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  "title": "नागौर में हार के बाद भी महिला प्रत्याशी पर हुई पैसों की बरसात, ग्रामीणों ने थाल में दिए 25 लाख रुपये",
  "summary": "राजस्थान के नागौर जिले में सरपंच चुनाव हारने वाली चिड़ी देवी को ग्रामीणों ने 25 लाख रुपये और ढोल-धमाकों के साथ सम्मानित किया, जिससे चुनावी हार-जीत के मायने ही बदल गए।",
  "content": "चुनावी मैदान में हार का सामना करने के बाद अमूमन निराशा छा जाती है और राजनीतिक सरगर्मी थम जाती है, लेकिन राजस्थान के नागौर जिले में एक अनोखी घटना ने सबको हैरान कर दिया। यहां सरपंच पद का चुनाव हारने वाली एक महिला उम्मीदवार को स्थानीय लोगों ने ऐसा मान-सम्मान दिया जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। इस अनूठी पहल के तहत ग्रामीणों ने हार के गम को भुलाकर आपस में चंदा जुटाया और 25 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि थाल में सजाकर भेंट कर दी।\n\nभदौरा पंचायत का अनोखा वाकया\nयह पूरा मामला नागौर जिले की मूंडवा पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली भदौरा ग्राम पंचायत का है। इस पंचायत के मोड़ी गांव की रहने वाली 45 वर्षीय चिड़ी देवी ने सरपंच पद के लिए अपनी किस्मत आजमाई थी। मुकाबला बेहद कड़ा था और अंत में उन्हें जीत नहीं मिल सकी, लेकिन इसके बावजूद गांव वालों का समर्थन उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहा। ग्रामीणों का मानना था कि चिड़ी देवी और उनके परिवार ने समाज सेवा के लिए जो कार्य किए हैं, उन्हें केवल एक चुनाव परिणाम के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।\n\nकौन हैं चिड़ी देवी और उनका परिवार?\nचिड़ी देवी एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पति हेमाराम राव खेती-किसानी करके अपने परिवार का गुजारा चलाते हैं। करीब दो साल पहले हेमाराम राव ने गांव की गोशाला को एक ट्रैक्टर दान किया था। इसके अलावा उन्होंने गांव में एक प्याऊ बनवाई और बोरवेल खुदवाने का ऐलान भी किया था। उनके इन सामाजिक कार्यों की वजह से ग्रामीण उनसे काफी प्रभावित थे। जब भदौरा पंचायत की सरपंच सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हुई, तो सभी ने आपसी सहमति से चिड़ी देवी को मैदान में उतारने का निर्णय लिया।\n\nमहज 162 वोटों से रहना पड़ा पीछे\nमूंडवा पंचायत समिति के तहत आने वाले मोड़ी गांव में 36 कौम के लोगों ने एकजुट होकर इस साधारण परिवार की महिला को समर्थन दिया था। चुनाव में चिड़ी देवी का मुकाबला सेवानिवृत्ति पा चुके थानेदार माधोसिंह की पुत्रवधू गिरिजा सांदू से हुआ। मतगणना के दौरान गिरिजा सांदू को 1317 वोट हासिल हुए, जबकि चिड़ी देवी के खाते में 1155 वोट आए। इस प्रकार कड़े संघर्ष के बाद चिड़ी देवी मात्र 162 वोटों के अंतर से चुनाव हार गईं। कम अंतर से मिली इस हार के बाद भी ग्रामीणों ने उनके प्रति अपना आदर कम नहीं होने दिया।\n\nआपसी सहयोग से जुटाए 25 लाख रुपये\nचुनाव नतीजे आने के बाद गांव में एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें 34 कौम के लोगों ने मिलकर एक आर्थिक सहयोग राशि एकत्र करने का फैसला किया। ग्रामीणों का सोचना था कि चुनाव प्रचार और अन्य व्यवस्थाओं के कारण एक गरीब परिवार पर आर्थिक दबाव नहीं आना चाहिए। देखते ही देखते गांव के लोगों ने मिलकर 25 लाख रुपये की राशि जमा कर ली। इसके बाद दर्जनों गाड़ियों में सवार होकर ग्रामीण ढोल-धमाकों के साथ चिड़ी देवी के आवास पर पहुंचे।\n\nभावुक कर देने वाला स्वागत समारोह\nगांव वालों ने चिड़ी देवी का फूलमालाओं से स्वागत किया और उनके सिर पर साफा बांधकर उनका हौसला बढ़ाया। इसके बाद 25 लाख रुपयों से भरा हुआ थाल उनके पति हेमाराम राव को सौंपा गया। इस अभूतपूर्व सम्मान को देखकर पूरा माहौल भावुक हो गया। इस दौरान वार्ड संख्या 5 और 6 से नवनिर्वाचित वार्ड पंच सहदेवराम गोलिया और जगराम गोलिया का भी साफा पहनाकर स्वागत किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।