राजस्थान में मानसून की बेरुखी, सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश के बीच 20 जिलों में गहराया जल संकट राजस्थान में इस बार मानसून की बेरुखी के कारण सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे राज्य के 20 जिले सूखे की मार झेल रहे हैं। रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में इस मानसूनी सीजन में बादलों की बेरुखी साफ तौर पर देखी जा रही है, जिससे जल स्तर और कृषि को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों से बारिश का सिलसिला थमने के बाद राज्यभर में पानी की भारी किल्लत के आंकड़े तेजी से ऊपर जा रहे हैं। मौसम के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 23 अगस्त की शाम तक पूरे प्रदेश में औसत से 22 प्रतिशत कम पानी बरसा है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस अवधि के दौरान निर्धारित सामान्य कोटे के मुकाबले लगभग 75 एमएम कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जिससे स्थिति गंभीर होती जा रही है। साल की शुरुआत यानी 1 जून से लेकर 23 अगस्त की तय समय सीमा के भीतर राजस्थान में कुल 341.3 एमएम बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन बादलों की कंजूसी के कारण अब तक महज 266.3 एमएम पानी ही धरती तक पहुंच पाया है। अब लोगों की निगाहें केवल अगस्त महीने के आखिरी बचे हुए दिनों और सितंबर के शुरुआती सप्ताह पर टिकी हुई हैं, जिन्हें मौसम के मोर्चे पर आखिरी उम्मीद माना जा रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान से उलट रही स्थिति इस बार के मानसून सीजन ने मौसम विभाग के शुरुआती अनुमानों को भी पूरी तरह से झुठला दिया है। सीजन की शुरुआत में विशेषज्ञों ने आकलन जताया था कि पूरे राज्य में सामान्य से करीब 8 से 10 प्रतिशत कम बारिश हो सकती है, और साथ ही यह भी अंदेशा जताया गया था कि पश्चिमी राजस्थान में पानी की कमी का असर सबसे ज्यादा गहरा होगा। लेकिन जैसे-जैसे हफ्ते बीते, मौसम ने पूरी तरह एक नया और हैरान करने वाला रुख अख्तियार कर लिया। अनुमान के विपरीत, पश्चिम के मुकाबले पूर्वी राजस्थान के हिस्से में बारिश का घाटा कहीं ज्यादा बढ़ गया है। पूर्वी संभाग में सामान्य बारिश का आंकड़ा 488.2 एमएम होना चाहिए था, जिसके मुकाबले अब तक सिर्फ 375.02 एमएम बारिश ही दर्ज हुई है, और यहां घाटा बढ़कर 23 फीसदी तक पहुंच चुका है। इसके उलट, पश्चिमी राजस्थान में सामान्य 224.4 एमएम के मुकाबले 179.5 एमएम पानी बरसा है, जहां बारिश की कमी का यह आंकड़ा 20 फीसदी रिकॉर्ड किया गया है। पूर्वी इलाकों की स्थिति पश्चिमी जिलों से ज्यादा खराब जिस क्षेत्र के सबसे ज्यादा सूखे रहने की आशंका जताई गई थी, वह इलाका मौजूदा समय में पूर्वी राजस्थान के कई जिलों की तुलना में थोड़े बेहतर पायदान पर खड़ा नजर आ रहा है। अगर जिलों के हिसाब से जमीनी तस्वीर पर नजर डालें तो हालात और भी ज्यादा चिंताजनक दिखाई देते हैं। इस पूरे दौर में सिर्फ झुंझुनूं और भरतपुर ही ऐसे दो जिले बचे हैं जिन्हें सामान्य या फिर उससे बेहतर बारिश वाले जिलों की श्रेणी में जगह मिली है, जबकि कुल 11 जिले ग्रीन कैटेगरी में शामिल हैं। दूसरी तरफ, लगभग 20 जिले ऐसे हैं जो इस समय गंभीर रूप से बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं। इस प्राकृतिक मार का सबसे ज्यादा और बुरा असर जालोर जिले पर पड़ा है, जहां पानी का कुल घाटा बढ़कर 56 प्रतिशत के ऊंचे स्तर को छू चुका है। राजधानी जयपुर समेत कई बड़े जिले पानी को तरसे जालोर के अलावा दूसरे कई बड़े इलाकों में भी बादलों ने पूरी तरह से निराशा हाथ लगी है। इस फेहरिस्त में पाली जिला 47 प्रतिशत की कमी