माउंट आबू नगरपालिका कैसे बनी राजस्थान की सबसे अमीर स्थानीय संस्था, जानिए इसकी जबरदस्त कमाई के जरिए सिरोही जिले में स्थित प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू की नगरपालिका सालाना 42 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखती है, जिसकी मुख्य वजह एंट्री टोल, नक्की झील का ठेका और पर्यटन व्यवसाय हैं। सिरोही जिले में स्थित राजस्थान का इकलौता पर्वतीय पर्यटन केंद्र माउंट आबू न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां का स्थानीय निकाय भी अपनी वित्तीय संपन्नता के मामले में पूरे प्रदेश में शीर्ष पर गिना जाता है। महज 25 हजार के आसपास आबादी वाले इस छोटे से पहाड़ी शहर की नगरपालिका का सालाना वित्तीय बजट 42 करोड़ रुपये से भी अधिक का पारित होता है। बजट का यह विशाल आकार राज्य की कई बड़ी नगर परिषदों के बराबर ठहरता है। एक छोटी आबादी वाले कस्बे के स्थानीय प्रशासन का इतना साधन संपन्न होना किसी भी सामान्य नागरिक को हैरत में डाल सकता है, लेकिन इसके पीछे इस हिल स्टेशन की अनूठी भौगोलिक स्थिति और विशाल पर्यटन तंत्र काम करता है। प्रवेश द्वार पर टोल टैक्स से होती है भारी भरकम कमाई माउंट आबू नगरपालिका की तिजोरी भरने में सबसे बड़ा योगदान शहर के प्रवेश द्वार पर वसूला जाने वाला टोल टैक्स निभाता है। बाहर से आने वाले प्रत्येक पर्यटक वाहन को शहर की सीमा में दाखिल होते ही यह शुल्क चुकाना होता है। इस सिंगल चेकपोस्ट से पालिका को पूरे साल करोड़ों रुपये का सीधा राजस्व प्राप्त होता है। उदाहरण के तौर पर, सामान्य तौर पर कम आवाजाही वाले पिछले जुलाई के महीने में ही इस नाके से लगभग 60 लाख रुपये का संग्रह दर्ज किया गया था। गर्मियों की छुट्टियों और दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान यह आमदनी कई गुना बढ़ जाती है। साल के आम दिनों और ऑफ सीजन के दौरान भी इस टोल नाके से हर महीने औसतन 20 से 25 लाख रुपये की नियमित आमदनी बनी रहती है। त्योहारी छुट्टियों और लंबे वीकेंड्स पर वाहनों की कतारें इतनी लंबी हो जाती हैं कि महज चंद दिनों के भीतर ही 15 लाख रुपये तक का राजस्व एकत्र हो जाता है। पालिका के रिकॉर्ड के अनुसार, वीकेंड पर केवल एक दिन में सर्वाधिक 6.7 लाख रुपये की ऐतिहासिक कमाई भी दर्ज हो चुकी है। पूरे वित्तीय वर्ष में अकेले इस टोल व्यवस्था से पालिका को 5 से 7 करोड़ रुपये की बंपर राशि मिलती है, जिसका कुछ निर्धारित हिस्सा वन विभाग को भी हस्तांतरित किया जाता है। नक्की झील के बोटिंग ठेके से मिलता है करोड़ों का राजस्व टोल के बाद इस पर्वतीय निकाय के लिए दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय आधार यहां की मशहूर नक्की झील है। झील में नौकायन और उससे जुड़ी अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का ठेका करोड़ों रुपये की ऊंची बोली में नीलाम होता है। कुछ वर्ष पहले नक्की लेक के संचालन का 3 साल का अनुबंध 7.61 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि में छोड़ा गया था। देश और विदेश से आने वाले लाखों सैलानी इस झील में नौकायन का आनंद लेने पहुंचते हैं। इस प्राकृतिक जलस्रोत से मिलने वाला यह विशाल राजस्व निकाय को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाता है। होटल कारोबार, टैक्स और विज्ञापनों का अतिरिक्त सहारा पर्यटन का बड़ा केंद्र होने के कारण शहर में सैकड़ों होटल, लग्जरी रिसॉर्ट्स और रेस्टोरेंट्स संचालित हो रहे हैं। इन तमाम व्यावसायिक परिसरों से नगरपालिका को हर साल मोटा कमर्शियल लाइसेंस शुल्क और अर्बन डेवलपमेंट टैक्स प्राप्त होता है। इसके साथ ही शहर के प्रमुख चौराहों, सर्कलों और मुख्य पार्किंग स्थलों पर बड़े कॉर्पोरेट घरानों तथा ब्रांड्स द्वारा लगाए जाने वाले विज्ञापन होर्डिंग्स से भी निकाय को भारी राजस्व की प्राप्ति होती है। संपत्ति कर और यूजर चार्ज जैसे आंतरिक साधन इस बजट को और मजबूत करते हैं। ब्रिटिश दौर में 1864 में रखी गई थी प्रशासनिक नींव आर्थिक रूप से राज्य का सबसे समृद्ध निकाय होने के साथ ही यह राजस्थान की सबसे पुरानी नगरपालिका का दर्जा भी रखता है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1864 में इसकी स्थापना की गई थी। उन्नीसवीं सदी के मध्य में मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी और संक्रामक महामारियों से राहत पाने के लिए अंग्रेज अधिकारियों ने माउंट आबू को अपना ग्रीष्मकालीन ठिकाना बनाया था। उसी दौर में यहां सुचारू स्वच्छता और जनसुविधाएं विकसित करने के उद्देश्य से पहली बार इस आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत की गई थी, जो आज अपने अनोखे रेवेन्यू मॉडल के बूते चल रही है। इसका आप पर असर माउंट आबू की यात्रा करने वाले सैलानियों और स्थानीय निवासियों पर इस समृद्ध राजस्व मॉडल का सीधा प्रभाव पड़ता है। • पर्यटकों के लिए: शहर में प्रवेश करते ही निजी और व्यावसायिक वाहनों पर निकाय टोल टैक्स अनिवार्य रूप से वसूला जाता है। अपनी यात्रा योजना और बजट में प्रवेश टोल तथा नक्की झील पर बोटिंग के निर्धारित शुल्क को पहले से शामिल करके चलें। • माउंट आबू में: भारी बजट के चलते 25 हजार स्थानीय नागरिकों को बेहतर सफाई और बुनियादी नागरिक सुविधाएं प्राप्त होती हैं। स्थानीय होटल व दुकान संचालकों को नियमित रूप से व्यावसायिक लाइसेंस शुल्क और नगरीय विकास कर समय पर चुकाना होता है। • राजस्थान भर में: आत्मनिर्भर नगर निकायों के लिए माउंट आबू का मॉडल अन्य पर्यटन आधारित शहरों के लिए एक मिसाल प्रस्तुत करता है। राज्य के अन्य नगर निकाय भी अपने स्थानीय आकर्षणों का मुद्रीकरण करके अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने की प्रेरणा ले सकते हैं। • पर्यावरण व वन क्षेत्र: प्रवेश टोल से एकत्र होने वाले राजस्व का एक हिस्सा वन विभाग को जाता है। यह फंड अरावली पर्वतमाला के आसपास पारिस्थितिकी संतुलन और वन संरक्षण कार्यों में इस्तेमाल होता है। ऐसा क्यों हुआ माउंट आबू नगरपालिका की अपार वित्तीय संपदा के पीछे इसके विशिष्ट भौगोलिक और ऐतिहासिक कारक काम करते हैं। • एकमात्र पर्वतीय गंतव्य: राजस्थान के भीषण मरुस्थलीय और गर्म वातावरण के बीच माउंट आबू राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है। इसके चलते पूरे साल गुजरात और राजस्थान के लाखों सैलानी यहां घूमने आते हैं, जिससे लगातार राजस्व उत्पन्न होता है। • रणनीतिक टोल और ठेका व्यवस्था: शहर में प्रवेश का एक ही मुख्य मार्ग होने से टोल वसूली बेहद सटीक और प्रभावी हो जाती है। इसके अलावा नक्की झील की व्यावसायिक नीलामी से तीन वर्षों में 7.61 करोड़ रुपये जैसा भारी-भरकम अग्रिम राजस्व प्राप्त हो जाता है। • सघन होटल और व्यापारिक ढांचा: सैकड़ों रिसॉर्ट्स, रेस्टोरेंट्स और विज्ञापनों से मिलने वाला अर्बन डेवलपमेंट टैक्स और लाइसेंस शुल्क पालिका के खजाने में लगातार इजाफा करता है। सीमित आबादी के मुकाबले व्यावसायिक आमदनी का अनुपात बहुत ऊंचा है। • 1864 की पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था: अंग्रेजों द्वारा स्थापित 1864 की व्यवस्था ने शहर को बुनियादी संरचना और कर प्रणाली की मजबूत शुरुआत दी थी। 19वीं सदी से लगातार चली आ रही इसी कार्यप्रणाली ने इसे आर्थिक दृष्टि से सबसे सुदृढ़ निकाय बना दिया। सवाल-जवाब 1. माउंट आबू नगरपालिका का सालाना बजट कितना है? माउंट आबू नगरपालिका का वार्षिक बजट 42 करोड़ रुपये से भी अधिक का पारित होता है, जो राज्य की कई बड़ी नगर परिषदों के बराबर है। 2. इस नगरपालिका की कमाई का सबसे बड़ा जरिया क्या है? शहर के प्रवेश द्वार पर स्थित चेकपोस्ट से वसूला जाने वाला टोल टैक्स सबसे बड़ा स्रोत है, जिससे सालाना 5 से 7 करोड़ रुपये मिलते हैं। 3. नक्की झील से पालिका को कितनी आमदनी होती है? नक्की झील में नौकायन और व्यावसायिक गतिविधियों का तीन साल का ठेका कुछ साल पहले 7.61 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ था। 4. माउंट आबू नगरपालिका की स्थापना कब हुई थी? इसकी स्थापना ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1864 में हुई थी और यह राजस्थान की सबसे पुरानी नगरपालिका है। 5. एक दिन में टोल नाके से अधिकतम कितनी कमाई दर्ज की गई है? सैलानियों की भारी भीड़ वाले एक वीकेंड पर सिंगल डे में रिकॉर्ड 6.7 लाख रुपये की टोल वसूली दर्ज की जा चुकी है। https://trendkia.com/rajasthan/mount-abu-municipality-kaise-bani-rajasthan-ki-sabase-amira-sthaniya-snstha-janie-isaki-jabaradasta-kamai-ke-jarie-48039 TrendKia — Har trend, sabse pehle.