# नागौर में मवेशियों की आंखें बन रही हैं चिंता का विषय, जानिए कीमोसिस के लक्षण और बचाव

> मौसम बदलने के साथ ही नागौर क्षेत्र में गाय और भैंसों में कीमोसिस यानी आंखों की बीमारी का खतरा बढ़ गया है। समय पर इलाज न मिलने पर पशुओं की रोशनी पर बुरा असर पड़ सकता है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/nagaur-me-maveshiyo-ki-aankhe-ban-rahi-hai-chinta-ka-v-vishay-janiye-chemosis-ke-lakshan-aur-bachav-51710 · **Language:** Hindi
**Tags:** पशु रोग, कीमोसिस, नागौर, पशु चिकित्सा, गाय भैंस, पशुपालन

मौसम में होने वाले बदलाव के कारण मवेशियों की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ना आम बात है, लेकिन इन दिनों नागौर के पशुपालकों के लिए गाय और भैंसों की आंख से जुड़ी बीमारियां बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही हैं। तापमान और आद्रता में उतार-चढ़ाव के अलावा बैक्टीरियल व वायरल संक्रमण, धूल-मिट्टी तथा विभिन्न प्रकार की एलर्जी के चलते पशुओं में कीमोसिस की समस्या तेजी से उभर रही है। इस स्वास्थ्य स्थिति में आंख की बाहरी परत यानी कंजंक्टिवा में सूजन आ जाती है और ऊतकों के भीतर तरल पदार्थ एकत्र होने लगता है, जिससे प्रभावित हिस्सा फूला हुआ और कई बार जेली जैसा नजर आने लगता है।

यदि इस तकलीफ का समय रहते उचित उपचार न किया जाए, तो पशुओं को असहनीय दर्द सहना पड़ सकता है और उनका संक्रमण तथा दृष्टि से जुड़ा संकट काफी गहरा सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पशु पालने वाले लोगों को शुरुआती संकेतों को भांपकर तुरंत किसी योग्य पशु चिकित्सक से संपर्क साधना चाहिए। मवेशियों में कीमोसिस पैदा होने के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिनमें संक्रामक बोवाइन राइनोट्रेकाइटिस जैसे खतरनाक वायरल संक्रमण भी शामिल हैं, जो आंखों के भीतर तेज जलन और सूजन पैदा करते हैं। इसके अलावा मैदानों में चरते समय घास के तिनके चुभने या किसी नुकीली वस्तु के लगने से भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है।

## खुले वातावरण में संक्रमण फैलने की मुख्य वजहें
खुले खेतों और मैदानों में उड़ने वाली धूल, परागकण, धुएं के गुबार तथा रासायनिक कीटनाशकों के सीधे संपर्क में आने से पशुओं की नाज़ुक आंखों में गंभीर जलन और एलर्जी की शिकायत हो जाती है। इसके अतिरिक्त थेलेजिया प्रजाति के परजीवी कृमि भी मवेशियों की आंखों को अपना शिकार बनाते हैं, जो मुख्य रूप से आंख की सतह, कंजंक्टिवा और आंसू की नलियों के आसपास सक्रिय रहते हैं। इन सूक्ष्म जीवों की मौजूदगी के कारण आंखों में लगातार सूजन बनी रहती है, पानी बहता रहता है और कॉर्निया पर घाव बनने का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। ऐसे जटिल मामलों में बिना किसी देरी के चिकित्सीय जांच और समुचित इलाज की आवश्यकता होती है।

## इन प्रमुख लक्षणों से करें रोग की पहचान
पशु चिकित्सक विशाल प्रजापति ने इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि कीमोसिस से पीड़ित पशु की आंखों में कई तरह के स्पष्ट बदलाव देखने को मिलते हैं। मवेशी की आंख की झिल्ली बुरी तरह सूजकर बाहर की ओर निकली हुई प्रतीत हो सकती है, जिससे लगातार पानी बहना, पीले रंग का गाढ़ा स्राव निकलना, आँखें लाल होना और बार-बार पलकें झपकाना इसके मुख्य लक्षण हैं। तेज धूप या अत्यधिक रोशनी के संपर्क में आने पर पशु अपनी आंखें बंद करने का प्रयास करता है और लगातार जारी रहने वाले दर्द व जलन के कारण वह काफी बेचैन भी रहने लगता है। यदि संक्रमण का दायरा बहुत बढ़ जाए तो पशु को बुखार तक आ सकता है, जबकि परजीवी कृमियों की स्थिति में कभी-कभी आंखों के भीतर छोटे कीड़े भी साफ दिखाई दे जाते हैं। आंखों में सफेद या धुंधलापन नजर आने पर या देखने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