के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि बांसवाड़ा में 44 फीसदी, सवाई माधोपुर में 41 प्रतिशत, जैसलमेर में 40 फीसदी, सिरोही में 39 प्रतिशत, डूंगरपुर में 36 फीसदी और कोटा जिले में 34 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इस मामले में राज्य की राजधानी जयपुर भी पीछे नहीं छूटी है, जहां मानसून इस बार पूरी तरह मेहरबान नहीं हो सका। राजधानी जयपुर में इस सीजन के दौरान बारिश का घाटा बढ़कर 28 फीसदी तक पहुंच गया है। नियमानुसार 23 अगस्त तक जयपुर में लगभग 416 एमएम बारिश हो जानी चाहिए थी, मगर अब तक सिर्फ 298.2 एमएम पानी ही बरस सका है। आमतौर पर अगस्त महीने का दूसरा पखवाड़ा राजस्थान के लिए बारिश के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस बार मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण वह दौर भी पूरी तरह सूखा ही निकल गया। आसमान की तरफ टिकी नजरें अब जबकि मानसून का यह पूरा सफर अपने अंतिम चरण की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, अगस्त के बचे हुए दिन और सितंबर के शुरुआती एक-दो हफ्ते राजस्थान के भविष्य के लिए बहुत अहम साबित होने वाले हैं। यदि इस आखिरी समय में झमाझम बारिश होती है, तो काफी हद तक नुकसान की भरपाई संभव हो सकती है। हालांकि, अगर आसमान से इसी तरह बेरुखी जारी रही, तो यह जल संकट और गहराता चला जाएगा। सबसे बड़ा गौर करने वाला पहलू यह है कि मानसून की शुरुआत में जहां राज्यभर में केवल 8 से 10 फीसदी कमी की उम्मीद की जा रही थी, वह आंकड़ा अब बढ़कर सीधे 22 फीसदी पर पहुंच गया है। फिलहाल हर किसी की आंखें आसमान की तरफ टिकी हैं और लोग टकटकी लगाए देख रहे हैं कि आगामी दिन इस भारी भरकम कमी को कितना पाटने में कामयाब होते हैं। इसका आप पर असर यह समाचार राजस्थान के आम नागरिकों, किसानों और दैनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है: • भारत में: देश के अन्य हिस्सों की तरह राजस्थान में कृषि उत्पादन और जल संचय सीधे तौर पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करते हैं, जिससे फसल चक्र प्रभावित हो सकता है। • राजस्थान में: राज्य के 20 जिलों में बारिश की भारी कमी और जल संकट के कारण आगामी महीनों में पेयजल आपूर्ति और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता पर गंभीर असर पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. राजस्थान में इस बार मानसून की स्थिति कैसी है? राजस्थान में इस बार मानसून की भारी बेरुखी देखने को मिली है, जहां सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। 2. 23 अगस्त तक राज्य में कितनी बारिश की कमी दर्ज हुई है? 1 जून से 23 अगस्त के बीच राज्य में सामान्य 341.3 एमएम के मुकाबले केवल 266.3 एमएम बारिश हुई है, यानी लगभग 75 एमएम पानी कम बरसा है। 3. किन जिलों में बारिश की सबसे ज्यादा कमी है? जालोर जिले में बारिश का घाटा सबसे ज्यादा 56 फीसदी तक पहुंच गया है, इसके अलावा पाली में 47 प्रतिशत और बांसवाड़ा में 44 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। 4. राजधानी जयपुर में इस बार कितनी बारिश हुई है? जयपुर में सामान्य से 28 फीसदी कम बारिश हुई है, जहां 416 एमएम के लक्ष्य के मुकाबले केवल 298.2 एमएम पानी ही बरसा है। 5. किन जिलों को सामान्य बारिश की श्रेणी में रखा गया है? फिलहाल केवल झुंझुनूं और भरतपुर ऐसे दो जिले हैं जिन्हें सामान्य या बेहतर बारिश वाली श्रेणी में रखा गया है। https://trendkia.com/rajasthan/monsoon-deficit-deepens-in-rajasthan-as-20-districts-face-severe-dry-spell-with-22-percent-less-rainfall-21158 TrendKia — Har trend, sabse pehle.