# नागौर के जेएलएन अस्पताल में मरीजों को लंबी लाइनों से राहत, ओपीडी और आयुष्मान योजना के लिए बढ़े काउंटर और कर्मचारी

> नागौर के जेएलएन अस्पताल में मरीजों की भीड़ को कम करने के लिए ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटरों और आयुष्मान योजना के कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई है। इससे अस्पताल में दस्तावेज सत्यापन और पर्ची मिलने की प्रक्रिया तेज होगी।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/nagaur-ke-jln-hospital-men-marijon-ko-lnbi-lainon-se-rahata-opd-aura-ayushman-scheme-ke-lie-barhe-kauntara-aura-karmachari-32974 · **Language:** Hindi
**Tags:** नागौर जेएलएन अस्पताल, ओपीडी काउंटर रजिस्ट्रेशन, आयुष्मान योजना, स्वास्थ्य सुधार राजस्थान, अस्पताल प्रबंधन, मरीज सुविधा

नागौर के जेएलएन अस्पताल ने मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के दौरान होने वाली असुविधाओं से बचाने के लिए अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अस्पताल में अब मरीजों को OPD पर्ची बनवाने और मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना से जुड़े कामों के लिए लंबी लाइनों में खड़े होकर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए न केवल काउंटरों की संख्या बढ़ा दी है, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी की है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अस्पताल में होने वाली भीड़ को नियंत्रित करना और मरीजों के काम को तेजी से पूरा करना है।

## पर्ची काउंटरों की संख्या में वृद्धि और कतारों का नया नियम
जेएलएन अस्पताल में पहले OPD पर्ची बनाने के लिए केवल दो ही काउंटर संचालित किए जा रहे थे, जिसकी वजह से मरीजों को पर्ची बनवाने में काफी समय लगता था और वहां भारी भीड़ जमा हो जाती थी। इस समस्या के समाधान के लिए अस्पताल प्रशासन ने अब काउंटरों की संख्या बढ़ाकर तीन कर दी है। एक नया काउंटर शुरू होने से मरीजों को अपनी पर्ची बनवाने के लिए ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही अस्पताल प्रशासन ने भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए महिला, पुरुष और बुजुर्ग मरीजों के लिए अलग-अलग कतारें लगाने की व्यवस्था की है।

इस अलग कतार प्रणाली से पर्ची काउंटरों पर होने वाली अफरातफरी थमेगी और मरीज बिना किसी परेशानी के अपनी निर्धारित लाइन में खड़े होकर आसानी से पर्ची बनवा सकेंगे। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से मरीजों का कीमती समय बचेगा और उन्हें इलाज के लिए डॉक्टर के कक्ष तक पहुंचने में आसानी होगी। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा बुजुर्ग मरीजों को मिलेगा, जिन्हें अब पर्ची लेने के लिए घंटों सामान्य कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा।

## मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ी
मरीजों को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (जिसे मां योजना भी कहा जाता है) का लाभ जल्द से जल्द दिलाने के लिए अस्पताल में ऑपरेटरों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। इस कल्याणकारी योजना के तहत मरीजों के दस्तावेजों के सत्यापन और क्लेम की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अब पहले से कहीं अधिक कर्मचारी तैनात किए गए हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस योजना से जुड़े कार्यों को संभालने के लिए अब 8 ऑपरेटर मौजूद रहेंगे, जो मरीजों की एंट्री से लेकर दस्तावेजों की जांच और क्लेम दर्ज करने की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करेंगे।

इसके अतिरिक्त, योजना के काम को और अधिक सुचारू बनाने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। वर्तमान में MCH विंग में चार ऑपरेटर पहले से ही काम कर रहे हैं। इसके साथ ही जेएलएन अस्पताल में दो नर्सिंग स्टाफ और MCH विंग में दो नर्सिंग स्टाफ को भी इस व्यवस्था से जोड़ दिया गया है। इस प्रकार, कुल 16 कर्मचारियों की एक विशेष टीम इस योजना से संबंधित सभी कार्यों को पूरी तत्परता से संभालेगी। इस कार्यबल में हुई वृद्धि से मरीजों के क्लेम और दस्तावेजों की प्रोसेसिंग बहुत तेजी से हो सकेगी।

## क्लेम प्रक्रिया तेज होने से अस्पताल के फंड में हुई भारी बढ़ोतरी
अस्पताल प्रशासन का पूरा ध्यान केवल मरीजों का इंतजार कम करने पर ही केंद्रित नहीं है, बल्कि वे योजना के तहत मिलने वाले क्लेम को भी समय पर दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं। क्लेम की एंट्री प्रक्रिया में आई तेजी की वजह से अस्पताल को मिलने वाले सरकारी फंड में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में अस्पताल को लगभग 40 लाख रुपये का फंड प्राप्त हुआ था, जो अगस्त में बढ़कर लगभग 65 लाख रुपये हो गया। अब इस सुधरी हुई व्यवस्था के दम पर प्रशासन ने सितंबर महीने में 80 लाख रुपये का फंड हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि फंड में होने वाली इस बढ़ोतरी का सीधा इस्तेमाल जेएलएन अस्पताल में मरीजों के लिए नागरिक सुविधाओं को और अधिक बेहतर बनाने में किया जाएगा। नई काउंटर व्यवस्था, अलग-अलग कतारों के नियम और आयुष्मान योजना के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती से अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस पूरी कवायद का एकमात्र उद्देश्य अस्पताल की पूरी कार्यप्रणाली को तेज और मरीज-अनुकूल बनाना है।