## बीमारी का इलाज और बचाव के जरूरी उपाय
कीमोसिस का संपूर्ण उपचार पूरी तरह से इसके वास्तविक कारणों और आंखों की तत्कालीन स्थिति पर निर्भर करता है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य सूजन को कम करना, संक्रमण को मिटाना और दृष्टि को सुरक्षित रखना होता है। आंखों की साफ-सफाई के लिए केवल पशु चिकित्सक की सलाह के बाद ही स्टेराइल नॉर्मल सेलाइन या फिर उचित नेत्र शोधन घोल का उपयोग किया जाना चाहिए। जरूरत के हिसाब से डॉक्टर एंटीबायोटिक ड्रॉप्स या परजीवीरोधी दवाइयां लिख सकते हैं।

पशु चिकित्सक ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि यदि मवेशी के कॉर्निया पर कोई घाव या अल्सर मौजूद है, तो कभी भी कॉर्टिकोस्टेरॉइड युक्त आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से घाव और अधिक गंभीर रूप ले सकता है। घरेलू नुस्खों के तहत बोरिक एसिड या किसी अन्य घोल से आंखें धोने के बजाय विशेषज्ञ की देखरेख में ही दवा डालें। अपने मन से पशु की आंख में कोई भी दवा डालना खतरनाक हो सकता है। बचाव के लिए पशुओं के रहने के स्थान को पूरी तरह साफ-सुथरा रखें, उन्हें धूल और धुएं से बचाएं तथा चराई के वक्त कांटेदार झाड़ियों से दूर रखें। समय पर इलाज कराने से मवेशी की आंखों को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
पशुओं में होने वाली आंखों की यह बीमारी सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आजीविका को प्रभावित करती है।

- **भारत में:** देश भर के पशुपालकों को मौसम बदलने पर मवेशियों की सेहत पर खास ध्यान देना चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज न होने से दुधारू पशुओं की देखभाल का खर्च बढ़ जाता है।
- **नागौर में:** नागौर क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों को अपनी गायों और भैंसों की आंखों में पानी आने या सूजन जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत स्थानीय पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
- **आर्थिक असर:** पशु की दृष्टि कमजोर होने या बीमार पड़ने से उसकी कार्यक्षमता और दूध उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
- **बचाव के उपाय:** पशुबाड़े को धूल और धुएं से मुक्त रखकर तथा चरागाहों में कांटेदार झाड़ियों से बचाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- **सतर्कता जरूरी:** किसी भी तरह का संक्रमण दिखने पर घरेलू नुस्खों के बजाय केवल डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाइयों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
पशुओं में कीमोसिस की समस्या मुख्य रूप से पर्यावरणीय बदलाव, संक्रमण और बाहरी चोटों के कारण उत्पन्न होती है।

- **मौसम और संक्रमण:** मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण पनपते हैं, जो मवेशियों की कंजंक्टिवा झिल्ली में सूजन पैदा करते हैं।
- **पर्यावरणीय कारक:** खुले मैदानों में उड़ने वाली धूल, परागकण और रासायनिक कीटनाशक सीधे तौर पर पशुओं की संवेदनशील आंखों में जलन और एलर्जी का कारण बनते हैं।
- **परजीवी कृमि:** थेलेजिया जैसे परजीवी सीधे आंख की सतह और आंसू नलियों को प्रभावित करते हैं, जिससे लगातार सूजन और घाव बनने का खतरा पैदा होता है।
- **यांत्रिक चोट:** खेतों में चरते समय घास के तिनके या कांटे लगने से भी आंख के ऊतकों में तरल पदार्थ जमा होने की समस्या शुरू हो जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. कीमोसिस क्या है?
यह पशुओं की आंखों से जुड़ी एक समस्या है जिसमें आंख की बाहरी झिल्ली यानी कंजंक्टिवा में सूजन आ जाती है और तरल पदार्थ जमा हो जाता है।

### 2. यह बीमारी किन पशुओं में होती है?
यह समस्या मुख्य रूप से गाय और भैंसों में देखने को मिलती है।

### 3. कीमोसिस होने के मुख्य कारण क्या हैं?
मौसम में बदलाव, वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण, धूल-मिट्टी, एलर्जी, घास के तिनके से चोट और थेलेजिया जैसे परजीवी इसके मुख्य कारण हैं।

### 4. इस रोग के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
आंख की झिल्ली का बाहर निकलना, लगातार पानी बहना, पीला स्राव, आंख लाल होना और बार-बार पलकें झपकाना इसके प्रमुख लक्षण हैं।

### 5. क्या कॉर्निया पर घा होने पर स्टेरॉयड देना चाहिए?
नहीं, कॉर्निया पर अल्सर या घाव होने पर कॉर्टिकोस्टेरॉइड वाली आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे घाव गंभीर हो सकता है।

### 6. पशुओं की आंखें साफ करने के लिए क्या इस्तेमाल करें?
आंखें साफ करने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह से स्टेराइल नॉर्मल सेलाइन या उपयुक्त नेत्र धुलाई घोल का उपयोग करना चाहिए।

### 7. इस बीमारी से बचाव के लिए क्या सावधानी रखें?
पशुबाड़े को साफ रखें, मवेशियों को धूल और धुएं से बचाएं तथा चराई के दौरान कांटेदार पौधों का ध्यान रखें।

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