# माउंट आबू का प्रसिद्ध शंकर मठ: जहां 27 टन के विशाल शिवलिंग पर बारिश खुद करती है जलाभिषेक

> सिरोही जिले के हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित शंकर मठ अपनी भव्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहां काले संगमरमर का 9.5 फीट ऊंचा और 27 टन वजनी शिवलिंग स्थापित है, जिस पर मानसून के दौरान खुद ही पानी गिरता है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/mount-abu-ka-prasiddha-shankar-math-jahan-27-ton-ke-vishal-shivalinga-par-barish-khud-karti-hai-jalabhishek-51925 · **Language:** Hindi
**Tags:** माउंट आबू, शंकर मठ, सिरोही, शिवलिंग, राजस्थान मंदिर, मानसून

अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच आबोहवा और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। सिरोही के मशहूर पर्वतीय स्थल माउंट आबू में स्थित शंकर मठ अपनी खास वास्तुकला और शांत परिवेश के कारण श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है। इस धार्मिक स्थल पर जिले का सबसे बड़ा शिवलिंग मौजूद है, जो यहां आने वाले हर व्यक्ति के लिए मुख्य आकर्षण का बिंदु रहता है। पर्यटक और भक्तगण यहां भगवान शिव के दर्शन करने के साथ-साथ इस शांत वातावरण में कुछ सुकून भरे पल भी बिताते हैं।

## इतिहास और स्थापना से जुड़ी जानकारी
इस पावन मठ की स्थापना का सफर काफी पुराना है। स्थानीय टूरिस्ट गाइड प्रकाश कुमार ने इस बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि संत स्वामी महेशानंद गिरि महाराज ने इस मठ की नींव साल 1960 से 1962 के दौरान रखी थी। इसके बाद साल 1965 के बाद से यहां साधु-संतों का स्थायी रूप से रहना शुरू हो गया। मुख्य शिव मंदिर का निर्माण कार्य साल 1975 में आरंभ हुआ था। आज के समय में इस पूरे मठ परिसर की देखरेख और संचालन स्वामी पुण्यानंद गिरि महाराज के मार्गदर्शन में किया जाता है।

## विशाल शिवलिंग और उसकी अनोखी विशेषताएं
इस मंदिर का मुख्य आकर्षण इसके गर्भगृह में स्थापित विशालकाय प्रतिमा है। यहां लगभग 9.5 फीट की ऊंचाई, 7.5 फीट की चौड़ाई और करीब 27 टन वजन वाला शिवलिंग विराजमान है। इस अद्भुत प्रतिमा को काले रंग के संगमरमर के केवल एक ही बड़े पत्थर को तराशकर तैयार किया गया है। कारीगरी के दौरान इस पत्थर पर भगवान शिव की जटाएं और तीसरी आंख जैसी आकृतियां अपने आप ही प्राकृतिक रूप से उभरकर सामने आ गईं। इस मंदिर की वास्तुकला इतनी अनूठी है कि जब मानसून का मौसम आता है, तो बारिश का पानी सीधे शिवलिंग पर गिरता है, जिसे स्थानीय लोग और भक्तगण एक प्राकृतिक जलाभिषेक के रूप में देखते हैं।

## परिसर की बनावट और अन्य आकर्षण
लाल पत्थरों से तैयार किए गए इस भवन की बनावट और इसके चारों तरफ फैली हरियाली इसे बेहद खास बनाती है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके पारंपरिक गुंबद की जगह पर विशालकाय शिवलिंग को ही स्थापित किया गया है। इसके अलावा परिसर के भीतर एक कमल का तालाब और रुद्राक्ष के कई पेड़ भी मौजूद हैं, जो यहां की फिजाओं को और भी अधिक शांत बनाते हैं। जो लोग ध्यान या पूजा-पाठ करना चाहते हैं, उनके लिए यह जगह बेहद अनुकूल है। आने वाले यात्रियों और संतों के ठहरने के लिए परिसर में 'शंकर धाम' नाम से विशेष सुविधा भी बनाई गई है।

## दैनिक धार्मिक अनुष्ठान और दर्शन का समय
इस मठ में हर दिन नियमित रूप से धार्मिक कार्य संपन्न होते हैं। सुबह और शाम के वक्त वेदांत तथा उपनिषद ग्रंथों का पाठ किया जाता है। इसके अलावा दिनभर में कुल तीन बार विधिवत आरती होती है। हर हफ्ते आने वाले सोमवार के दिन विशेष भस्म आरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। जो भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचना चाहते हैं, उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक मुख्य मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद रखे जाते हैं।

## इसका आप पर असर
माउंट आबू के इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल की यात्रा करने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय यहां के तय समय का विशेष ध्यान रखना होगा।

- **राजस्थान में:** स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को मुख्य मंदिर के दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बंद रहने के नियमों के अनुसार ही अपनी यात्रा का समय तय करना चाहिए। मानसून के दौरान यहां आने वाले यात्रियों को प्राकृतिक दृश्यों के साथ-साथ इस अनूठे जलाभिषेक के दर्शन का अवसर मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस प्राचीन और अनूठे मंदिर के निर्माण तथा इसकी विशेष भौगोलिक बनावट के पीछे कुछ खास कारण और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जुड़ी हुई है।

- **ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:** इस मठ की स्थापना साठ के दशक में संत स्वामी महेशानंद गिरि महाराज द्वारा क्षेत्र में आध्यात्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। मुख्य मंदिर का निर्माण कार्य बाद में साल 1975 में शुरू किया गया था।
- **शिल्प कला का स्वरूप:** काले संगमरमर के एक ही विशाल पत्थर को तराशने के दौरान प्राकृतिक रूप से भगवान शिव की तीसरी आंख और जटाओं की आकृतियां उभर आई थीं। मंदिर की वास्तुकला ऐसी है कि बारिश का पानी सीधे मुख्य प्रतिमा पर गिरता है।

## सवाल-जवाब

### 1. शंकर मठ कहाँ स्थित है?
शंकर मठ राजस्थान के सिरोही जिले के प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू की पहाड़ियों के बीच स्थित है।

### 2. शंकर मठ की स्थापना किसने की थी?
इस मठ की स्थापना संत स्वामी महेशानंद गिरि महाराज ने वर्ष 1960 से 1962 के बीच की थी।

### 3. शिवलिंग का वजन और आकार कितना है?
गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग लगभग 9.5 फीट ऊंचा, 7.5 फीट चौड़ा और करीब 27 टन वजनी है।

### 4. मंदिर के कपाट कब बंद रहते हैं?
दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्य मंदिर के कपाट दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बंद रहते हैं।

### 5. मानसून के दौरान मंदिर की क्या विशेषता है?
मानसून के मौसम में बारिश का पानी सीधे शिवलिंग पर गिरता है, जिसे श्रद्धालु प्राकृतिक जलाभिषेक मानते हैं।

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