मल्चिंग तकनीक से सिंचाई में होगी 50 प्रतिशत पानी की बचत, फसलों की लागत घटाने का आसान तरीका खेती में लागत कम करने और पैदावार बढ़ाने के लिए मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इससे सिंचाई के पानी की खपत आधी हो सकती है और खरपतवार पर होने वाला खर्च भी घटता है। आधुनिक कृषि पद्धतियों में किसान अब ऐसी तकनीकों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो उत्पादन लागत को कम करने के साथ-साथ फसलों की पैदावार में सुधार लाती हैं। इस दिशा में मल्चिंग तकनीक कृषि क्षेत्र में एक प्रभावी और व्यावहारिक विकल्प बनकर उभरी है। इस तकनीक के तहत फसल के पौधों के चारों ओर की मिट्टी को जैविक पदार्थों जैसे पुआल और सूखी पत्तियों अथवा प्लास्टिक शीट की मदद से ढक दिया जाता है। ऐसा करने से पौधों के मूल तंत्र यानी जड़ों को विभिन्न बाहरी खतरों और पर्यावरणीय प्रतिकूलताओं से सुरक्षा मिलती है। सिंचाई के पानी और लागत में बड़ी बचत मल्चिंग को अपनाने का सबसे मुख्य लाभ जल संरक्षण के रूप में देखा जाता है। जब मिट्टी की ऊपरी सतह पूरी तरह ढकी होती है, तब सूर्य की सीधी किरणों के संपर्क में न आने के कारण नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है। वाष्पीकरण की दर धीमी होने से फसलों को बार-बार सींचने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस तकनीक के उपयोग से सिंचाई के पानी में लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक की प्रत्यक्ष बचत दर्ज की जा सकती है, जिससे किसानों का ऊर्जा और सिंचाई पर होने वाला आर्थिक खर्च काफी कम हो जाता है। खरपतवार नियंत्रण और मजदूरी में कमी खेत में अवांछित घास-फूस यानी खरपतवार की समस्या से निपटने में भी मल्चिंग बेहद असरदार पाई गई है। जब मिट्टी के ऊपर सुरक्षात्मक शीट या ढाल बिछाई जाती है, तो सूर्य का प्रकाश मिट्टी की सतह तक नहीं पहुंच पाता। प्रकाश के अभाव में खरपतवार के बीज अंकुरित नहीं हो पाते या उनका विकास रुक जाता है। इससे किसानों को बार-बार निराई-गुड़ाई कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे खेत की देखरेख में लगने वाले मजदूरों का खर्च घटता है। इसके अलावा, मिट्टी के माध्यम से फैलने वाले कुछ हानिकारक कीटों और फंगस के संक्रमण से भी फसल का बचाव होता है। मिट्टी के स्वास्थ्य और तापमान का संतुलन यह तकनीक मिट्टी की भौतिक स्थिति और उसके तापमान को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ठंड के मौसम में यह मिट्टी को अत्यधिक पाले से बचाती है, जबकि गर्मी के दिनों में तेज लू के थपेड़ों से जड़ों का संरक्षण करती है। मल्चिंग के कारण मिट्टी की ऊपरी परत कठोर नहीं होती और उसमें भुरभुरापन बना रहता है, जिससे जड़ों का फैलाव और विकास बेहतर तरीके से होता है। साथ ही, मूसलाधार बारिश के दौरान मिट्टी का कटाव रोकने में भी यह काफी मददगार साबित होती है। सब्जियों की खेती में विशेष लाभ बागवानी और सब्जी वर्गी फसलों के लिए मल्चिंग तकनीक का प्रयोग अत्यधिक लाभदायक माना जाता है। विशेष रूप से टमाटर, मिर्च, खरबूज और तरबूज जैसी फसलों में इसका नियमित प्रयोग करने से सिंचाई जल, खरपतवार प्रबंधन और मजदूरी पर होने वाले कुल व्यय में बड़ी कटौती की जा सकती है। पौधों को अनुकूल वातावरण मिलने से उनकी बढ़वार अच्छी होती है, जिससे अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता और कुल पैदावार में सुधार देखने को मिलता है। विशेषकर पानी की किल्लत वाले क्षेत्रों में यह तकनीक खेती को अधिक टिकाऊ और लाभप्रद बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है। इसका आप पर असर मल्चिंग तकनीक को अपनाने से किसानों को सिंचाई के पानी और मजदूरी के खर्च में तुरंत राहत मिलती है। • लागत में कमी: सिंचाई के पानी में 30 से 50 प्रतिशत तक की बचत होती है। इससे पंपिंग और पानी की खपत पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है। • खरपतवार से राहत: प्लास्टिक या जैविक ढाल से धूप मिट्टी तक नहीं पहुंचती। इससे बिना वजह घास-फूस नहीं उगती और निराई-गुड़ाई की मजदूरी बचती है। • फसल की सुरक्षा: मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहने से पाले और लू का असर घटता है। पौधों की जड़ें सुरक्षित रहकर बेहतर विकास करती हैं। • उत्पादन में सुधार: टमाटर, मिर्च, तरबूज और खरबूज जैसी फसलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में बढ़ोतरी होती है। ऐसा क्यों हुआ कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और जल संकट के कारण किसान पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक समाधान अपना रहे हैं। • पानी की कमी: सूखे या भूजल की किल्लत वाले इलाकों में नमी को लंबे समय तक बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है। • मजदूरी की बढ़ती दरें: खेत में बार-बार निराई-गुड़ाई कराने से लागत बढ़ती है, जिससे बचने के लिए खरपतवार रोधी तकनीकों की जरूरत पड़ी। • मौसम के प्रभाव से बचाव: बदलते मौसम, अत्यधिक ठंड और भीषण गर्मी से फसलों की जड़ों को सुरक्षित रखने के लिए मल्चिंग एक सुरक्षा चक्र का काम करती है। सवाल-जवाब 1. मल्चिंग तकनीक क्या है? मल्चिंग में फसल के पौधों की जड़ों के आसपास की मिट्टी को पुआल, सूखी पत्तियों या प्लास्टिक शीट से ढक दिया जाता है। 2. इस तकनीक से पानी की कितनी बचत होती है? मल्चिंग का उपयोग करने से सिंचाई में लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। 3. क्या मल्चिंग से खरपतवार नियंत्रित होते हैं? हां, मिट्टी ढकी रहने के कारण सूर्य की रोशनी नीचे नहीं पहुंचती, जिससे अनचाही घास नहीं उगती और मजदूरी का खर्च बचता है। 4. किन फसलों में यह तकनीक सबसे अधिक उपयोगी है? यह तकनीक टमाटर, मिर्च, तरबूज और खरबूज जैसी सब्जी वर्ग की फसलों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। https://trendkia.com/rajasthan/mulching-takneek-se-sinchai-mein-hogi-50-percent-pani-ki-bachat-32910 TrendKia — Har trend, sabse pehle.