मेवाड़ में झाड़ोल और गोगुंदा हाईवे को जोड़ने की तैयारी, केंद्र से मिली वन भूमि उपयोग की सैद्धांतिक मंजूरी केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने उदयपुर जिले में गोगुंदा और झाड़ोल मार्ग को जोड़ने के लिए 14.6568 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है, जिससे यात्रियों का सफर 15 से 20 किलोमीटर तक घट जाएगा। राजस्थान के मेवाड़ अंचल में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने और दूरदराज के इलाकों को आपस में जोड़ने की दिशा में एक अहम प्रशासनिक प्रगति हुई है। उदयपुर जिले के अंतर्गत झाड़ोल और गोगुंदा हाईवे को आपस में जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना के लिए वन भूमि के इस्तेमाल की रुकावट काफी हद तक दूर हो गई है। केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य के लिए कुल 14.6568 हेक्टेयर आरक्षित एवं संरक्षित वन भूमि के डायवर्जन को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस फैसले के बाद लंबे समय से बेहतर सड़क संपर्क की उम्मीद लगाए बैठे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को आने वाले समय में बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद बंधी है। गांधीनगर क्षेत्रीय कार्यालय ने जारी किया आदेश केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के गांधीनगर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने 29 अक्टूबर को इस सड़क परियोजना के लिए वन भूमि डायवर्जन की सैद्धांतिक मंजूरी का औपचारिक आदेश जारी किया। इस प्रस्ताव पर मंत्रालय की क्षेत्रीय अधिकार प्राप्त समिति की 9 अक्टूबर को आयोजित बैठक में विचार-विमर्श किया गया था। हालांकि प्रशासनिक नियमों के तहत यह स्वीकृति परियोजना की अंतिम अनुमति नहीं है। परियोजना को धरातल पर उतारने और वास्तविक निर्माण कार्य शुरू करने से पहले निर्माण एजेंसी को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की गई कुल 35 कड़ी शर्तों का अक्षरशः पालन करना होगा। इन सभी 35 अनिवार्य शर्तों के अनुपालन की पुष्टि होने के बाद ही वन विभाग की भूमि के वास्तविक उपयोग की अंतिम मंजूरी जारी की जाएगी। 15 से 20 किलोमीटर तक घटेगा सफर इस संपर्क मार्ग के तैयार होने से उदयपुर शहर और उसके नजदीकी ग्रामीण अंचलों से गोगुंदा, झाड़ोल एवं प्रमुख दर्शनीय स्थलों की ओर यात्रा करने वाले आम लोगों को सीधी राहत मिलेगी। नए और सुदृढ़ मार्ग के अस्तित्व में आने के बाद गोगुंदा की ओर आवागमन करने वाले मुसाफिरों की यात्रा दूरी में लगभग 15 से 20 किलोमीटर की उल्लेखनीय कमी आ जाएगी। सफर छोटा होने से न केवल लोगों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि रोजाना खर्च होने वाले पेट्रोल और डीजल के मद में भी राहत मिलेगी। चौड़ी और मजबूत सड़क बनने से इस पूरे पहाड़ी और वन क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुगम, तेज और सुरक्षित हो जाएगी, जिससे स्थानीय कारोबार के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलेगी। परियोजना का मार्ग और तकनीकी विवरण सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की यह पूरी कार्ययोजना गोगुंदा-मजावद-उदयपुर-धार-रामपुरा-सिसारमा-नया खेड़ा-नादेश्वर मार्ग