित मूल्य मिल जाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. रबी सीजन में मुख्य फसल के साथ मटर की खेती कैसे की जा सकती है?
गेहूं या सरसों जैसी मुख्य रबी फसलों के साथ खेत की खाली मेड़ों और किनारों पर मटर बोई जा सकती है। इससे मुख्य फसल की जगह प्रभावित नहीं होती और अतिरिक्त उत्पाद मिलता है।

### 2. मेड़ पर मटर उगाने के लिए किस तरह की मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है?
खेत की मेड़ की मिट्टी भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए। पानी का भराव रुकने से मटर के पौधों की जड़ें सुरक्षित रहती हैं और बढ़वार बेहतर होती है।

### 3. बुवाई से पहले किसानों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
किसानों को हमेशा प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीजों का चुनाव करना चाहिए। इसके अलावा स्थानीय कृषि विभाग से अपने क्षेत्र के मौसम के अनुकूल किस्म की जानकारी लेनी चाहिए।

### 4. मटर की बिक्री से अच्छा लाभ कमाने के लिए क्या करना चाहिए?
तुड़ाई से पहले स्थानीय मंडियों और सब्जी बाजारों में मौजूदा दरों व मांग की जानकारी लेनी चाहिए। सही समय और सही बाजार की योजना बनाकर किसान अधिकतम दाम पा सकते हैं।

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