नागौर के निंबी जोधा गांव में गोवंश के लिए आई खास एंबुलेंस, ग्रामीणों और भामाशाहों की अनूठी पहल नागौर जिले के निंबी जोधा गांव में वीर तेजाजी गो सेवा समिति ने ग्रामीणों और भामाशाहों के सहयोग से 12.30 लाख रुपए की लागत से गोवंश के लिए एक विशेष एंबुलेंस खरीदी है। नागौर जिले में बेजुबान और बेसहारा पशुओं की सेवा के लिए एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल सामने आई है। यहां के निंबी जोधा गांव में वीर तेजाजी गो सेवा समिति की तरफ से एक सराहनीय कदम उठाते हुए गोवंश के लिए विशेष एंबुलेंस का इंतजाम किया गया है। अक्सर सड़क हादसों में घायल होने वाले मवेशियों और बीमार पशुओं को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसी समस्या के समाधान के लिए समिति ने ग्रामीणों और भामाशाहों के साथ मिलकर एक खास एंबुलेंस वाहन खरीदने का निर्णय लिया, जिसे अब गांव में लाया जा चुका है। इस वाहन की खरीद पर कुल 12 लाख 30 हजार रुपए की लागत आई है। एंबुलेंस के गांव पहुंचते ही पूरे इलाके के पशुप्रेमियों और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। वीर तेजाजी गो सेवा समिति से जुड़े युवाओं और पदाधिकारियों ने क्षेत्र में बेसहारा पशुओं की दुर्दशा को बहुत करीब से देखा था। इसके बाद उन्होंने मिलकर एक वाहन खरीदने की योजना बनाई और गांव के लोगों, समाजसेवियों तथा भामाशाहों से आर्थिक मदद की अपील की। सभी ने अपनी क्षमता के अनुसार इस नेक काम में बढ़-चढ़कर दान दिया और इस मुहिम को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस तरह सामूहिक प्रयासों के बाद इस वाहन को लाडनूं से निंबी जोधा लाया गया। लिफ्ट सिस्टम से होगी गोवंश को आसानी से चढ़ाने की व्यवस्था केवल एंबुलेंस खरीद लेना ही काफी नहीं था, इसलिए समिति इस वाहन को पशुओं की शारीरिक जरूरतों के हिसाब से विशेष रूप से तैयार करवा रही है। इस प्रक्रिया के तहत वाहन में करीब 4 लाख रुपए की अतिरिक्त लागत से एक आधुनिक लिफ्ट सिस्टम लगाया जाएगा। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ पशुओं को वाहन तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होती है। कई बार तो चोट और दर्द की वजह से गोवंश अपने पैरों पर खड़ा तक नहीं हो पाता है। ऐसे में इस लिफ्ट सिस्टम की मदद से लाचार और घायल पशुओं को बिना किसी अतिरिक्त तकलीफ के आसानी से उठाकर गाड़ी के अंदर चढ़ाया जा सकेगा। राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले हादसों से मिलेगी बड़ी राहत निंबी जोधा और उसके आसपास के इलाकों से दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं। इन व्यस्त मार्गों पर वाहनों की तेज रफ्तार के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें अक्सर बेकसूर गोवंश और अन्य बेजुबान जानवर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। पहले संसाधनों की कमी के कारण ऐसे घायल पशु घंटों तक सड़क के किनारे पड़े रहते थे और उन्हें तुरंत मेडिकल हेल्प नहीं मिल पाती थी। इसी गंभीर समस्या को भांपते हुए समिति के युवाओं ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने का बीड़ा उठाया। अब वाहन में लिफ्ट लग जाने के बाद दुर्घटनाओं के शिकार हुए पशुओं को फौरन सुरक्षित जगह पर ले जाकर उनका इलाज शुरू किया जा सकेगा, जिससे पूरे क्षेत्र में पशु सेवा को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। सामूहिक सहयोग से साकार हुआ जनहित का यह बड़ा सपना समिति के अध्यक्ष मदनलाल ठोलिया ने इस पूरी मुहिम के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि गांव के भामाशाहों और आम नागरिकों ने छोटे-छोटे आर्थिक योगदान देकर इस असंभव दिखने वाले काम को संभव बना दिया है। यह एंबुलेंस महज चार पहियों का एक वाहन नहीं है, बल्कि यह बेजुबान जीवों की जिंदगी