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  "type": "article",
  "title": "नागौर कृषि मंडी ने रचा नया कीर्तिमान, राजस्व में 84.29 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज",
  "summary": "मूंग और इसबगोल की कम आवक के बावजूद नागौर कृषि मंडी ने राजस्व में 84.29 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया है। व्यवस्था सुधार और समय पर बोली से किसानों का भरोसा लौटा है।",
  "content": "राजस्थान के कृषि व्यापार क्षेत्र से एक उत्साहजनक खबर सामने आई है, जहाँ नागौर कृषि उपज मंडी ने वित्तीय प्रदर्शन में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मुख्य नकदी फसलों पर कम कर दर और स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को मिलने वाली शत-प्रतिशत शुल्क छूट जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भी मंडी ने अपने राजस्व में 84.29 प्रतिशत का जबर्दस्त इजाफा दर्ज किया है। इस अप्रत्याशित वित्तीय उछाल के दम पर नागौर मंडी अपने पूरे जोन की 16 मंडियों के बीच 386.86 लाख रुपए की कुल कमाई दर्ज कर दूसरे पायदान पर पहुँच गई है।\n\nजोन की मंडियों में नागौर की स्थिति और वित्तीय समीकरण\nक्षेत्रीय स्तर पर आय के आँकड़ों का विश्लेषण करें तो मेड़ता मंडी 960.50 लाख रुपए के राजस्व के साथ जोन में पहले स्थान पर काबिज है। प्रतिशत वृद्धि के पैमाने पर नागौर मंडी ने जोन में तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि कुल आवक के लिहाज से भी यह दूसरे नंबर पर रही। इस उपलब्धि का विशेष पहलू यह है कि शीर्ष पर रहने वाली अन्य प्रमुख मंडियों में रीको औद्योगिक क्षेत्र मौजूद नहीं है। नागौर मंडी के अंतर्गत रीको क्षेत्र आता है, जहाँ राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजनाओं के तहत औद्योगिक इकाइयों को 100% मंडी टैक्स छूट मिलती है। इस नीतिगत छूट के बावजूद नागौर मंडी ने राजस्व और आवक दोनों पैमानों पर दूसरा स्थान पाकर व्यापारिक सुदृढ़ता का प्रमाण दिया है।\n\nफसलों के बदले चक्र ने संभाला मंडी का गणित\nनागौर कृषि पट्टी को पारंपरिक तौर पर मूंग, सरसों और इसबगोल की भारी पैदावार के लिए पहचाना जाता रहा है। चालू सत्र के दौरान मूंग और इसबगोल की आवक मंडी यार्ड में काफी सीमित रही। इसके अतिरिक्त, इन दोनों फसलों पर मंडी समिति को मिलने वाला कर शुल्क अन्य उपजों की तुलना में कम निर्धारित है। सामान्य परिस्थितियों में इन दो प्रमुख जिंसों की गिरावट मंडी के कुल वित्तीय संग्रह को गहरा झटका दे सकती थी। हालांकि, अन्य महत्वपूर्ण फसलों ने इस संभावित घाटे की पूरी भरपाई कर दी। मंडी यार्ड में सरसों, चना, जीरा और ग्वार की जबर्दस्त आवक दर्ज की गई। इन जिंसों के व्यापक क्रय-विक्रय और ऊंचे व्यापारिक टर्नओवर से मंडी को उल्लेखनीय कर प्राप्त हुआ, जिसने पूरे वित्तीय गणित को लाभ की ओर मोड़ दिया।\n\nबोली प्रक्रिया के समय में बदलाव से किसानों को राहत\nराजस्व में हुई इस ऐतिहासिक वृद्धि के पीछे केवल कृषि उत्पादन ही एकमात्र कारक नहीं रहा, बल्कि मंडी परिसर की कार्यप्रणाली में किए गए नीतिगत सुधारों ने निर्णायक भूमिका निभाई। पूर्व में नीलामी व्यवस्था काफी देर तक चलती थी, जिसके कारण दूर-दराज से अपनी उपज लेकर आए किसानों को देर शाम तक इंतजार करना पड़ता था। कई बार किसान रात 9 बजे तक भी अपने घरों को नहीं लौट पाते थे। इस लंबी प्रतीक्षा और भागदौड़ से बचने के लिए कई किसान मंडी के बाहर निजी व्यापारियों को औने-पौने दामों पर माल बेच देते थे। इस बार प्रशासन ने नीलामी की एक समयबद्ध समय-सारिणी तय की, जिसके अंतर्गत बोली प्रक्रिया सुबह करीब 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच पूरी कर ली जाती है। समय पर बोली समाप्त होने से किसानों को तुरंत भुगतान और समय पर घर लौटने की सहूलियत मिली, जिससे बिचौलियों के पास जाने का चलन बंद हुआ।\n\nजागरूकता अभियान और बुनियादी ढांचे के कायाकल्प की तैयारी\nमंडी प्रशासन ने किसानों को परिसर में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं, पारदर्शी बोली व्यवस्था और फसलों के प्रतिस्पर्धी भावों की नियमित जानकारी देकर जागरूक किया। प्रतिस्पर्धी माहौल में पारदर्शी तरीके से बेहतर भाव मिलने से किसानों का विश्वास फिर से लौटा और उन्होंने अपनी उपज सीधे मंडी में लाना शुरू किया। इस बढ़े हुए कारोबार से मंडी समिति के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन एकत्र हो गए हैं। प्रशासन अब इस बढ़ी हुई आय का उपयोग मंडी प्रांगण के बुनियादी ढांचे को सुधारने में करने जा रहा है। इसके तहत जर्जर शौचालयों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण, पक्की नालियों का निर्माण, कचरा प्रबंधन प्रणाली और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति को दुरुस्त करने के विस्तृत प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। बजट आवंटन होते ही इन सभी विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nनागौर कृषि उपज मंडी में बढ़ी आय और नई नीलामी व्यवस्था से स्थानीय किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।