\n\nहेमाराम राव की प्रतिक्रिया और सामाजिक संदेश\nग्रामीणों के इस अप्रत्याशित स्नेह से अभिभूत होकर हेमाराम राव ने कहा कि सरपंच की कुर्सी न मिलने का मलाल जरूर था, लेकिन गांव वालों ने इस गम को खुशी में बदल दिया। उन्होंने कहा कि पद मिले या न मिले, पूरे गांव का साथ और अपनापन ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। मोड़ी गांव के लोगों की यह पहल इस बात की मिसाल पेश करती है कि राजनीति और चुनाव अपनी जगह हैं, लेकिन संकट और हार के समय आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सबसे अहम होता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना दिखाती है कि जमीनी स्तर पर जनसेवा और सामाजिक कार्यों का प्रभाव चुनावी नतीजों से कहीं अधिक गहरा होता है।\n\n• राजस्थान में: स्थानीय स्तर पर समाज सेवा करने वाले नेताओं को जनता का समर्थन हमेशा मिलता रहता है, चाहे वे चुनाव जीतें या हारें। ग्रामीण इलाकों में इस तरह के आयोजनों से सामाजिक भाईचारा और मजबूत होता है।\n• नागौर में: मोड़ी गांव और आसपास के इलाकों के लोगों ने यह साबित कर दिया कि वे चुनावी हार-जीत से ऊपर उठकर अपने मददगारों के साथ खड़े रहते हैं। इस आर्थिक सहयोग से स्थानीय राजनीति में मानवीय मूल्यों की नई मिसाल कायम हुई है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह स्थिति तब पैदा हुई जब एक स्थानीय महिला उम्मीदवार कड़े मुकाबले में मामूली अंतर से चुनाव हार गईं, लेकिन उनके परिवार के पुराने सामाजिक कार्यों ने ग्रामीणों का दिल जीत लिया था।\n\n• सामजिक योगदान: परिवार ने पहले गोशाला को ट्रैक्टर देने और प्याऊ बनवाने जैसे कार्य किए थे, जिससे उनकी मजबूत सामाजिक छवि बनी थी।\n• कम अंतर से हार: चुनाव में हार का अंतर मात्र 162 वोटों का था, जिससे समर्थकों में निराशा के बजाय उनके प्रति सहानुभूति और बढ़ गई।\n• आर्थिक बोझ कम करना: ग्रामीणों ने मिलकर यह तय किया कि चुनाव लड़ने वाले एक साधारण परिवार पर कर्ज या आर्थिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चिड़ी देवी ने किस पद के लिए चुनाव लड़ा था?\nचिड़ी देवी ने सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा था।\n\n2. यह घटना किस जिले की है?\nयह घटना राजस्थान के नागौर जिले की है।\n\n3. चिड़ी देवी कितने वोटों से चुनाव हारीं?\nचिड़ी देवी को महज 162 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।\n\n4. ग्रामीणों ने कितनी राशि भेंट की?\nग्रामीणों ने आपस में 25 लाख रुपये जुटाकर थाल में भेंट किए।\n\n5. चिड़ी देवी के पति क्या काम करते हैं?\nउनके पति हेमाराम राव खेती-किसानी करते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nचिड़ी देवी और उनके परिवार की यह यात्रा समाज सेवा और ईमानदारी के दम पर लोगों का दिल जीतने का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है।\n\n• निस्वार्थ सेवा करें: समाज में किए गए अच्छे कार्य और दान हमेशा लोगों के दिलों में याद रहते हैं, चुनाव परिणाम चाहे जो भी हों।\n• जनता का विश्वास जीतें: पद या सत्ता मिलने से ज्यादा महत्वपूर्ण आम जनता का प्यार और विश्वास हासिल करना होता है।\n• संकट में एकता: मुश्किल समय में जब अपने साथ खड़े होते हैं, तो हर बड़ी निराशा एक नई उम्मीद में बदल जाती है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-26",
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    "नागौर न्यूज",
    "सरपंच चुनाव",
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