से संबंधित है। आधिकारिक आदेश के अनुसार इसमें सड़क के किलोमीटर 0/0 से लेकर किलोमीटर 39/0 तक के हिस्से को शामिल किया गया है। वर्तमान समय में बलीचा से गोगुंदा तक की सड़क दूरी तकरीबन 50 किलोमीटर बैठती है। बलीचा से ही झाड़ोल हाईवे की शुरुआत होती है, जबकि गोगुंदा की दिशा से आने वाली सड़क सिसारमा इलाके में आकर इससे सीधे मिल जाएगी। इस परस्पर कनेक्टिविटी के विकसित होने से दोनों तरफ से आने-जाने वाले वाहन चालकों को एक सुगम और छोटा वैकल्पिक मार्ग सुलभ हो सकेगा। इस निर्माण कार्य की नोडल क्रियान्वयन एजेंसी सार्वजनिक निर्माण विभाग, उदयपुर द्वितीय खंड है। पर्यावरण क्षतिपूर्ति और पौधारोपण का खाका सड़क विस्तार के लिए उपयोग में ली जाने वाली 14.6568 हेक्टेयर आरक्षित और संरक्षित वन भूमि की भरपाई के लिए सरकार ने व्यापक क्षतिपूरक वनीकरण की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत उदयपुर जिले की बड़गांव तहसील में स्थित बंडनवाड़ा गांव में ठीक 14.6568 हेक्टेयर गैर-वन भूमि को चिह्नित किया गया है। निर्धारित योजना के मुताबिक इस गैर-वन भूमि पर सघन हरियाली विकसित करने के उद्देश्य से करीब 14,650 पौधे रोपे जाएंगे। इस व्यवस्था से विकास कार्यों के लिए जंगल की जमीन लिए जाने के साथ ही समतुल्य क्षेत्र में नया हरित आवरण तैयार करने का संतुलन साधा जाएगा। वन्यजीवों के लिए अंडरपास और सख्त पाबंदियां पहाड़ी और जंगली इलाके से गुजरने वाले इस हाईवे पर वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही किसी भी तरह से बाधित न हो, इसके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन क्षेत्र के भीतर कुल तीन कम ऊंचाई वाले पशु अंडरपास निर्मित किए जाएंगे, ताकि जंगली जानवर सड़क के एक छोर से दूसरे छोर पर बिना किसी खतरे के आ-जा सकें। इसके अलावा पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने जंगल के भीतर श्रमिकों के अस्थायी शिविर लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति केवल अत्यंत अपरिहार्य परिस्थितियों में ही दी जाएगी और यह कार्य पूरी तरह वन विभाग के अधिकारियों की सीधी निगरानी में होगा। साथ ही वन भूमि की बाहरी सीमाओं को स्पष्ट करने के लिए चार फीट ऊंचे सीमेंट-कंक्रीट के पिलर लगाना अनिवार्य किया गया है। इसका आप पर असर इस सड़क परियोजना के पूरा होने से स्थानीय यात्रियों और वाहन चालकों के सफर में सीधा समय और ईंधन बचेगा। • राजस्थान भर में: राज्य के दक्षिणी और जनजातीय अंचलों में सुगम कनेक्टिविटी से क्षेत्रीय पर्यटन और व्यापारिक माल ढुलाई को रफ्तार मिलेगी। इससे दूरदराज के क्षेत्रों और मुख्य जिला मुख्यालयों के बीच आवागमन पहले से अधिक सुरक्षित और तेज हो सकेगा। • उदयपुर और गोगुंदा में: स्थानीय दैनिक यात्रियों को गोगुंदा जाने के लिए 15 से 20 किलोमीटर तक कम दूरी तय करनी होगी। इससे न केवल हर फेरे में ईंधन की बचत होगी, बल्कि सिसारमा और बलीचा के रास्ते सफर का समय भी काफी घट जाएगा। • पर्यटकों और मुसाफिरों के लिए: झाड़ोल, गोगुंदा और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान और व्यवस्थित हो जाएगी। चौड़ी सड़कों के कारण संकरे पहाड़ी मोड़ों पर होने वाले ट्रैफिक जाम और हादसों के जोखिम में कमी