## इसका आप पर असर
नागौर के जेएलएन अस्पताल में किए गए इन प्रशासनिक सुधारों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों की मुश्किलें और प्रतीक्षा समय काफी हद तक कम हो जाएंगे।

- **कम प्रतीक्षा समय:** ओपीडी (OPD) विभाग में आने वाले मरीजों को नया रजिस्ट्रेशन काउंटर खुलने से अब लाइनों में कम समय बिताना होगा। इस बदलाव से अस्पताल पहुंचने से लेकर डॉक्टर से परामर्श लेने तक की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।
- **व्यवस्थित कतार प्रबंधन:** महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों के लिए अलग-अलग कतारें होने से रजिस्ट्रेशन क्षेत्र में व्यवस्था बनी रहेगी। इसके चलते बुजुर्ग मरीजों को भीड़भाड़ में लंबे समय तक खड़े रहने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी।
- **त्वरित बीमा मंजूरी:** आयुष्मान योजना की टीम में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 16 करने से दस्तावेजों का सत्यापन और क्लेम रजिस्ट्रेशन काफी तेज हो जाएगा। इससे मरीजों को बिना किसी प्रशासनिक देरी के योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ मिल सकेगा।
- **अस्पताल की सुविधाओं में सुधार:** अस्पताल के फंड में हुई बढ़ोतरी, जिसका लक्ष्य सितंबर में 80 लाख रुपये तक पहुंचना है, का सीधा निवेश बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने में किया जाएगा। इस वित्तीय सुधार से अस्पताल के भीतर मरीजों को बेहतर सुविधाएं और चिकित्सा उपकरण मिल सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
जेएलएन अस्पताल में व्यवस्थाओं को बदलने का मुख्य कारण अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करना और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना था।

- **अत्यधिक भीड़भाड़ की समस्या:** अस्पताल में पहले केवल दो OPD काउंटर होने के कारण मरीजों की भारी भीड़ लग जाती थी, जिससे कर्मचारियों के लिए दैनिक कार्य संभालना मुश्किल हो गया था। इस समस्या को दूर करने के लिए तीसरा काउंटर शुरू करना और अलग कतारें बनाना अनिवार्य हो गया था।
- **योजनाओं में प्रशासनिक देरी:** मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत दस्तावेजों की प्रोसेसिंग और सत्यापन का काम कर्मचारियों की कमी के कारण धीमा था। मरीजों को समय पर लाभ देने के लिए इस टीम का आकार बढ़ाकर 16 सदस्य करना बेहद जरूरी हो गया था।
- **वित्तीय फंड को अधिकतम करना:** क्लेम की फाइलों को तेजी से जमा करने से अस्पताल को मिलने वाली सरकारी सहायता राशि में बड़ी वृद्धि हुई है, जो जुलाई में 40 लाख से बढ़कर अगस्त में 65 लाख रुपये हो गई। प्रशासन ने इस गति को बनाए रखने और आगे के सुधारों के लिए सितंबर में 80 लाख रुपये का लक्ष्य रखा है।

## सवाल-जवाब

### 1. नागौर के जेएलएन अस्पताल में वर्तमान में कितने ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर चालू हैं?
अस्पताल प्रशासन ने मरीजों का प्रतीक्षा समय कम करने के लिए ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटरों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन कर दी है।

### 2. पर्ची काउंटरों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या विशेष व्यवस्था की गई है?
अस्पताल प्रशासन ने भीड़भाड़ से बचने के लिए पुरुष, महिला और बुजुर्ग मरीजों के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की है।

### 3. मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के लिए विशेष रूप से कितने ऑपरेटर तैनात किए गए हैं?
योजना के तहत प्रविष्टियों, दस्तावेजों और क्लेम से जुड़े कार्यों को संभालने के लिए कुल 8 ऑपरेटरों को तैनात किया गया है।

### 4. अस्पताल में स्वास्थ्य योजना का प्रबंधन करने वाली टीम में कुल कितने सदस्य शामिल हैं?
इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए 16 सदस्यों की एक विशेष टीम बनाई गई है, जिसमें एमसीएच विंग के ऑपरेटर और अतिरिक्त नर्सिंग स्टाफ शामिल हैं।

### 5. जेएलएन अस्पताल को अगस्त महीने में क्लेम के जरिए कितना फंड प्राप्त हुआ था?
अस्पताल को अगस्त के महीने में लगभग 65 लाख रुपये का फंड मिला था, जो जुलाई के 40 लाख रुपये से अधिक है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._