बचाने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण जरिया साबित होगी। उन्होंने आगे बताया कि लिफ्ट सिस्टम का काम पूरा होते ही इस एंबुलेंस को क्षेत्र में नियमित रूप से सेवा देने के लिए उतार दिया जाएगा। समिति का मुख्य उद्देश्य यही है कि सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायल या किसी भी बीमारी से पीड़ित मवेशी को कम से कम समय में सही उपचार उपलब्ध कराया जा सके। इसका आप पर असर इस पहल से नागौर और आसपास के इलाकों में सड़क हादसों में घायल होने वाले पशुओं को तुरंत चिकित्सा सहायता मिलने का रास्ता साफ हो गया है। • ग्रामीण इलाकों में राहत: निंबी जोधा और आसपास के गांवों में अब घायल गोवंश को समय पर इलाज मिल सकेगा जिससे उनकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। • राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा: पास से गुजरने वाले हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में बेसहारा पशुओं को तड़पता नहीं छोड़ना पड़ेगा क्योंकि वाहन में मौजूद लिफ्ट सिस्टम उन्हें आसानी से अस्पताल तक ले जाने में मदद करेगा। • सामूहिक भागीदारी: स्थानीय लोगों और भामाशाहों के इस तरह के छोटे-छोटे आर्थिक सहयोग से समाज में अन्य विकास कार्यों और पशु कल्याण के लिए प्रेरणा मिलती है। • लागत और तैयारी: इस एंबुलेंस को तैयार करने में कुल 16.30 लाख रुपए की कुल लागत आएगी जिसमें वाहन की कीमत और लिफ्ट सिस्टम शामिल है। ऐसा क्यों हुआ यह पहल क्षेत्र में बेसहारा पशुओं की लगातार खराब हो रही स्थिति और हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं को देखकर शुरू की गई है। • हादसों का बढ़ना: निंबी जोधा के पास से दो राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं जहां तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर आए दिन मवेशी घायल होते हैं। • संसाधनों की कमी: गंभीर चोट लगने के बाद गोवंश के खड़े न हो पाने के कारण उन्हें पारंपरिक वाहनों में लादना बेहद कठिन होता था, जिसके चलते समय पर इलाज नहीं मिल पाता था। • सामूहिक सोच: वीर तेजाजी गो सेवा समिति के युवाओं ने इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए ग्रामीणों और भामाशाहों को एकजुट करने का निर्णय लिया। सवाल-जवाब 1. निंबी जोधा गांव में गोवंश के लिए एंबुलेंस किसने खरीदी है? यह एंबुलेंस वीर तेजाजी गो सेवा समिति द्वारा ग्रामीणों और भामाशाहों के सहयोग से खरीदी गई है। 2. इस एंबुलेंस वाहन को खरीदने में कितनी लागत आई है? इस एंबुलेंस वाहन को खरीदने में लगभग 12 लाख 30 हजार रुपए की लागत आई है। 3. एंबुलेंस में लिफ्ट सिस्टम लगवाने पर कितना खर्च आएगा? वाहन में विशेष लिफ्ट सिस्टम लगवाने के लिए करीब 4 लाख रुपए की अतिरिक्त लागत आ रही है। 4. इस एंबुलेंस को कहां से खरीदकर लाया गया है? इस वाहन को लाडनूं से खरीदकर निंबी जोधा लाया गया है। 5. वीर तेजाजी गो सेवा समिति के अध्यक्ष कौन हैं? मदनलाल ठोलिया वीर तेजाजी गो सेवा समिति के अध्यक्ष हैं। प्रेरणा और सबक निंबी जोधा के ग्रामीणों और युवाओं का यह प्रयास समाज को यह सिखाता है कि किस तरह सामूहिक इच्छाशक्ति से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। • सामूहिक सहयोग की ताकत: छोटे-छोटे आर्थिक योगदान से भी बड़े और कल्याणकारी प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है। • संवेदना और मानवता: बेजुबान जीवों के प्रति दया भाव रखते हुए आगे आना और उनकी व्यावहारिक मुश्किलों को हल करना सच्ची इंसानियत है। • नेतृत्व और पहल: स्थानीय युवाओं ने सिर्फ समस्या देखने के बजाय खुद आगे आकर उसका स्थायी समाधान ढूंढा। https://trendkia.com/rajasthan/nagaur-ke-nimbi-jodha-gaon-mein-govansh-ke-liye-aayi-khaas-ambulance-graminon-aur-bhamashahon-ki-anuthi-pehal-56999 TrendKia — Har trend, sabse pehle.