आएगी। • पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा: जंगल में तीन विशेष अंडरपास बनने से वन्यजीव बिना सड़क हादसों के सुरक्षित तरीके से आ-जा सकेंगे। साथ ही बंडनवाड़ा में 14,650 नए पौधे लगाने से स्थानीय पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई होगी। ऐसा क्यों हुआ इस परियोजना की आवश्यकता उदयपुर जिले के ग्रामीण और पर्यटन क्षेत्रों के बीच आवागमन को सुगम बनाने और मौजूदा लंबी दूरी को कम करने के लिए पड़ी। • सीधा कारण: बलीचा से गोगुंदा के बीच 50 किलोमीटर की मौजूदा दूरी को छोटा करने और झाड़ोल मार्ग से सीधी कनेक्टिविटी देने के लिए इस सड़क के चौड़ीकरण की जरूरत महसूस की गई। इस प्रक्रिया में वन क्षेत्र आड़े आ रहा था, जिसके लिए केंद्र से वैधानिक डायवर्जन अनुमति मांगी गई। • पर्यावरणीय प्रक्रिया: गोगुंदा-मजावद-उदयपुर-धार-रामपुरा-सिसारमा-नया खेड़ा-नादेश्वर मार्ग के किलोमीटर 0/0 से 39/0 तक सड़क निर्माण के लिए 14.6568 हेक्टेयर वन भूमि का इस्तेमाल अनिवार्य था, जिसके लिए 9 अक्टूबर को समिति की बैठक में प्रस्ताव पर विचार हुआ। • शर्तों का निर्धारण: वन क्षेत्र और वन्यजीवों को नुकसान से बचाने के लिए मंत्रालय ने 35 शर्तें तय कीं, जिनमें 14,650 पौधे लगाना और तीन पशु अंडरपास बनाना शामिल है, ताकि विकास और संरक्षण में तालमेल बना रहे। • अगला कदम: सार्वजनिक निर्माण विभाग, उदयपुर द्वितीय खंड जब इन 35 औपचारिक शर्तों के अनुपालन की रिपोर्ट सौंपेगा, तभी वन विभाग से जमीन हस्तांतरण की अंतिम मंजूरी मिलेगी और वास्तविक निर्माण शुरू होगा। सवाल-जवाब 1. झाड़ोल-गोगुंदा हाईवे जोड़ने के लिए कितनी वन भूमि का डायवर्जन किया जा रहा है? इस सड़क चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण परियोजना के लिए कुल 14.6568 हेक्टेयर आरक्षित एवं संरक्षित वन भूमि का डायवर्जन किया जाएगा। 2. नया मार्ग बनने से यात्रियों को दूरी में कितनी राहत मिलेगी? नए संपर्क मार्ग के तैयार होने से गोगुंदा की ओर यात्रा करने वाले लोगों का सफर करीब 15 से 20 किलोमीटर तक कम हो जाएगा। 3. वन भूमि के बदले क्षतिपूरक पौधारोपण कहां और कितना किया जाएगा? उदयपुर जिले की बड़गांव तहसील के बंडनवाड़ा गांव में 14.6568 हेक्टेयर गैर-वन भूमि पर करीब 14,650 पौधे लगाए जाएंगे। 4. वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए परियोजना में क्या उपाय शामिल हैं? सड़क पर वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तीन कम ऊंचाई वाले पशु अंडरपास बनाए जाएंगे और वन क्षेत्र में मजदूरों के शिविर लगाने पर रोक रहेगी। 5. इस परियोजना को लागू करने वाली मुख्य एजेंसी कौन सी है? इस सड़क परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी सार्वजनिक निर्माण विभाग, उदयपुर द्वितीय खंड है। 6. सड़क का निर्माण कार्य कब शुरू हो सकेगा? केंद्र सरकार द्वारा तय की गई 35 अनिवार्य शर्तों के पूरा होने और अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही वास्तविक निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। https://trendkia.com/rajasthan/mewar-men-jhadol-aura-gogunda-highway-ko-jorane-ki-taiyari-kendra-se-mili-vana-bhumi-upayoga-ki-saiddhantika-mnjuri-54783 TrendKia — Har trend, sabse pehle.