\n\n• समय की बचत: नीलामी प्रक्रिया सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक पूरी हो रही है। किसान दिन ढलने से पहले अपनी फसल बेचकर बिना रात 9 बजे तक रुके समय पर घर लौट सकते हैं।\n• बेहतर मूल्य प्राप्ति: पारदर्शी बोली व्यवस्था के चलते किसानों को अपनी उपज का प्रतिस्पर्धी भाव मिल रहा है। इससे उन्हें बिचौलियों या बाहरी व्यापारियों को कम दाम में फसल बेचने के नुकसान से मुक्ति मिली है।\n• परिसर की सुविधाओं में सुधार: मंडी की आय बढ़ने से जर्जर सड़कों, पेयजल और शौचालयों के जीर्णोद्धार का काम शुरू होगा। आने वाले दिनों में मंडी परिसर में किसानों को साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाएं बेहतर मिलेंगी।\n• फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन: सरसों, चना, जीरा और ग्वार के बढ़े कारोबार से इन फसलों को बाजार में मजबूत मंच मिला है। किसान मांग और आवक को देखकर अपनी बुवाई और विपणन की सही योजना बना सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nनागौर मंडी के राजस्व में 84.29 प्रतिशत की उछाल फसलों के बदले आवक पैटर्न और मंडी संचालन में किए गए समयबद्ध प्रशासनिक सुधारों के कारण आई है।\n\n• वैकल्पिक जिंसों की आवक में उछाल: मूंग और इसबगोल की आवक घटने के बावजूद सरसों, चना, जीरा और ग्वार की बंपर आवक दर्ज हुई। इन जिंसों के व्यापक कारोबार से मंडी शुल्क के रूप में भारी राजस्व प्राप्त हुआ।\n• नीलामी समय का युक्तिकरण: बोली प्रक्रिया को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के तय समय में समेटा गया। पहले देर रात तक रुकने के डर से किसान बाहर व्यापारियों को माल बेचते थे, जो अब सीधे यार्ड में आने लगे।\n• किसान जागरूकता अभियान: मंडी प्रशासन ने भावों और पारदर्शी बोली प्रक्रिया को लेकर किसानों को सक्रिय रूप से जागरूक किया। प्रतिस्पर्धी भावों की जानकारी मिलने से किसानों का भरोसा बढ़ा और आवक में तेज सुधार हुआ।\n• शुल्क छूट की भरपाई: रीको औद्योगिक क्षेत्र के कारण स्थानीय इकाइयों को 100% मंडी टैक्स छूट मिलने के बावजूद व्यापारिक टर्नओवर इतना अधिक रहा कि कर संग्रह के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट गए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नागौर कृषि मंडी के राजस्व में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई है?\nनागौर कृषि उपज मंडी के राजस्व में इस बार 84.29 प्रतिशत की जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।\n\n2. इस सत्र में नागौर मंडी की कुल आय कितनी रही?\nनागौर मंडी ने 386.86 लाख रुपए की कुल आय अर्जित की और अपने जोन में दूसरे स्थान पर रही।\n\n3. जोन में सर्वाधिक आय किस मंडी ने हासिल की?\nजोन की 16 मंडियों में मेड़ता मंडी 960.50 लाख रुपए की आय के साथ पहले स्थान पर रही।\n\n4. किन फसलों की आवक बढ़ने से मंडी का राजस्व मजबूत हुआ?\nसरसों, चना, जीरा और ग्वार की बंपर आवक ने मूंग और इसबगोल की कमी की भरपाई करते हुए राजस्व को बढ़ाया।\n\n5. नीलामी प्रक्रिया के समय में क्या बड़ा बदलाव किया गया है?\nअब नीलामी प्रक्रिया सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच पूरी कर ली जाती है, जिससे किसानों को देर रात तक रुकना नहीं पड़ता।\n\n6. मंडी प्रशासन बढ़ी हुई आय का उपयोग किन कार्यों में करेगा?\nबढ़े हुए बजट से मंडी परिसर में क्षतिग्रस्त शौचालय, सड़कें, नालियां, कचरा प्रबंधन और पेयजल व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/nagaur-krishi-mndi-ne-racha-naya-kirtimana-rajasva-men-84-29-pratishata-ki-bhari-barhotari-darja-42662",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-04",
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    "नागौर कृषि मंडी",
    "मंडी राजस्व",
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    "सरसों चना जीरा"
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